उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने एक अभूतपूर्व फ़ैसला लेते हुए उत्तराखंड विधानसभा में हुई 228 विवादित भर्तियां रद्द कर दी हैं.
इन भर्तियों की जांच के बाद विधानसभा अध्यक्ष 2016 में की गई 150 और 2020-21 में की गई 78 भर्तियों को निरस्त करने का प्रस्ताव सरकार को भेज रही हैं. साथ ही मौजूदा विधानसभा सचिव को भी निलंबित कर दिया गया है.
बता दें कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सरकारी नौकरियों में घोटालों के सामने आने के बाद विधानसभा में बैकडोर भर्तियों पर भी सवाल उठने लगे थे.
इसके बाद तीसरी विधानसभा के अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल और चौथी विधानसभा के अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने ऐसी भर्तियां करने की बात स्वीकार भी की थी. इसके बाद मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से ऐसी नियुक्तियों की जांच का आग्रह किया था.
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने तीन सितंबर को ऐसी भर्तियों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था जिसे एक महीने में अपनी रिपोर्ट देनी थी लेकिन समिति ने अपना काम पहले ही पूरा कर लिया.
गुरुवार देर रात जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय में हुई वर्ष 2016 की 150 तदर्थ नियुक्तियां रद्द की गई हैं.
खंडूड़ी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि साल 2020 की 6 तदर्थ नियुक्तियां और साल 2021 की 72 तदर्थ नियुक्तियों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है.
उन्होंने बताया कि समिति ने विधानसभा सचिवालय के रिकॉर्ड की जांच करने पर पाया कि वर्ष 2016, 2020 और 2021 में की गई तदर्थ नियुक्तियों में अनियमितताएं थीं. इन नियुक्तियों में विभिन्न पदों के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं हुआ है.
सेवा के विभिन्न पदों पर की गई भर्ती के लिए निर्धारित चयन समिति का गठन नहीं किया गया था, इसलिए ये तदर्थ नियुक्तियां चयन समिति के माध्यम से नहीं की गईं.
तदर्थ नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन या सार्वजनिक सूचना नहीं दी गई, न ही रोजगार कार्यालय से नाम मंगाए गए.
समिति ने इन नियुक्तियों को निरस्त करने की सिफारिश की थी जिसके आधार पर ये फ़ैसला लिया गया. इसके अलावा मौजूदा विधानसभा सचिव को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
प्रेमचंद अग्रवाल ने बतौर विधानसभा अध्यक्ष उन्हें चंद महीने में तीन प्रमोशन दे दिए थे ताकि उन्हें सचिव बनाया जा सके.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फ़ैसले के बाद ट्वीट कर कहा कि पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए अनुरोध पत्र के क्रम में अनियमित विधानसभा भर्तियों पर कार्रवाई प्रदेश सरकार की सुशासन नीति को लेकर प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
उन्होंने कहा, "माननीय विधानसभा अध्यक्ष जी द्वारा विवादित भर्तियों को रद्द करना अत्यंत सराहनीय कदम है. राज्य सरकार भविष्य में होने वाली भर्तियों में पूर्ण पारदर्शिता लाने हेतु एक कारगर नीति बनाने पर भी कार्य कर रही है."