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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण शुरू हो गया है. ये मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आख़िरी पूर्ण बजट है.
बजट भाषण की शुरूआत में निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये अमृतकाल का पहला बजट है और पहले के बजट में जो तस्वीर बनाई गई उसी को आगे बढ़ाता है. इसका उद्देश्य देश के सभी तबकों को फायदा पहुंचाने का है.
बजट 2023: ट्रक में भर कर संसद लाई गई बजट की प्रतियां
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अब से थोड़ी देर में संसद में बजट 2023-24 पेश करने वाली हैं.
आज सवेरे उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात की. निर्मला सीतारमण अब संसद पहुंच चुकी हैं.
उनके पहुंचने के साथ ही ट्रक में भर कर बजट की प्रतियां भी संसद परिसर में लाई गई हैं.
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समाचार एजेंसी पर आए वीडियो में देखा जा सकता है कि सुरक्षा के मद्देनज़र स्निफ़र डॉग ने सबसे पहले सूंघकर कागज़ों की जांच की जिसके बाद प्रतियां संसद के भीतर लाई गईं.
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दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दूसरे नेता भी संसद भवन पहुंच चुके हैं जहां बजट पेश करने से पहले केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होनी है.
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बजट 2023: विकास को रफ़्तार देने के लिए कितनी तैयार है भारतीय अर्थव्यवस्था की ज़मीन
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इमेज कैप्शन, महंगाई आने वाले समय में बढ़ सकती है
बजट से एक दिन पहले और क्या ख़ुशखबरी मिल सकती थी. सरकार अपने आंकड़े देती इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ ने बता दिया कि कुहासे भरी दुनिया में भारत एक चमकता सितारा होगा.
हालांकि आईएमएफ़ ने भारत की जीडीपी बढ़ने की रफ़्तार पिछले साल के 6.8 फ़ीसदी से घट कर 6.1 फ़ीसदी रहने का अनुमान बरक़रार रखा है.
लेकिन साथ में कहा है कि यह दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ रफ़्तार होगी.
आईएमएफ़ का कहना है कि 2023 में दुनिया की अर्थव्यवस्था में जो भी तेज़ी दिखेगी उसमें आधा हिस्सा भारत और चीन का होगा.
निर्मला सीतारमण: छठी वित्त मंत्री जो पेश करेंगी लगातार पांचवीं बार बजट
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अब से थोड़ी देर बाद संसद में साल 2023-24 का बजट पेश करने वाली हैं.
आज़ाद भारत की वो छठी मंत्री हैं जो लगातार पांचवीं बार देश का बजट पेश कर रही हैं. उनसे पहले मनमोहन सिंह, अरुण जेटली, पी चिदंबरम, यशवंत सिन्हा और मोरारजी देसाई लगातार पांच बार बजट पेश कर चुके हैं.
2019 में सीतारमण ने वित्त मंत्री के तौर पर अपना पहला बजट पेश किया था.
2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद अरुण जेटली ने वित्त मंत्री का पदभार संभाला और 2014-15 से लेकर 2018-19 तक लगातार पांच बार बजट पेश किया.
उन्हीं के कार्यकाल में साल 2017 में फरवरी के आख़िरी दिन की बजाय फरवरी की पहली तारीख को बजट पेश करने का फ़ैसला किया गया.
2019-20 में अरुण जेटली की तबीयत बिगड़ने के बाद वित्त मंत्रायलय का अतिरिक्त कार्यभार पीयूष गोयल को दिया गया. उन्होंने 2019-2020 का अंतरिम बजट पेश किया.
वीडियो कैप्शन, COVER STORY: क्यों बेहाल हैं लाखों मज़दूर?
2019 में हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने एक बार फिर बड़ी जीत हासिल की और मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ.
नई सरकार में वित्त मंत्रालय की ज़िम्मेदारी निर्मला सीतारमण के हाथों सौंपी गई.
उनके कार्यकाल के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था ने कोरोना महामारी संकट का सामना किया. इस दौरान लोगों को राहत देने के लिए कई तरह की घोषणाएं की गईं. उसके बाद का दौर लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी के लाने की कोशिशों का रहा.
