ब्रिटेन की गृह मंत्री ने ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों के लिए की ऐसी टिप्पणी

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ब्रिटेन की गृहमंत्री सुलेला ब्रेवरमैन ने एक हालिया इंटरव्यू में कहा है कि ब्रिटिश पाकिस्तानी मर्दों का गैंग गोरी लड़कियां, जिन्हें गुमराह करना आसान होता है, उनकी परिस्थिति का फ़ायदा उठाकर उन्हें निशाना बनाते हैं.
स्काई न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में ब्रेवरमैन ने कहा, “जो हम देख रहे हैं, ये एक प्रैक्टिस है कि गोरी अंग्रेज़ लड़कियां जो किसी तरह की चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में होती हैं, जिन्हें गुमराह करना आसान है, उन्हें ब्रिटिश-पाकिस्तानी मर्दों के गैंग ड्रग्स देते हैं, उनका रेप करते हैं और फ़ायदा उठाते हैं. हमने देखा है कि राज्य की एजेंसियां- पुलिस और समाजिक कार्यकर्ता भी ऐसे मामलों में पीड़ितों से नज़र फेर लेते हैं.”
“ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें नस्लभेदी कहलाए जाने का डर होता है और वो राजनीतिक विवाद पैदा करने से बचते हैं. इसका नतीजा ये होता है कि हज़ारों बच्चों का बचपन छिन जाता है. कई ऐसे मुजरिम हैं जो एक के बाद एक ऐसे लोगों को प्रताड़ित करते रहते हैं. ये प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि ऐसे लोगों को बिना डर और पक्षपात के ट्रैक करे और लोगों के न्याय दिलाए.”
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बीते साल अक्टूबर में उन्होंने ब्रिटेन में आने वाले भारतीयों की संख्या पर भी बयान देते हुए कहा था कि भारत के साथ व्यापार समझौते की वजह से ब्रिटेन में आने वाले भारतीयों की संख्या बढ़ सकती है और इससे ब्रेग्ज़िट के मक़सद को भी नुक़सान पहुँच सकता है.
उस समय एक इंटरव्यू में ही उन्होंने कहा था, “ब्रिटेन में वीज़ा समाप्त होने के बाद सबसे ज़्यादा भारतीय प्रवासी ही रहते हैं. छात्रों और कारोबारियों के लिए कुछ नरमी बरती जा सकती है लेकिन इसके नकरात्मक असर भी हैं”
विवादित इमिग्रेशन बिल
इसके अलावा इंग्लिश चैनल को पार कर ब्रिटेन में घुसने वाली छोटी नावों को रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार नया इमिग्रेशन बिल ला रही है.
ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने हाल ही में कहा था कि उनका काम दक्षिणी तट पर 'नावों के ज़रिए होने वाले आक्रमण को रोकना है.'
उन्होंने कहा था, "जब तक नौकाएं आती रहेंगी, समुद्र में लोग मरते रहेंगे, ऐसे में सबसे सभ्य, मानवीय और दया की चीज जो आप कर सकते हैं वो है नावों को रोकना."
इन बिल के मुताबिक़ ब्रिटेन सरकार अवैध रूप से आने वाले लोगों को उनके देश में वापस भेजना चाहेगी, नहीं तो शरण मांगने वालों को थर्ड वर्ल्ड के किसी देश में भेजा जाएगा, जो शरणार्थियों को लेने के लिए तैयार हैं.
इसमें अठारह साल के कम उम्र के बच्चे, जो स्वास्थ्य कारणों से विमान यात्रा नहीं कर सकते या जिस देश से उन्हें निकाला जा रहा है वहां उनकी जान को गंभीर खतरा है तो उन्हें देश से बाहर ले जाने का समय दिया जाएगा.
अब तक रवांडा एकमात्र देश है जो प्रवासियों को लेने के लिए सहमत हुआ है. पहले साल वहां 200 लोगों को भेजा जाना था लेकिन कानूनी चुनौतियों के चलते अभी तक वहां कोई नहीं जा सका है.









