राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने बुधवार को राइट टू हेल्थ बिल को मंजूरी दी है.
विधानसभा में 21 मार्च को राइट टू हेल्थ बिल पास हुआ था.
बिल को लेकर राज्य में सोलह दिन तक निजी अस्पतालों और डॉक्टर्स ने हड़ताल की थी.
डॉक्टरों का कहना था कि ये बिल निजी अस्पतालों को खत्म करने जैसा है.
डॉक्टर इस बिल को वापस लेने की मांग कर रहे थे. जबकि, सरकार ने बिल वापस लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया था.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा और मुख्य सचिव ऊषा शर्मा के सात डॉक्टरों की मीटिंग भी हुई.
आखिरकार डॉक्टरों की सरकार से सहमति बन गई थी.
इन मांगों पर बनी थी सहमति
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राइट टू हेल्थ बिल के विरोध के दौरान डॉक्टर्स पर दर्ज पुलिस केस वापस लिए जाएंगे.
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अस्पतालों को फायर एनओसी हर साल लेनी होती थी लेकिन अब हर पांच साल में फायर एनओसी लेनी होगी.
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नियमों में बदलाव करना होगा तो उस दौरान आईएमए के दो डॉक्टर्स शामिल होंगे.
21 मार्च को विधानसभा से पास होने के बाद बिल राज्यपाल को भेजा गया था.
राज्यपाल कलराज मिश्र ने राजस्थान विधानसभा में पास हुए चार विधेयकों पर अनुमति प्रदान की है.
राजस्थान विधानसभा से पास राइट टू हेल्थ के साथ ही राजस्थान नगर पालिका संशोधन विधेयक 2023, बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय जयपुर विधेयक 2023 और राजस्थान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विधेयक 2023 को भी अनुमति प्रदान की है.
राजस्थान देश का पहला राज्य है जहां राइट टू हेल्थ बिल लाया गया है.