भारत, पाकिस्तान ने किया 2023 क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफ़ाई, दक्षिण अफ़्रीका, वेस्ट इंडीज़, श्रीलंका मुश्किल में

वर्ल्ड कप 2023 के लिए भारत, पाकिस्तान समेत सात टीमों ने मौजूदा टीम रैंकिंग की बदौलत क्वालिफ़ाई कर लिया है.

लाइव कवरेज

प्रियंका झा

  1. सोशल मीडिया पर झंडे से 'अल्लाह' हटाया, ईरान ने फ़ीफ़ा से की अमेरिका की शिकायत

    ईरान झंडा

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    ईरान के फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन ने फ़ीफ़ा से शिकायत की है कि अमेरिका ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के झंडे से उसके राष्ट्र चिह्न को हटा दिया.

    मंगलवार को हुई वर्ल्ड कप मीटिंग से पहले, अमेरिका ने ट्विटर, फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए ग्राफ़िक्स में ईरान के झंडे से 'अल्लाह' शब्द हटा दिया. ईरान के झंडे पर हरे और लाल रंग के बीच में सफ़ेद रंग पर अल्लाह लिखा है.

    अमेरिका ने कहा कि उन्होंने बुनियादी अधिकारों की लड़ाई लड़ रही ईरानी महिलाओं के समर्थन में ईरान का आधिकारिक झंडा न इस्तेमाल करने का फ़ैसला लिया.

    ईरान में सितंबर महीने में 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में हुई मौत के बाद पूरे देश में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी है. अमीनी को ईरान की मोरैलिटी पुलिस ने हिरासत में लिया था.

    हालांकि ईरानी पुलिस का कहना है कि महसा की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी.

    ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, "ग़ैर-पेशेवर रुख़ अपनाते हुए अमेरिका ने यूएस फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन के इंस्टाग्राम पेज से ईरानी झंडे से अल्लाह शब्द हटा दिया."

    "ईरान फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन ने फ़ीफ़ा को ईमेल भेजा है और अमेरिकी फ़ेडरेशन को सख़्त चेतावनी जारी करने की मांग की है."

    वहीं, अमेरिकी फ़ुटबॉल के प्रवक्ता ने बाद में कहा कि सोशल मीडिया से पोस्ट हटा दिए गए हैं और उनकी जगह ईरान के सही झंडे लगाए गए हैं. हालांकि, उन्होंने कहा, "हम अभी भी ईरान की महिलाओं को समर्थन करेंगे."

    ईरान इससे पहले अमेरिका और अन्य देशों पर प्रदर्शन को हवा देने का आरोप लगाता रहा है. प्रदर्शनकारियों पर ईरान की कार्रवाई के बाद अमेरिका ने भी कई ईरानी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच साल 1980 से कूटनीतिक रिश्ते नहीं है.

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  3. क़तर में किस हाल में रहती हैं महिलाएं, क्या है पुरुष गार्जियन की व्यवस्था?

  4. कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने पीएम मोदी को बताया 'झूठों का सरदार'

    मल्लिकार्जुन खरगे

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    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुजरात में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री को घेरा और उन्हें 'झूठों का सरदार' बताया.

    उन्होंने कहा कि मोदी जी एक के बाद एक झूठ बोलते जा रहे हैं.

    खड़गे ने ये भी कहा कि मोदी और अमित शाह अक्सर पूछते हैं कि 70 सालों में कांग्रेस ने क्या किया. उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा, "अगर हम 70 सालों में कुछ न करते तो आप लोकतंत्र न पाते."

    दलित जाति से आने वाले खड़गे ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "आपके जैसा आदमी जो हमेशा कहता है कि मैं ग़रीब हूं. हम भी ग़रीब हैं. हम तो ग़रीब से भी ग़रीब हैं. हम तो अछूतों में से आते हैं. कम से कम आपकी चाय तो कोई पीता है. मेरी चाय भी नहीं पीता कोई."