इस साल निर्मला सीतारमण रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पैदा हुए खाद्य संकट, सप्लाई चेन में रुकावट और दुनियाभर में बढ़ती महंगाई के बीच बजट पेश कर रही हैं.
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निर्मला सीतारमण का पांचवां बजट और वो रस्में जो बन रही हैं इतिहास
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बुधवार एक फ़रवरी को सुबह 11 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना पांचवां बजट पेश करेंगी.
भारत में सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है. इसलिए इस बार भी लोगों की नज़र इस बात पर रहेगी कि बजट भाषण कितना लंबा होगा.
लेकिन नई पीढ़ी के कुछ ही लोग जानते होंगे कि आज़ादी के बाद कई दशक तक यह बजट भाषण दिन के ग्यारह बजे नहीं बल्कि शाम पांच बजे हुआ करता था.
ऐसा क्यों होता था, इसके पीछे भी तरह-तरह के किस्से प्रचलित रहे.
आम बजट से पहले शेयर बाज़ार के शुरुआती कारोबार में तेज़ी
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आम बजट से पहले बुधवार को शेयर बाज़ार के शुरुआती कारोबार में तेज़ी देखने को मिली.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, निवेशकों की इस बजट पर नज़र है और वे ये देखेंगे कि वैश्विक मंदी की आशंकाओं के मद्देनज़र अर्थव्यवस्था के दीर्घकालीन विकास के लिए सरकार क्या कदम उठाती है.
सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर निफ्टी 50 इंडेक्स 0.66 फीसदी बढ़कर 17,777 पर था जबकि बीएसई सेंसेक्स 0.7 फीसदी बढ़कर 59,963.63 पर था.
जनवरी के महीने में दोनों ही इंडेक्स में दो फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. ये दोनों ही इंडेक्स पिछले दो महीने से लगातार नुक़सान में चल रहे हैं.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 11 बजे केंद्रीय बजट पेश करेंगी.
माना जा रही है कि वे करदाताओं को राहत देने के साथ राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए कुछ कदम उठा सकती हैं.
बजट 2023: इनकम टैक्स में राहत, क्या पूरी होगी मिडिल क्लास की ये चाहत
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इमेज कैप्शन, सरकारी और गैर सरकारी दोनों ही आंकड़े दिखा रहे हैं कि इस वित्त वर्ष में बेरोज़गारी कम हुई है
नरेंद्र मोदी सरकार 1 फ़रवरी को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले का आख़िरी पूर्ण बजट पेश करने जा रही है.
2023 में नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और फिर 2024 में केंद्र में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी सत्ता में बने रहने की लड़ाई लड़ेगी.
लिहाज़ा इस बजट से लोगों की उम्मीदें काफ़ी बढ़ी हुई हैं. वोटरों को लग रहा है कि सरकार चुनाव से पहले पेश किए जाने वाले इस बजट में उनके लिए सौगातों का पिटारा ज़रूर खोलेगी.
ख़ास कर मिडिल क्लास के उन वेतनशुदा लोगों की उम्मीदें काफ़ी बढ़ी हुई हैं जो इनकम टैक्स देनदारी के दायरे में आते हैं.
हालांकि सिर्फ़ मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स ही छूट और राहत की उम्मीद लगाए नहीं बैठे हैं.
उच्च आय वर्ग में आने वाले टैक्सपेयर्स भी टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद लिए बैठे हैं ताकि उनकी भी जेब ज़्यादा हल्की न हो. वो ख़र्च और निवेश में इज़ाफ़ा कर सकें और अर्थव्यवस्था में डिमांड बनी रहे.
भारत निम्न मध्य आय वर्ग वाले देशों की कैटेगरी में शामिल है, जहां लगभग 136 करोड़ लोगों की आबादी में सिर्फ़ आठ करोड़ लोग आयकर देते हैं. सरकार के राजस्व का बड़ा स्रोत अप्रत्यक्ष कर है. सरकार जीएसटी और कुछ सरचार्ज के ज़रिये हर उपभोक्ता से अप्रत्यक्ष कर वसूलती है.
इसलिए इनकम टैक्स देने वालों का मानना है कि उन पर टैक्स का दोगुना बोझ है. एक तो वे अप्रत्यक्ष कर के रूप में वस्तुओं और सेवाओं का उपभोग करने के एवज में टैक्स देते हैं, दूसरा उनकी आय पर इनकम टैक्स लगाया जाता है.
