पाकिस्तान सेना ने कहा फ़ौजी इमारतों पर हमला करने वालों के विरुद्ध आर्मी एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई

पाकिस्तान सेना ने कहा है कि सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले की साजिश रचने वाले और हमला करने वाले के ख़िलाफ़ पाकिस्तान सेना अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी.

लाइव कवरेज

दीपक मंडल

  1. पाकिस्तान सेना ने कहा फ़ौजी इमारतों पर हमला करने वालों के विरुद्ध आर्मी एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई

    पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर

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    पाकिस्तान सेना ने कहा है कि सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले की साजिश रचने वाले और हमला करने वाले के ख़िलाफ़ पाकिस्तान सेना अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी.

    सेना के जनसंपर्क विभाग आईएसपीआर ने कहा कि हमला करने वालों के ख़िलाफ़ ठोस सबूत मौजूद हैं.

    आईएसपीआर की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि सेना प्रमुख असीम मुनीर ने स्पेशल कोर कमांडर कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की.

    इस बैठक में पिछले कुछ दिन से पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई.

    आईएसपीआर के अनुसार, कॉन्फ्रेंस को बताया गया, '' शहीदों की तस्वीरों, इमारतों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर तय योजना बनाकर निशाना बनाया गया और इसका लक्ष्य सेना के छवि ख़राब करना और उसे प्रतिक्रिया देने पर मजबूर करना था.''

    कोर कमांडर कॉन्फ्रेंस ने इन घटनाओं की निंदा की है.

    कोर कमांडरों की बैठक में पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिरता लाने के लिए सभी पक्षों को मिलकर सहमति बनाने पर ज़ोर दिया ताकि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक प्रक्रिया मज़बूत हो.

    पाकिस्तान में इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद उनके समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा था.

    पिछले सप्ताह मंगलवार को कई शहरों में उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए. इन समर्थकों का गुस्सा ख़ास तौर से पाकिस्तानी सेना पर उतरा.

    गुस्साई भीड़ ने लाहौर में कोर कमांडर के घर पर धावा बोल दिया था. लाहौर के अलावा रावलपिंडी में सेना के जनरल हेडक्वॉर्टर में लोग घुस गए थे.

  2. दिल्लीः आईएएस अधिकारी ने नहीं माना तबादले का आदेश, मंत्री से फोन पर बात भी नहीं की

    सौरभ भारद्वाज

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    दिल्ली सरकार ने आईएएस अधिकारी और सर्विसेज़ विभाग के सचिव आशीष मोरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी है.

    दिल्ली सरकार का आरोप है कि आशीष मोरे ने अपने तबादले के आदेश को नज़रअंदाज़ किया और वो संपर्क से बाहर हो गए.

    सिविल सर्विस बोर्ड (सीएसबी) के चेयरमैन और दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने सर्विस मंत्री के निर्देश पर 16 मई को सीएसबी की बैठक बुलाई है जिसमें मोरे समेत अन्य अधिकारियों के तबादले पर चर्चा होगी.

    सर्विस विभाग के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मोरे को 13 मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था लेकिन अभी तक इसका जवाब नहीं मिल सका है.

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    भारद्वाज ने तबादले का आदेश न मानने पर मोरे से 24 घंटों के भीतर जवाब मांगा था.

    भारद्वाज का ये भी कहना है कि मोरे से संपर्क करने के कई प्रयास किए गए लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

    मोरे को पिछले गुरुवार दिल्ली सरकार ने पद से हटा दिया था.

    सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली में अधिकारियों के तबादले और तैनाती का अधिकार दिल्ली सरकार को देने के कुछ घंटे बाद ही आम आदमी पार्टी सरकार ने आशीष मोरे के तबादले का आदेश दिया था.

  3. कर्नाटकः शिवकुमार नहीं आए दिल्ली, अब कल होगा मुख्यमंत्री पर फ़ैसला

      • Author, इमरान क़ुरैशी
      • पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
    डीके शिवकुमार

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    कर्नाटक में कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार के स्वास्थ्य कारणों से दिल्ली ना पहुंच पाने की वजह से कर्नाटक के मुख्यमंत्री को लेकर कांग्रेस का फ़ैसला कल तक के लिए टल सकता है.

    शिवकुमार के दफ़्तर की तरफ़ से बताया गया है कि डॉक्टर ने उन्हें यात्रा ना करने की सलाह दी है क्योंकि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है.

    उनके कार्यालय की तरफ़ से बीबीसी से कहा गया, “कल अगर उनकी तबियत बेहतर हुई तो वो दिल्ली जाएंगे.”

    कांग्रेस हाई कमान ने आज सुबह डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया को दिल्ली तलब किया था. दोनों ही नेता कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी के दावेदार हैं.

    सिद्धारमैया दोपहर की फ़्लाइट से रवाना हो गए थे और आज शाम दिल्ली पहुंच गए.

    सोमवार सुबह कांग्रेस के तीन सदस्यी पर्यवेक्षक दल के दिल्ली पहुंचने के बाद दोनों नेताओं को तलब किया गया था. कांग्रेस पर्यवेक्षक दल का नेतृत्व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे कर रहे थे.

    पर्यवेक्षक अपने साथ विधायकों के वोटों का बैलटबॉक्स भी लेकर दिल्ली पहुंचे हैं.

    कर्नाटक के विधायकों ने मतदान के ज़रिए मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी-अपनी पसंद बताई है.

    डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया

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    पर्यवेक्षकों को वोटों की गिनती करके रिपोर्ट पार्टी हाई कमान को सौंपनी थी. कर्नाटक में कांग्रेस के विधायक दल ने भी एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से नया मुख्यमंत्री चुनने के लिए कहा है.

