योगेश्वर दत्त ने कहा विपक्ष के बहकावे में आ गए थे जंतर मंतर पर धरने में बैठे पहलवान
बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों को रविवार को पुलिस ने हटा दिया.
लाइव कवरेज
प्रियंका झा and अनुराग कुमार
आईपीएल: अहमदाबाद में आज भी नहीं हो पाया फ़ाइनल मुक़ाबला तो जीत किसकी?
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इमेज कैप्शन, रविवार को तेज़ बारिश की वजह से नहीं हो सका था मैच
अहमदाबाद में रविवार को होने वाले आईपीएल 2023 का खिताबी मुक़ाबला बारिश की वजह से सोमवार के लिए टल गया था.
बारिश इतनी तेज़ थी कि चेन्नई सुपर किंग्स और गुजरात टाइटंस के कप्तान टॉस के लिए भी मैदान पर नहीं आ सके.
इसके बाद ये आशंका बनी हुई थी कि क्या सोमवार को अहमदाबाद का मौसम साफ़ रहेगा और अगर आज भी मैच बारिश की वजह से धुल गया तो खिताब किस टीम को मिलेगा.
अगर सोमवार को बारिश हुई और दोनों टीमों के बीच पाँच-पाँच ओवरों का मैच खेलना भी संभव न हो सका तो गुजरात टाइटंस को विजेता बन सकती है, क्योंकि पॉइंट टेबल में वो पहले पायदान पर रही है.
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लेकिन इसके लिए कई शर्तें हैं.
क्या कहता है नियम?
अगर सोमवार रात को भी 9.36 बजे तक बारिश हुई तो मैच के ओवर घटने शुरू हो जाएंगे. इसके बाद अगर देर रात 12:06 मिनट तक कम से कम पाँच-पाँच ओवर का भी खेल नहीं हो पाया तो फिर दोनों टीमें सुपओवर खेलेंगी.
लेकिन अगर बारिश इतनी तेज़ हो कि सुपरओवर फेंकना भी संभव न रह जाए तो लीग मैचों में सबसे अधिक अंक हासिल करने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाएगा.
गुजरात टाइटंस ने कुल 14 लीग मैचों में से 10 जीते थे. वहीं चेन्नई सुपरकिंग्स ने 14 में से 8 मैच जीते थे. गुजरात के 20 अंकों के साथ पहले पायदान पर है और चेन्नई 17 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर.
कैसा रहेगा अहमदाबाद में आज मौसम?
मौसम की जानकारी देने वाली साइट एक्यूवेदर के अनुसार आज सुबह अहमदाबाद में आसमान साफ़ रहेगा और धूप रहेगी.
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हालांकि, जैसे-जैसे दिन चढ़ेगा बादल आएंगे और मैच से ठीक पहले यानी शाम 5 से 6 बजे के बीच घने बादल रहने की आशंका है.
लेकिन शाम 7 बजे तक मौसम साफ़ हो जाएगा और बारिश भी नहीं होगी.
तुर्की में अर्दोआन की जीत भारत के लिए क्या टेंशन बढ़ाने वाली है?
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तुर्की में रेचेप तैय्यप अर्दोआन फिर से राष्ट्रपति चुनाव जीत गए
हैं. अर्दोआन पिछले दो दशक से तुर्की की कमान संभाल रहे हैं और दो दशक सत्ता में
रहने के बाद भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे.
अर्दोआन की जीत भारत के लिए क्या मायने रखती है? भारतीय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्दोआन को जीत की बधाई दे दी है. पीएम मोदी ने बधाई
देते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले वक़्त में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय
संबंध अच्छे होंगे और वैश्विक मुद्दे पर सहयोग बढ़ेगा.
मोदी ने भले बधाई दे दी है लेकिन उन्हें पता है कि अर्दोआन के सत्ता
में आने के बाद भारत से रिश्ते सहज नहीं रहे हैं. पिछले नौ सालों में पीएम मोदी ने
मध्य-पूर्व के कई देशों का दौरा किया लेकिन तुर्की नहीं गए.
2019 में मोदी तुर्की का दौरा करने वाले थे लेकिन ऐन मौक़े पर दौरा
रद्द हो गया था. पाँच अगस्त 2019 को कश्मीर का विशेष दर्जा भारत ने ख़त्म कर दिया
था और तुर्की ने इसका खुलकर विरोध किया था. अर्दोआन ने इस मुद्दे को संयुक्त
राष्ट्र की आम सभा में भी उठाया था.
