गुजरात के मोरबी में बीती
रात हुए पुल हादसे में अब तक कम से कम 132 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है.
बीबीसी संवाददाता तेजस वैद्य
ने राहतकर्मियों से बात करके बचाव अभियान से जुड़ी ताजा जानकारियां जुटाने की
कोशिश की है.
एनडीआरएफ़ के अधिकारी
प्रसन्ना कुमार ने बीबीसी को बताया है कि उनकी टीमों को बचाव अभियान में किस तरह
की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने कहा, “यहां पर पानी ठहरा हुआ है और ये
पानी सीवेज़ वॉटर है. इस वजह से पानी में देखना बहुत मुश्किल है. हमारे गोताखोर
रात के टाइम पर पानी में लाइट लेकर उतरें तब भी दिखाई नहीं पड़ता है. हमारे लिए ये
बहुत बड़ी चुनौती है. अब सुबह होने के बाद स्थिति बेहतर होनी चाहिए.
इस
पानी को निकालना मुश्किल है. हमारे गोताखोर इसी पानी में से लोगों को निकालने की
कोशिश कर रहे हैं. यहां पर हमारी पांच टीमें तैनात हैं जिसमें लगभग 125 बचावकर्मी
शामिल हैं. इसके साथ ही हमारे पास नावों के साथ-साथ गहरे पानी में उतरने वाले
गोताखोर और ज़रूरी उपकरण मौजूद हैं.”
इसके साथ ही राजकोट के
ज़िलाध्यक्ष अरुण महेश बाबू ने बताया है कि ‘मौके पर एसडीआरएफ़
की दो टीमें, एनडीआरएफ़ की एक स्थानीय टीम और बड़ौदा से आई एक टीम मौजूद है. इसके
साथ ही आर्मी, एयरफोर्स, दमकल विभाग से लेकर नगर निकायों की टीमें बचाव अभियान में
लगी हुई हैं.’
राजकोट के मुख्य दमकल अधिकारी इलेश खेर ने बताया है, “राजकोट फायर बिग्रेड ने छह नावों, छह एंबुलेंस, दो रेस्क्यू वैन और साठ जवानों को तैनात किया है. इसके साथ ही बड़ौदा, अहमदाबाद, गोंडाल, जामनगर और कच्छ से आईं कुल 20 नावें बचाव अभियान चला रही हैं.”