ईरान: अयातुल्ला ख़ामेनेई ने अर्दोआन को चेताया- सीरिया पर हमला तुर्की के लिए हानिकारक

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला ख़ामेनेई ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन को सलाह दी है कि सीरिया के ख़िलाफ़ नया सैन्य अभियान न छेड़ा जाए.

लाइव कवरेज

अभिनव गोयल

  1. राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले श्रीलंकाई नेता ने भारत से मांगी ये मदद

    श्रीलंका की संसद में नेता प्रतिपक्ष सजिथ प्रेमादासा

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    श्रीलंका की संसद में नेता प्रतिपक्ष सजिथ प्रेमादासा ने अपने यहां राष्ट्रपति चुनाव होने से ठीक पहले भारत सरकार से कहा है कि वह श्रीलंका की मदद करना जारी रखे.

    गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में कल यानी बुधवार को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं.

    इससे पहले अंतरिम राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले रनिल विक्रमसिंघे ने देश में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आपातकाल लगा दिया है.

    सजिथ प्रेमादासा ने श्रीलंका का नया राष्ट्रपति चुने जाने से पहले भारत से मदद की गुहार लगाई है.

    उन्होंने लिखा है, “श्रीलंका का राष्ट्रपति चाहे कोई भी बने, लेकिन मेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के सभी राजनीतिक दलों और भारतीय जनता से विनती है कि वो श्रीलंका और उसके लोगों की इस समस्या से उबरने में मदद करना जारी रखें.”

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    भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को बताया है कि, "भारत ने श्रीलंका को 3.8 अरब डॉलर की सहायता दी है. किसी अन्य देश ने इस वर्ष श्रीलंका को इस स्तर की सहायता नहीं दी है. हम पहल कर रहे हैं कि श्रीलंका की मदद कैसे करें, आईएमएफ और अन्य देनदार संस्थाओं के साथ उनके संबंधों को सुविधाजनक कैसे बनाया जाए."

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  2. प्रवर्तन निदेशालय ने मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर संजय पांडेय को गिरफ़्तार किया

    संजय पांडेय

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    प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी और मुंबई पुलिस के कमिश्नर रहे संजय पांडेय को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज फ़ोन टेपिंग मामले में गिरफ़्तार किया है.

    पांडेय इस साल 30 जून को अपने पद से सेवानिवृत्त हुए हैं.

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    संजय पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की पूर्व सीईओ चित्रा रामाकृष्णन के कहने पर 91 कर्मचारियों का फ़ोन टेप किया.

    इन कर्मचारियों के फ़ोन आईसेक सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से टेप किए गए थे जो कि पांडेय से जुड़ी हुई थी.

  3. ईरान: अयातुल्ला ख़ामेनेई ने अर्दोआन को चेताया- सीरिया पर हमला तुर्की के लिए हानिकारक

    ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला ख़ामेनेई

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    ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला ख़ामेनेई ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन को सलाह दी है कि सीरिया के ख़िलाफ़ नया सैन्य अभियान न छेड़ा जाए.

    न्यूज़ चैनल अल-जज़ीरा के मुताबिक़, अर्दोआन ने कुछ महीने पहले कहा था कि वह जल्द ही उत्तरी सीरिया के दो शहरों पर सैन्य हमला करके कुर्दिश लड़ाकों को हराएंगे और 30 किलोमीटर का 'सुरक्षित दायरा' तैयार करेंगे. तुर्की उत्तरी सीरिया के कुर्दिश लड़ाकों को चरमपंथियों के रूप में देखता है.

    ये बयान ऐसे समय आया है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सीरिया शांति शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ईरान पहुंचे हैं.

    पुतिन के साथ इब्राहिम रईसी

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    इमेज कैप्शन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलते हुए ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी

    इस सम्मेलन में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन और ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी भी शामिल हो रहे हैं.

    लेकिन इस सम्मेलन से ठीक पहले ईरान के सर्वोच्च नेता की ओर से सीरिया की सुरक्षा के मुद्दे पर जो बयान आया है उसे बेहद अहम माना जा रहा है.

    ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के साथ तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन

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    इमेज कैप्शन, ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के साथ तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन और साथ में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी

    ख़ामेनेई ने कहा है कि “उत्तरी सीरिया पर सैन्य हमला सीरिया के साथ-साथ तुर्की और इस पूरे क्षेत्र के लिए हानिकारक होगा. यह आतंकवादियों के हित में होगा और इससे सीरियाई सरकार वह राजनीतिक कदम भी नहीं उठाएगी जिसकी अपेक्षा तुर्की को है.”

    उन्होंने ये भी कहा है कि “आतंकवाद का सामना ज़रूर किया जाएगा लेकिन सीरिया पर सैन्य हमला सिर्फ आतंकियों को फायदा पहुंचाएगा. क्योंकि आतंकी सिर्फ एक समूह से नहीं जुड़े हैं. और हम निश्चित रूप से तुर्की के साथ आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष करेंगे.“

    “हमारे लिए तुर्की और उसकी सीमाओं की सुरक्षा हमारी अपनी सीमाओं की सुरक्षा जितनी अहम है. आपको भी सीरिया की सुरक्षा को अपनी सुरक्षा की तरह लेना चाहिए. सीरिया से जुड़े मसले बातचीत से सुलझाए जाने चाहिए. ईरान, तुर्की, सीरिया और रूस को मिल बैठकर इन मुद्दों का समाधान निकालना चाहिए."

