पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा, अदालती मामलों और विपक्ष के चुनावी धांधली के आरोपों के बीच सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की है.
वोटों की गिनती पूरी नहीं हो सकी है, लेकिन अब तक आए नतीजों में पार्टी ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को काफी पीछे छोड़ दिया है.
टिकटों के लिए आंतरिक कलह और दो बड़े नेताओं, बीरभूम के बाहुबली नेता अणुब्रत मंडल और पूर्व मेदिनीपुर के शुभेंदु अदिकारी, के साथ नहीं होने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस अपने प्रदर्शन को दोहराने में कामयाब नजर आ रही है.
ग्राम पंचायतों में तो उसका प्रदर्शन बेहतर रहा ही था, अब पंचायत समिति और जिला परिषद के वोटों की गिनती शुरू होने के बाद भी वह पहले नंबर पर है. भाजपा दूसरे नंबर पर रही है. लेकिन तृणमूल के साथ उसकी सीटों में काफी फासला है. लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन तीसरे नंबर पर रहा है.
बंगाल की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में ज़िला परिषद सबसे ऊपर हैं.
ज़िला परिषद की कुल 928 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस ने 475 सीटें या तो जीत ली हैं या फिर उन पर काफी आगे चल रही है. भाजपा को अब तक 17 सीटें मिली हैं जबकि सीपीएम को सात और कांग्रेस को चार.
इसी तरह पंचायत समिति की 9,730 सीटों में से तृणमूल ने अब तक 4,938 सीटें जीती हैं. इसमें भाजपा को 511, सीपीएम को 125 और कांग्रेस को अब तक 105 सीटें ही मिली हैं.
इस चुनाव में बहुचर्चित मुर्शिदाबाद मॉडल को फेल करते हुए तृणमूल उम्मीदवार ने अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद और मालदा जिला में बेहतर प्रदर्शन किया है. बीते मार्च में सागरदीघी उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत के बाद इस मॉडल की चर्चा तेज हुई थी.
कूचबिहार के जिस दिनहाटा इलाके में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी वहां भी उसने भाजपा को पीछे छोड़ दिया है.
कोलकाता से सटे भांगड़ इलाके में इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने स्थानीय जमीन रक्षा समिति के साथ कुछ सीटें जीती हैं. पूर्व मेदिनीपुर के नंदीग्राम इलाके में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है.
कूचबिहार के अलावा उत्तर 24-परगना जिले में केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के इलाके में भी भाजपा उम्मीदवार की हार हुई है. यह मतुआ बहुल इलाका है.
भाजपा को दार्जिलिंग पर्वतीय इलाके में भी झटका लगा है. वहां स्थानीय पार्टी भारतीय गोर्खा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) ने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुत पीछे छोड़ दिया है. दार्जिलिंग लोकसभा सीट पर लंबे समय से भाजपा का ही कब्जा रहा है.
मतगणना के दौरान भी राज्य के विभिन्न इलाकों से छिटपुट हिंसा की खबरें आती रही हैं. दक्षिण 24-परगना जिले के भांगड़ा में आईएसएफ समर्थकों और पुलिस के बीच भिड़ंत हुई. राज्य के कई स्थानों पर उत्तेजित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. मंगलवार पूरी रात कई इलाकों में राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच झड़पें जारी रही.
टीएमसी पर लगे धांधली के आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बार जीत के लिए राज्य के लोगों के प्रति आभार जताया है. वहीं दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने इस चुनाव को एक तमाशा करार देते हुए आरोप लगाया है कि मतगणना में जीतने वाले पार्टी के उम्मीदवारों को धांधली के जरिए हराया जा रहा है.
सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा है कि इस नतीजे में लोगों का असली जनादेश नहीं झलकता क्योंकि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है. मतदान के दिन बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और केंद्रीय बल के जवान कहीं नजर नहीं आए.