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    "अगर ऐसी बात कर-कर के आप हमदर्दी पाने की कोशिश करेंगे, तो लोग अब होशियार हो गए हैं. उतने बेवक़ूफ़ नहीं हैं. एक बार अगर झूठ बोलेंगे, लोग सुन लेंगे. दो बार भी बोलेंगे तो भी सुन लेंगे. लेकिन कितनी बार बोलेंगे. झूठ पर झूठ.. ये झूठों के सरदार हैं और ऊपर से बोलते हैं कि ये कांग्रेस वालों ने देश को लूटा."

  5. सेना का ग़ैर-सियासी होना लोकतंत्र को मज़बूत करेगा: पाक सेना प्रमुख जनरल बाजवा

    कमर जावेद बाजवा

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    पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने कहा है कि सेना को ग़ैर-सियासी रखने के उनके बयान को कुछ लोग नकारात्मक तरीक़े से देख रहे हैं.

    उन्होंने कहा कि उनपर निजी हमले किए जा रहे हैं लेकिन सच्चाई यह है कि यह फ़ैसला पाकिस्तान में लोकतंत्र को मज़बूत करने में एक अहम रोल अदा करेगा.

    जनरल बाजवा ने कहा कि ऐसा करने से देश की संस्थाओं को अपना काम प्रभावी तरीक़े से करने में मदद मिलेगी.

    गल्फ़ न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने यह बातें कहीं.

    जनरल बाजवा 29 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं और उनकी जगह पर जनरल आसिम मुनीर सेना प्रमुख होंगे.

    पिछले सप्ताह एक कार्यक्रम में उन्होंने इस बात को स्वीकार किया था कि सेना राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करती है लेकिन साथ ही उन्होंने विश्वास दिलाया था कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा.

    गल्फ़ न्यूज़ से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना हमेशा से ही राष्ट्र के नीतिगत फ़ैसलों में निर्णायक भूमिका निभाती रही है.

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सियासत में सेना की पिछली भूमिका के कारण सेना को जनता और राजनीतिज्ञ दोनों की तीव्र आलोचना का सामना करना पड़ा है.

    उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का पूरा यक़ीन है कि सेना को राजनीति से दूर रखना लंबे समय में पाकिस्तान के लिए नेक शगुन साबित होगा.

    उनके अनुसार इससे राजनीतिक स्थिरता भी क़ायम होगी और सेना एंव जनता के बीच रिश्ते भी मज़बूत होंगे.

  6. गहलोत बनाम पायलट: कांग्रेस हाईकमान समाधान करने में अबतक नाकाम क्यों

  7. सूरत से LIVE: गुजरात चुनाव का ये लोग बहिष्कार क्यों कर रहे हैं?

    सूरत से LIVE: गुजरात चुनाव का ये लोग बहिष्कार क्यों कर रहे हैं? ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी संवाददाता तेजस वैद्य (कैमरा: रूपेश)

  8. शिखर धवन ने बताई संजू सैमसन को दूसरे वन डे से बाहर रखने की वजह

    शिखर धवन

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    न्यूज़ीलैंड के साथ रविवार को हुए दूसरे वनडे मैच के प्लेइंग इलेवन में संजू सैमसन को न रखने पर अब कप्तान शिखर धवन ने जवाब दिया है.

    मैच के बाद बातचीत के दौरान धवन ने कहा, "हम टीम में छठा गेंदबाज़ चाहते थे. इसलिए संजू सैमसन की जगह दीपक हुडा को रखा गया. चाहर को टीम में इसलिए जगह दी गई क्योंकि वो गेंद को अच्छी स्विंग दे सकते थे."

    दरअसल, हैमिलटन में हुआ दूसरा वनडे मैच बारिश की वजह से रद्द हो गया. ये मैच सिर्फ़ 12.5 ओवर का ही हो सका. हालांकि, मैच के प्लेइंग इलेवन में भारत ने दो बदलाव किए थे.