बजट से पहले तेज़ी के साथ खुला शेयर बाज़ार
आम बजट पेश होने से पहले शेयर बाज़ार तेज़ी के साथ खुला है.
अभी सेंसेक्स 437.32 प्वाइंट की बढ़त
के साथ 59,987.22 प्वाइंट पर खुला.
अब से क़रीब घंटेभर बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में आम बजट पेश
करने वाली हैं.
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वित्त मंत्री ने की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात, थोड़ी देर में करेंगी बजट पेश
बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी की टीम के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचीं.
आज वित्तमंत्री मौजूदा सरकार का आख़िरी पूर्ण बजट पेश करेंगी. पिछले दो सालों की तरह इस साल भी यूनियन बजट पेपरलेस होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट पेश होने से पहले कहा है कि ये बजट देश के आम लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरा उतरेगा और दुनिया के लिए भी उम्मीद की किरण साबित होगा.
मंगलवार को पेश किए गए आर्थिक सर्वे में भारत की अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर बेहतर परफॉर्म करता हुआ बताया गया है. इस सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि आगामी वित्त वर्ष में देश की जीडीपी 6.8% होगी.
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जनवरी में जीएसटी कलेक्शन ने तोड़ा रिकॉर्ड, 1.55 लाख करोड़ से अधिक की कमाई
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जनवरी महीने में जीएसटी कलेक्शन 1.55 लाख करोड़ रुपये से भी
ज़्यादा रहा और इसके साथ ही ये सरकार का सबसे ज़्यादा जीएसटी कलेक्शन का महीना बन गया
है.
जनवरी 2023 ने अक्टूबर 2022 में हुए जीएसटी कलेक्शन का भी
रिकार्ड तोड़ दिया है, जो टैक्स जुटाने के लिहाज़ से सरकार के लिए अब तक का सबसे शानदार
महीना था.
केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने जनवरी महीने का जीएसटी आंकड़ा
मंगलवार को जारी किया, इस महीने में 1.55 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का जीएसटी राजस्व हासिल हुआ है.
सरकार का जनवरी में 1,55,922
करोड़ रुपये का
सकल जीएसटी कलेक्शन हुआ है.
वहीं बीते साल 2022 दिसंबर के महीने में 1,49,507 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन हुआ था.
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वित्त मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक़, इस महीने सीजीएसटी के रूप में 28,963 करोड़ रुपये और एसजीएसटी से 36,730 करोड़ रुपये और आईजीएसटी के रूप में 79,599 करोड़ रुपये सरकार को मिले. आईजीएसटी में 37,118 करोड़ रुपये वस्तुओं के आयात पर लगने वाले कर के रूप में वसूला गया है.
वित्त मंत्री के कार्यालय ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए कहा कि, “जनवरी 2023 सबसे ज़्यादा कलेक्शन का महीना माना जा रहा है.”
इससे पहले अक्टूबर 2022में सबसे ज़्यादा जीएसटी कलेक्शन किया गया था जो 1 .51 लाख करोड़ से अधिक था. जनवरी 2023 के महीने में 1,55,922 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी कलेक्शन हुआ है.
कांग्रेस ने कहा, बजट सत्र में उठाएंगे अदानी और चीन का मुद्दा
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि बजट सत्र के दौरान विपक्ष अदानी और दूसरे मुद्दों को उठाएगा.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस सत्र के दौरान विपक्ष बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी का भी मुद्दा उठाएगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक खड़गे अदानी समूह, भारत-चीन सीमा पर बढ़ रही चीन की आक्रामकता और उन राज्यपालों की भूमिका पर बात करेंगे 'जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी निष्ठा साबित करने की होड़ में हैं'.
अमेरिकी फ़ॉरेंसिक फ़ाइनेंशियल कंपनी हिंडनबर्ग ने पिछले हफ़्ते अदानी समूह पर आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे जिसके बाद से अदानी समूह से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई.
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वहीं कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि वित्त मंत्री अदानी समूह को लेकर आई हिंडनबर्ग रिपोर्ट का पूरा ऑडिट और जांच की घोषणा करेंगी.