  4. केरल: छात्राओं के कपड़े उतरवाने के मामले में महिला आयोग ने लिया संज्ञान

    छात्रा

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    केरल में नीट की परीक्षा देने पहुंची छात्राओं के कपड़े उतरवाने के मामले को राष्ट्रीय महिला आयोग ने शर्मनाक और छात्राओं के लिए अपमानजनक कहा है.

    मामले का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के अध्यक्ष को छात्राओं के लगाए आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने को कहा है.

    आयोग ने इस मामले में ज़िम्मेदार पाए जाने वालों के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करने के लिए भी कहा है.

    साथ ही आयोग ने केरल के डीजीपी को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उचित धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज कर आरोपों की सत्यता की जांच करने के आदेश दिए हैं.

    आयोग ने कहा कि इस मामले में क्या कदम उठाए गए इसके बारे में तीन दिनों में आयोग को जानकारी दी जाए.

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    क्या है मामला?

    केरल के कोल्लम ज़िले में रविवार को हुई नीट परीक्षा के दौरान एक सेंटर पर कई लड़कियों से अंडरवियर उतारने के लिए कहे जाने का मामला सामने आया था.

    ये परीक्षा कोल्लम के एक शैक्षणिक संस्थान में हो रही थी जहां इन लड़कियों से कहा गया कि वे अपने अंडर गारमेंट्स उतारने के बाद ही परीक्षा में शामिल हो सकेंगी.

    घटना की जानकारी तब सामने आई जब एक छात्रा के पिता ने कोल्लम रूरल पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई.

    उनका कहना था कि परीक्षा केंद्र पर हुई इस ज़्यादती की वजह से शर्मिंदगी के कारण उनकी बेटी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था.

  5. ‘दिनभर: पूरा दिन, पूरी ख़बर’, सुनिए मोहम्मद शाहिद और अंजुम शर्मा से

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  6. मक्का के पूर्व इमाम हारले-डेविडसन पर बैठे, सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

    मक्का की शाही मस्जिद के पूर्व इमाम शेख़ अदेल अल-कलबनी

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    इमेज कैप्शन, मक्का की शाही मस्जिद के पूर्व इमाम शेख़ अदेल अल-कलबनी

    इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र धर्मस्थल मक्का की शाही मस्जिद के पूर्व इमाम शेख़ अदेल अल-कलबनी के हारले-डेविडसन मोटरसाइकिल पर बैठने का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया है.

    स्नैपचैट पर रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में पूर्व इमाम शेख़ अदेल अल-कलबनी सड़क किनारे मशहूर मोटरसाइकिल हारले-डेविडसन पर बैठे नज़र आ रहे हैं.

    इस वीडियो में पूर्व इमाम आधुनिक पश्चिमी कपड़ों में भी नज़र आ रहे हैं, उन्होंने एक कोटी पहनी हुई है जिसमें अमेरिकी झंडे के साथ-साथ कई अन्य प्रतीक बने हुए हैं.

    सोशल मीडिया पर ये वीडियो पहुंचने के बाद से पूर्व इमाम का नाम ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है.

    कुछ लोग उनके समर्थन में ट्वीट कर रहे हैं. वहीं, कुछ लोग उन्हें इस अंदाज़ में देखकर असहजता प्रकट कर रहे हैं.

    कुछ लोगों ने लिखा है कि एक पूर्व इमाम होते हुए आपको ये शोभा नहीं देता कि आप इस तरह के कपड़े पहनें. ये इस्लाम के लिहाज़ से ठीक नहीं है.

    इस पर पूर्व इमाम ने अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से कहा है कि बश्त (लंबा चोला) पहनना इस्लाम के लिहाज़ से ठीक है.

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    हालांकि, कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने पूर्व इमाम के समर्थन में भी पोस्ट किए हैं.

    एक शख़्स ने पूर्व इमाम की आलोचना करने वाले शख़्स को जवाब देते हुए लिखा है, “आधुनिक कपड़ों से क्या समस्या है? उनके सोचने की बात है और उन्हें स्वतंत्रता है. उन्हें अल्लाह के अतिरिक्त कोई और जवाबदेह नहीं ठहराएगा. आप हर चीज़ में खुद को क्यों झोंक देते हो?

  7. पाकिस्तानी युवक गिरफ़्तार, पुलिस का दावा नूपुर शर्मा को सज़ा देने के इरादे से आया था भारत

      • Author, मोहर सिंह मीणा
      • पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
    रिज़वान अशरफ

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    इमेज कैप्शन, रिज़वान अशरफ

    राजस्थान पुलिस ने मंगलवार को एक पाकिस्तानी युवक को गिरफ़्तार किया है. पुलिस का दावा है कि वह बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की हत्या के इरादे से भारत आया था.

    श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा ने बीबीसी हिन्दी को बताया है, "पकड़ा गया युवक 16 - 17 जुलाई की रात बॉर्डर पिलर को क्रॉस करके फेंसिंग के पास आ गया. यह घटना बीएसएफ के खक्का चेकपोस्ट की है. युवक को बीएसएफ ने पकड़ा और पुलिस थाना हिंदूमल कोर्ट को सौंप दिया."

    एसपी ने बताया है, "थाना हिंदूमल कोर्ट में युवक के ख़िलाफ़ कई धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है.''

