लंदन स्थित सैटेलाइट ऑपरेटर कंपनी वनवेब ग्लोबल इंटरनेट विकसित करने के क़रीब पहुंच गई है.
इस सप्ताह कंपनी ने अपने 40 स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष भेजे हैं.
अब ब्रॉडबैंड इंटरनेट देने में सक्षम कंपनी की सैटेलाइट्स की संख्या 580 हो गई है.
अगले सप्ताह में कंपनी एक और लॉन्च करने जा रही है.
इसके साथ ही कंपनी के पास दुनिया के किसी भी कोने में इंटरनेट सेवा देने की क्षमता होगी.
मार्च 2020 में कोविड महामारी के समय कंपनी वित्तीय रूप से बर्बाद होने के क़रीब पहुंच गई थी.
ब्रितानी सरकार और भारतीय टेलीकॉम समूह भारती टेलीकॉम ने जब इसके कुछ महीने बाद ही इस कंपनी को ख़रीदकर इसे दिवालिया होने से बचाया था तब इसके पास 80 से भी कम स्पेसक्राफ्ट थे.
कंपनी के सईओ नील मास्टरसन का कहना है कि उसके बाद से कंपनी ने ज़ोरदार वापसी की है.
फिलहाल ये कंपनी 15 देशों में इंटरनेट सेवाएं दे रही है.
कंपनी के सैटेलाइट धरती से 1200 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात रहते हैं.
इन्हें स्थापित होने और सुचारू रूप से काम करने में समय लगता है.
कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में उसके सैटेलाइट्स अमेरिका, मेक्सिको, उत्तरी अफ़्रीका और फिर भारत तक में इंटरनेट उपलब्ध करवा सकेंगी.
अंतरिक्ष में नेटवर्क बनाने के बाद कंपनी को डाटा लिंक स्थापित करने के लिए ग्राउंड स्टेशन बनाने होंगे.
वनवेब का प्लान है कि वो साल 2023 के अंत तक लगभग 40 नोड स्थापित कर लेगी.
दुनिया में इस समय सिर्फ़ एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के पास ही अंतरिक्ष वनवेब से अधिक स्पेसक्राफ्ट हैं.
स्टारलिंक की तरह वनवेब सीधे तौर पर ग्राहकों को ब्रॉडबेंड कनेक्शन नहीं बेचती है बल्कि टेलीकॉम कंपनियों को इंटरनेट देती है जो आगे ग्राहकों को ब्रॉडबेंड देते हैं.