    एक नव-निर्वाचिक विधायक ने बीबीसी से कहा, “हम सभी को पर्ची दी गई थी और अपनी पसंद के नेता का नाम लिखने के लिए कहा गया था. जब तक ये प्रक्रिया पूरी हुई, काफ़ी देर हो चुकी थी.”

    कर्नाटक के मीडिया में डीके शिवकुमार के दिल्ली ना जाने को लेकर चर्चाएं जारी हैं.

    शिवकुमार से जब पत्रकारों ने सिद्धारमैया के इस बयान के बारे में पूछा कि उनके पास बहुमत में विधायकों का समर्थन है तो उन्होंने कहा, “अगर उनके पास संख्या है तो मैं उन्हें मुबारकबाद देता हूं.”

    हालांकि शिवकुमार के दफ़्तर की तरफ़ से बीबीसी को बताया गया है कि वो कल डॉक्टर की सलाह के बाद दिल्ली जाएंगे.

  4. डीके शिवकुमारः 'मुझे नहीं पता कि विधायकों के क्या विचार हैं.''

    डी के शिवकुमार और सिद्धारमैया

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    कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने कहा है कि उन्हें नहीं पता कि विधायकों के क्या विचार हैं.

    उन्होंने कहा, ''मेरे पास कोई विधायक नहीं है. हमारे पास कुल 135 विधायक हैं. वे कांग्रेस पार्टी के विधायक हैं. मुझे नहीं पता कि विधायकों के क्या विचार हैं.''

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    शिवकुमार आज दिल्ली के लिए रवाना होने वाले थे लेकिन समाचार एजेंसी पीटीआई और एएनआई की ख़बर के अनुसार आंत के संक्रमण का हवाला देते हुए उन्होंने दिल्ली की यात्रा रद्द कर दी है.

    कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसे लेकर रविवार को कांग्रेस के विधायक दल की बैठक हुई थी.

    लेकिन कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया था और सर्वसम्मति से इसका निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर छोड़ दिया गया.

    व्यक्तिगत तौर पर नव निर्वाचित विधायकों से बात करने के बाद कांग्रेस के तीन पर्यवेक्षक भी सोमवार को दिल्ली लौट चुके हैं.

    बेंगलुरु में एआईसीसी के पर्यवेक्षक भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा, ''हमने सभी विधायकों से बातचीत की है. इसके आधार पर रिपोर्ट भी तैयार कर ली है और कांग्रेस अध्यक्ष को सौंप भी चुके हैं.''इसी बीच कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से मुलाक़ात की है.

  5. तुर्की: राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं, दूसरे चरण में होगा फ़ैसला

    तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप्प अर्दोआन

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    तुर्की में राष्ट्रपति चुनाव में किसी को भी बहुमत नहीं मिलने की वजह से 28 मई को फिर चुनाव होंगे.

    तुर्की में मौजूदा राष्ट्रपति रेचेप तैयप्प अर्दोआन को 49.51 प्रतिशत वोट जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को उनके प्रतिद्वंद्वी कमाल कलचदारलू 44.79 फीसदी वोट मिले हैं.

    किसी को भी 50 प्रतिशत वोट नहीं मिलने की वजह से रन ऑफ़ होगा.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की ख़बर के अनुसार, तुर्की के चुनाव प्रमुख ने कहा है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए दूसरा राउंड होगा.

    सोमवार को कलचदारलू अंकारा में अपने पार्टी मुख्यालय के स्टेज पर खड़े हुए. हालांकि अपने समर्थकों से घिरे कलचदारलू में आत्मविश्वास की थोड़ी कमी दिख रही थी.

    उन्होंने कहा, '' अगर दूसरे दौर का मतदान हुआ तो हम निश्चित तौर पर जीतेंगे.''

    क्या है रन-ऑफ?

    राष्ट्रपति पद के लिए डाले गए वोटों में से 97.95 फीसदी की गिनती के बाद न तो अर्दोआन और न ही कमाल कलचदारलू 50 फीसदी वोट हासिल कर पाए थे.

    अर्दोआन को 49.49 फीसदी वोट मिले थे और कमाल को 44.79 फीसदी. इसका मतलब ये की कोई भी जीत का दावा नहीं कर सकता. लिहाजा अब दोबारा वोटिंग होगी.

  6. दिनभर: तुर्की के चुनावी दंगल में अर्दोआन कहां?

  7. आईपीएल 2023: हैदराबाद ने जीता टॉस, हार्दिक की गुजरात टीम करेगी पहले बल्लेबाज़ी

    हार्दिक पटेल

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    आईपीएल 2023 में आज (सोमवार को) 62वां मैच खेला जा रहा है. आमने सामने हैं गुजरात टाइटन्स और सनराइजर्स हैदराबाद.

    हैदराबाद के कप्तान एडन मार्करम ने टॉस जीता है और पहले गेंदबाज़ी का फ़ैसला किया है. उनका कहना है कि पिच में कुछ नमी है और वो इसका फ़ायदा लेना चाहते हैं.

    पहले बल्लेबाज़ी करने वाली गुजरात की टीम के कप्तान हार्दिक पांड्या ने कहा कि जो अच्छा खेलगा वो जीत हासिल करेगा और वो अच्छी क्रिकेट खेलना चाहते हैं.

    हार्दिक की टीम ने टूर्नामेंट में 12 में से आठ मैच जीते हैं और 16 अंक के साथ प्वाइंट टेबल में पहले नंबर पर है. गुजरात की टीम अगर आज का मैच जीत लेती है तो प्लेऑफ़ में जगह पक्की कर लेगी.

    वहीं हैदराबाद टीम आठ अंक के साथ नौवें नंबर पर है. प्लेऑफ़ की रेस में बने रहने के लिए उन्हें आज के मैच में जीत हासिल करना ज़रूरी है.

  8. जयशंकर ने स्वीडन में क्यों कहा- आपके मुँह में घी शक्कर

    जयशंकर स्वीडन में

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    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर स्वीडन में रविवार को भारतीय समुदाय को संबोधित कर रहे थे. विदेश मंत्री के तौर पर एस जयशंकर का यह पहला स्वीडन दौरा था.

