महाराष्ट्र में दही हांडी को मिलेगा खेल का दर्जा, बीमा से लेकर सरकारी नौकरी तक देंगे- महाराष्ट्र सीएम
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दही हांडी को खेल श्रेणी के तहत मान्यता देने की बात कही है.
लाइव कवरेज
प्रियंका झा and भूमिका राय
युआन वांग 5: चीन का ये 'जासूस जहाज़' क्यों बना भारत का सिरदर्द?
चीन उसे एक "रिसर्च शिप" कहता है. यानी एक ऐसा नौसैनिक जहाज़ जिसका काम समुद्र में वैज्ञानिक अनुसंधान करना है.
भारत और अमेरिका जैसे देश उसे एक "स्पाई शिप" मानते हैं. यानि एक ऐसा जहाज़ दो दूसरे देशों की जासूसी करने के लिए तैनात किया जाता है.
युआन वांग 5 नाम के चीनी नौसैनिक जहाज़ का 16 अगस्त को श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पहुँचाना भारत के लिए एक नया सिरदर्द बन गया है.
चीन का कहना है कि ये जहाज़ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने के लिए हंबनटोटा में रुका है.
अखिलेश यादव ने कहा- चुनाव आयोग की 'बेईमानी' के कारण हारे यूपी विधानसभा चुनाव
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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग की 'बेईमानी' के कारण उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा के उप चुनाव में हारी.
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उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत में ये दावा किया. इसी साल हुए यूपी के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जीत हासिल हुई और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सरकार का गठन हुआ.
403 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए गठबंधन ने 273 सीटें जीती, जबकि सपा गठबंधन को 125 सीटें मिली. कांग्रेस गठबंधन को दो और बहुजन समाज पार्टी को एक ही सीट मिल पाई.
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इंटरव्यू के दौरान अखिलेश यादव ने बिहार में राजनीतिक प्रगति को सकारात्मक कहा और उम्मीद जताई कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मज़बूत विकल्प उभरेगा.
हाल ही में बिहार में नीतीश कुमार ने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर राष्ट्रीय जनता दल के साथ सरकार बनाई है.
इंटरव्यू के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनका ध्यान पार्टी को मज़बूत करने पर है. उन्होंने कहा कि वे इस साल पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाएँगे.
LIVE: दिल्ली में किस हाल में रह रहे हैं रोहिंग्या शरणार्थी
LIVE: दिल्ली में किस हाल में रह रहे हैं रोहिंग्या शरणार्थी. मदनपुर खादर से बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा.
शाहनवाज़ हुसैन पर रेप का केस दर्ज करने के मामले में अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
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Author, सुचित्र मोहंती, बीबीसी हिंदी के लिए
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बिहार सरकार में मंत्री रहे बीजेपी नेता शाहनवाज़ हुसैन पर रेप का केस दर्ज करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अर्ज़ी पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट राज़ी हो गया है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अगले सप्ताह होगी.
साल 2018 में एक महिला ने शाहनवाज हुसैन पर कथित तौर पर बलात्कार करने और फिर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था.
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को शाहनवाज़ हुसैन के ख़िलाफ़ रेप का केस दर्ज करने का आदेश दिया था. बीजेपी नेता इस आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट गए थे.
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पुलिस अपनी रिपोर्ट में ये स्पष्टीकरण नहीं दे पाई है कि उसने एफ़आईआर दर्ज क्यों नहीं की थी. हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को तीन महीने में जाँच पूरी करने का निर्देश दिया था.
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कोर्ट ने कहा था कि एफ़आईआर किसी भी जाँच की शुरुआत की बुनियाद है. जाँच के बाद ही पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुँच सकती है कि अभियुक्त ने अपराध किया है या नहीं. मौजूदा मामले में, ऐसा लगता है कि पुलिस एफ़आईआर दर्ज करने से बच रही थी.
