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वाराणसी में मोहर्रम के जुलूस के दौरान शिया-सुन्‍नी भिड़े, पत्‍थरबाज़ी में दर्जनों घायल

पुलिस का कहना है कि मोहर्रम के मौक़े को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही थी, लेकिन इसके बावजूद शिया और सुन्नी समुदाय के बीच विवाद बढ़ गया और दोनों तरफ से पत्थरबाज़ी हुई.

लाइव कवरेज

अभिनव गोयल and चंदन सिंह राजपूत

  1. मणिपुर रवाना होने से पहले विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने क्या कहा?

    मणिपुर में स्थिति का जायज़ा लेने के लिए विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' इंफाल के लिए रवाना हो गया है.

    मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “हम 20 सांसद जा रहे हैं. हम रिलीफ कैंप में जाएंगे, जहां सरकार जाने देगी. सरकार अगर रुकावट पैदा न करे तो बेहतर है. हम स्थिति का जायज़ा लेने के लिए जा रहे हैं. शांति और सौहार्द का वातावरण पैदा हो. आम लोग पीड़ित हैं उनके कष्ट निवारण करने के लिए सरकार पहल करे और सामान्य स्थिति जल्द से जल्द बहाल हो, यही हमारा मकसद है.”

    “सरकार जिस तरह से मणिपुर के मुद्दे को दिखाना चाहती है. ये सिर्फ कानून और स्थिति का मामला नहीं है. ये जातीय दंगा है. हिंदुस्तान के लोगों को समझना चाहिए कि ये जातीय दंगा है, ये आज तक हिंदुस्तान में आज तक नहीं हुआ.”

    राष्ट्रीय जनता दल के नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा, “अगर सामूहिक हिंसा के बरक्स हमारे भाजपा के लोगों को लगता है कि ये फोटो ओप्ट है तो मैं उनकी बुद्धि पर तरस खा सकता हूं. आज मणिपुर को सुनने की सबसे ज्यादा जरूरत है. लोकतंत्र में अगर कोई सुनता नहीं है और सिर्फ अपनी सुनाता है तो मुझे उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता होती है. मणिपुर के लोगों का हाथ पकड़ना, उन्हें भरोसा दिलाना, आप इसी हिंदुस्तान के हिस्सा हैं. हम एक छोटी कोशिश कर रहे हैं.”

    जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष लल्लन सिंह ने कहा, “हम वहां लोगों से मिलेंगे. हमारी मंशा है कि मणिपुर में शांति स्थापित हो. मणिपुर इस देश का राज्य है और कई महीनों से जल रहा है. इस देश के पीएम एक शब्द नहीं बोलते हैं. देश में घूम-घूमकर हर मुद्दे पर बोल रहे हैं लेकिन मणिपुर पर चुप हैं.”

    राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी ने कहा, “मणिपुर और यहां के लोगों का दर्द समझना प्रधानमंत्री मोदी की जिम्मेदारी है. वे अलग-अलग राज्यों में चुनाव प्रचार कर रहे हैं...हम मणिपुर जाएंगे और लोगों की समस्याएं समझेंगे...हमें उम्मीद है कि सरकार इसे सकारात्मक तरीके से लेगी और हम मदद करने जा रहे हैं, ना कि उनकी समस्याएं बढ़ाने के लिए. बीजेपी ने मुद्दे को भटकाने की कोशिश की और वे संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं हैं.”

    तृणमूल कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने कहा, “मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी एक फेल पार्टी साबित हुई है. वहां बीजेपी सरकार है इसलिए मुख्यमंत्री को नहीं बदला जा रहा है…मणिपुर में लोगों की जो जिंदगियां गईं उसके लिए बीजेपी जिम्मेदार है.”

    डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा, “हम उन 50 हजार लोगों से मिलने जा रहे हैं जिन्हें मजबूर अपने घरों को छोड़ना पड़ा और जो आज रिलीफ कैंप में रह रहे हैं. हम उन्हें कहेंगे कि हम आपके साथ हैं और आपके लिए लड़ रहे हैं. हमें वहां जाने की इजाजत मिली है. हमने राज्यपाल से मिलने की भी अनुमति मांगी है.

    कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “आने वाले सप्ताह में हम लोकसभा और राज्यसभा में मणिपुर की बात रखना चाहते हैं. मणिपुर के लोगों पर जो गुजरी है उनके दर्द को, उनकी चिंताओं को हम व्यक्त करना चाहते हैं. हम साबित करना चाहते हैं कि इंडिया गठबंधन मणिपुर के साथ है. भाजपा का राष्ट्रवाद झूठा और खोखला है और उन्हें सत्तावाद पर विश्वास है. आज जो वन इंडिया की बात करते हैं उन्होंने मणिपुर में दो मणिपुर बना दिए हैं."

    आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने कहा, “मणिपुर जल रहा है. वहां निहत्थे लोगों को जलाया जा रहा है. काटा जा रहा है. गर्दन काटकर पेड़ पर लटका दी गई, ऐसी खबरें अखबारों में पढ़ने को मिल रही हैं. बहन बेटियों को नंगा कर घुमाया जा रहा है. सरकार सदन में चर्चा के लिए तैयार नहीं है. पीएम संसद में आ नहीं रहे हैं. इसलिए तय किया गया वहां जाकर वस्तुस्थिति देखें, वहां के लोगों से मिले और उनके दर्द को बांटे और वहां की स्थिति को संसद के अंदर रखें."

    प्रतिनिधिमंडल रविवार को मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके से भी मुलाकात करेगा.