    भारतीयों को संबोधित करते हुए जयशंकर हिन्दी के एक चर्चित मुहावरे का इस्तेमाल किया.

    वह मुहावरा था- आपके मुँह में घी शक्कर. जब जयशंकर ने इस मुहावरे को कहा तो लोग खिलखिलाकर हँस पड़े.

    जयशंकर ने कहा, ''मुझे नहीं पता कि आपमें से कितने लोग हिन्दी जानते-समझते हैं. हिन्दी में एक मुहावरा है- आपके मुँह में घी शक्कर. यानी आप जो उम्मीद कर रहे हैं वो सच हो जाए.''

    जयशंकर स्वीडन और भारत के बीच इलेक्ट्रिक एविएशन में साझेदारी, भारत की संस्कृति के प्रसार, जियो-पॉलिटकल हालात, भारत की दुनिया में कथित रूप से बढ़ रही धाक से संबंधित सवालों के जवाब दे रहे थे.

    उन्होंने कहा, ''दरअसल हम देख रहे हैं कि भारतीय संस्कृति का वैश्वीकरण हो रहा है और ऐसा कई वजहों से हो रहा है. ऐसा विदेशों में भारत के लोगों के प्रसार की वजह से भी हो सकता है.''

    उन्होंने संस्कृति को लेकर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का हवाला देते हुए कहा, ''ईमानदारी से मैं यह कहना चाहूंगा कि हमने सोचा नहीं था कि इसकी इतनी लोकप्रियता बढ़ेगी. दुनिया में अब ऐसा एक भी देश नहीं है, जहां योग को पसंद करने वाले लोग न हों. हो सकता है कि वहां यह पहले से हो, या सुप्त अवस्था में रहा हो और हमने जगा दिया.''

    एस जयशंकर तीन दिन के दौरे पर हैं. 2023 में भारत और स्वीडन के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए 75 साल हो गए.

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  9. डीके शिवकुमार क्यों बोले- अकेले भी साहस से बहुमत संभव

    डी के शिवकुमार

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    कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के लिए एक तरह से अपनी दावेदारी पेश करते हुए डी के शिवकुमार ने कहा कि वह पार्टी के अध्यक्ष हैं और उनकी अध्यक्षता में पार्टी 135 सीटों पर जीत हासिल की है.

    उन्होंने कहा, ''कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने मुझे और सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया है. मैं प्रदेश का प्रमुख हूं और मेरी अध्यक्षता में पार्टी को 135 सीटें मिली हैं.''

    शिवकुमार भी दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं जबकि सिद्धारमैया दिल्ली पहुंच चुके हैं.

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    रविवार को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में यह निर्णय नहीं हो पाया था और सर्वसम्मति से इसका निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर छोड़ दिया गया.

    उन्होंने कहा, '' मैं अकेला आदमी हूं और मैं इस चीज़ में विश्वास करता हूं कि हौसले और साहस से अकेला आदमी भी बहुमत ला सकता है. मैंने इसे साबित भी कर दिया है. पिछले पांच साल में क्या-क्या हुआ, इसे मैं अभी सार्वजनिक नहीं करना चहता. इसे मैं भविष्य में बताऊंगा.''

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    शिवकुमार ने कहा, ''मैंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खड़गे को आश्वस्त किया था कि मेरा एकमात्र लक्ष्य कर्नाटक में जीतना है.''

    व्यक्तिगत तौर पर नव निर्वाचित विधायकों से बात करने के बाद कांग्रेस के तीन पर्यवेक्षक भी सोमवार को दिल्ली लौट चुके हैं. बेंगलुरु में एआईसीसी के पर्यवेक्षक भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा, ''हमने सभी विधायकों से बातचीत की है. इसके आधार पर रिपोर्ट भी तैयार कर ली है और कांग्रेस अध्यक्ष को सौंप भी चुके हैं.''

  10. सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार को दिया अल्टीमेटम

    सचिन पायलट

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    कर्नाटक में भले कांग्रेस जीत गई है और इस जीत से पार्टी का हौसला बढ़ा है लेकिन राजस्थान की मुश्किलें ख़त्म होती नहीं दिख रही हैं.

    राजस्थान में भी इसी साल दिसंबर महीने में चुनाव है. पार्टी और प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से नाराज़ राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सोमवार को कहा कि अगर उनकी मांग मई महीने के आख़िर तक नहीं मानी गई तो राज्य भर में ज़ोरदार आंदोलन शुरू करेंगे.

    सचिन पायलट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग को भंग कर फिर से बनाने की मांग की है. पायलट ने कहा कि जिन्हें पेपर लीक होने के कारण नुक़सान हुआ है, उन्हें मुआवजा दिया जाए. पायलट ने पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार पर कथित भ्रष्टाचार के मामलों की उच्चस्तरीय जाँच की भी मांग की है.

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    सचिन पायलट ने कहा, ''जयपुर में आज हमारी जनसंघर्ष यात्रा समाप्त हो रही है. इस महीने के आख़िर में ये तीनों मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेश भर में आंदोलन करूंगा. अब तक मैंने गांधीवादी तरीक़े से अनशन किया है लेकिन मांगें नहीं मानी गईं तो हर शहर और गली में आंदोलन छेड़ूंगा. हमारी ताक़त जनता है और जनता के लिए लड़ना ही हमारा मक़सद है.''

    सचिन पायलट जब यह बात कह रहे थे तो काफ़ी आक्रामक मुद्रा में थे. आम तौर पर सचिन पायलट कूल दिखते हैं लेकिन सोमवार को आक्रामक तेवर में थे. आंदोलन छेड़ने की घोषणा के बाद आम लोगों ने ताली बजाकर समर्थन किया.