साल 2018 में दिल्ली की रहने वाली एक महिला ने निचली अदालत याचिका दायर कर कहा था कि शाहनवाज़ हुसैन के ख़िलाफ़ रेप के आरोप में एफ़आईआर दर्ज किए जाने का आदेश दिया जाए.
मजिस्ट्रेट अदालत ने 7 जुलाई 2018 को हुसैन के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने का आदेश दिया था. इस आदेश को बीजेपी नेता ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसे ख़ारिज कर दिया गया था.
इसके बाद बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी बीजेपी नेता की याचिका को ख़ारिज कर दिया था.
प्रशांत किशोर ने कहा- 10 लाख नौकरी दे दें नीतीश कुमार, तो छोड़ दूँगा 'सुराज अभियान'
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चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कहा है कि अगर बिहार की नई 'महागठबंधन' सरकार अगले एक या दो साल में 10 लाख़ युवाओं को नौकरी दे ती है तो वो अपना जन सुराज अभियान वापस ले लेंगे और नीतीश कुमार को समर्थन दे देंगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ बिहार के समस्तीपुर में मतदाताओं को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने ये भी कहा कि आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस की गठबंधन सरकार को जनता का समर्थन नहीं है.
एक समय नीतीश कुमार की पार्टी से जुड़े प्रशांत किशोर ने कहा, "नीतीश कुमार सीएम पद की कुर्सी से 'फ़ेविकॉल' लगाकर बैठ गए हैं, जबकि दूसरी पार्टियाँ उनके इर्द-गिर्द चक्कर काट रही हैं."
हाल ही में बिहार के उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि नई सरकार का हिस्सा बनने के बाद अब उनकी पार्टी साल 2020 में चुनाव के समय 10 लाख नौकरियाँ देने के वादे को पूरा करेगी.
नीतीश कुमार ने स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर पटना के गाँधी मैदान में अपने भाषण में कहा था कि उनका लक्ष्य सरकारी और निजी सेक्टर में 20 लाख़ नौकरियाँ देने का है. उन्होंने कहा था, "नई पीढ़ी के लोग (तेजस्वी यादव) हमारे साथ हैं, इसलिए हम मिलकर नौकरी देने के लिए काम करेंगे. हमारा लक्ष्य बिहार को विकसित राज्यों की सूची में शामिल करना है."
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रोज़गार को लेकर महागठबंधन की ओर से किए वादे पर प्रशांत किशोर ने प्रतिक्रिया दी, "अगर अगले एक या दो साल के अंदर 10 लाख़ नौकरियां दे दी गईं तो मैं अपने जन सुराज अभियान को वापस लेकर नीतीश कुमार को समर्थन दे दूंगा."
प्रशांत किशोर ने इस दौरान बिहार में अगले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल की भी भविष्यवाणी की.
उन्होंने कहा, "मुझे बिहार के राजनीतिक अखाड़े में आए केवल तीन महीने ही बीते हैं और यहाँ की राजनीति 180 डिग्री घूम गई. अगल चुनाव आते-आते ये राजनीति और घूमेगी. क्योंकि जनता का सहयोग ही नहीं है. आप जुगाड़ लगाकर सरकार बनाएँगे तो उसे जनता वोट ही नहीं देगी."
बिहार में एक स्कूली छात्रा को गोली मारने की घटना के बाद बीजेपी के निशाने पर नीतीश सरकार
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बिहार की राजधानी पटना में एक स्कूली छात्रा को गोली मारने की घटना को लेकर बीजेपी ने नीतीश सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल लिया है. पटना की इस घटना का सीसीटीवी फ़ुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.
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इस फ़ुटेज में दिख रहा है कि एक लड़की कोचिंग सेंटर से निकलकर बाहर आती है, तभी वहाँ से पहले से मौजूद एक लड़का अपने झोले में से पिस्तौल निकालता है और फिर लड़की के पीछे से गर्दन में गोली मार देता है.
