सैकड़ों लोग
शुक्रवार को अपने घर से निकले. कोई नौकरी करने चेन्नई या केरल की ओर जा रहा था.
कोई अपने घर लौट रहा था.
ट्रेनें शाम सात
बजे के क़रीब ओडिशा के बालासोर ज़िले से निकल रही थीं. तभी तीन ट्रेनें हादसे का
शिकार हुईं और 238 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई.
हादसे के बाद
समाचार एजेंसियों, एनडीआरएफ़, निजी न्यूज़ चैनलों के कैमरों से घटनास्थल और अस्पताल की जो तस्वीरें
सामने आ रही हैं, वो डरा देने वाली हैं.
इस कहानी में
समझिए कि घटनास्थल पर इस वक़्त क्या कुछ दिख रहा है और माहौल कैसा है?
रेल बोगियों से बाहर का हाल
घटनास्थल पर ट्रेन की लगभग चार बोगियां पलटी हुई दिख रही हैं. कुछ बोगियां एक-दूसरे के ऊपर चढ़ी हुई हैं और कुछ बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं.
मालागाड़ी के ऊपर एक ट्रेन का इंजन चढ़ा हुआ है.
ट्रेन की पलटी हुई बोगी की फर्श को फाड़कर पटरी ट्रेन की छत को फाड़कर ऊपर निकल गई हैं.
पटरियों पर लोगों का सामान बिखरा पड़ा है. कुछ बैग बंद हैं और कुछ से सामान बाहर निकला दिख रहा है.
पटरियों पर लाशों को बैग में बंद करके रखा हुआ है और इन लाशों को गाड़ियों से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है.
बोगियों के अंदर लोगों की चप्पलें, कपड़े हैं.
रेस्क्यू ऑपरेशन के अंदर कुछ फँसे हुए लोगों को कपड़ा या रस्सी बांधकर निकालने की कोशिशें भी हुईं. कुछ लोग इन कपड़ों के सहारे बाहर निकाल लिए गए.
हादसा शाम 7 बजे का है यानी वो वक़्त जब लोगों के ख़ाने या नाश्ते का वक़्त था. ऐसे में हादसे वाली बोगियों में बिखरा हुआ खाना, लोगों की चप्पलें दिख रही हैं.
कुछ चश्मदीदों की मानें तो हादसे के फ़ौरन बाद बोगियों के अंदर लोग घायल हालत में भी दिखे. किसी का हाथ कटा हुआ था, किसी का पैर.
बहुत बुरी तरह से क्षतिग्रस्त बोगियों को मशीनों से काटा जा रहा है और ये ज़िंदगियों को बचाने की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है.
घटनास्थल पर मौजूद लोग बता रहे हैं कि बोगियों के अंदर से किसी तरह की आवाज़ नहीं आ रही है यानी किसी के अंदर फँसे होने की आशंका कम ही है. हालांकि रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.
बोगियों के शीशे, सीटें टूट चुकी हैं.
घटनास्थल वाली जगह से घायलों को ओडिशा के भदरक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अस्पताल के वॉर्ड में घायलों की भीड़ है. लोगों के शरीर से खून निकल रहा है. खून से सने कपड़ों में घायलों का दर्द चेहरे पर साफ़ देखा जा सकता है.
घायलों के इलाज के लिए ख़ून की ज़रूरतें बढ़ गई हैं और इस दिशा में संस्थाएं काम भी कर रही हैं.
कुछ घायल एक-दूसरे के कंधे पर सिर रखकर रो रहे हैं और कुछ इलाज की प्रतीक्षा में दिख रहे हैं.
अस्पताल के बाहर एंबुलेंस के सायरन लगातार सुनाई दे रहे हैं. इन एंबुलेंस में घायलों को लाया जा रहा है.
इन घायलों को भर्ती करवाने के लिए अस्पताल के गेट पर डॉक्टर्स या एनडीआरएफ़ की टीमें तैनात हैं. कुछ आम लोग भी बचाव कार्य में जुटे दिख रहे हैं.