    वो जगह जहां से सीमा पार करके भारत आया रिज़वान अशरफ

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    एसपी आनंद शर्मा ने बताया है, "पकड़े गए युवक से पूछताछ के लिए कई एजेंसियों की समिति बनी है, जो 18 जुलाई से ही पूछताछ कर रही हैं. अब तक की गई पूछताछ में पकड़े गए युवक ने बताया कि इसका नाम रिज़वान अशरफ़ पुत्र मोहम्मद अशरफ़ है. यह 24 साल का है और पाकिस्तान में कुटियाल शेखा का रहने वाला है. आठवीं तक पढ़ा है और वहाँ यह बिजली का काम करता है."

    एसपी ने बताया है कि, "रिज़वान अशरफ़ पास से कुछ पानी की बोतलें, धार्मिक किताबें, कपड़े और दो चाकू मिले हैं."

    "इसने बताया है कि नुपुर शर्मा ने जो बयान दिया है, वह उससे आहत है और नूपुर शर्मा को सज़ा देने के लिए भारत आ रहा था."

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  8. ईरान की सबसे ख़ूबसूरत मस्जिद मरम्मत करते हुए क्षतिग्रस्त हुई

    ईरान के इस्फ़हान शहर की शाह मस्जिद

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    ईरान के इस्फ़हान शहर की सबसे सुंदर माने जाने वाली शाह मस्जिद मरम्मत के दौरान क्षतिग्रस्त हो गई है.

    अधिकारियों ने मस्जिद के क्षतिग्रस्त होने की बात को स्वीकार किया है. 17वीं सदी की ये ईरानी मस्जिद वास्तुशिल्प का एक बेहतरीन नमूना है. ये मस्जिद संयुक्त राष्ट्र के विश्व धरोहरों में से एक है.

    हाल की तस्वीरों को देखने से पता चलता है कि उसमें एकरूपता नहीं है, वहीं मस्जिद के ऊपर लगे ख़ास फूलों के पैटर्न भी मेल नहीं खाते हैं.

    अधिकारियों ने ग़लती को मानते हुए कहा कि उन्हें ठीक किया जा सकता है.

    ईरान के इस्फ़हान शहर की शाह मस्जिद

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    मरम्मत के काम में लगे मेहदी पकडेल ने कहा कि काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है. उन्होंने मचान बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए सामान और गुंबद की ऊंचाई (177 फीट) से पैदा हुई चुनौतियों को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

    मस्जिद का निर्माण ईरान के तीसरे सबसे बड़े शहर इस्फ़हान के सबसे सुनहरे दौर में किया गया था.

    इसकी चमकदार नीली और पीली पैटर्न वाली टाइलों ना सिर्फ ईरान बल्कि दुनियाभर से मुस्लिम धर्म को मानने वाले और पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं.

    स्टेट मीडिया के मुताबिक शहर की विरासत के प्रमुख अलीरेज़ा इज़ादी ने कहा कि सुपरवाइजर और रिस्टोर करने वालों ने पाया कि विशेष रूप से गुंबद के ऊपरी हिस्से में क्षति हुई थी.

    उन्होंने कहा, "हम गुंबद की टाइलों को बदलने जा रहे हैं, क्योंकि मचान के वजन ने उनके किनारे को नुकसान पहुंचाया है.

  9. तेजस्वी का दावा, राजद में शामिल होना चाहते थे नित्यानंद राय

    तेजस्वी यादव

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    बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को दावा किया है कि बीजेपी नेता एवं केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कुछ समय पहले राजद में शामिल होने की गुहार लगाई थी.

    तेजस्वी यादव ने कहा है, “बीजेपी नेता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मुझसे मिलकर राजद में शामिल होने की इच्छा जताई थी. उन्होंने मंत्री बनने से पहले हमसे कहा था कि उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया जाए. उन्होंने कहा था कि उनका वहाँ (बीजेपी) मन नहीं लग रहा था.”

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    इस पर बीजेपी नेता संजय जायसवाल ने पलटवार करते हुए कहा है कि “तेजस्वी यादव उनसे (नित्यानंद राय) ज़िंदगी में सिर्फ़ एक बार मिले हैं. उन्होंने कहा था कि वह बिहार में सरकार गठन में बीजेपी का समर्थन करने के लिए राज़ी हैं ताकि वह अपने आपको और परिवार को जेल जाने से बचा सके. लेकिन बीजेपी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. वो चाहें जितनी कोशिश कर लें, तेजस्वी और उनका परिवार जेल जाएगा.”

  10. निर्मला सीतारमण ने जीएसटी को लेकर दी सफ़ाई

    निर्मला सीतारमण

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    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बताया है कि खाने-पीने की जिन चीजों पर जीएसटी लगाया गया है, उन्हें खुला ख़रीदा जाए तो टैक्स नहीं देना होगा.

    सीतारमण ने ट्वीट कर लिखा है, “जीएसटी काउंसिल ने इस लिस्ट में शामिल सभी चीजों को बिना पैकिंग बेचे जाने पर जीएसटी नहीं देना होगा. ये फ़ैसला किसी एक सदस्य नहीं बल्कि पूरी जीएसटी काउंसिल ने लिया है.”

    इस लिस्ट में दालें, गेहूं, राई, ओट्स, मक्का, चावल, आटा, सूजी/रवा, बेसन, मुरमुरा, दही, लस्सी शामिल हैं.

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    विपक्षी दलों ने मंगलवार को कुछ नयी चीजों पर जीएसटी लगाने और महंगाई के मुद्दे पर सदन में विरोध प्रदर्शन किया जिसके बाद सदन स्थगित कर दिया गया.

