किम कार्दशियन पर क्यों लगा 1.26 मिलियन डॉलर का जुर्माना
अपने इंस्टाग्राम पेज पर इथिरियम मैक्स को अवैध रूप से प्रमोट करने के आरोप में किम कार्दशियन 1.26 मिलियन डॉलर का जुर्माना देने को तैयार हो गई हैं.
लाइव कवरेज
प्रेरणा ., रजनीश कुमार and ब्रजेश मिश्र
सऊदी अरब ने उमराह करने वालों का वीज़ा तीन महीने के लिए बढ़ाया
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इमेज कैप्शन, सऊदी के हज और उमराह मंत्री डॉ. तवफ़ीक़-अल-रबियाह
सऊदी अरब की सरकार ने सभी देशों के
नागरिकों के लिए उमराह का वीज़ा तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है.
सऊदी के हज और उमराह मंत्री डॉ. तौफ़िक़-अल-रबियाह ने उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे के आख़िरी दिन घोषणा की.
सऊदी गैजेट के मुताबिक़, डॉ. अल-रबियाह ने उज्बेकिस्तान और उसकी
जनता के विकास के लिए सऊदी किंग सलमान और क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद
बिन सलमान की प्रतिबद्धता को भी ज़ाहिर किया.
दोनों देशों के बीच बातचीत मुख्य रूप से
हज और उमराह को लेकर हुई.
सऊदी सरकार के मंत्री ने बताया कि
कोरोना महामारी के बाद यात्रा पर लगे प्रतिबंध कम होने और अधिक लोगों को अनुमति
देने की वजह से इस साल क़रीब 12000 उज़्बेक नागरिक हज के लिए गए.
उन्होंने यह भी बताया कि बीते दो
महीनों में 36000 से अधिक उज़्बेक नागरिकों ने उमराह किया है. इनमें से अधिकतर लोग
मदीना भी गए.
दोनों देशों के बीच पारस्परिक संबंध मज़बूत
करने को लेकर भी बातचीत हुई. साथ ही उमराह के लिए वीज़ा आसानी से मिलने और यात्रा
को बेहतर बनाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई.
नेटो प्रमुख बोले- पुतिन ने ये ग़लती की तो बहुत महंगा पड़ेगा
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इमेज कैप्शन, नेटो के महासचिव जेन्स स्टॉलटेनबर्ग
नेटो के महासचिव जेन्स स्टॉलटेनबर्ग ने
यूक्रेन में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर रूस को ‘गंभीर परिणाम भुगतने’ की चेतावनी दी है.
उन्होंने रविवार को कहा, ‘‘परमाणु हथियारों को लेकर हो रही बयानबाजी ख़तरनाक है और यह बड़ी
लापरवाही है और किसी भी तरह के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध के
तरीक़े को बदल सकता है.’’
नेटो महासचिव ने कहा, ‘‘परमाणु युद्ध कभी न तो लड़ा जाना चाहिए और न ही जीता जा सकता है. ये
संदेश स्पष्ट रूप से नेटो और उसके सहयोगी रूस को देना चाहते हैं.’’
स्टॉलटेनबर्ग का ये बयान ऐसे समय पर आया
है, जब यूक्रेन में अपनी सेना पर बढ़ते दबाव और कई इलाकों में हार के बाद रूस के
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु हथियार इस्तेमाल करने के संकेत दिए हैं.
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रूस के लोग ही कर रहे अपनी सेना की आलोचना
पश्चिमी देशों के नेता और सरकारें यह मानती हैं कि बीते शुक्रवार के बाद से यह ख़तरा और बढ़ा है, जब राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र में चार इलाक़ों को आधिकारिक तौर पर रूस का हिस्सा घोषित कर दिया.
वहीं यूक्रेन का दावा है कि उसकी सेनाओं ने पूर्व में दोनेत्स्क प्रांत के लाइमन इलाके पर फिर से कब्जा कर लिया है. लाइमन को रेलवे हब के रूप में जाना जाता है.
लाइमन में रूसी सेना की हार के कारण रूस के सैन्य नेतृत्व की काफ़ी आलोचना हो रही है. इसके बाद पुतिन के कुछ करीबियों ने यूक्रेन और मज़बूत हमला करने की मांग शुरू कर दी है. कुछ कट्टर राष्ट्रवादी कम असर वाले परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की वकालत भी कर रहे हैं.