  11. भारत में क्रिकेट वर्ल्ड कप खेलने पर पाकिस्तान का बड़ा बयान

    नजम सेठी

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    पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की मैनेजमेंट कमिटी के प्रमुख नजम सेठी ने कहा है कि इस बात की 'बेहुत संभावना' है कि अगर पाकिस्तान से एशिया कप की मेज़बानी के अधिकार लिए जाते हैं तो वो वर्ल्ड कप का बहिष्कार किया जा सकता है.

    दोनों ही देशों में क्रिकेट बेहद लोकप्रिय है लेकिन तनाव की वजह से लंबे समय से भारत-पाकिस्तान एक-दूसरे की सरजमीं पर जाकर मैच नहीं खेले हैं. दोनों देशों के बीच दूसरे देशों में ही मैच हुए हैं.

    द बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल फ़ोर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) के सेक्रेटरी जय शाह यह कह चुके हैं कि 2023 में एशिया कप पाकिस्तान के बदले किसी तटस्थ जगह पर होगा. यानी किसी तीसरे देश में होगा.

    भारत ने सुरक्षा कारणों से वहां जाने से इनकार कर दिया था. इसके बाद पीसीबी ने पेशकश की थी कि वो अपने मैच 'हाइब्रिड मॉडल' के तहत संयुक्त अरब अमीरात खेल सकते हैं.

    जय शाह

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    इस पर बीसीसीआई की प्रतिक्रिया नहीं आई है. सेठी ने कहा कि भारत पूरे आयोजन को ही पाकिस्तान से बाहर करना चाहता है. उन्होंने कहा कि इसका गंभीर असर भारत में इस साल होने वाले वर्ल्ड कप पर और पाकिस्तान में होने वाली चैंपियन्स ट्रॉफ़ी पर पड़ सकता है.

    वहीं, श्रीलंका और बांग्लादेश ने गर्मी और अन्य कारणों से संयुक्त अरब अमीरात में खेलने से इनकार किया है.

    इसकी वजह से एशियन क्रिकेट काउंसिल पूरे टूर्नामेंट को पाकिस्तान से बाहर ले जाने पर विचार कर सकता है. सेठी ने इस पर कहा है कि यह स्वीकार्य नहीं है और अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान वर्ल्ड कप का बहिष्कार करेगा.

    भारत को हाइब्रिड मॉडल पर सहमत होना चाहिए? इस सवाल पर सेठी कहते हैं कि पाकिस्तान भी अक्टूबर-नवंबर में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए पारस्परिक शर्त रखेगा. उन्होंने कहा, ''भारत में मैच खेलने को लेकर हमारी भी सुरक्षा चिंताएं हैं. इसलिए पाकिस्तान को मैच ढाका, मीरपुर या संयुक्त अरब अमीरात या श्रीलंका में खेलने दें.''

    भारत-पाकिस्तान मैच में प्रशंसक

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    पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष रमीज़ राजा भी यह कह चुके हैं कि अगर भारतीय टीम पाकिस्तान नहीं आई तो पाकिस्तान भारत में होने वाले विश्व कप में हिस्सा नहीं लेगा.

    पिछले साल 19 अक्टूबर को पीसीबी ने बयान जारी किया था और कहा था कि 2023 में एशिया कप केवल इसलिए पाकिस्तान से बाहर शिफ़्ट किया जाएगा कि भारत आने से इनकार कर रहा है, तो पाकिस्तान भी मुँहतोड़ जवाब देगा.

    2018 में एशिया कप भारत में होना था, लेकिन इसका आयोजन यूएई में शिफ़्ट कर दिया गया था. तब भारत और पाकिस्तान में काफ़ी तनाव था.

  12. सीबीआई ने इस न्यूज़ चैनल के कॉमर्शियल हेड को किया गिरफ़्तार

    सीबीआई

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    सीबीआई ने 'इंडिया अहेड न्यूज़' चैनल के कॉमर्शियल हेड और प्रोडक्शन कंट्रोलर को दिल्ली के कथित शराब घोटाला मामले में गिरफ़्तार किया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की ख़बर में बताया गया है कि अरविंद कुमार सिंह को हवाला के ज़रिए एक कंपनी को कथित तौर पर 18 करोड़ रुपये भेजने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. यह कंपनी गोवा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी का प्रचार अभियान संभाल रही थी.

    अधिकारियों ने बताया है कि जांच के दौरान सीबीआई को व्हाट्सऐप चैट्स और हवाला ऑपरेटर्स के रिकॉर्ड से यह जानकारी मिली है. इसमें आरोप लगाया गया कि सिंह ने जून 2021 से जनवरी 2022 के बीच हवाला के ज़रिए चैरियोट मीडिया को कथित तौर पर 17 करोड़ रुपये भेजे थे.

    गोवा में विधानसभा का चुनाव 14 फ़रवरी, 2022 को आयोजित हुआ था. दिल्ली सरकार पर ऐसे आरोप हैं कि वह कुछ ख़ास डीलर्स को फ़ायदा पहुंचाने के लिए 2021-22 की शराब नीति लेकर आई थी और उन डीलर्स ने रिश्वत दिए थे.

    हालांकि दिल्ली सरकार इन आरोपों से इनकार करती है. यह नीति बाद में वापस ले ली गई.

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  13. तालिबान से भिड़े भारत में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत

    भारत में अफ़ग़ानिस्फ़तान के राजदूत फ़रीद मामुन्दज़ई

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    अफ़गानिस्तान की तालिबान सरकार के कादिर शाह को भारत का कार्यकारी राजदूत बनाने के फ़ैसले पर अब भारत में अफ़ग़ानिस्फ़तान के राजदूत फ़रीद मामुन्दज़ई की प्रतिक्रिया आई है.

    फ़रीद 2020 से ही भारत में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत हैं.फ़रीद भारत में तब से राजदूत हैं, तब अफ़ग़ानिस्तान की कमान तालिबान के पास नहीं आई थी.