    इसके बाद जब 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके समेत अन्य दलों के सांसदों ने सदन के बीचों-बीच विरोध प्रदर्शन किया.

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    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इन चीजों पर टैक्स लगाने पर केंद्र सरकार का विरोध करते हुए ट्वीट किए हैं.

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  11. एक लाख 63 हज़ार लोगों ने पिछले साल भारत की नागरिकता छोड़ी, जानिए कहाँ बसे

    भारत

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    2021 में भारत की नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या बढ़कर 1,63,370 हो गई. 2020 में यह तादाद 85,256 थी. मंगलवार को भारत के गृह मंत्रालय ने इससे जुड़ा डेटा जारी किया है. 2019 में 1,44,017 लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी थी.

    गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बहुजन समाज पार्टी के लोकसभा सांसद हाजी फ़ज़लुर रहमान के सवाल के जवाब में इससे जुड़ी सूचना को साझा किया है.

    रहमान ने गृह मंत्रालय से जानकारी मांगी थी कि 2019 तक कितने लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी है. उन्होंने नागरिकता छोड़ने की वजह और किस देश की नागरिता ली, की भी जानकारी मांगी थी.

    सरकार के डेटा के अनुसार, भारत की नागरिकता छोड़ जिस देश में बसना लोग सबसे ज़्यादा पसंद कर रहे हैं, वह देश है- अमेरिका.

    2020 में 30,828 भारतीयों को अमेरिका की नागरिकता मिली और 2021 में 78,284 लोगों को.

    अमेरिका के बाद ऑस्ट्रेलिया दूसरा देश है, जहाँ भारतीय बसना पसंद कर रहे हैं. पिछले साल 23,533 भारतीयों को ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता मिली. वहीं 2020 में 13,518 भारतीयों ने ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता ली.

    कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय नौकरी और पढ़ाई के लिए जाते हैं लेकिन 2021 में 21,597 लोगों ने ही कनाडा की नागरिकता ली.

    2021 में शीर्ष के वे 10 देश, जहाँ की नागरिकता भारतीयों ने ली

    1. अमेरिका ( 2021 में 78,284 और 2020 में 30,828)

    2. ऑस्ट्रेलिया ( 2021 में 23,533 और 2020 में 13,518 )

    3. कनाडा ( 2021 में 21,597 और 2020 में 17,093)

    4. ब्रिटेन ( 2021 में 14,637 और 2020 में 6,489)

    5. इटली ( 2021 में 5,986 और 2020 में 2,312 )

    6. न्यूज़ीलैंड (2021 में 2,643 और 2020 में 2,116 )

    7. सिंगापुर (2021 में 2,516 और 2020 में 2,289 )

    8. जर्ममी (2021 में 2,381 और 2020 में 2,152)

    9. द नीदरलैंड्स (2021 में 2,187 और 2020 में 1,213)

    10. स्वीडन (2021 में 1,841 और 2020 में 1,046)

    पिछले साल दिसंबर में राय ने संसद में कहा था कि पिछले सात सालों में 8.5 से ज़्यादा भारतीयों ने यहाँ की नागरिकता छोड़ी है.

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  12. ब्रेकिंग न्यूज़, सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक नूपुर शर्मा को दी राहत

    नूपुर शर्मा

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    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा को फौरी राहत देते हुए अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ़्तार न किए जाने का आदेश जारी किया है.

    पैग़ंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी के मामले में नूपुर शर्मा के ख़िलाफ़ अलग-अलग राज्यों में कई एएफ़आईआर दर्ज की गई है. इसी मामले में नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में सभी एफ़आईआर को एक जगह करने और सुनवाई भी एक ही अदालत में करने की याचिका दायर की थी.

    सर्वोच्च अदालत ने इस मामले की सुनवाई आगामी 10 अगस्त को करने का फ़ैसला किया है और कहा है कि अगली सुनवाई तक उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं होगी.

    नूपुर शर्मा ने अपनी याचिका में कहा था कि कुछ अराजक तत्वों ने एक बार फिर उन्हें जान से मारने और बलात्कार की धमकी दी है.

    इसके साथ ही उनके वकील ने नूपुर शर्मा के ख़िलाफ़ सभी एफ़आईआर को दिल्ली वाली एफ़आईआर से जोड़ने का आग्रह भी किया था.

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    मई महीने के आख़िर में एक टीवी डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा ने पैग़ंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी की थी, जिसके विरोध में देश के कई राज्यों में उनके ख़िलाफ़ लगभग एक दर्जन एफ़आईआर दर्ज कराई गई थीं.

    इस बयान के विरोध में दर्जन भर से अधिक मुस्लिम देश आ गए थे और भारत सरकार के समक्ष आधिकारिक तौर पर विरोध दर्ज कराया था.

    नूपुर शर्मा को फौरी राहत देने का फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पार्दीवाला की बेंच ने किया है.

    इससे पहले जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पार्दीवाला की बेंच ने उनके आपत्तिजनक बयान पर फटकार लगाई थी.

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नूपुर शर्मा की टिप्पणियों को "तकलीफ़देह" बताते हुए कहा था कि - "उनको ऐसा बयान देने की क्या ज़रूरत थी?"

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये भी सवाल किया था कि एक टीवी चैनल का एजेंडा चलाने के अलावा ऐसे मामले पर डिबेट करने का क्या मक़सद था, जो पहले ही न्यायालय के अधीन है.

    सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की बयानबाज़ी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि, "अगर आप एक पार्टी की प्रवक्ता हैं, तो आपके पास इस तरह के बयान देने का लाइसेंस नहीं है."

  13. फ़िल्मकार और पत्रकार अविनाश दास को गुजरात पुलिस ने गिरफ़्तार किया

    अविनाश दास

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    गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को फ़िल्मकार और पत्रकार अविनाश दास को गिरफ़्तार कर लिया है.

    दिन के दो बजे गुजरात पुलिस की टीम ने दास को उनके घर के पास मढ जेटी से हिरासत में लिया है.

    उन्हें पुलिस सड़क के रास्ते अहमदाबाद ले जा रही है, जहां बुधवार को उन्हें मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा.

    अविनाश दास के ख़िलाफ़ अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने केस दर्ज किया था.

    भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार झारखंड कैडर की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की गृह मंत्री अमित शाह के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर तौर पर पोस्ट करने का आरोप अविनाश दास पर है.

    अहमदाबाद पुलिस ने 14 मई को अविनाश दास के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था. इसके मुताबिक़ अविनाश दास ने आठ मई को अमित शाह और पूजा सिंघल की बातचीत करने वाली, 2017 के सार्वजनिक समारोह की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जो लोगों को भ्रमित करने और अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंचाने के इरादे से किया गया था.

    इस मामले में अविनाश दास ने सुप्रीम कोर्ट में ज़मानत के लिए याचिका दी थी, जिस पर आगामी शुक्रवार को सुनवाई होनी थी.

    इस सुनवाई से पहले अविनाश दास को अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हिरासत में ले लिया है.

    एक अन्य फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिए राष्ट्रध्वज के अपमान का आरोप भी उन पर है.

    सोशल मीडिया पर अलग-अलग क्षेत्रों की मशहूर हस्तियों ने गुजरात पुलिस के इस कदम की आलोचना की है.

    वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्विटर पर लिखा, “एक और दिन, सोशल मीडिया पोस्ट के लिए एक और गिरफ़्तारी, आख़िर कब ये सब बंद होगा?”

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    दास के सहयोगी और फिल्मकार रामकुमार सिंह ने लिखा है, “अभी कुछ ही देर पहले मित्र फिल्ममेकर अविनाश दास को अपने घर से निकलते ही मढ़ जेटी से गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच के लोग उठाकर ले गए. उनकी जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. पुलिस को यह नहीं करना था. हम लोग जरूरी कानूनी सलाह ले रहे हैं.”

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  14. ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा में डीएसपी को डंपर से कुचला, मौक़े पर मौत

    हरियाणा

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    समाचार एजेंसी एनएनआई के अनुसार, हरियाणा के मेवात ज़िले में तावडू के डीएसपी सुरेंद्र सिंह की मंगलवार को एक डंपर ड्राइवर ने कुचलकर हत्या कर दी.

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरेंद्र सिंह डंपर ड्राइवर के दस्तावेज़ों की जाँच कर रहे थे. सुरेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ पचगाँव में तुरू के पास अरावली पहाड़ियों पर चल रहे अवैध खनन के ख़िलाफ़ रेड मारने गए थे.

    सुरेंद्र सिंह मंगलवार को दिन में 11.50 बजे दो पुलिसकर्मी, एक ड्राइवर और एक गनमैन के साथ वहाँ गए थे. वहाँ जाने के बाद उन्होंने एक संदिग्ध डंपर को रुकने के लिए कहा था.

    उन्होंने उस ड्राइवर से पेपर मांगा लेकिन उसने स्पीड बढ़ा दी और लोगों पर डंपर चढ़ाने की कोशिश की. ड्राइवर और गनमैन दोनों जान बचाने के लिए गाड़ी से कूद गए लेकिन सुरेंद्र सिंह पर गाड़ी चढ़ा दी.

    उन्हें अस्पताल लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. हरियाणा पुलिस के अनुसार, सुरेंद्र सिंह 1994 में एएसआई के तौर भर्ती हुए थे और अभी तावडू में डीएसपी के तौर पर तैनात थे. चार महीने में ही वह रिटायर होने वाले थे.

    हरियाणा पुलिस ने ट्वीट कर कहा है, ''डीएसपी तावडू सुरेंद्र सिंह ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान की बाज़ी लगा दी. हरियाणा पुलिस इस बहादुर अधिकारी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करती है. अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी.''

    कांग्रेस नेता विरेंद्र सिंह राठौर ने डीएसपी की मौत पर प्रदेश की बीजेपी सरकार को निशाने पर लिया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा है, ''हरियाणा में भाजपाई कुशासन. हरियाणा के नूंह में खनन माफ़ियाओं ने तावडू DSP सुरेंद्र सिंह पर डंपर चढ़ा दिया, जिससे मौक़े पर ही उनकीदर्दनाक मृत्यु हो गई है. इसी साल रिटायर होने वाले थे. इन माफ़ियाओं को किसकी शह?''

    हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा है कि इस मामले सख़्त कार्रवाई होगी और किसी को छोड़ा नहीं जाएगा.

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  15. 'जहाँ मुसलमान कम वहाँ ज़्यादा बच्चा पैदा करें' की टिप्पणी पाकिस्तानी मंत्री ने क्यों की

    पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री अब्दुल क़ादिर पटेल

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    पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री अब्दुल क़ादिर पटेल ने सोमवार को इस्लामाबाद में एक सेमिनार में कहा था कि जो ज़्यादा बच्चा पैदा करना चाहते हैं, वे ऐसे मुल्क में जाएं, जहाँ मुसलमान अल्पसंख्यक हैं.