कश्मीर पर अर्दोआन की लाइन पाकिस्तान के पक्ष में रही है. भारत के
लिए हमेशा से यह असहज करने वाला रहा है. तुर्की इस्लामिक देशों के संगठन
ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी ओआईसी में भी कश्मीर को लेकर हमलावर रहा
है.
भारत तुर्की की इन आपत्तियों के जवाब में कहता रहा है कि कश्मीर उसका
आंतरिक मामला है और तुर्की की टिप्पणी भारत के आंतरिक मामलो में हस्तक्षेप है.
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भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी ट्वीट कर इस बात पर
चिंता जताई है कि अर्दोआन की जीत भारत के लिए किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है.
कंवल सिब्बल ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''तुर्की में अर्दोआन
की जीत भारत के लिए बहुत सहज स्थिति नहीं है. तुर्की कश्मीर पर इस्लामिक लाइन पर
समर्थन पाकिस्तान को देगा. ओआईसी में भी कश्मीर पर सक्रिय रहेगा. पाकिस्तान के साथ
तुर्की की जुगलबंदी चिंताजनक है. ऑटोमन साम्राज्य वाला अर्दोआन का लक्ष्य भी
विनाशकारी है. अर्दोआन के नेतृत्व में तुर्की का ब्रिक्स में आना किसी भी मायने
में ठीक नहीं है. रूस के साथ भी अर्दोआन की दोस्ती बहुत अच्छी है.''
तुर्की का पाकिस्तान परस्त रुख़ रहा है. कहा जाता है कि इसकी शुरुआत
1950 के शुरुआती दशक या फिर शीत युद्ध के दौर में होती है.
इसी दौर में भारत-पाकिस्तान के बीच दो जंग भी हुई थी. तुर्की और भारत
के बीच राजनयिक संबंध 1948 में स्थापित हुआ था. तब भारत के आज़ाद हुए मुश्किल से
एक साल ही हुआ था.
इन दशकों में भारत और तुर्की के बीच क़रीबी साझेदारी विकसित नहीं हो
पाई. कहा जाता है कि तुर्की और भारत के बीच तनाव दो वजहों से रहा है. पहला कश्मीर
के मामले में तुर्की का पाकिस्तान परस्त रुख़ और दूसरा शीत युद्ध में तुर्की
अमेरिकी खेमे में था जबकि भारत गुटनिरपेक्षता की वकालत कर रहा था.
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नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन यानी नेटो दूसरे विश्व युद्ध के
बाद 1949 में बना था. तुर्की इसका सदस्य था. नेटो को सोवियत यूनियन विरोधी संगठन
के रूप में देखा जाता था.
इसके अलावा 1955 में तुर्की, इराक़, ब्रिटेन,
पाकिस्तान
और ईरान ने मिलकर 'बग़दाद पैक्ट' किया था. बग़दाद पैक्ट को तब डिफ़ेंसिव
ऑर्गेनाइज़ेशन कहा गया था.
इसमें पाँचों देशों ने अपनी साझी राजनीति, सेना और आर्थिक
मक़सद हासिल करने की बात कही थी. यह नेटो की तर्ज़ पर ही था. 1959 में बग़दाद
पैक्ट से इराक़ बाहर हो गया था. इराक़ के बाहर होने के बाद इसका नाम सेंट्रल
ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन कर दिया गया था. बग़दाद पैक्ट को भी सोवियत यूनियन के
ख़िलाफ़ देखा गया. दूसरी तरफ़ भारत गुटनिरपेक्षता की बात करते हुए भी सोवियत
यूनियन के क़रीब लगता था.
जब शीत युद्ध कमज़ोर पड़ने लगा था तब तुर्की के 'पश्चिम
परस्त' और 'उदार' राष्ट्रपति माने जाने वाले तुरगुत ओज़ाल ने भारत से संबंध पटरी पर
लाने की कोशिश की थी.
1986 में ओज़ाल ने भारत का दौरा किया था. इस दौरे में ओज़ाल ने दोनों
देशों के दूतावासों में सेना के प्रतिनिधियों के ऑफिस बनाने का प्रस्ताव रखा था.
इसके बाद 1988 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने तुर्की का दौरा
किया था. राजीव गांधी के दौरे के बाद दोनों देशों के रिश्ते कई मोर्चे पर सुधरे
थे.
लेकिन इसके बावजूद कश्मीर के मामले में तुर्की का रुख़ पाकिस्तान के
पक्ष में ही रहा इसलिए रिश्ते में नज़दीकी नहीं आई.
