सुप्रीम कोर्ट ने साल 1994 के इसरो जासूसी मामले में वैज्ञानिक नांबी नारायण को कथित रूप से फंसाने के मामले से जुड़े अभियुक्तों को झटका दिया है.
शीर्ष न्यायालय ने इस मामले में पुलिस और आईबी के पांच पूर्व अधिकारियों को अग्रिम ज़मानत देने वाले केरल हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया. केरल उच्च न्यायालय ने 2021 में ये आदेश दिया था.
जस्टिस एमआर शाह की अगुवाई वाली पीठ ने ज़मानत याचिकाओं को हाई कोर्ट वापस भेज दिया और कहा कि इसपर चार सप्ताह के भीतर फ़ैसला किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों को पाँच सप्ताह के लिए गिरफ़्तारी से सुरक्षा भी दी है, जब तक हाईकोर्ट अपना अतिम फ़ैसला न ले ले.
सीबीआई ने केरल हाई कोर्ट की ओर से पाँच अभियुक्तों की दी गई अग्रिम ज़मानत वाले फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
केरल हाई कोर्ट ने पूर्व गुजरात डीजीपी आरबी श्रीकुमार, पूर्व केरल डीजीपी सिबी मैथ्यूज़, केरल के दो पूर्व पुलिस अधिकारी एस विजयन और एस दुर्गा दत्त के साथ रिटायर्ड ख़ुफ़िया अधिकारी पीएस जयप्रकाश को इस मामले में अग्रिम ज़मानत दे दी थी.
सीबीआई का कहना था कि अग्रिम ज़मानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है.
डॉक्टर नांबी नारायण इसरो के वो वैज्ञानिक थे जिन्हें 30 नवंबर 1994 को गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान को देने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
उन पर भारत के सरकारी गोपनीय क़ानून (ऑफ़िशियल सीक्रेट लॉ) के उल्लंघन और भ्रष्टाचार समेत अन्य कई मामले दर्ज किए गए. 1996 में उन्हें ज़मानत मिली. 1996 में ही सीबीआई ने उन्हें क्लीनचिट भी दे दी.
इसरो की एक आंतरिक जांच में भी पता चला कि क्राइजेनिक इंजन से जुड़ा कोई काग़ज ग़ायब नहीं था.
नांबी नारायणन ने उन्हें ग़लत तरीके से फंसाने के लिए केरल सरकार पर मुक़दमा कर दिया था. मुआवज़े के तौर पर उन्हें 50 लाख रुपए दिए गए थे.