    तीन मई को हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक मणिपुर में 142 लोगों की मौत हो चुकी है और क़रीब 60,000 लोग बेघर हो गए हैं. राज्य सरकार के मुताबिक़, इस हिंसा में 5000 आगज़नी की घटनाएं हुई हैं.

  2. ज़करबर्ग के नए प्लेटफॉर्म थ्रेड्स को आधे से ज़्यादा लोगों ने छोड़ा

    ट्विटर के जवाब में ज़करबर्ग ने जैसे ही थ्रेड्स को लॉन्च किया, तो पहले चार घंटे में ही इस ऐप पर 50 लाख यूज़र्स जुड़ गए, लेकिन अब लोग इस प्लेटफार्म को छोड़कर जा रहे हैं.

    मेटा प्रमुख मार्क ज़करबर्ग का कहना है उनके नए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म थ्रेड्स ने अपने आधे से ज्यादा यूज़र्स को खो दिया है.

    जुलाई महीने की शुरुआत में लॉन्च हुए थ्रेड्स पर पांच दिनों के अंदर ही 10 करोड़ यूज़र्स जुड़ गए थे, लेकिन अब ज़करबर्ग का कहना है कि ये संख्या कम हो रही है.

    उन्होंने कहा कि अगर आपके पास 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने साइन अप किया है. ऐसे में आपके पास सभी या उनमें से आधे भी बने रहें तो यह प्लेटफॉर्म के लिए आदर्श स्थिति है, लेकिन अभी तक हम वहां नहीं पहुंच पाए हैं.

    प्लेटफॉर्म का कहना है कि कुछ नए फीचर्स जोड़े जाने के बाद रिटेंशन रेट में सुधार आएगा.

    थ्रेड्स एक तरह से इंस्टाग्राम का एक्सटेंशन है. इस पर यूज़र्स टेक्स्ट के अलावा लिंक, फ़ोटो और 5 मिनट का वीडियो पोस्ट कर सकते हैं.

  3. नीज़ेर: नाटकीय तख़्तापलट के बाद जनरल त्चियानी का एलान

    नाटकीय तख्तापलट के बाद जनरल अब्दुर्रहमान त्चियानी ने खुद को नीज़ेर का नया नेता घोषित कर दिया है.

    बुधवार को जनरल त्चियानी के नेतृत्व में सैनिकों ने तख्तापलट की कार्रवाई को शुरू किया और राष्ट्रपति मुहम्मद बज़ूम को बंदी बना लिया गया.

    नीज़ेर, अफ़्रीका के साहेल क्षेत्र में गिने-चुने लोकतांत्रिक देशों में से एक था. अब अपने पड़ोसी देशों की तरह वहां भी सत्ता पर फौज क़ाबिज़ हो गई है.

    पश्चिम में माली से लेकर पूरब में सूडान तक, अफ्रीका के एक बड़े इलाक़े में अब हुकूमत फौजी जनरलों के हाथों में है.

    नीज़ेर फ्रांस का उपनिवेश रह चुका है. वहां, यूरेनियम के प्रचुर भंडार मौजूद हैं. नीज़ेर में फ्रांस और अमेरिका ने फौजी अड्डे बनाए हुए हैं.

    वहां जैसे ही सैनिकों ने तख़्तापलट का एलान किया, तो फ्रांस और अमेरिका ने इसकी कड़ी आलोचना की.

    पश्चिमी देशों को इस बात की फ़िक्र सता रही है कि नई हुकूमत के आने पर नीज़ेर, कहीं उनसे दूर होकर रूस के पाले में न चला जाए.

    अगर नीज़ेर ऐसा करता है, तो वो भी उसी रास्ते पर चल रहा होगा, जिसे उसके दो पड़ोसी देश बुर्किना फासो और माली ने अपनाया है.

    अपने यहां फौजी तख़्तापलट के बाद दोनों ही देशों ने रूस से नज़दीकी बढ़ा ली है.

  4. आज मणिपुर जाएंगे विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के नेता

    मणिपुर में स्थिति का जायज़ा लेने के लिए विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' का प्रतिनिधिमंडल शनिवार, 29 जुलाई को राज्य का दौरा करेगा.

    गठबंधन दलों का कहना है कि दो दिवसीय इस यात्रा के दौरान वह हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने के बाद समस्याओं के समाधान के बारे में सरकार और संसद को सिफारिश करेंगे.

    तीन मई को हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक मणिपुर में 142 लोगों की मौत हो चुकी है और क़रीब 60,000 लोग बेघर हो गए हैं. राज्य सरकार के मुताबिक़, इस हिंसा में 5000 आगज़नी की घटनाएं हुई हैं.

    प्रतिनिधिमंडल रविवार को मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके से भी मुलाकात करेगा.

    विपक्षी नेताओं का कहना है कि जिन दलों के पास अपने सांसद नहीं हैं वे खुद अपने से चुनकर प्रतिनिधि भेजेंगे.

    कांग्रेस सांसद और राज्य सभा में पार्टी के व्हिप नासिर हुसैन ने दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शुक्रवार को ये बताया कि 16 पार्टियों के सांसद मणिपुर के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और वे घाटी और पहाड़ी क्षेत्र दोनों के ही निवासियों से मिलेंगे.

    केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “पीएम मोदी और एनडीए के पास मणिपुर हिंसा को हल करने की न तो इच्छाशक्ति है और न ही क्षमता है.”

    वहीं दूसरी तरफ शुक्रवार को भी मणिपुर को लेकर संसद में गतिरोध जारी रहा. विपक्षी दलों के हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार, 31 जुलाई के लिए स्थगित कर दी गई है.

  5. नमस्कार आपका दिन शुभ हो. ये लाइव पेज 24 घंटे के लिए उपलब्ध रहेगा. 28 जुलाई के लाइव अपडेट्स पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.