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रूस को चेतावनी
रूसी नेता रमज़ान कादिरोव ने शनिवार को कहा कि युद्ध में रूस की रणनीति में बदलाव की जरूरत है. रूस को ‘‘सीमा वाले इलाकों में मार्शल लॉ लागू करने और यूक्रेन पर कम असर वाले परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की जरूरत है.’’
टैक्टिकल परमाणु हथियार कम असरदार होते हैं. ये पारंपरिक हथियारों के मुकाबले 10 फीसदी ही असर डालते हैं.
स्टॉलटेनबर्ग ने नेटो देशों के इनफ्रास्ट्रक्टर पर हमले को लेकर भी रूस को चेतावनी दी है. उन्होंने संकेत दिए हैं कि नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन लीक भी किसी साजिश के तहत हुआ है.
उन्होंने कहा लाइमन में जिस तरह रूस की सेना को पीछे हटना पड़ा वो यूक्रेन के साहस और बहादुरी को दिखाता है. उन्होंने इसके लिए अमेरिका और नेटो के दूसरे देशों की ओर से दिए जा रहे हथियारों को भी वजह माना.
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नेटो क्या है?
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी
ऑर्गेनाइज़ेशन यानी नेटो दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में बना था. इसे
बनाने वाले अमेरिका, कनाडा और अन्य पश्चिमी देश थे. इसे इन्होंने सोवियत यूनियन
से सुरक्षा के लिए बनाया था. तब दुनिया दो ध्रुवीय थी. एक महाशक्ति अमेरिका था और
दूसरी सोवियत यूनियन.
शुरुआत में नेटो के 12 सदस्य देश थे.
नेटो ने बनने के बाद घोषणा की थी कि उत्तरी अमेरिका या यूरोप के इन देशों में से
किसी एक पर हमला होता है तो उसे संगठन में शामिल सभी देश अपने ऊपर हमला मानेंगे.
नेटो में शामिल हर देश एक दूसरे की मदद करेगा.
लेकिन दिसंबर 1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद कई चीज़ें बदलीं. नेटो जिस मक़सद से बना था, उसकी एक बड़ी वजह
सोवियत यूनियन बिखर चुका था. दुनिया एक ध्रुवीय हो चुकी थी. अमेरिका एकमात्र
महाशक्ति बचा था. सोवियत यूनियन के बिखरने के बाद रूस बना और रूस आर्थिक रूप से
टूट चुका था.
जयशंकर के बयान पर पाकिस्तान के लोग कर रहे ऐसी टिप्पणी
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भारत के विदेश मंत्री एस
जयशंकर की एक टिप्पणी को लेकर पाकिस्तान के लोग नाराज़गी ज़ाहिर कर रहे हैं.
शनिवार को भारतीय विदेश मंत्री ने कहा था कि वैश्विक स्तर पर भारत की विशेषज्ञता
आईटी यानी इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी में है. दूसरी ओर पड़ोसी पाकिस्तान भी आईटी में
एक्सपर्ट है लेकिन उसकी आईटी इंटरनेशनल टेररइज़म है.
भारतीय विदेश मंत्री 'मोदी युग की विदेश नीति में भारत के उभार' विषय पर बोल रहे थे. एस जयशंकर की यह टिप्पणी सोशल मीडिया
पर छा गई लेकिन पाकिस्तान के लोग इससे ख़फ़ा हैं.
ब्रिटेन में पाकिस्तान के
उच्चायुक्त मोहम्मद नफ़ीस ज़कारिया ने जयशंकर को निशाने पर लेते हुए कहा, ''यह शर्मनाक है कि एक ज़िम्मेदार पद पर बैठे लोग
ग़ैर-ज़िम्मेदार बयान देते हैं. जयशंकर आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि भारतीय एजेंट
कुलभूषण जाधव रंगे हाथ पकड़े गए थे. कुलभूषण जाधव पाकिस्तान में आतंकवादी
गतिविधियों में शामिल थे.''