ऐसी रिपोर्टें हैं कि लड़की की स्थिति गंभीर है और उसका इलाज पटना में चल रहा है. पुलिस अभी तक अपराधी को नहीं पकड़ पाई है.
बीजेपी के आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने ये फ़ुटेज ट्वीट कर इसे जंगल राज कहा है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है- बिहार की राजधानी पटना में स्कूली छात्रा को दिनदहाड़े गोली मार दी. राजद के जंगल राज में कॉलेज से लड़कियों के अपहरण, बलात्कार और हत्या की घटनाएँ आम थीं. नीतीश कुमार ने अपने स्वार्थ के चलते इन बच्चियों के भविष्य को दोबारा अंधकार में धकेल दिया है. लाचार मुख्यमंत्री हैं नीतीश.
जब से नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर सरकार बनाई है, बीजेपी ने महागठबंधन की सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है. नए मंत्रिमंडल में शामिल क़ानून मंत्री कार्तिकेय सिंह को लेकर भी बीजेपी ने कई सवाल उठाए हैं.
बीजेपी का कहना है कि कार्तिकेय सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड है और अपहरण के एक मामले में उनके ख़िलाफ़ वारंट जारी हुआ है. हालाँकि अदालत ने कार्तिकेय सिंह को एक सितंबर तक के लिए अंतरिम राहत दी है.
जम्मू-कश्मीर में मतदान के अधिकार को लेकर क्यों भड़क गए हैं उमर अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती
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जम्मू-कश्मीर में इस साल विधानसभा चुनाव होने की संभावनाओं के बीच वहाँ के मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदेश कुमार ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले दूसरे राज्य के लोग भी अगले चुनाव में वोट डाल सकते हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, हृदेश कुमार ने बताया कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के बाद पहली बार मतदाता सूची में विशेष संशोधन हो रहा. इससे विधानसभा चुनाव में 25 लाख अतिरिक्त मतदाता जुड़ेंगे.
उन्होंने बताया कि इसी साल 15 सितंबर से मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. ये 25 अक्तूबर तक चलेगी. हालाँकि, 10 नवंबर तक आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा.
इस फ़ैसले पर कश्मीर के नेताओं की प्रतिक्रिया आने लगी है. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने इस मामले को लेकर बीजेपी को आड़े हाथों लिया है.
उन्होंने ट्वीट किया, "क्या बीजेपी जम्मू कश्मीर के असल मतदाताओं के समर्थन को लेकर इतनी असुरक्षित है कि उसे सीटें जीतने के लिए अस्थायी मतदाताओं को आयात करने की ज़रूरत है? जब जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का मौक़ा दिया जाएगा तो कोई भी फ़ैसला बीजेपी की मदद नहीं कर पाएगा."
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वहीं, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि इस प्रक्रिया का असली उद्देश्य स्थानीय आबादी को शक्तिहीन करना है.
उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर में चुनावों को स्थगित करने संबंधी भारत सरकार का निर्णय, पहले भाजपा के पक्ष में पलड़ा झुकाने और अब गैर-स्थानीय लोगों को वोट देने की अनुमति देने से चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए है. असल मक़सद स्थानीय लोगों को शक्तिहीन करने के लिए जम्मू-कश्मीर पर शासन जारी रखना है."
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केंद्र की बीजेपी सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था. इसके बाद से पहली बार जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव होना है.
बिलकिस बानो ने गैंगरेप के दोषियों की रिहाई पर दिया बयान, जानिए क्या कहा है उन्होंने
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बिलकिस बानो ने अपने साथ हुए गैंगरेप मामले में सभी 11 दोषियों की जेल से रिहाई पर बयान जारी किया है.
बिलकिस बानो ने इस बयान में कहा है कि सज़ायाफ़्ता दोषियों की रिहाई से उनके 20 सालों का सदमा फिर से ताज़ा हो गया है और इस फ़ैसले ने उन्हें सुन्न कर दिया है.
