मणिपुर रवाना होने से पहले विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने क्या कहा?
मणिपुर में स्थिति का जायज़ा लेने के लिए विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' इंफाल के लिए रवाना हो गया है.
मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “हम 20 सांसद जा रहे हैं. हम रिलीफ कैंप में जाएंगे, जहां सरकार जाने देगी. सरकार अगर रुकावट पैदा न करे तो बेहतर है. हम स्थिति का जायज़ा लेने के लिए जा रहे हैं. शांति और सौहार्द का वातावरण पैदा हो. आम लोग पीड़ित हैं उनके कष्ट निवारण करने के लिए सरकार पहल करे और सामान्य स्थिति जल्द से जल्द बहाल हो, यही हमारा मकसद है.”
“सरकार जिस तरह से मणिपुर के मुद्दे को दिखाना चाहती है. ये सिर्फ कानून और स्थिति का मामला नहीं है. ये जातीय दंगा है. हिंदुस्तान के लोगों को समझना चाहिए कि ये जातीय दंगा है, ये आज तक हिंदुस्तान में आज तक नहीं हुआ.”
राष्ट्रीय जनता दल के नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा, “अगर सामूहिक हिंसा के बरक्स हमारे भाजपा के लोगों को लगता है कि ये फोटो ओप्ट है तो मैं उनकी बुद्धि पर तरस खा सकता हूं. आज मणिपुर को सुनने की सबसे ज्यादा जरूरत है. लोकतंत्र में अगर कोई सुनता नहीं है और सिर्फ अपनी सुनाता है तो मुझे उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता होती है. मणिपुर के लोगों का हाथ पकड़ना, उन्हें भरोसा दिलाना, आप इसी हिंदुस्तान के हिस्सा हैं. हम एक छोटी कोशिश कर रहे हैं.”
जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष लल्लन सिंह ने कहा, “हम वहां लोगों से मिलेंगे. हमारी मंशा है कि मणिपुर में शांति स्थापित हो. मणिपुर इस देश का राज्य है और कई महीनों से जल रहा है. इस देश के पीएम एक शब्द नहीं बोलते हैं. देश में घूम-घूमकर हर मुद्दे पर बोल रहे हैं लेकिन मणिपुर पर चुप हैं.”
राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी ने कहा, “मणिपुर और यहां के लोगों का दर्द समझना प्रधानमंत्री मोदी की जिम्मेदारी है. वे अलग-अलग राज्यों में चुनाव प्रचार कर रहे हैं...हम मणिपुर जाएंगे और लोगों की समस्याएं समझेंगे...हमें उम्मीद है कि सरकार इसे सकारात्मक तरीके से लेगी और हम मदद करने जा रहे हैं, ना कि उनकी समस्याएं बढ़ाने के लिए. बीजेपी ने मुद्दे को भटकाने की कोशिश की और वे संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं हैं.”
तृणमूल कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने कहा, “मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी एक फेल पार्टी साबित हुई है. वहां बीजेपी सरकार है इसलिए मुख्यमंत्री को नहीं बदला जा रहा है…मणिपुर में लोगों की जो जिंदगियां गईं उसके लिए बीजेपी जिम्मेदार है.”
डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा, “हम उन 50 हजार लोगों से मिलने जा रहे हैं जिन्हें मजबूर अपने घरों को छोड़ना पड़ा और जो आज रिलीफ कैंप में रह रहे हैं. हम उन्हें कहेंगे कि हम आपके साथ हैं और आपके लिए लड़ रहे हैं. हमें वहां जाने की इजाजत मिली है. हमने राज्यपाल से मिलने की भी अनुमति मांगी है.
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “आने वाले सप्ताह में हम लोकसभा और राज्यसभा में मणिपुर की बात रखना चाहते हैं. मणिपुर के लोगों पर जो गुजरी है उनके दर्द को, उनकी चिंताओं को हम व्यक्त करना चाहते हैं. हम साबित करना चाहते हैं कि इंडिया गठबंधन मणिपुर के साथ है. भाजपा का राष्ट्रवाद झूठा और खोखला है और उन्हें सत्तावाद पर विश्वास है. आज जो वन इंडिया की बात करते हैं उन्होंने मणिपुर में दो मणिपुर बना दिए हैं."
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने कहा, “मणिपुर जल रहा है. वहां निहत्थे लोगों को जलाया जा रहा है. काटा जा रहा है. गर्दन काटकर पेड़ पर लटका दी गई, ऐसी खबरें अखबारों में पढ़ने को मिल रही हैं. बहन बेटियों को नंगा कर घुमाया जा रहा है. सरकार सदन में चर्चा के लिए तैयार नहीं है. पीएम संसद में आ नहीं रहे हैं. इसलिए तय किया गया वहां जाकर वस्तुस्थिति देखें, वहां के लोगों से मिले और उनके दर्द को बांटे और वहां की स्थिति को संसद के अंदर रखें."
प्रतिनिधिमंडल रविवार को मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके से भी मुलाकात करेगा.
तीन मई को हिंसा शुरू होने के बाद से अब तक मणिपुर में 142 लोगों की मौत हो चुकी है और क़रीब 60,000 लोग बेघर हो गए हैं. राज्य सरकार के मुताबिक़, इस हिंसा में 5000 आगज़नी की घटनाएं हुई हैं.