उन्होंने लिखा, "बजट केवल लेखा-जोखा नहीं है बल्कि ये भारत के भविष्य की राह दिखाता है. इसलिए ज़िम्मेदारी लेना इसका अहम हिस्सा है."
उन्होंने लिखा, "हमें उम्मीद है कि वित्त मंत्री अदानी समूह पर आए हिंडनबर्ग रिपोर्ट के पूरे ऑडिट और सेबी, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और सीरियन फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफ़िस से इसकी जांच की घोषणा करेंगी."
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इससे पहले उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण पर कहा था कि ये सरकार के परफॉर्म न कर पाने के बहानों से भरी रिपोर्ट है.
उन्होंने लिखा, "आम लोगों के लिए कोई राहत नहीं, कोविड महामारी को ज़िम्मेदार ठहराना, महंगाई बढ़ने के लिए रूस यूक्रेन युद्ध को ज़िम्मेदार ठहराना और देश के जीडीपी गिरने के लिए वैश्विक मंदी को ज़िम्मेदार ठहराना. मोदी सरकार का आर्थिक सर्वे बजट पेश होने से पहले बचने के बहानों की स्क्रिप्ट है."
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बजट 2023: भारत का आम बजट कैसे तैयार होता है, जानिए इससे जुड़ी दिलचस्प जानकारियां
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भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को आम बजट पेश करेंगी. आम बजट सुबह 11 बजे पेश होगा. निर्मला सीतारमण पांचवीं बार बजट पेश करेंगी.
इससे पहले 31 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया. आइए जानते हैं कैसे तैयार होता है बजट और क्या है इससे जुड़ी दिलचस्प जानकारियां.
बजट की नींव कैसे रखी जाती है?
देश में किसी साल उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की मौजूदा बाजार कीमत को नॉमिनल जीडीपी कहते हैं. इसे बजट की बुनियाद या नींव कहा जा सकता है क्योंकि बगैर नॉमिनल जीडीपी जाने अगले साल का बजट बनाना संभव नहीं होगा.
कैसे शुरू होती है बजट बनाने की प्रक्रिया?
बजट बनाने की प्रक्रिया संसद में इसे पेश करने से छह महीने पहले शुरू हो जाती है. यह काफी-लंबी चौड़ी प्रक्रिया होती है. इसके तहत अलग-अलग प्रशासनिक निकायों से आंकड़े मंगाए जाते हैं. इन आंकड़ों से पता किया जाता है कि उन्हें कितने फंड की जरूरत है.
इसके साथ ही यह तय किया जाता है कि जनकल्याण योजनाओं के लिए कितने पैसों की जरूरत होगी. इसी हिसाब से अलग-अलग मंत्रालयों को फंड मुहैया कराए जाते हैं.
बजट बनाने में वित्त मंत्री के अलावा वित्त सचिव, राजस्व सचिव और व्यय सचिव अहम भूमिका निभाते हैं. इस दौरान हर रोज कई बार वित्त मंत्री से उनकी बजट के सिलसिले पर बातचीत होती है. बैठक या तो नॉर्थ ब्लॉक ( जहां वित्त मंत्रालय है) में होती है या वित्त मंत्री के आवास पर.
बजट से पहले बजट को बनाएं आसान. बीबीसी हिंदी के साथ समझिए 'सरल है बजट'
इस साल के बजट का फ़ोकस विकास पर होना चाहिए- अमेरिकी फ़ोरम
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भारत-क्रेंद्रित अमेरिकी स्ट्रैटजिक समूह का यूएसआईएसपीएफ़ कहना है कि भारत के इस साल के बजट को विकास को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए. बीते साल का बजट अर्थव्यवस्था
को कोरोना महामारी के दौर से बाहर निकालने वाला था.
यूएस इंडिया
स्ट्रैटजिक एंड पार्टनरशिप फ़ोरम के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा कि आने वाला बजट
विकास को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए.
उन्होंने
कहा कि जी20 की अध्यक्षता करने वाला भारत अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर इस समूह का सबसे
तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देश है, वहीं इस समूह के बाकी देश भारत के मुक़ाबले धीमी रफ़्तार
से बढ़ रहे हैं.
भारत एक दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023
तक जी20 की अध्यक्षता कर रहा है.