बिलकिस की ओर से बयान उनकी वकील ने जारी किया है. इस बयान में बिलकिस ने दोषियों की रिहाई पर कहा है, "15 अगस्त को, जब मैंने सुना कि जिन 11 लोगों ने मेरी ज़िंदगी और परिवार को बर्बाद किया, मेरी तीन साल की बेटी को छीन लिया, उन्हें आज़ाद कर दिया गया है तो उस समय बीते 20 साल का दर्द ने एक बार फिर मुझे झकझोर दिया. मेरे पास शब्द नहीं बचे. मैं अभी भी सुन्न हूँ."
"आज, मैं सिर्फ़ ये कह सकती हूँ कि किसी महिला को मिले न्याय का अंत ऐसे कैसे हो सकता है? मैंने अपने देश की उच्चतम अदालतों पर भरोसा किया था. मैंने व्यवस्था पर भरोसा किया था और मैं धीरे-धीरे अपने दुख के साथ जीना सीख रही थी. इन दोषियों की रिहाई ने मेरा सुकून छीन लिया है और न्याय से मेरा भरोसा भी डिगा दिया है. मेरा ये दुख और डिगता विश्वास केवल अपने लिए नहीं बल्कि हर उस महिला के लिए है जो अदालतों में न्याय के लिए संघर्ष कर रही हैं."
बिलकिस बानो ने कहा, "इतना बड़ा और अन्यायी फ़ैसला लेने से पहले किसी ने भी मेरी सुरक्षा के बारे में नहीं सोचा. मैं गुजरात सरकार से अपील करती हूँ कि वो इस फ़ैसले को वापस लें. मुझे भय के बिना शांति से जीने का मेरा अधिकार लौटाएँ. कृपया मेरे और मेरे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें."
साल 2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद के पास रनधिकपुर गांव में एक भीड़ ने पाँच महीने की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया था. उनकी तीन साल की बेटी सालेहा की भी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इसी आरोप में सज़ा काट रहे 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने 15 अगस्त के दिन जेल से रिहा कर दिया था.
बिलकिस बानो के लिए न्याय मांगते हुए कई लोगों ने ट्वीट किया है.
बिलकिस बानो के लिए न्याय की मांग करने वालों में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल समेत तमिलनाडु कैडर की आईएएस अधिकारी स्मिता सभरवाल ने भी ट्वीट किया है.
तेलंगाना कैडर की
आईएएस अधिकारी स्मिता सभरवाल ने बिलकिस बानो मामले मे आए नवीनतम आदेश पर ट्वीट किया है. उन्होंने इस ट्वीट के साथ हैशटैग #JusticeForBilkisBanoभी इस्तेमाल किया है.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त सचिव स्मिता
सभरवाल ने ट्वीट किया है, “एक महिला होने के नाते और
एक सिविल सेवक होने के नाते, बिलकिस बानो
केस के बारे में ख़बरें पढ़ते हुए मैं यक़ीन नहीं कर पा रही हूं.”
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वह आगे लिखती है, “हम बिना किसी भय के, आज़ादी से सांस लेने के उनके अधिकार
को छीन नहीं सकते हैं."
अमेरिका ने अब बताया, यूक्रेन के मामले में रूस से दूरी क्यों नहीं बना पा रहा है भारत
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यूक्रेन पर हमले के बावजूद भारत के रूस से तेल ख़रीदने को लेकर अमेरिका ने कहा है कि वो किसी भी देश की विदेश नीति पर टिप्पणी नहीं कर सकता है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने नियमित प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा कि कई देशों ने रूस के यूक्रेन पर हमले की आलोचना की है. साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कई देशों ने रूस के ख़िलाफ़ मतदान भी किया है.
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लेकिन उन्होंने माना कि जिन देशों के रूस के साथ दशकों पुराने रिश्ते हैं और इसे भी समझने की ज़रूरत है.