पाकिस्तान उच्चायोग ने दिल्ली में अपने स्कूल को बंद किया, बताई ये वजह
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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान उच्चायोग (फ़ाइल फ़ोटो)
पाकिस्तान उच्चायोग ने नई दिल्ली में अपने स्कूल को बंद कर दिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की ख़बर के अनुसार, स्कूल में दाखिला लेने वाले छात्रों की कम संख्या की वजह से ये फ़ैसला किया गया है.
ये स्कूल उच्चायोग में काम करने वाले लोगों के बच्चों की शिक्षा के लिए बनाया गया था. हालांकि, साल 2020 में पाकिस्तान ने अपने कर्मचारियों की संख्या घटाई, जिसके बाद से स्कूल में छात्रों की संख्या भी कम होने लगी.
पाकिस्तान उच्चायोग के प्रवक्ता के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया, "मौजूदा शैक्षणिक सत्र पूरा होने के बाद कम बच्चों का दाखिला होने की वजह से स्कूल का संचालन रोक दिया गया है."
"ये ध्यान देने वाली बात है कि स्कूल कभी भी आम बच्चों के लिए नहीं था और यहाँ सिर्फ़ पाकिस्तान उच्चायोग के कर्मचारियों के बच्चों को ही पढ़ाया जाता था."
प्रवक्ता ने पीटीआई को ये भी बताया कि भारत के कहने पर जून 2020 में पाकिस्तान के उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या आधी कर दी गई थी.
बजरंग पूनिया ने किसे कहा- "सीने पर खाएंगे तेरी गोली"
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इमेज कैप्शन, रविवार को प्रदर्शन के दौरान पहलवान
कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ धरना दे रहे पहलवानों में शामिल बजरंग पूनिया ने एक पूर्व आईपीएस अधिकारी के ट्वीट पर जवाब में लिखा है कि वो गोली खाने को भी तैयार हैं.
दरअसल, पूर्व आईपीएस एनसी अस्थाना ने एक ट्वीट में ये प्रदर्शन कर रहे पहलवानों पर कार्रवाई को सही ठहराते हुए ये लिखा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो गोली भी मारी जाएगी.
ये ट्वीट रविवार को प्रदर्शनकारी पहलवानों को सड़कों पर घसीटे जाने के बाद किया गया था. दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को भी खाली करा दिया है, जहाँ पिछले एक महीने से भी अधिक समय से पहलवान धरना दे रहे थे.
उन्होंने लिखा, "ज़रूरत हुई तो गोली भी मारेंगे. मगर, तुम्हारे कहने से नहीं. अभी तो सिर्फ़ कचरे के बोरे की तरह घसीट कर फेंका है. दफ़ा 129 में पुलिस को गोली मारने का अधिकार है. उचित परिस्थितियों में वो हसरत भी पूरी होगी. मगर वह जानने के लिये पढ़ा- लिखा होना आवश्यक है. फिर मिलेंगे पोस्टमॉर्टम टेबल पर."
इसके जवाब में बजरंग पूनिया ने लिखा, "ये आईपीएस ऑफ़िसर हमें गोली मारने की बात कर रहा है. भाई सामने खड़े हैं. बता कहाँ आना है गोली खाने...क़सम है पीठ नहीं दिखाएंगे, सीने पे खाएंगे तेरी गोली. यो ही रह गया है अब हमारे साथ करना तो यो भी सही."
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दिल्ली पुलिस ने विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया को रविवार को सुरक्षा घेरा तोड़कर महिला ‘महापंचायत’ के लिए नए संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश करने के बाद कानून-व्यवस्था के उल्लंघन को लेकर हिरासत में लिया था. साक्षी मलिक, विनेश और संगीता फोगाट को देर रात रिहा किया गया.
देश के शीर्ष पहलवानों ने 23 अप्रैल को भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ़्तार करने की मांग को लेकर अपना आंदोलन फिर से शुरू किया था. प्रदर्शनकारी पहलवानों ने बृजभूषण पर एक नाबालिग़ सहित कई महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोप लगाया है.
अर्दोआन के फिर से तुर्की के राष्ट्रपति बनने पर मोदी और पुतिन बोले
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इमेज कैप्शन, मोदी-अर्दोआन (फ़ाइल फ़ोटो)
रेचेप तैय्यप अर्दोआन तीसरी बार तुर्की के राष्ट्रपति बन गए हैं और अब नरेंद्र मोदी सहित दुनिया के शीर्ष नेता उन्हें बधाई संदेश दे रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्दोआन की जीत पर ट्वीट किया, "तुर्की के राष्ट्रपति पद पर दोबारा चुने जाने के लिए रेचेप तैय्यप अर्दोआन को बधाई. मुझे भरोसा है कि हमारे द्विपक्षीय संबंध और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग आने वाले समय में भी बढ़ना जारी रहेगा."
