उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बहुचर्चित कृष्णानंद राय हत्याकांड और व्यापारी नंदकिशोर रूंगटा अपहरण केस में गैंगस्टर ऐक्ट के तहत मुख़्तार अंसारी को 10 साल की सज़ा और 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
सरकारी वकील नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि "मुख़्तार अंसारी और अफ़ज़ाल अंसारी के विरुद्ध जो गैंगस्टर ऐक्ट के तहत मुक़दमा था उसमें ये फैसला आया है."
ग़ाज़ीपुर के मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के बसनिया चट्टी में नवंबर 2005 को वहां के बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या कर दी गई थी.
कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने बीबीसी से बताया कि "इस मामले में 2007 में गैंगस्टर ऐक्ट के तहत अफ़ज़ाल अंसारी, मुख़्तार अंसारी और बहनोई एज़ाजुल हक़ पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था."
इस पूरे मामले के ट्रायल और सज़ा को लेकर पीयूष राय कहते हैं कि "पहले की जो भी सरकारें रही हैं, उनके ना इरादे नेक रहे हैं और ना ही उनका मक़सद सही रहा है. उनके लिए अपराधियों को पालना पोसना एक अपना व्यवसाय था और जब से ये बीजेपी की सरकार आई है उसमे कम से कम इतना रहा है कि गवाहों को बिना भय अपनी गवाही करने का मौका मिला है."
"किसी भी अपराधी को संरक्षण नहीं मिला है जीरो टॉलरेंस की नीति जो भी रही है सरकार की उसको ग्राउंड पर लागू भी किया गया है जिसके चलते यही हो रहा है कि हम अपनी गवाही ठीक से कर सके."
पीयूष राय कहते हैं, "उनके पिता जी हत्या का जो मुख्य मुक़दमा है जिसमें निचली अदालत से मुख़्तार अंसारी को बरी कर दिया गया था उस मुक़दमे में सीबीआई द्वारा हाई कोर्ट में दाखिल किया जा चुका है उसमें भी जल्दी सुनवाई होने वाली है."
पीयूष राय कहते हैं कि न्यायपालिका एक स्वतंत्र संस्था है और इसपर हमें भरोसा है. जब हाई कोर्ट में सुनवाई होगी तो हमें इस मामले में भी न्याय मिलेगा.
1985 से अंसारी परिवार के पास रही गाज़ीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट 17 साल बाद 2002 के चुनाव में उनसे बीजेपी के कृष्णानंद राय ने छीन ली. लेकिन वे विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके, तीन साल बाद उनकी हत्या कर दी गई.
वह एक कार्यक्रम का उद्घाटन करके लौट रहे थे कि तभी उनकी बुलेट प्रूफ़ टाटा सूमो गाड़ी को चारों तरफ़ से घेर कर अंधाधुंध फ़ायरिंग की गई. हमले के लिए स्पॉट ऐसी सड़क को चुना गया था जहां से गाड़ी दाएँ-बाएँ मोड़ने का कोई स्कोप नहीं था.
कृष्णानंद के साथ कुल 6 और लोग गाड़ी में थे. एके-47 से तक़रीबन 500 गोलियां चलाई गईं, सभी सातों लोग मारे गए.
जानकारों के अनुसार ग़ाज़ीपुर की अपनी पुरानी पारिवारिक सीट हार जाने से मुख़्तार अंसारी नाराज़ थे. कृष्णानंद हत्याकांड के वक़्त में जेल में बंद होने के बावजूद मुख़्तार अंसारी को इस हत्याकांड में नामज़द किया गया.