नेड प्राइस ने कहा कि भारत के मामले में भी ऐसा ही है. भारत और रूस के दशकों पुराने रिश्ते हैं. रूस से अलग अपनी विदेश नीति को नई दिशा देना एक दीर्घकालिक प्रस्ताव होगा. ये बिजली के स्विच का बटन दबाने जैसा नहीं है.
प्रेस ब्रीफ़िंग में नेड प्राइस से इस पर सवाल पूछा गया कि भारत तो रूस के साथ सैन्य अभ्यास भी कर रहा है. इस सवाल के जवाब में नेड प्राइस ने कहा कि विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भी कई बार ये संदेश दिया है कि ऐसा नहीं है कि देशों को अमेरिका और अन्य देशों में किसी एक को चुनना है. दुनिया के हर देश अपने फ़ैसले लेंगे और वे फ़ैसले उनके हितों और मूल्यों के आधार पर होंगे.
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उन्होंने कहा- हमें ये भी समझना होगा कि दुनिया के कई देशों के बीच दीर्घकालीन रिश्ते हैं, जिनमें सुरक्षा भी शामिल हैं. रूस के संबंध में अगर बात करें, तो जिन देशों के साथ रूस का सुरक्षा समझौता है या हथियार ख़रीद समझौता है, वो देश एकाएक रूस से अलग अपनी विदेश नीति नहीं बना सकते. ये कुछ हफ़्तों या महीनों में नहीं हो सकता. हमें इसे दीर्घकालिक चुनौती के रूप में देखते हैं.
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नेड प्राइस ने कहा कि रूस ने जिस तरह यूक्रेन पर आक्रमण किया और यूक्रेन के अंदर भी जो कार्रवाई की या अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के सिद्धांतों का उल्लंघन किया, वो अन्य देशों के लिए एक सबक होगा. उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका को दुनिया के देशों को ये समझाने में मदद मिली कि अमेरिका का क्या रुख़ है और रूस जैसे देशों का क्या रुख़ है.
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रूस ने फ़रवरी में यूक्रेन पर हमला किया था. लेकिन भारत ने कभी भी खुलकर रूस की आलोचना नहीं की. भारत ने हर मंच पर यही कहा कि दोनों पक्षों को मिलकर इसका हल निकालना चाहिए. यूरोप और अमेरिका के अलावा कई देशों ने रूस पर पाबंदी लगाई. लेकिन भारत ने रूस से तेल लेना जारी रखा. अमेरिका ने भी भारत की आलोचना की थी. लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि वो अपने हित को देखते हुए ही फ़ैसला लेगा.
एक दिन पहले ही यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्री कुलेबा ने अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू को दिए इंटरव्यू में कहा था कि रूस की ओर से भारत को मिल रहे कच्चे तेल के हर बैरल में यूक्रेनी ख़ून का एक अच्छा हिस्सा है. अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू से बातचीत में कुलेबा ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने में मदद की थी. इंटरव्यू के दौरान कुलेबा ने कहा- हम कृषि उत्पादों ख़ासकर सनफ़्लावर ऑयल के प्रतिबद्ध सप्लायर्स और ट्रेडर हैं. हमें भारत से मज़बूत और व्यावहारिक सहयोग की उम्मीद थी.
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जबकि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ये बताया था कि यूक्रेन पर हमले के बाद लगे प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से तेल ख़रीदना क्यों जारी रखा है. थाइलैंड में भारतीय समुदाय से बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा था कि भारत में लोगों की आमदनी इतनी नहीं कि वे ऊँचे दामों में पेट्रोल-डीज़ल ख़रीद पाएँ. ऐसे में ये उनका नैतिक दायित्व है कि वे अपने लोगों को सबसे अच्छा सौदा दिलवाएँ.
