एनडीटीवी को ख़रीदने की अडानी समूह की कोशिश में आया एक और मोड़

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अडानी समूह के मीडिया कंपनी एनडीटीवी की क़रीब 30 फ़ीसदी हिस्सेदारी ख़रीदने के मामले में एक नया मोड़ आया है.
नई दिल्ली टेलिविज़न लिमिटेड (एनडीटीवी) ने कहा है कि कर विभाग की अनुमति के बिना उसके संस्थापक कंपनी की हिस्सेदारी अडानी समूह को नहीं बेच सकते हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ एनडीटीवी ने बुधवार को एक्सचेंज फ़ाइलिंग में कहा है कि कर विभाग ने साल 2017 में एनडीटीवी के संस्थापक प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर कर पुनर्मूल्यांकन के तहत अपना हिस्सा बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था.
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कारोबारी गौतम अडानी के नियंत्रण वाले अडानी ग्रुप ने एनडीटीवी में परोक्ष रूप से क़रीब 30 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीदी है. अडानी ग्रुप ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज़ (एनएसई) को बताया कि वह एनडीटीवी में 26 फ़ीसदी हिस्सेदारी और ख़रीदने के लिए ओपन ऑफ़र भी लाएगा.
इसका मतलब ये है कि अडानी समूह का इरादा एनडीटीवी में मालिकाना हिस्सेदारी हासिल करने का है. अगर अडानी का ओपन ऑफ़र कामयाब रहा तो एनडीटीवी में उसकी कुल हिस्सेदारी 55 फ़ीसदी से अधिक हो जाएगी.
इस पूरे मामले की शुरुआत एक कम जानी-पहचानी कंपनी विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) से साल 2008 में हुई थी.

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क्या है पूरा मामला
प्रणॉय और राधिका रॉय ने 2008-09 में आरआरपीआर (राधिका रॉय प्रणॉय रॉय) होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए वीसीपीएल से चार अरब रुपए का क़र्ज़ लिया था.
इस क़र्ज़ के बदले वीसीपीएल को 29.18 फ़ीसदी रेहन में दिए गए थे. साथ ही ये विकल्प भी दिया गया था कि क़र्ज़ न चुका पाने की स्थिति में वे इन वाउचर्स का 99.5 फ़ीसदी हिस्सा इक्विटी में बदल सकते हैं.
ये क़र्ज़ 10 साल के लिए लिया गया था और इसकी अवधि 2019 में ख़त्म हो गई थी. लेकिन आरआरपीआर ने लिया गया क़र्ज़ नहीं चुकाया था.
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एनडीटीवी के प्रमोटर्स प्रणॉय रॉय के नाम कंपनी में 15.94 फ़ीसदी हिस्सेदारी है, जबकि उनकी पत्नी राधिका रॉय का कंपनी में 16.32 फ़ीसदी हिस्सा है. प्रणॉय और राधिका ही आरआरपीआर के प्रोमोटर्स थे, इस कंपनी के पास एनडीटीवी के 29.18 फ़ीसदी शेयर थे.
लेकिन, इसके कुछ दिनों बाद एनडीटीवी ने अडानी समूह को रोकने की एक और कोशिश की थी. एनडीटीवी ने इस बारे में रेगुलेटरी पाबंदियों का हवाला देते हुए कहा था कि अडानी ग्रुप की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकती है.
तब ये कहा गया था कि सेबी (सेक्यूरिटिज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया) ने प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर साल 2020 से शेयर बाज़ार में शेयर ख़रीदने और बेचने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. ऐसे में रॉय दंपति अडानी समूह को उन शेयरों का ट्रांसफ़र नहीं कर सकेंगे जिनके आधार पर अडानी एनडीटीवी का मालिकाना अधिकार हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
एनडीटीवी के इस दावे को खारिज करते हुए वीसीपीएल ने कहा था कि इस सौदे के लिए सेबी की मंज़ूरी की अनिवार्यता नहीं है. यह सौदा रॉय दंपति पर लगे प्रतिबंध के दायरे में नहीं आता है. सेबी के आदेश के मुताबिक इस मामले में आरआरपीआर कोई पक्ष नहीं है.
