    टीम में संजू सैमसन की जगह दीपक हुडा और शार्दुल ठाकुर की जगह दीपक चाहर को जगह दी गई.

    पहले वन डे में अच्छा खेलने के बावजूद संजू सैमसन को बाहर रखने पर सवाल खड़े किए जा रहे थे.

    मैच में भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए एक विकेट के नुक़सान पर 89 रन जोड़े थे. पहले बारिश की वजह से मैच को 29 ओवर का कर दिया गया लेकिन बाद में मैच रद्द करना पड़ा.

  9. चीन के लोगों के समर्थन में पेरिस, एम्सटरडम, टोरंटो और अमेरिका में भी प्रदर्शन

    चीन में विरोध प्रदर्शन

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    इमेज कैप्शन, चीन में विरोध प्रदर्शन

    लंदन के बाद अब पेरिस, एम्सटरडम, डबलिन, टोरंटो और अमेरिका के कुछ शहरों में चीनी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में लोग जुट रहे हैं.

    हालांकि बीबीसी ऑनलाइन जारी की जा रही तस्वीरों की पुष्टि नहीं करता लेकिन पेरिस के पॉम्पीदू सेंटर के बाहर कई लोग प्रदर्शन करते दिख रहे हैं.

    इनमें से कुछ के हाथों में वुलुमची मिडिल रोड साइन दिख रहे हैं. शंघाई की इस सड़क का नाम पश्चिमी शिनजियांग के उरूमची शहर पर रखा गया है. उरूमची में बीते सप्ताह एक इमारत में आग से 10 लोगों की मौत हो गई थी. उरूमची में इस साल अगस्त महीने से कोविड पाबंदियां लगी हुई हैं.

    एम्सटरडम में बहुत से लोग कोरे सफ़ेद काग़ज़ के साथ दिख रहे थे. ये चीन में सेंसरशिप की ओर संकेत करता है.

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    ऑनलाइन पोस्ट हो रही तस्वीरों में, डबलिन में प्रदर्शनकारियों के एक समूह को शहर के ऐतिहासिक ढाँचों के पास मोमबत्ती जलाते और फूल रखते देखा जा सकता है. इसी तरह के दृश्य सैन फ़्रैंसिस्को और टोरंटो के साथ ही यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ़ शेफ़िल्ड में भी देखने को मिल रहे हैं.

  10. असदउद्दीन ओवैसी ने केजरीवाल और आप को 'छोटा रिचार्ज' कह कसा तंज़

    असदुद्दीन ओवैसी

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    इमेज कैप्शन, असदुद्दीन ओवैसी

    ऑल इंडिया मुस्लिम इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष असदउद्दीन ओवैसी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर निशाना तंज़ करने के लिए 'छोटा रिचार्ज' शब्द का इस्तेमाल किया.

    ओवैसी ने ये भी आरोप लगाया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने मुसलमानों को बदनाम किया और वो नरेंद्र मोदी के सभी रिकॉर्ड तोड़ना चाहते हैं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ओवैसी दिल्ली नगर निगम चुनाव में सीलमपुर से अपनी पार्टी के प्रत्याशी का प्रचार कर रहे थे. एमसीडी चुनाव में एआईएमआईएम के 16 प्रत्याशी अपना भाग्य आज़मा रहे हैं. चार दिसंबर को मतदान होना है.

    इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि अरविंद केजरीवाल साल 2013 के मोदी हैं.

    उन्होंने कहा, "जब लोग कोरोना से परेशान थे. अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन के लिए भटक रहे थे तो दिल्ली के मुख्यमंत्री ज़हर उगल रहे थे और कह रहे थे कि कोरोना वायरस तबलीग़ी जमात की वजह से फैल रहा है. दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की सूची में तबलीग़ी जमात के लिए अलग से कॉलम बनाकर उन्हें सुपर स्प्रेडर कहा गया. पूरे देश ने मुसलमानों पर शक करना शुरू कर दिया. नफ़रत बढ़ी और बहुत से लोगों पर हमले हुए. इसके लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री ज़िम्मेदार हैं."