    उन्होंने दिल्ली में अफ़गानिस्तान दूतावास की तरफ़ से जारी एक बयान को ट्वीट किया है.

    इसमें कहा गया है कि वो एक व्यक्ति के उस दावे को ख़ारिज करते हैं कि तालिबान के इशारे पर उन्हें मिशन का प्रभार मिला है.

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    दूतावास ने कहा है कि वो अफ़ग़ान लोगों के हितों का समर्थन करने और काबुल में तालिबान की सरकार को मान्यता नहीं देने के भारत के फ़ैसले की सराहना करते हैं. भारत वही रुख़ अपनाए हुए है जो दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक देशों के हैं.

    बयान में कहा गया, ''वो व्यक्ति जो तालिबान की तरफ़ से 'कार्यकारी राजदूत' बनाए जाने का दावा कर रहा है, वही ग़लत जानकारियां फैलाने, मिशन के अधिकारियों के ख़िलाफ़ आधारहीन अभियान चलाने का ज़िम्मेदार है. इन आरोपों में मिशन में भ्रष्टाचार के आरोप भी शामिल हैं.''

    बयान में यह भी कहा गया कि वो अफ़गानिस्तान के लोगों को यह जानकारी देना चाहते हैं कि वो उनके हित में भारत में सामान्य तरीक़े से काम करते रहेंगे.

    इससे पहले तालिबान के विदेश मंत्रालय ने एक पत्र जारी कर भारत स्थित अपने दूतावास पर भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप लगाए थे.

    तालिबान के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास पर एक भारतीय कंपनी को लीज़ पर ज़मीन के मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. तालिबान के विदेश मंत्रालय के इस पत्र को अफ़ग़ानिस्तान के टोलो न्यूज़ ने पोस्ट किया था.

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    भारत के अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, फ़रीद मामुन्दज़ई ने जवाब में एक पत्र जारी कर कहा है कि भ्रष्टाचार के आरोप एकतरफ़ा, पक्षपाती और झूठ हैं. फ़रीद ने अपने पत्र में कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में लोकतांत्रिक व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक देश के बाहर भी मुश्किलें झेल रहे हैं. फ़रीद मामुन्दज़ई 2020 से ही भारत में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत हैं.

    पिछले महीने ही तालिबान के विदेश मंत्रालय ने फ़रीद मामुन्दज़ई को वापस काबुल बुलाया था. पिछले महीने 25 अप्रैल को तालिबान के विदेश मंत्रालय ने फ़रीद को पत्र भेजकर वापस काबुल आने के लिए कहा था.

    उसी दिन तालिबान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्ताक़ी ने कहा था कि ट्रेड काउंसलर क़ादिर शाह दिल्ली स्थित अफ़ग़ानिस्तान के दूतावास को देखेंगे. तालिबान ने यही काम अप्रैल 2022 में चीन में किया था. तब तालिबान ने बीजिंग स्थित अपने दूतावास से तत्कालीन राजदूत को वापस बुला लिया था.

    अगर भारत तालिबान के राजदूत बदलने के फ़ैसले को स्वीकार करता है तो इसे तालिबान के साथ भारत के संबंध औपचारिक होने के रूप में एक और क़दम आगे बढ़ने की तरह देखा जाएगा. भारत तालिबान पर अतीत में कई आतंकवादी हमले का आरोप लगा चुका है. इसमें 2008 में काबुल में भारतीय दूतावास पर हमले का भी मामला है.

  14. कर्नाटक में ओवैसी की पार्टी का क्या हाल रहा? जानिए

    लोकसभा सांसद असदउद्दीन ओवैसी

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    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदउद्दीन ओवैसी कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कुछ भी नहीं कर पाए. कर्नाटक में 13 फ़ीसदी मुसलमान हैं लेकिन ओवैसी की पार्टी प्रदेश में कोई असर नहीं डाल पाई.

    कर्नाटक में एआईएमआईएम ने 2021 में शहरी निकाय में कुछ सीटें जीतकर दस्तक दी थी.

    कर्नाटक विधानसभा चुनाव में ओवैसी ने दो उम्मीदवार उतारे थे लेकिन दोनों जगह हार मिली. ओवैसी का पूरा चुनावी कैंपेन विवादित मुद्दों के ईर्द-गिर्द था. चुनाव अभियान में उन्होंने हिजाब बैन, टीपू सुल्तान और मुसलमानों के चार फ़ीसदी आरक्षण हटाने को ज़ोर-शोर से उठाया गया था.

    एआईएमआईएम ने पहले 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फ़ैसला किया था लेकिन आख़िर में दुर्गप्पा कशप्पा बिजवाड़ और अल्लाहबख़्श बीजापुर को क्रमशः हुबली-धारवाड़ ईस्ट और बसावना बागेवाड़ी से उतारा था.

    बिजवाड़ को महज़ 5,644 वोट मिले और बीजापुर को केवल 1,475 वोट. ओवैसी ने कई रैलियां भी की थीं. ऐसा लग रहा था कि ओवैसी की वजह से ही मुस्लिम वोट बँट ना जाए. एआईएमआईएम का वोट शेयर महज़ 0.02 प्रतिशत रहा.

    ओवैसी ने कर्नाटक के जनादेश को स्वीकार करते हुए समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा था, ''कर्नाटक के लोगों ने स्पष्ट जनादेश दिया है. हमें यहाँ कामयाबी नहीं मिली. लेकिन हम अपनी पार्टी को इन राज्यों में मज़बूत करना जारी रखेंगे.''

    कांग्रेस ने इस बार 15 मुस्लिमों को टिकट दिया था और नौ को जीत मिली है. वहीं जनता दल सेक्युलर ने 23 मुस्लिमों को टिकट दिया था लेकिन किसी को जीत नहीं मिली.