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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में अर्दोआन को 52.1 फ़ीसदी वोट मिले हैं जबकि कलचदारलू के हिस्से में 47.9 फ़ीसदी वोट आए.
इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी अर्दोआन को शुभकामनाएं देते हुए कहा था कि उनकी जीत इस बात का सबूत है कि तुर्की के नागरिक देश की स्वतंत्र विदेश नीति के साथ खड़े हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पुतिन ने अर्दोआन को भेजे संदेश में कहा, "चुनाव में मिली जीत तुर्की के नेता के तौर पर आपके स्वार्थहीन कामों का सहज परिणाम है. ये साफ़ दिखाता है कि तुर्की के नागरिक देश की संप्रभुता को मज़बूती देने के लिए आपके प्रयासों और एक स्वतंत्र विदेश नीति का समर्थन करते हैं."
नीरज चोपड़ा के बाद सुनील छेत्री भी पहलवानों के समर्थन में आए, कहा- ये सही बर्ताव नहीं
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ओलंपियन नीरज चोपड़ा के बाद अब भारत के फुटबॉल खिलाड़ी सुनील छेत्री भी प्रदर्शनकारी पहलवानों पर कार्रवाई के ख़िलाफ़ सामने आए हैं.
सुनील छेत्री ने एक ट्वीट में लिखा है कि पहलवानों को घसीटने की क्या ज़रूरत है.
उन्होंने लिखा, "बिना सोचे-समझे हमारे पहलवानों को इस तरह घसीटे जाने की क्या ज़रूरत है? किसी के साथ बर्ताव करने का ये सही तरीका नहीं है. मुझे उम्मीद है कि इस पूरी स्थिति का आकलन उसी तरह किया जाएगा, जैसा होना चाहिए."
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इससे पहले रविवार को नीरज चोपड़ा ने भी प्रदर्शनकारी पहलवानों पर कार्रवाई का वीडियो ट्वीट करते हुए साथ में लिखा था, "यह देख कर मुझे दुख हो रहा है. इस हालात से निपटने का दूसरा तरीका भी हो सकता था."
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दिल्ली पुलिस ने विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया को रविवार को सुरक्षा घेरा तोड़कर महिला ‘महापंचायत’ के लिए नए संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश करने के बाद कानून-व्यवस्था के उल्लंघन को लेकर हिरासत में लिया था.
देर रात पुलिस ने साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और संगीता फोगाट को छोड़ दिया था लेकिन कुछ पहलवान अभी भी हिरासत में हैं.
देश के शीर्ष पहलवानों ने 23 अप्रैल को भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ़्तार करने की मांग को लेकर अपना आंदोलन फिर से शुरू किया था. प्रदर्शनकारी पहलवानों ने बृजभूषण पर एक नाबालिग सहित कई महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोप लगाया है.
एक बार फिर से राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद क्या बोले अर्दोआन
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इमेज कैप्शन, जीत के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए अर्दोआन
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने रनऑफ़ इलेक्शन में अपने प्रतिद्वंद्वी कमाल कलचदारलू को पीछे छोड़ दिया और तीसरी बार राष्ट्रपति बन गए हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार कमाल कलचदारलू ने इसे 'सबसे ग़लत ढंग से पूरा हुआ चुनाव' करार दिया है लेकिन नतीजों पर उन्होंने कोई सवाल नहीं किए हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अर्दोआन को 52.1 फ़ीसदी वोट मिले हैं जबकि कलचदारलू के हिस्से में 47.9 फ़ीसदी वोट आए.
अर्दोआन के लिए इस चुनाव को बहुत मुश्किल माना जा रहा था क्योंकि घरेलू स्तर पर वह कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं.
तुर्की में महंगाई आसमान पर है और इसी साल आए विनाशकारी भूकंप के बाद से प्रभावित इलाकों में ज़िंदगी पटरी पर पूरी तरह नहीं लौट सकी है.
ऐसे में विपक्षी पार्टियों को लग रहा था कि अर्दोआन को चुनाव में हराया जा सकता है. इसी वजह से तुर्की की छह पार्टियों के गठबंधन ने कमाल कलचदारलू को अपना साझा उम्मीदवार बनाया था.
