शहबाज़ शरीफ़ ने कहा पड़ोसी देश ख़ुश कि जो 73 साल में नहीं हुआ वो पाकिस्तान में अब हो रहा है

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद कहा कि देश के हालात बेहद गंभीर हैं जिस पर विचार करने की ज़रूरत है.
इमरान ख़ान को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर उन्होंने कहा कि अदालत दोहरे मानदंड अपना रही है और इमरान ख़ान को बचाने की कोशिश कर रही है.
शहबाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के पड़ोसी मुल्क का नाम तो नहीं लिया लेकिन कहा, "वो मुल्क आज खुश था कि पाकिस्तान में जो हो रहा है वो, वो 73 सालों में नहीं कर सका."
"यहां पर क़ानून का पालन होगा और सभी लोग उसका पालन करेंगे और जो भी नतीजा होगा हम उसे झेलेंगे."
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शहबाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान तहरीक़-ए- इंसाफ़ के प्रमुख इमरान ख़ान को आड़े हाथों लिया और कहा कि उनकी सरकार अमेरिका के साथ देश के रिश्ते बेहतर करने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन इमरान ख़ान ने अमेरिका के साथ रिश्ते ख़राब किए थे.
उन्होंने कहा, "इमरान ख़ान चाहते थे देश के साथ आईएमएफ़ की डील ख़त्म हो जाए और देश डिफॉल्ट कर जाए. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के हालात श्रीलंका जैसे होने जा रहे हैं. वो दिल में बददुआ कर रहे थे कि पाकिस्तान के आर्थिक हालात ख़राब हो जाएं."
पार्टी नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद एक प्रेस वार्ता में शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि बदला लेने के इरादे से इमरान ख़ान ने अपने विरोधियों को जेल भेजा.
उन्होंने सवाल किया, "क्या उस वक्त किसी अदालत ने इसका संज्ञान लिया था? क्या किसी ने कोई कार्रवाई की थी."
उन्होंने कहा, "अभी नैब ने गबन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उनके ख़िलाफ़ मामले बनाए हैं लेकिन अदालत अभी भी उनका बचाव करने की कोशिश कर रही है. इसकी कहीं और मिसाल नहीं मिलती."
उनके ख़िलाफ़ मामलों में कोर्ट से स्टे ऑर्डर दिलवाए गए, उनके मामले की जांच भी सही तरीके से नहीं की गई और कुछ मामलों में तो उन्हें क्लीन चिट दे दी गई.
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उनकी पार्टी की योजना थी कि वो दस साल सत्ता में रहें और पाकिस्तान पर शासन करें. उन्होंने 9 मई के दिन को पाकिस्तान के इतिहास का काला दिन बताया और कहा, "कोर्ट में जब इमरान ख़ान पहुंचे तो जज ने उनसे कहा-'आपसे मिलकर अच्छा लगा'. इसके बाद उनकी गिरफ्तारी को ग़ैरक़ानूनी करार दिया गया. क्या नवाज़ शरीफ़ या किसी और के मामले में ऐसा हुआ है?"
शहबाज़ शरीफ़ ने कहा, "अदालत दोहरे मानदंड अपना रही है जिसने इंसाफ़ का जनाज़ा निकाल दिया है."
"लाखों मामले ऐसे हैं जहां सालों तक लोगों को ज़मानत नहीं मिलती, लेकिन उनके मामले अदालत में नहीं लगते. लेकिन यहां एक दिन में इमरान ख़ान को ज़मानत दे दी गई. ये बेहद गंभीर मसला है."
"मैं कहना चाहता हूं कि जो हिंसा हुई और सरकार पर जो हमले हुए उसके लिए इमरान ख़ान ज़िम्मेदार था. उन्होंने अपने समर्थकों को इसके लिए उकसाया था. देश के हालात बेहद गंभीर हैं और हमें इस बारे में विचार करने की ज़रूरत है. मैं समझता हूं कि इससे पहले इस तरह का दिल दुखाने वाला मंज़र भी नहीं देखा था."
उन्होंने कहा, "अगर इमरान ख़ान बेगुनाह हैं तो अदालत के सामने पेश हों और अपनी बेगुनाही साबित करें."