  15. कर्नाटक की कमान किसे मिलेगी पर माथापच्ची के बीच शिवकुमार क्या बोले

    सिद्धारमैया, मल्लिकार्जुन खड़गे और डी के शिवकुमार

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    कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद शपथ ग्रहण समारोह की तारीख़ तय की जा चुकी है लेकिन मुख्यमंत्री का नाम अब तक तय नहीं हो पाया है. 18 मई को शपथ ग्रहण समारोह है.

    रविवार को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में यह निर्णय नहीं हो पाया था और सर्वसम्मति से इसका निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर छोड़ दिया गया.

    व्यक्तिगत तौर पर नव निर्वाचित विधायकों से बात करने के बाद कांग्रेस के तीन पर्यवेक्षक भी सोमवार को दिल्ली लौट चुके हैं.

    बेंगलुरु में एआईसीसी के पर्यवेक्षक भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा, ''हमने सभी विधायकों से बातचीत की है. इसके आधार पर रिपोर्ट भी तैयार कर ली है और कांग्रेस अध्यक्ष को सौंप भी चुके हैं.''

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    इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, कांग्रेस पर्यवेक्षक सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो सिद्धारमैया और डी के शिवकुमार को विचार-विमर्श के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा.

    सिद्धारमैया दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं जबकि शिवकुमार का कहना है कि उन्हें अब तक नेतृत्व की तरफ़ कोई कॉल नहीं आई है. उन्होंने कहा, ''अब तक किसी का फ़ोन नहीं आया है. देखते हैं...''

    सिद्धारमैया एक विशेष विमान से दोपहर एक बजे दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं और क़रीब चार बजे तक पहुंच जाएंगे. दिल्ली में वो एआईसीसी नेताओं से मिलेंगे.

    सिद्धारमैया दिल्ली के लिए रवाना

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    केपीसीसी अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर कहा, ''हमने सर्वसम्मति से इसे पार्टी हाईकमान पर यह फ़ैसला छोड़ा है. मैंने अभी दिल्ली जाने का फ़ैसला नहीं किया है क्योंकि अभी राज्य भर से लोग मुझसे मिलने आ रहे हैं. मुझे जो काम करना था मैं वो कर चुका हूं.''

    उन्होंने कहा कि आज उनका जन्मदिन है तो उन्हें कुछ अनुष्ठान भी करने हैं.

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    कर्नाटक में मुख्यमंत्री बनने की रेस में केपीसीसी अध्यक्ष डी के शिवकुमार और मौजूदा सीएलपी नेता सिद्धारमैया हैं.

    दावेदारी को लेकर दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच कर्नाटक में पोस्टर वॉर भी शुरू हो चुका है. सिद्धारमैया एक बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, वहीं डी के शिवकुमार की ये इच्छा लंबे समय से अधूरी है, जिसे वे इस बार पूरा कर लेना चाहते हैं.

  16. इमरान ख़ान ने अपनी ही सेना को क्यों याद दिलाया, 1971 में पाकिस्तान का टूटना

    इमरान ख़ान

    इमेज स्रोत, EPA/REX/SHUTTERSTOCK

    पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शहबाज़ शरीफ़ सरकार और सेना पर फिर हमला किया है. उन्होंने 1971 की लड़ाई में भारत के हाथों पाकिस्तान की हार की याद दिलाई है.

    अल कादिर ट्रस्ट मामले में ज़मानत मिलने के बाद शनिवार को देश के नाम अपने संबोधन वाले वीडियो में इमरान कहते दिख रहे हैं, ''पाकिस्तान में लोगों को डरा-धमका कर कंट्रोल करने की कोशिश हो रही है.मीडिया को कंट्रोल करने की कोशिश हो रही है. यहां वे लोगों को डरा-धमका कर, डंडे मार कर कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं.''

    ''इनको पता ही नहीं ईस्ट पाकिस्तान में क्या हुआ था. मेरी ज़िंदगी में हुआ ईस्ट पाकिस्तान. मार्च 1971 में अंडर-19 टीम के ख़िलाफ़ मैं ईस्ट पाकिस्तान में मैच खेलने गया था. हमें तो पता ही नहीं था कि कितनी नफ़रत थी पाकिस्तान के ख़िलाफ़. तब भी मीडिया को कंट्रोल किया गया था. अब भी यही हो रहा है.''

    पाकिस्तान

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे लोग

    इमरान ख़ान ने कहा, ''लेकिन फ़र्क आज ये है कि आज सोशल मीडिया है. सोशल मीडिया को भी उन्होंने कंट्रोल कर दिया. फ़ेसबुक, ट्विटर सब बंद कर दिया. इससे कितना नुकसान हुआ. इन्होंने इमरान ख़ान को पकड़ना था और ये मुल्क को नहीं दिखाना था. इसलिए सोशल मीडिया बंद कर दिया गया.''

    पाकिस्तान

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    पाकिस्तान के पूर्व पीएम ने कहा, ''मीडिया कंट्रोल की वजह से ही ईस्ट पाकिस्तान में जो हुआ सबको पता है. हमें इंग्लैंड में पता चला था. मैं उस समय वहां था. वहां हमें पता चला कि क्या हुआ.''

    इमरान ख़ान ने कहा,''आज हमें समझना चाहिए कि ईस्ट पाकिस्तान के लोगों से इतना बड़ा जुल्म हुआ था. वहां जो पार्टी बहुमत में आई उसे सत्ता में नहीं आने दिया. जीतने वाले पार्टी के शख्स को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया गया. मुल्क गंवा दिया. 90 हजार फौजियों को क़ैदी बनवा दिया.''

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    इमरान ने कहा,''पाकिस्तान में कुछ लोग बंद कमरे में फ़ैसले ले लेते हैं. उन्हें पता नहीं होता कि दुनिया कैसे चलती है. ये भी पता नहीं करने देते कि उन फ़ैसलों का क्या नुकसान होता है.''