नीतीश कुमार आए अपनों के निशाने पर, लेशी सिंह को मंत्री बनाने से नाराज़ विधायक बीमा भारती
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल के साथ सरकार का गठन तो कर लिया है. लेकिन अब उनकी ही पार्टी की एक विधायक ने लेशी सिंह को मंत्री बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं.
पार्टी विधायक बीमा भारती ने लेशी सिंह को कैबिनेट में शामिल किए जाने को लेकर सवाल तो उठाए ही हैं, साथ ही कई गंभीर आरोप लगाए हैं.
बीमा भारती ने कहा है कि उन्हें परेशानी इस बात से है कि लेशी सिंह को हर बार कैबिनेट में क्यों शामिल किया जाता है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में बीमा भारत ने कहा, "सीएम उनमें क्या देखते हैं? वो अपने इलाक़े में लगातार किसी न किसी अपराध में शामिल रही हैं. हमारी बात क्यों नहीं सुनी जाती? इसलिए क्योंकि हम पिछड़ी जाति से हैं?"
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वहीं, बीजेपी की बिहार इकाई ने भी बीमा भारती का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने लेशी सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं.
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बीते सप्ताह नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होकर महागठबंधन के साथ बिहार में नई सरकार बनाई और मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. मंगलवार को ही उन्होंने कैबिनेट विस्तार किया जिसमें जेडीयू कोटे से धमदाहा विधायक लेशी सिंह को भी शामिल किया गया था.
लेशी सिंह बूटन सिंह की पत्नी हैं. वर्ष 2000 में पूर्णिया की अदालत में बूटन सिंह की हत्या की गई थी. इसके बाद लेशी सिंह राजनीति में आई थीं और उन्हें नीतीश कुमार का करीबी भी माना जाता है.
अफ़ग़ानिस्तान में किस हाल में रह रहे हैं हिंदू और सिख: ग्राउंड रिपोर्ट
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बीती 15 अगस्त को अफ़गानिस्तान में तालिबान को सत्ता में आए एक साल पूरा हो गया. ऐसे में राजधानी क़ाबुल सहित दूसरे इलाकों में किसी बड़े चरमपंथी धमाके या हमले को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है.
पढ़िए अफ़ग़ानिस्तान से बीबीसी संवाददाता विनीत खरे की ये ग्राउंड रिपोर्ट.
अर्जुन कपूर को एमपी के मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया 'फ़्लॉप', अभिनेता ने किया था बॉलीवुड का बचाव
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बॉलीवुड फ़िल्मों का बायकॉट करने को लेकर होती अपीलों के बीच अभिनेता अर्जुन कपूर ने एक बयान दिया है जिसे लेकर प्रतिक्रियाएँ हो रही हैं. इसे लेकर अब मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी टिप्पणी की है.
नरोत्तम मिश्रा ने अर्जुन कपूर को 'फ़्लॉप' और 'फ़्रस्ट्रेटेड' अभिनेता बताया है.
अर्जुन कपूर ने कुछ दिन पहले एक मनोरंजन वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में बॉलीवुड फ़िल्मों को बॉयकॉट किए जाने पर अपनी राय रखी.
इस दौरान उन्होंने कहा, "अब ज़्यादा होने लगा है...ये ग़लत है. अब शुक्रवारों की सुबह नई फ़िल्मों के लिए लोगों में वो उत्साह नहीं बचा.. इंडस्ट्री की चमक कम होती जा रही है. लगातार कीचड़ उछालते जाएंगे तो नई गाड़ी भी थोड़ी सी चमक खो देगी न? हमने तो काफ़ी कीचड़ झेल लिया है पिछले कुछ सालों में क्योंकि हमने इसपर आंखें मूंद लीं."