अघी ने
कहा, “निवेशकों की निगाहें बजट पर होंगी और इसलिए विकास पर
केंद्रित एक मज़बूत बजट, मैन्युफ़ैक्चरिंग
सेक्टर में निवेशकों
के लिए पीएलआई योजनाओं को टारगेट करना और सप्लाई चेन में सुधार को टारगेट करना इस समय भारत के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है.”
उन्होंने कहा कि टैक्स से जुड़े क़ानूनों के औरर सरल होने से ज़रूरी
विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और निवेशकों में भी विश्वास पैदा होगा. खास कर बुनियादी
ढांचे के विकास और ग्रीन एनर्जी में महत्वपूर्ण कैपिटल इनफ़्लो को आकर्षित करते
हुए ये क़ानून निवेशकों को व्यापार करने के लिए अनुकूल माहौल देने का काम कर सकते
हैं
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महंगाई दर कैलकुलेटरः बढ़ती महंगाई ने आप पर कितना असर डाला है?
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महंगाई दर हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों के इस्तेमाल करने के तरीक़े अलग-अलग हैं.
हर महीने भारत का सांख्यिकी मंत्रालय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स जारी करता है, जो पूरे देश में औसत महंगाई दर को दर्शाता है.
हमने एक कैलकुलेटर बनाया है, जो आपकी इस बात में मदद करता है कि आप अलग-अलग चीजों पर कितना ख़र्च करते हैं, जैसे खाना, कपड़ा, और मकान पर. ये बताता है कि आपके लिए क़ीमतें कितनी बढ़ी हैं.
मान लीजिए कि इस महीने आपके पास ख़र्च करने के लिए हज़ार रुपये हैं. तो ये कैसे तय करेंगे कि किन चीज़ों की ख़रीद पर कितना ख़र्च करना है?
आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में क्या अच्छा और क्या बुरा
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को संसद में 2023-24 के लिए आम
बजट पेश करेंगी. मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ
बजट सत्र की शुरुआत हुई जिसके बाद वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वे पेश किया.
आर्थिक सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि 2023-24 में भारत की जीडीपी
6-6.8 फ़ीसदी की दर से बढ़ेगी.
बजट से लोगों को क्या उम्मीद?
कई जानकार मानते हैं कि रियल स्टेट सेक्टर के लोगों की नज़र
इस बजट पर टिकी हुई है. आशा जताई जा रही है कि रियल स्टेट सेक्टर में सरकार सुधार ला सकती है जिसकी इस सेक्टर को ज़रूरत है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा गया है कि रियल स्ट्रेट इंडस्ट्री चाहती है
कि होम लोन पर मिलने वाली छूट को दो लाख से बढ़ा कर पांच कर दिया जाए.
आर्थिक सर्वे कहता
है कि कृषि के क्षेत्र में निवेश बढ़ा है ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार अपने
बजट में किसानों को थोड़ी राहत दे सकती है.
कोविड महामारी के बाद रूस-यूक्रेन जंग के
कारण दुनिया पर आर्थिक मंदी का साया मंडरा रहा है. युद्ध के कारण दुनियाभर में मंहगाई
बढ़ी है.पश्चिम के देशों पर भी इसका असर दिख रहा है और कई बड़ी कंपनियों ने हाल-फ़िलहाल
में छंटनी भी की है. ऐसे में आम आदमी के लिए
बजट में क्या होगा इस पर सबकी नज़र है.
हाल ही में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बयान दिया था कि
वह खुद मध्य वर्ग से हैं और इस वर्ग की परेशानियों को समझती हैं.
उम्मीद
जताई जा रही है कि इस बजट में सरकार मध्यम वर्ग के लिए भी कुछ खास कर सकती है.
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आर्थिक सर्वे में क्या आया सामने
देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वर ने मंगलवार को देश के आर्थिक सर्वे की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वित्तीय साल 2023-24 में विकास दर 6-6.8 फ़ीसदी तक होने का अनुमान है.
अर्थव्यवस्था की रिकवरी पूरी हो चुकी है.नॉन-बैंक और कॉरपोरेट की बैलेंस शीट बेहतर दिख रही है और महामारी से उबरने की चिंता दूर हे गई है, अब हमें आगे के चरणों पर फ़ोकस करना है.