  17. ब्रेकिंग न्यूज़, पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन, पीडीएम ने रेड ज़ोन तोड़ा

    पाकिस्तान

    पाकिस्तान का सियासी संकट ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली तो सत्ताधारी पीडीएम यानी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट को यह रास नहीं आया.

    पीडीएम के कार्यकर्ता इस्लामाबाद में सुप्रीम कोर्ट के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. इस विरोध प्रदर्शन में जमिअत उलेमा-ए-इस्लाम-फज़्ल के कार्यकर्ता हैं. जेयूआई-एफ़ के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सुप्रीम कोर्ट के बाहर पहुँच गए हैं. पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद में सेक्शन 144 लागू होने के बावजूद विरोध-प्रदर्शन हो रहा है.

    पीडीएम 13 सियासी दलों का गठबंधन है और मौलाना फ़ज़्ल-उर रहमान इसके प्रमुख हैं. रहमान ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस उमर अता बंदिआल के ख़िलाफ़ धरने पर बैठेंगे.

    जस्टिस बंदिआल ने इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करने को अवैध बताया था और रिहा करने का आदेश दिया था. इस्लामाबाद पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने रेड ज़ोन का उल्लंघन किया है लेकिन हालात काबू में हैं.

    पाकिस्तान की जियो न्यूज़ के अनुसार जेयूआई-एफ़ और पुलिस की बातचीत नाकाम रही है. जेयूआई-एफ़ के कार्यकर्ता सुप्रीम कोर्ट के परिसर में जबरन घुसते दिख रहे हैं. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी ने पुलिस की आलोचना की है कि वह केवल 144 को सख़्ती से लागू पीटीआई के विरोध में करवाती है जबकि सत्ताधारी पीडीएम के कार्यकर्ताओं को लेकर नरमी बरतती है.

    प्रधानमंत्री शहबाज़ सरकार में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के ख़िलाफ़ अनुच्छेद 209 के तहत संवैधानिक अवहेलना के मामले की जांच के लिए एक संसदों की एक समिति बनाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि संसद ही सर्वोच्च है, इसे स्थापित करने की ज़रूरत है.

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  18. तालिबान का दिल्ली को लेकर यह फ़ैसला, क्या स्वीकार करेगा भारत?

    फ़रीद मामुन्दज़ई

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    इमेज कैप्शन, फ़रीद मामुन्दज़ई

    अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार ने भारत से अपने राजदूत फ़रीद मामुन्दज़ई को वापस बुलाने का फ़ैसला किया है और वर्तमान ट्रेड काउंसलर क़ादिर शाह को भारत का कार्यकारी राजदूत बनाया है.

    तालिबान के विदेश मंत्रालय ने एक पत्र जारी कर भारत स्थित अपने दूतावास पर भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप लगाए हैं. तालिबान के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास पर एक भारतीय कंपनी को लीज़ पर ज़मीन के मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. तालिबान के विदेश मंत्रालय के इस पत्र को अफ़ग़ानिस्तान के टोलो न्यूज़ ने पोस्ट किया था.

    भारत के अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, फ़रीद मामुन्दज़ई ने जवाब में एक पत्र जारी कर कहा है कि भ्रष्टाचार के आरोप एकतरफ़ा, पक्षपाती और झूठ हैं. फ़रीद ने अपने पत्र में कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में लोकतांत्रिक व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक देश के बाहर भी मुश्किलें झेल रहे हैं. फ़रीद मामुन्दज़ई 2020 से ही भारत में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत हैं.

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    पिछले महीने ही तालिबान के विदेश मंत्रालय ने फ़रीद मामुन्दज़ई को वापस काबुल बुलाया था. पिछले महीने 25 अप्रैल को तालिबान के विदेश मंत्रालय ने फ़रीद को पत्र भेजकर वापस काबुल आने के लिए कहा था.

    उसी दिन तालिबान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्ताक़ी ने कहा था कि ट्रेड काउंसलर क़ादिर शाह दिल्ली स्थित अफ़ग़ानिस्तान के दूतावास को देखेंगे. तालिबान ने यही काम अप्रैल 2022 में चीन में किया था. तब तालिबान ने बीजिंग स्थित अपने दूतावास से तत्कालीन राजदूत को वापस बुला लिया था.

    द हिन्दू ने क़ादिर शाह से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि वह किसी सियासी पार्टी या समूह से कोई ताल्लुक नहीं रखते हैं. उन्होंने कहा कि तालिबान के विदेश मंत्रालय ने उन्हें दिल्ली स्थित अफ़ग़ानिस्तान दूतावास में भ्रष्टाचार के मामलों को देखने की ज़िम्मेदारी दी है. क़ादिर शाह ने कहा कि फ़रीद की नियुक्त तालिबान के आने से पहले हुई थी.

    फ़रीद मामुन्दज़ई

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    भारत के विदेश मंत्रालय ने तालिबान के फ़ैसले पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है. भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने नाम नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर द हिन्दू से कहा कि राजदूत बदलने के लिए कोई औपचारिक नोटिस नहीं मिला है. साथ ही यह भी कहा कि यह तालिबान का आंतरिक मामला है. भारत समेत दुनिया के किसी भी देश ने तालिबान को मान्यता नहीं दी है.

    लेकिन भारत सरकार ने पिछले साल जब टेक्निकल मिशन स्थापित करने का फ़ैसला किया था तो इसे बड़े यूटर्न के तौर पर देखा गया था. भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने भी काबुल जाकर तालिबान के मंत्रियों से मुलाक़ात की थी. लेकिन भारत ट्रेड और काउंसलर के मामले में फ़रीद मामुन्दज़ई से ही डील कर रहा था.

    अगर भारत तालिबान के राजदूत बदलने के फ़ैसले को स्वीकार करता है तो इसे तालिबान के साथ भारत के संबंध औपचारिक होने के रूप में एक और क़दम आगे बढ़ने की तरह देखा जाएगा. भारत तालिबान पर अतीत में कई आतंकवादी हमले का आरोप लगा चुका है. इसमें 2008 में काबुल में भारतीय दूतावास पर हमले का भी मामला है.