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    उन्होंने कहा, "2020 के दिल्ली दंगों में घर जले और लोग मारे गए. उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री कहीं नहीं दिखे. लेकिन नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर उन्होंने कहा कि वो आधे घंटे के अंदर इन्हें शाहीन बाग़ से हटा सकते हैं."

  11. फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप में मोरक्को की जीत के बाद बेल्जियम, नीदरलैंड्स में दंगे

    बेल्जियम दंगा

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    इमेज कैप्शन, मोरक्को के झंडे के साथ एक फ़ुटबॉल फ़ैन

    फ़ीफ़ा विश्वकप में रविवार को मोरक्को ने बड़ा उलटफेर करते हुए बेल्जियम पर 2-0 से जीत दर्ज की. इसके बाद बेल्जियम और नीदरलैंड्स के कई शहरों में दंगे शुरू हो गए.

    पुलिस ने बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स से भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें की और दर्जन भर से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है. इसके अलावा आंटवर्प शहर से भी आठ लोग हिरासत में लिए गए हैं. नीदरलैंड्स के रॉटरडैम में दो पुलिसवालों के घायल होने की भी जानकारी मिली है. हालांकि, रविवार देर शाम तक कई शहरों में शांति दिखी.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने ब्रसेल्स में कई वाहनों को फूंक दिया.

    नीदरलैंड्स की राजधानी एम्सटरडैम में भी दंगारोधी पुलिस को तैनात कर दिया गया. यहाँ सैकड़ों लोगों ने इकट्ठे होकर आतिशबाज़ी की और आग लगानी शुरू कर दी थी. इसके अलावा हेग से भी हिंसा के मामले सामने आए हैं. मोरोक्को के फ़ुटबॉल प्रशंसकों की भीड़ को हटाने के लिए नीदरलैंड्स की पुलिस ने तीन शहरों में लाठी चार्ज किया.

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    समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार दर्जनों प्रशंसकों ने दुकानों की खिड़कियां तोड़ दी और वाहनों में आग लगा दी थी. पुलिस ने कहा कि कुल 11 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और अभी भी एक हिरासत में है.

    ब्रसेल्स पुलिस ने एक बयान में कहा कि मैच ख़त्म होने से पहले ही दर्जनों लोग पुलिस के साथ झड़प करने लगे, जिससे लोगों की सुरक्षा ख़तरे में आ गई. एक प्रवक्ता ने बताया कि फ़ुटबॉल प्रशंसक लाठी-डंडों के साथ पहुंचे थे और एक पत्रकार आग की वजह से घायल हो गया.

    बेल्जियम मोरक्को मूल के करीब पांच लाख लोगों का घर है. देश के पूर्वी हिस्से में करीब 50 लोगों ने एक पुलिस थाने पर हमला कर दिया और दो पुलिस वाहनों को नुक़सान पहुँचाया. पुलिस ने बाद में पानी की बौछार की.

  12. गुजरात चुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार ने अल्लाह और महादेव को बताया एक, बढ़ा विवाद

    इंद्रनील राजगुरु

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    इमेज कैप्शन, इंद्रनील राजगुरु

    गुजरात में विधानसभा चुनावों से पहले राजकोट से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार इंद्रनील राजगुरु ने अजमेर और सोमनाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर की गई अपनी टिप्पणी से विवाद छेड़ दिया है.

    राजकोट (पूर्व) से चुनाव लड़ रहे इंद्रनील राजगुरु ने शनिवार को एक सभा संबोधित की, जिसमें अधिकांश जनता मुस्लिम समुदाय से थी. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इंद्रनील राजगुरु ने यहां भीड़ से 'हर-हर महादेव' भी बुलवाया.