आर्थिक सर्वेक्षण 2023 में कहा गया है कि देश की 65 फ़ीसदी (2021 का आंकड़ा) आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और 47 फ़ीसदी आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है. ऐसे में ग्रामीण विकास पर सरकार का फोकस ज़रूरी है. कृषि के क्षेत्र में निजी निवेश 9.3 फ़ीसदी रहा है. इस क्षेत्र में बेहतर ग्रोथ दिख रही है.
आने वाले वित्तीय साल में संभावनाएं बेहतर हैं क्योंकि बैलेंस शीट बेहतर स्थिति में है. इंडस्ट्रिल प्रोडक्शन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स प्रोडक्शन बीते दो साल की तुलना में बेहतर हुआ है. एमएसएमई सेक्टर में क्रेडिट की मांग बढ़ी है.
आर्थिक सर्वे कहता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में विकास और मंहगाई को काबू में करने के कारण ये संभव है कि देश में विदेशी निवेश एक बार फिर बढ़े.
सर्वे में कुछ चिताएं भी जताई गई हैं. इसमें कहा गया है कि भारत का वैश्विक मंदी की आशंकाओं के कारण एक्सपोर्ट कम हो सकता है. ये भी संभव है कि दुनिया में कमोडिटी की अस्थिर कीमतें औऱ सप्लाई चेन प्रभावित होने पर औद्योगिक विकास प्रभावित हो.
आज खुलेगा वित्त मंत्री का पिटारा, आम लोगों को क्या मिलेगी राहत
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अब से थोड़ी देर बाद बीजेपी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस साल का बजट पेश करेंगी.
कल पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया, जिसके बाद आज वित्त मंत्री का बजट भाषण होगा.
पिछले दो सालों की तरह इस साल भी यूनियन बजट पेपरलेस होगा.
प्राधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट पेश होने से पहले कहा है कि ये बजट देश के आम लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरा उतरेगा और दुनिया के लिए भी उम्मीद की किरण साबित होगा.
उन्होंने कहा, "संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू पहली बार अपना भाषण दिया. ये गर्व की बात तो है ही और ख़ासकर महिला सम्मान की बात है. पूरा विश्व आज भारत की तरफ देख रहा है. वित्त मंत्री भी एक महिला हैं जो इसके बाद एक और साल बजट पेश करेंगी."
उन्होंने कहा, "वैश्विक आर्थिक स्थिति पहले ही मुश्किलों में है, ऐसे में भारत का बजट के देश के आम लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश तो होगी ही, साथ ही ये दुनिया के लिए भी उम्मीद की किरण होगी."
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कइयों को राहत की उम्मीद
अगले साल होने लोकसभा चुनावों से ठीक पहले ये मौजूदा सरकार का आख़िरी पूर्ण बजट होगा, इस लिहाज़ से माना जा रहा है कि इसमें कई वर्गों के लिए छूट दी जा सकती है.
हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि वित्त मंत्री के लिए सरकारी खज़ाने और नए एलानों के लिए खर्च की व्यवस्था करने के बीच के संतुलन को साधना मुश्किल काम हो सकता है.
बजट पेश होने से पहले आए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश के लिए बढ़ती महंगाई दर चिंता का विषय नहीं है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि रिज़र्व बैंक ने वित्त वर्ष 2023 के लिए महंगाई दर 6.8 फ़ीसदी रहने का अनुमान लगाया है जो कि टारगेट रेंज से बाहर है.
उन्होंने कहा, "न तो ये इतना अधिक है कि इससे खपत पर असर पड़ेगा और न ही ये इतना कम है कि इससे निवेश पर कोई असर पड़े."
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बजट पेश होने से पहले ये ख़बरआई कि पिछले महीने यानी दिसंबर में अर्थव्यवस्था के आठ कोर सेक्टर्स ने 7.4 फ़ीसदी की गति से विकास किया है. साल भर पहले इन सेक्टर्स की वृद्धि दर केवल 4.1 फ़ीसदी थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है.
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बजट से क्या है बड़ी उम्मीदें?
माना जा रहा है कि इस साल के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को पिछले साल की तुलना में थोड़ा और बढ़ाया जाएगा ताकि इससे नई नौकरियां पैदा हों और स्टील से लेकर ऑटो इंडस्ट्री और रिएल इस्टेट जैसे सभी सेक्टर में विकास बढ़े.