    अब्दुल क़ादिर का यह बयान सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हो रहा है. कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी स्वास्थ्य मंत्री ने आबादी कम करने के लिए अनोखा उपाय सुझाया है.

    पाकिस्तानी स्वास्थ्य मंत्री विश्व जनसंख्या दिवस से जुड़े एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. इसी सेमिनार में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में कुछ लोग कोविड-19 और पोलियो के टीकाकरण को परिवार नियोजन से जोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह बहुत ही ख़तरनाक प्रवृत्ति है.

    अब्दुल क़ादिर पटेल ने कहा था, ''पोलियो वर्कर को बच्चों को टीका लगाने के लिए हर दिन क़रीब एक हज़ार रुपए मिलते हैं. पोलियो का टीकाकरण बच्चों को विकलांगता से बचाने के लिए काफ़ी अहम है. लेकिन पोलियो वर्करों को लोग मार दे रहे हैं. कम से कम 60 पोलियो वर्करों को ड्यूटी के दौरान मारा गया.''

    पटेल ने अपना एक निजी अनुभव साझा करते हुए कहा, ''कोविड-19 की वैक्सीन मुफ़्त में दी जा रही है लेकिन फिर भी लोग इसे लगाने से पहरेज कर रहे हैं. मेरे पड़ोस में एक व्यक्ति ने वैक्सीन लगाने से इनकार कर दिया. इसके बाद डॉक्टरों ने मुझसे संपर्क किया और उस व्यक्ति को समझाने के लिए कहा. उस 73 साल के व्यक्ति के पास मैं गया और उसे समझाने की कोशिश की. लेकिन उसकी चिंता थी कि वैक्सीन लगाने के बाद वह बच्चा पैदा करने में सक्षम नहीं होगा.''

    क़ादिर पटेल ने कहा, ''लोगों को समझना चाहिए कि स्वास्थ्य मंत्रालय मुसमलानों की आबादी कम नहीं करना चाहता है. हम चाहते हैं कि मुसलमानों का जीवन स्तर सुधरे. लोगों को समझना चाहिए कि इस देश में मुसलमान बहुसंख्यक हैं. अगर मुसलमान अल्पसंख्यक होते तो आबादी बढ़ाने को तार्किक भी कहा जाता. पाकिस्तान की आबादी 2030 तक 30 करोड़ हो जाएगी.''

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  16. अग्निपथ में जाति और धर्म के कॉलम पर विवाद, बीजेपी ने दी सफ़ाई

    राजनाथ सिंह

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    भारतीय सेना में अग्निपथ योजना के तहत होने वाली भर्तियों में आवेदक से जाति प्रमाण पत्र भी मांगा गया है. इसे लेकर अब विवाद हो गया है. विपक्ष के लोग सवाल पूछ रहे हैं कि सेना में जाति आधारित कोई आरक्षण नहीं है तो फिर आवेदकों से जाति प्रमाण पत्र क्यों मांगा जा रहा है? बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने भी इस पर सवाल उठाया है.

    वरुण गांधी ने ट्वीट कर कहा है, ''सेना में किसी भी तरह का कोई आरक्षण नहीं है पर अग्निपथ की भर्तियों में जाति प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है. क्या अब हम जाति देख कर किसी की राष्ट्रभक्ति तय करेंगे?

    सेना की स्थापित परंपराओं को बदलने से हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर जो प्रभाव पड़ेगा उसके बारे में सरकार को सोचना चाहिए.''

    वरुण गांधी के अलावा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने जाति प्रमाण पत्र मांगने पर आपत्ति जताते हुए मोदी सरकार को निशाने पर लिया है. संजय सिंह ट्वीट कर कहा है, ''मोदी सरकार का घटिया चेहरा देश के सामने आ चुका है. क्या मोदी जी दलितों/पिछड़ों/आदिवासियों को सेना भर्ती के क़ाबिल नही मानते? भारत के इतिहास में पहली बार 'सेना भर्ती' में जाति पूछी जा रही है. मोदी जी आपको 'अग्निवीर' बनाना है या 'जातिवीर'?

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मंगलवार को समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि अग्निपथ में जाति को लेकर जो बात कही जा रही है, वह अफ़वाह है. राजनाथ सिंह ने कहा, ''यह महज़ अफ़वाह है. यह आज़ादी से पहले की ही व्यवस्था है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. पुरानी व्यवस्था ही जारी है.''

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    संजय सिंह के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख आमित मालवीय ने लिखा है, ''2013 में सेना ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाखिल कर स्पष्ट किया था कि जाति, क्षेत्र और धर्म आधारित भर्तियां नहीं होती हैं. हालांकि ख़ास इलाक़े के लोग रेजिमेंट में ज़रूर आते हैं और यह प्रशासनिक सुविधा के कारण होता है.''

    आरजेडी नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी जाति प्रमाण पत्र मांगने पर सरकार की आलोचना की है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ''आजादी के बाद 75 वर्षों तक सेना में ठेके पर “अग्निपथ” व्यवस्था लागू नहीं थी. सेना में भर्ती होने के बाद 75% सैनिकों की छँटनी नहीं होती थी लेकिन संघ की कट्टर जातिवादी सरकार अब जाति/धर्म देखकर 75% सैनिकों की छँटनी करेगी. सेना में जब आरक्षण है ही नहीं तो जाति प्रमाणपत्र की क्या ज़रूरत?''