सोशल मीडिया पर भी अर्जुन कपूर के इंटरव्यू का एक क्लिप वायरल हो रहा है. इसमें वो कह रहे हैं, "मुझे लगता है कि हमने गलती कर दी कि हमने चुप्पी बनाए रखी. वो हमारी शराफ़त थी और उसका लोग एडवांटेज ले गए कि वो हमारी कमज़ोरी थी. कहीं न कहीं हम ने ही थोड़ा ज़्यादा सहन कर लिया. आप जब ज़्यादा सह लेते हैं तो वही होने लगता है आपके साथ. लोग हमें सरनेम की वजह से नहीं बल्कि फ़िल्म की वजह से पसंद करते हैं. इंडस्ट्री को साथ आकर इसके लिए कुछ करना चाहिए."
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मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा से अर्जुन कपूर के इसी बयान पर सवाल किया गया था.
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इसपर नरोत्तम मिश्रा ने कहा, "कोई फ़्लॉप और फ़्रस्ट्रेटेड एक्टर जनता को धमकाए, ये तो अच्छा नहीं मानता मैं. अगर वो जनता को धमकाने की जगह वो अपने अभिनय पर ध्यान दें, तो ज़्यादा अच्छा है. मेरा उनसे सवाल है कि क्या उनमें, या वो जिस टुकड़े-टुकड़े गैंग के हिमायती हैं, उसमें इतनी हिम्मत है कि किसी और धर्म पर फ़िल्म बना सकें, किसी और धर्म के देवताओं को नीचा दिखा सकें. अब जनता जागरूक हो गई है."
क्या अमित शाह को नंबर दो बनाने और गडकरी के पर कतरने के लिए हुआ बीजेपी में बदलाव?
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बीजेपी ने बुधवार को पार्टी में नीति निर्धारण करने वाली सर्वोच्च इकाई से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को हटा दिया है.
संसदीय बोर्ड बीजेपी में नीति निर्धारण करने वाली सर्वोच्च इकाई है. मुख्यमंत्रियों, राज्य पार्टी प्रमुख और दूसरी अहम जिम्मेदारियों पर कौन रहेगा, इसका फैसला संसदीय बोर्ड ही करता है.
गुरुवार को प्रकाशति अख़बारों में ये ख़बर प्रमुखता से छाई है. पढ़िए अख़बारों की समीक्षा.
बीजेपी के संसदीय बोर्ड में बदलाव पर सुब्रमण्यम स्वामी का पीएम मोदी पर निशाना
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बीजेपी के नए संसदीय बोर्ड के गठन को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज़ कसा है.
पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि अब पार्टी में हर पद पर चुनाव की बजाय पीएम मोदी की मंज़ूरी से ही किसी को नियुक्त किया जाता है.
उन्होंने ट्वीट किया, "जनता पार्टी और उसके बाद बीजेपी के शुरुआती दिनों में संगठन के पदों को भरने के लिए हम संसदीय बोर्ड के चुनाव कराया करते थे. ये पार्टी के संविधान की मांग है. आज, बीजेपी में कोई चुनाव नहीं होता. हर पद पर मोदी की मंज़ूरी से सदस्यों को नामांकित किया जाता है."
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भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को ही संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति का फिर से गठन किया है. इसकी चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि संसदीय बोर्ड से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को हटा दिया है.
संसदीय बोर्ड बीजेपी में फ़ैसला करने वाली सर्वोच्च इकाई है. मुख्यमंत्रियों, राज्य पार्टी प्रमुख और दूसरी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियों पर कौन रहेगा इसका फैसला संसदीय बोर्ड ही करता है.
नए संसदीय बोर्ड में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत 11 लोग हैं, जिसमें नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बी एस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और बीएल संतोष शामिल हैं.
भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय चुनाव समिति भी पुनर्गठन किया है. ये समिति बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में काम करेगी.
