पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के प्रमुख और देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का कहना है कि वो मुल्क में चुनाव चाहते हैं और वे इसके लिए किसी से भी बात करने को तैयार हैं लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें इसके लिए बैसाखियों की ज़रूरत नहीं है.
बीबीसी उर्दू को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "मुझसे पूछा गया कि इस्टैबलिशमेंट (यानी सेना) आपसे बात करे तो क्या आप करेंगे? मैंने कहा कि मैं एक सियासी आदमी हूं. मैं सबसे बात करूंगा सिवाय चोरों के."
इमरान ख़ान ने कहा कि उन्होंने कभी शहबाज़ शरीफ़ और न ही सेना प्रमुख को बातचीत करने की दावत नहीं दी है.
उन्होंने कहा, "लोग कह रहे हैं कि मैं आर्मी चीफ़ से बात करना चाहता हूं. तो मुझे इस्टैबलिशमेंट की ज़रूरत नहीं है. जिस जमात के पास देश की जनता हो, उसे बैसाखियों की ज़रूरत नहीं है."
जब इमरान खान से पूछा गया कि क्या सैन्य नेतृत्व में बदलाव से उन्हें सत्ता के रवैये में कोई फर्क पड़ा है, तो उन्होंने कहा, "इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ा."
उन्होंने कहा, "जनरल बाजवा के दौर में हमारे ख़िलाफ़ मुक़दमे केस किए गए."
इमरान खान ने कहा, "हमने सोचा था कि नए मुखिया के आने पर बदलाव होगा, लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ, बल्कि मुश्किलें बढ़ गई हैं."
इमरान खान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिन में चुनाव कराने का आदेश दिया है. इमरान खान ने कहा, "कार्यवाहक सरकार का काम चुनाव कराना है. वे इसे कैसे रोक सकते हैं? अगर चुनाव होना ही है तो बिना चुनाव प्रचार और रैलियों के चुनाव कैसे हो सकता है?"
इससे पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने लाहौर के जमान पार्क इलाके के आसपास उसके कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प के बाद बुधवार की चुनावी रैली रद्द करने की घोषणा की थी.
पुलिस ने रैली को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, गोलाबारी और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि पीटीआई कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पथराव भी किया.
इस झड़प में जहां 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए वहीं तहरीक-ए-इंसाफ ने भी अपने एक कार्यकर्ता की मौत का दावा किया है.
तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान खान ने बुधवार शाम अपने संदेश में कहा कि चुनाव से भागने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि तहरीक-ए-इंसाफ के कार्यकर्ता किसी तरह के बवाल का हिस्सा न बनें, ताकि सरकार को चुनाव से भागने का मौका न मिले.