भारत में पाकिस्तान के
उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने भी भारतीय विदेश मंत्री के बयान पर आपत्ति जताई
है.
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अब्दुल बासित ने कहा, ''भारत ने आईटी में कामयाबी हासिल की है. इसकी तारीफ़ होनी
चाहिए. लेकिन जयशंकर जो हमारी आईटी को लेकर तंज़ कर रहे हैं वो ठीक नहीं है. मेरा
मानना है कि भारत एक और आईटी में बहुत आगे है और वह है- इंटरनेशनल ट्रिकरी. भारतीय
विदेश मंत्री ने मुंबई हमले का हवाला दिया और कहा कि ट्रायल में पाकिस्तान
जानबूझकर देरी कर रहा है. लेकिन सच यह है कि देरी भारत की वजह से हो रही है. हम
समझौता ब्लास्ट की तरह मुक़दमा नहीं लड़ना नहीं चाहते हैं.''
अब्दुल बासित ने कहा, ''अजमल कसाब को फांसी लगाने में भारत ने जल्दबाज़ी की. अजमल
कसाब ज़िंदा होता तो कई चीज़ें सामने आतीं. भारत पाकिस्तान को लेकर ग़लत सूचनाएं
देता है. एफ़एटीएफ़ के मामले में देखा जा सकता है. भारत पाकिस्तान के ख़िलाफ़
प्रॉपेगैंडा करता रहता है. भारत का ख़्याल यही था कि इमरान ख़ान की हुकूमत के बाद
चीज़ें बदलेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ इसलिए उसने प्रॉपेगैंडा फैलाना शुरू कर दिया.''
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RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने बढ़ती ग़रीबी और बेरोज़गारी पर जताई चिंता
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इमेज कैप्शन, राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ यानी आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले
राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ यानी आरएसएस के
महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को देश में बढ़ती ग़रीबी, बेरोज़गारी
और विषमता का मुद्दा उठाया.
होसबाले ने कहा कि ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए
जिससे उद्यमशीलता को बढ़ावा मिले ताकि नौकरी चाहने वाले लोग नौकरी देने की स्थिति
में आ जाएं.
होसबाले ने आरएसएस से जुड़े संगठन स्वदेशी
जागरण मंच की ओर से आयोजित एक वेबिनार में रविवार को कहा, ''देश में ग़रीबी
दानव की तरह खड़ी है. यह महत्वपूर्ण है कि हम इस दानव को ख़त्म करें. अब भी 20
करोड़ लोग ग़रीबी रेखा से नीचे हैं. यह आँकड़ा दुखी करने वाला है. 23 करोड़ लोग हर
दिन 375 रुपए से भी कम कमा रहे हैं. चार करोड़ लोगों के पास कोई काम नहीं है. श्रम
शक्ति सर्वे का कहना है कि बेरोज़गारी दर 7.6 फ़ीसदी है.''
होसबाले ने कहा कि दूसरी बड़ी चुनौती देश में
बढ़ती आर्थिक विषमता है. उन्होंने कहा, ''एक तस्वीर है कि भारत दुनिया की छह
बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. लेकिन क्या यह अच्छी स्थिति है? शीर्ष
के एक फ़ीसदी लोगों के पास राष्ट्र की 20 फ़ीसदी आय है. दूसरी तरफ़ देश की 40
फ़ीसदी आबादी के पास राष्ट्र की महज़ 13 फ़ीसदी आय है.''
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ग़रीबी और विकास पर संयुक्त राष्ट्र के अवलोकन
का हवाला देते हुए होसबाले नेकहा,
''देश
के बड़े हिस्से में लोगों को साफ़ पानी और पोषण युक्त खाना नहीं मिल रहा है. आपसी
कलह और ख़राब शिक्षा व्यवस्था के कारण भी ग़रीबी बढ़ रही है. जलवायु परिवर्तन के
कारण भी ग़रीबी बढ़ रही है. दूसरी ओर सरकार की अक्षमता भी ग़रीबी बढ़ाने में मदद
कर रही है.''