    उन्होंने कहा, "मेरी नज़र में महादेव और अल्लाह एक ही हैं. महादेव अजमेर में बसते हैं और अल्लाह सोमनाथ में. अल्लाहु अक़बर."

    अजमेर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरग़ाह है और सोमनाथ शिव के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है.

    इंद्रनील राजगुरु कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं लेकिन कुछ समय के लिए वो आम आदमी पार्टी में चले गए थे. अब उन्हें फिर से कांग्रेस ने टिकट दी है.

    राजगुरु का ये बयान इंटरनेट पर भी वायरल हो रहा है.

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    इस पर इंद्रनील राजगुरु ने कहा, "इंटरनेट पर मेरा अल्लाह हू अक़बर कहते वीडियो वायरल हो रहा है. उसी वीडियो में लोगों को ये भी दिखेगा कि पांच हज़ार मुस्लिम लोगों की भीड़ हर हर महादेव के नारे लगा रही है."

    बीजेपी ने इंद्रनील राजगुरु के बयान को आपत्तिजनक बताया है. वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार ने आरोप लगाया है कि बीजेपी उनके बयान को गलत संदर्भ में वायरल कर रही है.

    इंद्रनील ने कहा, "मैंने उनसे (भीड़) कहा कि अगर मुझे अल्लाह का नाम लेने में शर्म नहीं आती, तो क्या आपको महादेव का नाम लेने में शर्म आनी चाहिए? जब मैंने 'अल्लाह हू अक़बर' कहा तो 5 हज़ार लोगों ने 'हर-हर महादेव' का नारा लगाया. ये वीडियो की सच्चाई है."

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार राजकोट पूर्व से बीजेपी उम्मीदवार उदय कांगड ने कहा, "बहुत बड़ा अंतर है. इस तरह के बयान हिंदू समुदाय के लिए आपत्तिजनक हैं. सोमनाथ की देशभर में पूजा होती है, ये पहला ज्योतिर्लिंग है. किसी को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए."

    गुजरात की 182 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में 1 और 5 दिसंबर को मतदान होना है. नतीजे 8 दिसंबर को घोषित होंगे.

  13. चीन में प्रदर्शन के दौरान बीबीसी पत्रकार गिरफ़्तार, रिहाई से पहले पुलिस ने पीटा

    चीन विरोध प्रदर्शन

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    चीन में कोविड पाबंदियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों को कवर करने के दौरान गिरफ़्तार किए गए बीबीसी संवाददाता एड लॉरेंस को रिहा कर दिया गया है. लेकिन हिरासत में पुलिस ने उनके साथ बर्बर रवैया अपनाया.

    बीबीसी की ओर से जारी बयान के अनुसार, शंघाई में विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ़्तार पत्रकार एड लॉरेंस को रिहा करने से पहले पुलिस ने उनके हाथ बांधे, पीटाऔर उन्हें लात तक मारी. ये तब हुआ जब वो एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के तौर पर काम कर रहे थे.

    बीबीसी ने कहा है, "अपना काम करते हुए हमारे एक पत्रकार के साथ ऐसा हमला, चिंताजनक है. चीन की ओर से अभी तक औपचारिक तौर पर न तो सफ़ाई दी गई है और न ही माफ़ी मांगी गई है. कुछ अधिकारियों ने बाद में दावा किया कि पत्रकार को उनकी ही भलाई के लिए गिरफ़्तार किया गया ताकि, भीड़ से वो कोरोना संक्रमित न हो जाएं. बीबीसी इसे विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं मानता."

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    चीन में कोरोना की पाबंदियों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी है. उरूमची में एक इमारत के अंदर आग लगने से 10 लोगों की मौत के बाद ये प्रदर्शन शुरू हुए थे. लोगों का मानना है कि सख़्त प्रतिबंध इन मौतों की असली वजह है.