तुर्की में पहले 14 मई को चुनाव हुए थे लेकिन किसी भी उम्मीदवार को 50 फ़ीसदी से अधिक वोट न मिल पाने की वजह से दूसरे चरण का मतदान करवाना पड़ा.
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जीतने के बाद अपने भाषण में अर्दोआन ने सभी विवादों को पीछे छोड़ने और राष्ट्रीय मूल्यों और सपनों के लिए एकजुट होने का संकल्प लिया. हालांकि, उन्होंने विपक्ष पर हमलावर रुख अपनाते हुए बिना किसी सबूत के कलचदारलू पर आतंकवादियों का साथ देने का आरोप लगाया.
अर्दोआन ने कहा कि महंगाई तुर्की का सबसे प्रमुख मुद्दा है.
69 वर्षीय अर्दोआन ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "आज का विजेता सिर्फ़ तुर्की है. मैं हर उस शख्स का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने मुझे फिर से अगले पाँच सालों के लिए देश चलाने की ज़िम्मेदारी सौंपी."
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अर्दोआन के घर के बाहर जमा हुए उनके समर्थक लगातार 'अल्लाह-हू-अक़बर' के नारे लगाते रहे.
एक समर्थक ने रॉयटर्स से कहा, "दुनिया के हर देश में समस्याएं हैं. यूरोपीय देशों में भी...मज़बूत नेतृत्व के बलबूते हम भी तुर्की की समस्याएं सुलझा लेंगे."
नए संसद भवन के उद्घाटन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ये बयान
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए संसद भवन का उद्घाटन किए जाने का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि ये देश के लिए गर्व और बहुत खुशी की बात है.
कांग्रेस, एनसीपी सहित 19 से अधिक विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार किया था. इन पार्टियों की मांग थी कि उद्घाटन प्रधानमंत्री की बजाय राष्ट्रपति से कराया जाना चाहिए.
समाचार एजेंसी पीटीआई की ख़बर के अनुसार, संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि इसे देश के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा.
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने राष्ट्रपति के संदेश को पढ़कर सुनाया.
राष्ट्रपति ने कहा, "मुझे इस बात का गहरा संतोष है कि नई संसद का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है, जो संसद में विश्वास का प्रतीक है."
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इमेज कैप्शन, नई संसद में सेंगोल के साथ पीएम मोदी
उन्होंने कहा, "नया संसद भवन हमारी लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपू्रण मील का पत्थर है. ये अवसर भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा."
मुर्मू ने कहा कि नये संसद भवन का उद्घाटन देशवासियों के दिलों में एकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को मज़बूत करेगा.
मुर्मू ने नये संसद भवन के निर्माण में शामिल सभी लोगों के काम की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयास और योगदान देश के लोगों के दिलो-दिमाग़ में बने रहेंगे.
जंतर मंतर प्रदर्शन: बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज
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दिल्ली पुलिस ने रविवार को जंतर मंतर पर पहलवानों के विरोध प्रदर्शन के आयोजकों और उनके समर्थकों पर दंगा करने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने के आरोप में एफ़आईआर दर्ज की है.
जिन लोगों पर एफ़आईआर हुई है उनमें बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट भी शामिल हैं.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार ये एफ़आईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 149, 186, 188, 332, 353 और पीडीपीपी एक्ट की धारा 3 के तहत दर्ज की गई है.
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इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया को रविवार को सुरक्षा घेरा तोड़कर महिला ‘महापंचायत’ के लिए नए संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश करने के बाद कानून-व्यवस्था के उल्लंघन को लेकर हिरासत में लिया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से बताया है कि जंतर मंतर पर 109 प्रदर्शनकारियों सहित पूरी दिल्ली में 700 लोगों को हिरासत में लिया गया.
पहलवानों को बसों में भरकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाने के तुरंत बाद, पुलिस कर्मियों ने जंतर-मंतर पर धरना स्थल को साफ करना शुरू कर दिया तथा पहलवानों के खाट, गद्दे, कूलर, पंखे और तिरपाल को हटा दिया.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई से कहा कि हिरासत में ली गई सभी महिला पहलवानों को रिहा कर दिया गया है और पुरुष पहलवानों को भी जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा.
देश के शीर्ष पहलवानों ने 23 अप्रैल को भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ़्तार करने की मांग को लेकर अपना आंदोलन फिर से शुरू किया था. प्रदर्शनकारी पहलवानों ने बृजभूषण पर एक नाबालिग सहित कई महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोप लगाया है.
नमस्कार आपका दिन शुभ हो.
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