होसबाले ने कहा, ''केवल शहरों में
ही नौकरियां मिलेंगी के आइडिया से गाँव ख़ाली हो रहे हैं और शहरों की ज़िंदगियां
नर्क बन गई हैं. कोविड के दौरान एक मौक़ा था कि हम ग्रामीण क्षेत्रों में नौकरियां
पैदा करते. स्थानीय स्तर पर स्थानीय प्रतिभाओं को मौक़ा मिलना चाहिए. इसीलिए हमने
स्वाभिमानी भारत अभियान की शुरुआत की है. हमें केवल अखिल भारतीय स्तर पर योजना
शुरू करने से लक्ष्य हासिल नहीं होगा बल्कि स्थानीय स्तर पर भी योजनाएं लानी
होंगी. हम इसे कृषि, कौशल विकास और मार्केटिंग के ज़रिए कर सकते
हैं. हमें वैसे लोगों की ज़रूरत है जो उद्यमों में दिलचस्पी रखते हैं.''
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इमेज कैप्शन, राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ यानी आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले
यूपी: भदोही में दुर्गा पूजा पंडाल में आग लगने से तीन की मौत, 67 लोग झुलसे
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इमेज कैप्शन, भदोही के ज़िलाधिकारी गौरांग राठी
उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िले में
रविवार रात एक दुर्गा पूजा पंडाल में आग लगने से तीन लोगों की मौत हो गई और 67 लोग
झुलस गए.
हादसे में गंभीर रूप से घायल 43 लोगों
को वाराणसी भेजा गया है और तीन लोगों को प्रयागराज में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया
गया है.
भदोही के ज़िलाधिकारी गौरांग राठी ने
एक ट्वीट करके बताया कि मरने वालों में दो बच्चे और एक महिला शामिल हैं.
दोनों बच्चों की उम्र 10 से 12 साल के
बीच थी जबकि महिला की उम्र क़रीब 45 साल थी.
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ज़िलाधिकारी ने बताया कि ज़िले के औराई थाना क्षेत्र में बाल एकता क्लब नरथुआ हर साल दुर्गा पंडाल लगाता है. रविवार देर शाम आरती के समय पंडाल में अचानक आग लग गई.
आनन-फानन में फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने आग बुझाने की कोशिशें शुरू कीं.
बताया जा रहा है कि दुर्गा पूजा का यह पंडाल कागज और थर्माकोल से गुफा के आकार में बनाया गया था. देर शाम आरती के समय यहाँ काफ़ी भीड़ भी थी.
ज़िलाधिकारी ने कहा कि घटना की जांच के लिए चार सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है.
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श्रीभगवद् गीता पार्क में तोड़फोड़ पर भारत ने उठाए सवाल, कनाडा ने दिया जवाब
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कनाडा के ब्रैम्पटन में हाल ही में ‘श्रीभगवद् गीता’ नाम से खुले पार्क
में तोड़फोड़ की भारत ने निंदा की है.
रविवार को भारत ने प्रशासन से इस मामले की
जांच करने और हेट क्राइम की साज़िश रचने वालों पर सख़्त कार्रवाई की मांग की.
हालांकि
ब्रैम्पटन के मेयर पैट्रिक ब्राउन और स्थानीय पुलिस का कहना है कि पार्क में किसी
तरह की तोड़फोड़ नहीं हुई है.
पहले ट्रॉयर्स
पार्क कहे जाने वाले इस पार्क का उद्घाटन 28 सितंबर को किया गया.
कनाडा में भारतीय
उच्चायोग ने ट्वीट किया, ‘‘हम ब्रैम्पटन में श्रीभगवद् गीता पार्क में हेट क्राइम की घटना की
निंदा करते हैं. हम कनाडाई प्रशासन और पील प्रांतीय पुलिस से मामले की जांच करने
और साज़िश रचने वालों पर तुरंत एक्शन लेने की अपील करते हैं.’’
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पार्क में तोड़फोड़ का यह मामला कनाडा में एक अन्य मंदिर में हुई तोड़फोड़ के कुछ दिनों बाद आया है.
इस बीच बीजेपी ने श्रीभगवद् पार्क में तोड़फोड़ पर चिंता जताई है. बीजेपी में विदेश मामलों के प्रकोष्ठ के संयोजक विजय चौथाईवाले ने ब्रैम्पटन के मेयर पर इस घटना को लेकर सवाल उठाए.
उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘कनाडा में एक और हिंदू प्रतीक पर हमला. मेयर पैट्रिक ब्राउन की ओर से एक और ख़ाली ट्वीट.’’
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'पार्क में तोड़फोड़ नहीं हुई'
घटना की जानकारी होने पर मेयर ब्राउन ने पील रीजनल पुलिस को इसकी जांच के आदेश दिए थे और कहा था कि ऐसी घटनाओं को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
हालांकि सोमवार सुबह मेयर पैट्रिक ब्राउन ने ट्वीट करके बताया कि पार्क में तोड़फोड़ की शिकायत सही नहीं है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमें पता चला है कि पार्क में साइन बोर्ड लगाते समय ख़राब हो गया था और एक सिटी स्टाफ मेंबर इसे ठीक करने के लिए वापस ले आया, जिसकी सूचना किसी को नहीं थी.’’
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पील रीजनल पुलिस ने भी ट्वीट किया और बताया कि पार्क के बोर्ड या किसी अन्य हिस्से पर कोई तोड़फोड़ नहीं हुई है.
पार्क के उद्घाटन के समय वहां अस्थायी साइन बोर्ड लगाया गया था. स्थायी साइन बोर्ड लगाया जाना अभी बाकी है.
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ईरान में सुरक्षाबलों और छात्रों के बीच झड़प, पुलिस ने चलाई गोलियां
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ईरान में हिजाब के विरोध में चल रहे प्रदर्शन
के दौरान रविवार को देश की एक चर्चित यूनिवर्सिटी में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प
हुई.
सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स
के मुताबिक, सुरक्षाबलों ने भीड़ को हटाने के लिए फायरिंग की. सुरक्षाबलों से बचने
के लिए छात्र भागते दिखे.
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन सितंबर
महीने में एक युवती की पुलिस हिरासत में मौत के बाद शुरू हुए.
22 साल की महसा अमीनी को पुलिस ने हिजाब
क़ानून का पालन न करने के आरोप में गिरफ़्तार किया था, जिसके कुछ घंटों बाद वो कोमा
में चली गई.
आरोप है कि पुलिस ने अमीनी को बुरी तरह
पीटा और उनके सिर गाड़ी से टकराया. यह भी आरोप है कि पुलिस ने अमीनी के सिर पर
डंडे मारे.
हालांकि पुलिस इन आरोपों का खंडन कर
रही है और उसका कहना है कि अमीनी की मौत ‘अचानक आए
हार्ट अटैक’ की वजह से हुई.
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छात्रों पर खुली फायरिंग
महसा अमीनी के अंतिम संस्कार के दौरान विरोध प्रदर्शन शुरू हुए और देखते ही देखते देश भर में फैल गया. बीते कई वर्षों में यह ईरान में फैली सबसे ख़राब अशांति है.
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि ईरान की शरीफ़ यूनिवर्सिटी में कैसे फ़ायरिंग के बीच छात्र सुरक्षाबलों से बचने के लिए भाग रहे हैं.
एक अन्य वीडियो में सुरक्षाकर्मी एक कार में बैठे लोगों को निशाना बनाकर गोली चलाते दिखे. ये लोग कार में बैठकर विरोध-प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग कर रहे थे.
रविवार को कई स्टूडेंट पहली बार शरीफ़ यूनिवर्सिटी में पहुंचे थे. कहा जा रहा है कि यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर स्टूडेंट जमा हो गए और यहीं से झड़प की शुरुआत हुई.
बीबीसी इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका है.
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बीती दो रातों में ईरान की राजधानी तेहरान समेत बाकी इलाकों में भी विरोध प्रदर्शन और तेज़ हुए हैं. विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के मरने का आंकड़ा भी बढ़ रहा है.
नॉर्वे स्थित एक एनजीओ ईरान ह्यूमन राइट्स के अनुसार देशभर में अब 133 लोगों की मौत हुई है.
प्रशासन का कहना है कि वो प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटेगा और विरोध प्रदर्शन को दुश्मन की साजिश बताया है.
नमस्कार, बीबीसी हिंदी के लाइव पेज में आपका स्वागत है. अभिवादन स्वीकार करिए ब्रजेश मिश्र का.
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