  19. तुर्की के राष्ट्रपति चुनाव में रन-ऑफ की स्थिति, अब क्या होगा आगे?

    तुर्की

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    इमेज कैप्शन, कमाल कलचदारलू (बाएं) और राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन

    तुर्की में राष्ट्रपति पद के लिए दोबारा चुनाव हो सकते हैं. मौजूदा राष्ट्रपति रेचेप तैयप्प अर्दोआन और उनके प्रतिद्वंद्वी दोनों ने दावा किया है कि जीत उनकी मुट्ठी में है.

    इस बीच, पिछले 20 साल से सत्ता में बैठे अर्दोआन अपने पार्टी मुख्यालय की बालकनी से लोगों का अभिवादन करते नजर आए. उन्होंने दावा किया कि वो एक बार फिर राष्ट्रपति चुनाव जीतेंगे.

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    तुर्की में चुनावी रन-ऑफ 28 मई को हो सकता है. यानी इस दिन राष्ट्रपति चुनाव के लिए दोबारा वोट डाले जा सकते हैं.

    अर्दोआन के प्रतिद्वंद्वी कमाल कलचदारलू के लिए भी चुनाव नतीजे अनुकूल रहे हैं और उन्होंने भी लगभग अर्दोआन के बराबर ही वोट हासिल करने का दावा किया है. लेकिन अभी पूरे नतीजे नहीं आए हैं.

    कुछ देर पहले देश की सर्वोच्च चुनाव परिषद ने कहा था कि राष्ट्रपति चुनाव में अर्दोआन को 49.49 फीसदी वोट मिले हैं. उनके प्रतिद्वंद्वी कमाल कलचदारलू 44.79 फीसदी वोटों के साथ दूसरे नंबर पर हैं. तब तक राष्ट्रपति चुनाव में डाले गए वोटों में से 91.93 फीसदी गिने जा चुके थे.

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    सोमवार को कलचदारलू अंकारा में अपने पार्टी मुख्यालय के स्टेज पर खड़े हुए. हालांकि अपने समर्थकों से घिरे कलचदारलू में आत्मविश्वास की थोड़ी कमी दिख रही थी. उन्होंने कहा, '' अगर दूसरे दौर का मतदान हुआ तो हम निश्चित तौर पर जीतेंगे.''

    क्या है रन-ऑफ?

    राष्ट्रपति पद के लिए डाले गए वोटों में से 97.95 फीसदी की गिनती के बाद न तो अर्दोआन और न ही कमाल कलचदारलू 50 फीसदी वोट हासिल कर पाए थे.

    अर्दोआन को 49.49 फीसदी वोट मिले थे और कमाल को 44.79 फीसदी. इसका मतलब ये की कोई भी जीत का दावा नहीं कर सकता. लिहाजा अब दोबारा वोटिंग होगी.

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    इमेज कैप्शन, तीसरे उम्मीदवार सिनान ओगान

    कमाल ने इसका स्वागत किया है और कहा है कि दूसरे दौर में वो जीतेंगे. तीसरे उम्मीदवार सिनान ओगान को 5.28 फीसदी वोट मिले हैं.

    रन-ऑफ में वो किंगमेकर बन कर उभर सकते हैं. तुर्की में ये ऐसा पहली बार हो रहा है जब खेमों में बंटी विपक्षी पार्टियों ने मिल कर कमाल को अपना उम्मीदवार बनाया है.

  20. अमिताभ बच्चन बाइक सवार से लिफ़्ट लेकर काम पर पहुंचे, ब्लॉग पर लिखा - शुक्रिया!

    अमिताभ बच्चन

    इमेज स्रोत, Instagram- amitabhbachchan

    अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो शूट पर पहुंचने के लिए एक बाइक वाले से लिफ़्ट लेते दिख रहे हैं.

    उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस वाकये का जिक्र करते हुए लिखा है- राइड के लिए धन्यवाद दोस्त.

    ''आपको नहीं जानता लेकिन आपने मुझे वक्त पर वर्क लोकेशन पर पहुंचने में मदद की. बिल्कुल तेजी से कभी न ठीक होने वाले ट्रैफिक जाम से बचाते हुए. कैप, शॉर्ट्स और पीली टी-शर्ट के मालिक को धन्यवाद.''

    बाद में उन्होंने ब्लॉग में लिखा,'' बाइक की सवारी और इसे चलाने का उत्साह कभी दूर नहीं होता .. फिर युवावस्था के शुरुआती सालों के ख्याल दिमाग में आते हैं.... वो कॉलेज के दिन और पिकनिक और वो मौके जब परिवार की कार को इस्तेमाल करने की इजाजत मिल सकती थी.''

    ''वे बेफ्रिकी के दिन. मजेदार वक्त. लेकिन अब सावधानी और सतर्कता बरतनी पड़ती है. आखिर ज़िंदगी नियमों में बंध गई है. ये जिंदगी का हिस्सा है.''

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    उन्होंने लिखा है, ''कई बार लगता है कि गाड़ी पर बैठा जाए और इसे चलाते हुए काम पर पहुंच जाए.लेकिन जिस तरह से लोग बाइक ड्राइव करते हैं वो चिंता पैदा कर देती है. ऐसे लोग नियमों को तोड़ते चलते हैं.''

    '' पता नहीं कहां से ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाता है जबकि ड्राइविंग के बुनियादी कौशल पर सवाल किए जा सकते हैं..... कोई हेलमेट नहीं, कोई रेगुलेशन नहीं, ट्रैफिक सिग्नल को फॉलो न करते हुए चलते हैं.''

    ''ऐसे में निराशा गुस्से में बदल जाती है और अक्सर कार से बाहर निकलने और उन्हें हिदायत देने का मन करता है.''