कोरोना महामारी का बड़ा असर ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ी और गाड़ियों की बिकवाली काफी कम हुई. इस सेक्टर को पटरी पर लाने के लिए बजट में कुछ ख़ास घोषणा हो सकती है.
वित्त मंत्री से ये भी उम्मीद की जा रही है कि वो इस साल मध्यम वर्ग को टैक्स में राहत दे सकती हैं. बीते कुछ दिनों से अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस बजट में स्टैन्डर्ड डिडक्शन को थोड़ा बढ़ाया जा सकता है और टैक्स स्लैब में या तो थोड़ा बदलाव किया जा सकता है.
कई लोगों को ये भी उम्मीद है कि टैक्स में महिलाओं के लिए थोड़ी राहत की घोषणा की जा सकती है.
कई जानकार मान रहे हैं कि इस साल और आने वाले सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास जारी रहेगा और औसत प्रति व्यक्ति आय भी आने वाले वक्त में बढ़ेगी.
सरकार पहले ही ग्रीन एनर्जी की तरफ़ बढ़ने की मंशा जता चुकी है. ऐसे में सरकार की कोशिश रहेगी कि उपभोक्ता अधिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदें और इसके लिए देश में एक बेहतर बाज़ार बने. इस बजट में इसके उत्पादन और बिक्री से जुड़ी घोषणा की उम्मीद की जा सकती है.
सरकार इस साल सौ से अधिक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की घोषणा कर सकती है. भारतीय रेल राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों की जगह वंदे भारत ट्रेनों को लाने के बारे में विचार कर रही थी, ऐसे में इससे जुड़ी घोषणा आज हो सकती है.
हाल के सालों में डिजिटल करेंसरी का इस्तेमाल बढ़ा है और इसके मद्देनज़र इसे बढ़ावा देने की कोशिश कर सकती है. बीते साल दिसंबर में रिज़र्व बैंक ने रीटेल सीबीडीसी (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) का पायलट लॉन्च किया था.
जानकार मानते हैं कि इस साल ग्रामीण इलाको़ं में लागू होने वाली योजनाओं का खर्च बढ़ाए जाने की उम्मीद की जा रही है, जिसके कारण बजट पर थोड़ा दवाब पड़ सकता है और सरकार की ग्रॉस बॉरोइंग अधिक रहेगी.
ये भी उम्मीद की जा रही है कि प्रोडक्शन लिंक्ट स्कीम का विस्तार और सेक्टर में भी कर सकती है. अब तक इसमें 14 सेक्टर को शामिल किया गया है. माना जा रहा है कि इससे नई नौकरियां पैदा होंगी.
साल 2022-23 के बजट में विनिवेश के लिए 65 हज़ार करोड़ का लक्ष्य रखा गया था लेकिन सरकार इसका आधा ही हासिल कर सकी थी. ऐसे में माना जा रहा है कि इस साल सरकार विनिवेश के लिए अपना लक्ष्य घटाकर पेश कर सकती है और इसे 30 से 35 करोड़ रुपये तक कर सकती है.
दो साल से तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर सरकार ने टैक्स नहीं बढ़ाया था, इस साल इसमें लगने वाले टैक्स को बढ़ाया जा सकता है.
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आगे बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे ओलिविएर गौरिनचास ने बताया है कि वैश्विक विकास में भारत और चीन दोनों देशों की हिस्सेदारी क़रीब 50 फ़ीसदी की होगी.
वहीं, अमेरिका और यूरोपीय संघ के देशों की वैश्विक विकास में हिस्सेदारी केवल 10 फ़ीसदी की ही होगी.अमेरिका और यूरोपीय संघ के देशों की वैश्विक विकास में हिस्सेदारी केवल 10 फ़ीसदी की ही होगी.
आईएमएफ़ ने अपने विकास के पूर्वानुमानों में बताया है कि 2023 में दुनिया की विकास दर 2.9 फ़ीसदी रहेगी. इसके अनुसार, विकसित देशों की विकास दर 1.2 प्रतिशत और विकासशील देशों की विकास दर 4 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
साल 2023 में भारत की विकास दर 6.1 प्रतिशत और चीन की 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
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