रामनवमी पर हिंसा को लेकर ओआईसी के बयान का भारत ने दिया जवाब, बताया- विरोधी एजेंडा

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भारत ने इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन की ओर से रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा की आलोचना पर पलटवार किया है.
ओआईसी ने बिहार के नालंदा ज़िले में हुई हिंसा का हवाला देते हुए अपने बयान में कहा था कि भारत के कई राज्यों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा हुई है और अतिवादी हिन्दुओं की भीड़ ने मदरसों के अलावा लाइब्रेरी को आग के हवाले कर दिया.

इससे जुड़े सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा है, "हम भारत के संबंध में ओआईसी की ओर से जारी बयान की निंदा करते हैं. ये उनके सांप्रदायिक सोच और भारत-विरोधी एजेंडे का एक और उदाहरण है. भारत विरोधी ताकतों के दबाव में आकर ओआईसी अपनी ही छवि खराब करता है."
ओआईसी का बयान
ओआईसी ने कहा था, ''ओआईसी महासचिव इन उकसाने वाली हिंसक घटनाओं की निंदा करते हैं. ये हिंसक घटानाएं बढ़ते इस्लामोफ़ोबिया के ज्वलंत उदाहरण हैं. भारत में मुसलमानों को व्यवस्थित रूप से निशाने पर लिया जा रहा है. ओआईसी भारत से इस हिंसा में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग करता है. भारत मुसलमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनके अधिकार के साथ मर्यादा की रक्षा करे.''
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ओआईसी कश्मीर के मामले में भी भारत पर सवाल उठाता रहता है.
ओआईसी ने इससे पहले हरिद्वार में धर्म संसद, कर्नाटक में हिजाब विवाद और मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित नफ़रत को लेकर चिंता जताते हुए भी बयान जारी किया था. नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर भी ओआईसी ने भारत पर सवाल उठाया था.
भारत हर बार ओआईसी के बयानों को ख़ारिज करता रहा है.









