जम्मू-कश्मीर सरकार ने वोटर लिस्ट में 25 लाख नए वोटर जोड़े जाने की योजना को बताया ग़लत

जम्मू और कश्मीर में मतदाता सूची के रिवीज़न से जुड़ी ख़बरों में ग़लत तथ्य दिए जाने पर राज्य सरकार ने शनिवार को सफ़ाई दी है.
सरकार ने उन ख़बरों को ग़लत बताया है कि राज्य की मतदाता सूची में 25 लाख से अधिक नए नाम जोड़े जाएंगे.
साथ ही बताया है कि मतदाता सूची में कश्मीरी प्रवासियों के नाम जोड़े जाने के विशेष प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जैसा कि पहले दावा किया गया था.
सरकार ने यह भी कहा है कि जम्मू और कश्मीर में संपत्ति ख़रीदने और नौकरी पाने के नियमों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है. दावा यह भी किया गया है कि इन नियमों का वोटरों के प्रतिनिधित्व से कोई जुड़ाव नहीं है.
राज्य के सूचना और जनसंपर्क निदेशालय ने शनिवार को 'मतदाता सूची के रिवीज़न' से जुड़े विभिन्न प्रावधानों की सच्चाई बताने वाले एक ट्वीट को रिट्वीट करके ये जानकारियां दी हैं.
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और क्या कहा सरकार ने?
सरकार ने साफ किया है कि मतदाता सूचियों के इस रिवीज़न में जम्मू और कश्मीर के मौजूदा निवासियों को ही शामिल किया जाएगा.
सरकार के अनुसार हक़ीक़त ये है कि वोटरों की संख्या में केवल उतनी ही वृद्धि होगी जितने कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के नाम इस सूची में जुड़ेंगे.
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पाकिस्तान ने कल लगाए थे कई आरोप
पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव के पहले की तैयारियों को 'जान-बूझकर किया जा रहा हेर-फेर' और 'खुल्लम खुल्ला जोड़-तोड़' करार दिया था.
पाकिस्तान ने कई आरोप लगाते हुए चुनाव के लिए भारत सरकार के प्रयासों को ख़ारिज कर दिया था.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा था, ‘‘भारत प्रशासित कश्मीर में बाहरी कामगारों और सुरक्षाकर्मियों सहित अस्थायी निवासियों को वोटर के रूप में रजिस्टर होने की अनुमति देना, तथाकथित चुनाव के नतीजे को प्रभावित करने की भारतीय तरीक़े की स्पष्ट अभिव्यक्ति है.’’
उसने भारत पर कश्मीर की मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी को अल्पसंख्यक तबके में बदलने के लिए कोशिश करने का आरोप लगाया था.
उसका आरोप था कि तथाकथित ‘परिसीमन’ आयोग के फ़ॉर्मूले और उसकी रिपोर्ट के ज़रिए लाखों बाहरी लोगों को ‘नकली’ कश्मीरी डोमिसाइल देकर और संपत्ति क़ानून में बदलाव लाकर भारत ऐसा करने की कोशिश कर रहा है.
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कश्मीर के 'जनसंख्या के स्वरूप को बदलने के भारत के प्रयास' को रोकने की मांग की थी.

इमेज स्रोत, ANI
राज्य के सीईओ ने दिया था बयान
इससे पहले राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी हिरदेश कुमार ने गुरुवार को कहा था कि यहाँ रह रहे बाहर के लोगों को राज्य में मतदान करने पर कोई रोक नहीं है.
उन्होंने कहा था कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई जम्मू और कश्मीर में कितने समय से रह रहा है. उनके अनुसार बाहर के लोग जम्मू और कश्मीर में रह रहे हैं या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग लेगा.
उन्होंने बताया था कि राज्य में रहने वाले लोग भी वहाँ वोट डाल सकते हैं. उनके इस बयान की राज्य के विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की थी.