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, इस विवाद पर भारतीय सेना ने कहा है, ''अभ्यर्थियों से जाति और धर्म सर्टिफिकेट ज़रूरत पड़ने पर हमेशा से मांगा जाता रहा है. अग्निवीर भर्ती स्कीम में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. ट्रेनिंग और युद्ध के दौरान मौत होने पर धार्मिक रीति रिवाज के हिसाब से जवानों की अंत्येष्टि होती है. इसलिए धर्म का सर्टफिकेट मांगा जाता है.''

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    बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखा है. मंगलवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर संबित पात्रा ने कहा, ''इस बात का दुख है कि सांसद सच से परिचित नहीं हैं. भारत की सेना धर्म और जाति के आधार पर भर्तियां नहीं करती है. जाति और धर्म से कहीं ऊपर भारत की सेना है. जाति और धर्म के कॉलम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सेना ने जवाब दिया था. 2013 में सेना हलफनामा दायर कहा था कि जाति और धर्म की भर्तियों में कोई भूमिका नहीं है. लेकिन यह प्रशासनिक और संचलान के लिए ज़रूरत है. 2013 में तो मोदी जी की सरकार भी नहीं थी. तब मनमोहन सिंह की सरकार थी.''

    संबित पात्रा ने कहा, ''धर्म का कॉलम इसलिए है कि दुर्भाग्य से कोई जवान शहीद होता है तो उसकी अंत्येष्टि कैसे होगी, उसमें धर्म की ज़रूरत पड़ती है. इस सच को जानते हुए भी सेना पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है. सेना में भर्ती की प्रक्रिया कोई नई नहीं है. आज़ादी के बाद भी पुरानी प्रक्रिया को ही मंज़ूरी दी गई थी. मोदी सरकार ने इस प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया है. कुछ राजनेता अफ़वाह फैलाना चाहते हैं. जाति के आधार पर ये देश को बाँटना चाहते हैं.''

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  17. वामपंथी कवि वरवर राव को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, 10 अगस्त तक बढ़ी अंतरिम ज़मानत

    वामपंथी कवि और लेखक वरवर राव का पोस्टर

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    वामपंथी कवि और लेखक वरवर राव को मंगलवार सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है.

    अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव मामले में अभियुक्त वरवर राव की अंतरिम ज़मानत 10 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी है.

    जस्टिस उदय उमेश ललित की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मंगलवार को वरवर राव की स्थायी चिकित्सा ज़मानत की याचिका पर सुनवाई के बाद ये आदेश पारित किया है.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "आज का अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा, जब तक हम मामले की सुनवाई नहीं कर लेते." कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को करेगा.

    82 साल के वरवर राव को बॉम्बे हाई कोर्ट से मिली अस्थायी चिकित्सा ज़मानत आज ख़त्म हो रही है जिसके कारण उन्हें आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा.

    तीन जजों की बेंच में जस्टिस उदय उमेश ललित के अलावा एस रविंद्र भट्ट और जस्टिस सुधांशु धूलिया शामिल हैं.

    वामपंथी कवि और लेखक वरवर राव
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    क्या है भीमा कोरेगांव मामला

    साल 2018 में, भीमा कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ में हिंसा भड़क उठी थी.

    भीमा-कोरेगांव वो जगह है जहाँ एक जनवरी 1818 को मराठा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था. इस युद्ध में महार समुदाय ने पेशवाओं के खिलाफ अंग्रेज़ों की ओर से लड़ाई लड़ी थी. अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी ने महार रेज़िमेंट की बदौलत ही पेशवा की सेना को हराया था.

    साल 2018 में भड़की हिंसा में एक शख़्स की मौत हो गई थी और उसके बाद यह हिंसा महाराष्ट्र और देश के दूसरे हिस्सों में फैल गई.

    16 लोग, जिसमें वकील, एकेडेमिक्स और एक्टिविस्ट भी शामिल थे, उन्हें बाद में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया गया. इन लोगों पर चरमपंथ और माओवादी विद्रोहियों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया गया.

  18. लुलु मॉल विवाद पर योगी आदित्यनाथ ने दी चेतावनी

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में मौजूद लुलु मॉल विवाद पर बयान दिया है.

    उन्होंने कहा कि कुछ लोग मॉल को लेकर राजनीति का अड्डा बनाने, अनावश्यक बयानबाज़ी कर और उसके नाम पर प्रदर्शन करके लोगों के आवागमन को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं.

    सख्त कार्रवाई की बात करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, "लखनऊ के प्रशासन से कहा गया कि अराजकता पैदा करने और सांप्रदायिक विद्वेष की स्थिति पैदा करने की जो कोशिश हो रही है. इसे लखनऊ प्रशासन को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए. किसी भी शरारत को स्वीकार नहीं किया जाएगा. माहौल ख़राब करने वालों से सख्ती से निपटना चाहिए."

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    इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसी को भी सड़क पर कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़े.

    क्या है विवाद

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने 10 जुलाई को लुलु मॉल का उद्घाटन किया था. इसे लखनऊ का सबसे बड़ा मॉल बताया जा रहा है.

    मॉल में नमाज़ पढ़े जाने का एक वीडियो सामने आने के बाद से ये विवादों में बना हुआ है. इस वीडियो के बाद अखिल भारत हिंदू महासभा नाम के एक हिंदूवादी संगठन ने गुरुवार को मॉल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और इस पर बुलडोज़र चलाने की मांग की.