अजीत डोभाल की सुरक्षा में चूक से जुड़े मामले में सीआईएसएफ़ के तीन कमांडो बर्ख़ास्त
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के आवास पर इस साल हुई सुरक्षा में चूक को लेकर अब अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि एनएसए की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में सीआईएसएफ़ के तीन कमांडो बर्खास्त कर दिए गए हैं. इसके अलावा एनएसए की वीआईपी सिक्योरिटी यूनिट से भी दो वरिष्ठ अधिकारियों को बाहर कर दिया गया है.
77 वर्षीय अजीत डोभाल को केंद्र सरकार की ओर से 'जे़ड प्लस' सुरक्षा दी गई है. एनएसए डोभाल की यात्रा के दौरान सुरक्षा मुहैया कराने के साथ ही उनके सरकारी आवास पर भी अर्द्धसैनिक बलों का सुरक्षा घेरा रहता है.
इस साल 16 फ़रवरी को एक शख्स ने गाड़ी लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के नई दिल्ली स्थित घर में घुसने की कोशिश की थी. हालाँकि बाद में सुरक्षाकर्मियों ने उस शख्स को पकड़ लिया था. उस समय पुलिस ने दावा किया था कि शख्स की दिमागी हालत ठीक नहीं है.
मामले में सीआईएसएफ़ ने कोर्ट ऑफ़ इंक्वायरी पूरी होने के बाद कार्रवाई की है, जिसमें पाँच अधिकारियों को दोषी पाया गया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कौशिक गांगुली, इस वीवीआईपी यूनिट की अगुवाई करने वाले डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल और उनके सहयोगी, सीनियर कमांडेंट रैंक के अधिकारी नवदीप सिंह हीरा को एनएसए की सुरक्षा से बाहर किया गया है. इनकी जगह हाल ही में दो नए अधिकारियों की पोस्टिंग की गई है.
काबुल की मस्जिद में बड़ा धमाका, कई लोगों की मौत
अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल में एक मस्जिद में हुए ज़ोरदार धमाके से कई लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है.
ये धमाका बुधवार को शाम की नमाज़ के समय हुआ. एक गैर-सरकारी संगठन के अनुसार धमाके में कम से कम तीन लोग मारे जा चुके हैं और दर्जन भर से अधिक घायल हुए हैं.
बीबीसी की पश्तो सेवा के अनुसार कुछ अपुष्ट रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि धमाके से 20 लोग मारे गए हैं और 40 से अधिक घायल हुए हैं. हालाँकि, अभी तक इस आकंड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
काबुल में तालिबान के पुलिस के प्रवक्ता खालिद ज़दरान के हवाले से स्थानीय मीडिया ने बताया कि शहर के उत्तर-पश्चिमी इलाके में धमाका हुआ है.
कुछ रिपोर्ट में ये भी बताया जा रहा है कि सिद्दीक़ी मस्जिद के इमाम भी धमाके में मारे गए हैं.
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हालाँकि, अभी तक ये नहीं पता लग सका है कि धमाके के पीछे किसका हाथ है. एक सप्ताह पहले ही काबुल में एक तालिबान समर्थक मौलाना की आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी. इस हमले की ज़िम्मेदार इस्लामिक स्टेट ने ली थी.
काबुल में काम करने वाले इतालवी एनजीओ 'इमरजेंसी' ने बताया कि अभी तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है.
एनजीओ ने एक ट्वीट में जानकारी दी कि उन्हें धमाके में घायल 27 लोग मिले हैं, जिनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं.
वहीं, तालिबान के एक ख़ुफ़िया अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि अभी तक धमाके में कम से कम 35 लोग घायल हुए हैं या मारे गए हैं. ये आंकड़ा बढ़ने की आशंका है.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाका इतना ज़ोरदार था कि आसपास की इमारतों की खिड़कियां तक टूट गईं.
एक अधिकारी ने पहचान न बताने की शर्त पर कहा कि धमाका काबुल के खैर खाना इलाके की मस्जिद में हुआ. ख़ुफ़िया टीमें धमाके की जगह पहुँच गई हैं और जाँच जारी है.
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