  14. तस्वीरों में: चीन के पाँच बड़े शहरों तक पहुंचा कोविड पाबंदियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

    चीन विरोध प्रदर्शन

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    इमेज कैप्शन, बीजिंग में अपना आक्रोश दिखाने के लिए प्रदर्शनकारी सफेद कागज़ लेकर पहुंचे.

    चीन के उरूमची में एक इमारत में आग लगने की वजह से 10 लोगों की जान चली गई. लोगों का मानना है कि सख़्त कोविड प्रतिबंध इन मौतों की वजह है. हालांकि, प्रशासन इस आरोप को ख़ारिज कर रहा है.

    लेकिन इन मौतों के बाद चीन की जनता का कोरोना प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा फूट गया है और वो सड़कों पर आ गए हैं. लोग राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ख़िलाफ़ भी नारेबाज़ी कर रहे हैं. चीन में ऐसे विरोध प्रदर्शन असमान्य हैं.

    चीन प्रदर्शन

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    इमेज कैप्शन, उरूमची इमारत में हुए हादसे के पीड़ितों की याद में लोगों ने जलाई मोमबत्तियां.
    चीन

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    इमेज कैप्शन, प्रदर्शन बढ़ता देख, पुलिस ने अलग-अलग जगहों को घेर लिया है.
    चीन विरोध प्रदर्शन

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    इमेज कैप्शन, नानजियांग में प्रदर्शनकारी कम्युनिकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ़ चाइना में जुटे.
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    इमेज कैप्शन, रविवार को शंघाई में पुलिस अधिकारियों ने उरूमची की ओर जाने वाली सड़क को बंद कर दिया.
  15. लंदन पहुंचा चीन का प्रदर्शन, दूतावास के बाहर जुटे लोग

    चीन प्रदर्शन

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    कोरोना की रोकथाम के लिए कड़े प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ चीन में हो रहे प्रदर्शनों के बीच लंदन में चीन के दूतावास के बाहर रविवार को सैकड़ों लोग जुटे.

    इनमें से कुछ ने फूलों और मोमबत्तियों के ज़रिए उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने चीन के उरूमची में एक इमारत में आग लगने की वजह से जान गंवा दी.

    चीन में अधिकतर लोग सख़्त कोरोना प्रतिबंधों को इन मौतों की वजह बता रहे हैं. हालांकि, चीनी प्रशासन इस आरोप को ख़ारिज कर रहा है.

    चीन में सरकार की 'ज़ीरो कोविड नीति' के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध बढ़ रहा है.

    चीन प्रदर्शन

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    लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) को लागू करने के लिए लगाई गई पाबंदियों को तोड़ दिया है और अब बड़ी तादाद में लोग शहरों और यूनिवर्सिटी कैंपस में सड़क पर उतर आए हैं.

    चीन में कड़ाई के बावजूद कोरोना के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए जा रहे हैं. बुधवार को चीन में कोरोना के 31 हज़ार 527 नए मामले दर्ज किए गए जो कि अप्रैल के पीक 28 हज़ार से अधिक हैं.

    माना जा रहा है कि चीन की ज़ीरो कोविड पॉलिसी ने कोरोना से मरने वालों की संख्या को कम किया है लेकिन इसकी वजह से अर्थव्यवस्था और आम लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

  16. नमस्कार, बीबीसी हिंदी के लाइव पेज में आपका स्वागत है. अभिवादन स्वीकार कीजिए.

    ये लाइव पेज 24 घंटे उपलब्ध रहेगा. 27 नवंबर केअपडेट्स के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.

    आज की अहम ख़बरें-

    • चीन में कोरोना के सख़्त प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी, शी जिनपिंग से पद छोड़ने की मांग कर रहे लोग.
    • राजकोट से कांग्रेस उम्मीदवार इंद्रनील राजगुरु ने 'महादेव और अल्लाह को एक' बताया, बढ़ा विवाद.
    • पीटी ऊषा का इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन का प्रमुख बनना लगभग तय, इस पद पर वो पहली महिला होंगी.