    हालांकि पिछले साल, योगी आदित्यनाथ सरकार ने सार्वजनिक इलाक़ों में धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था. ये फ़ैसला सड़क पर नमाज़ पढ़े जाने को लेकर हुए विवाद के बाद लिया गया था.

    लुलु मॉल

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  19. रुपए कमज़ोर होने के असर को जानिए

    रुपया

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    भारतीय मुद्रा रुपए में जारी गिरावट थम नहीं रही है और मंगलवार को एक डॉलर की तुलना में रुपया 80.0125 पर पहुँच गया.

    इस साल क़रीब 30 अरब डॉलर विदेशी निवेश भारत से बाहर जा चुका है और रुपए पर इसका सीधा असर पड़ा है. इससे चालू खाता घाटा और बढ़ने की आशंका है.

    ऐसा तब हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर तेल की क़ीमतें लगातार बढ़ रही हैं. भारत सरकार कमज़ोर होते रुपए को रोकने के लिए सोने के आयात पर टैक्स बढ़ा रही है. लेकिन यह केवल भारत की मुद्रा की बात नहीं है. बाक़ी की उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं की हालत भी ऐसी ही है. इस साल भारत की मुद्रा में सात फ़ीसदी की गिरावट आई है.

    थाईलैंड ने 1997 के जुलाई महीने में अपनी मुद्रा का एक दशक से ज़्यादा समय के बाद अवमूल्यन किया था. थाईलैंड ने ऐसा निर्यात बढ़ाने के उद्देश्य से किया था. थाईलैंड ने पहले अपनी मुद्रा बाट को दुरुस्त रखने के लिए अरबों डॉलर खर्च किया, मगर बाद में सरकार को हथियार डालने पड़े और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने झुकना पड़ा. तब थाईलैंड की मुद्रा में 15 फ़ीसदी का अवमूल्यन किया गया था. यानी डॉलर की तुलना में 15 फ़ीसदी जानबूझकर कमज़ोर किया गया था.

    एशियाई मौद्रिक नीति में इसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा गया था. इससे पहले थाईलैंड ने 1984 में अपनी मुद्रा का अवमूल्यन किया था. तब जोक चलता था कि मज़बूत डॉलर से बैंकॉक में मसाज कराना और सस्ता होगा.

    कमज़ोर मुद्रा किसी के लिए ख़ुशी लेकर आती है तो कइयों को नुक़सान करती है. लेकिन कमज़ोर मुद्रा को कमज़ोर अर्थशास्त्र की निशानी के तौर पर देखा जाता है. लेकिन इसमें कोई विवाद नहीं है कि अस्थिर मुद्रा किसी के भी हित में नहीं होती. इससे चीज़ें महंगी होती हैं और अस्थिरता का माहौल रहता है.

    रुपया

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    1947 में जब देश आज़ाद हुआ तो रुपए और डॉलर की क़ीमत में कोई फ़र्क़ नहीं था. आज़ादी के बाद से अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुपए में गिरावट आती रही और आज की तारीख़ में एक डॉलर की क़ीमत क़रीब 80 रुपए से ज़्यादा हो गई है. अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की क़ीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार है.

    भारत अपनी ज़रूरत का 80 फ़ीसदी तेल आयात करता है. आरबीआई के अनुसार 2017-18 में भारत ने 87.7 अरब डॉलर तेल आयात पर खर्च किया. ज़ाहिर है तेल की क़ीमत बढ़ती है तो भारत के तेल का आयात बिल भी बढ़ता है और इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है.

    मतलब डॉलर की मांग बढ़ती है तो घरेलू मुद्रा का कमज़ोर होना लाजिमी है. कमज़ोर रुपया और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में तेल की बढ़ती क़ीमत का असर ये होता है कि देश के भीतर पेट्रोल और डीज़ल महंगे हो जाते हैं.

    1966 में इंदिरा गांधी की सरकार ने डॉलर की तुलना में रुपए में 4.76 से 7.50 तक का अवमूल्यन किया था. कहा जाता है कि इंदिरा गांधी ने कई एजेंसियों के दबाव में ऐसा किया था ताकि रुपए और डॉलर का रेट स्थिर रहे. सूखे और पाकिस्तान-चीन से युद्ध के बाद उपजे संकट के कारण यह इंदिरा गांधी ने यह फ़ैसला किया था.

    1991 में नरसिम्हा राव की सरकार ने डॉलर की तुलना में रुपए का 18.5 फ़ीसदी से 25.95 फ़ीसदी तक अवमूल्यन किया था. ऐसा विदेशी मुद्रा के संकट से उबरने के लिए किया गया था. इसके बाद रुपए में गिरावट किसी भी सरकार में नहीं थमी. वो चाहे अटल बिहारी वाजपेयी पीएम रहे हों या अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह. और अब मज़बूत मोदी सरकार में भी यह सिलसिला थम नहीं रहा.

    रुपया

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  20. शादी की पार्टी चल रही थी और यूं आई समंदर की भयावह लहर

    लहरें

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    हवाई के दक्षिणी तटों पर ऊंची लहरों से कई घरों और व्यवसायों को नुक़सान पहुँचा है.

    राष्ट्रीय मौसम सर्विस के मुताबिक़ लहरों की ऊंचाई 6 मीटर तक थी जो शनिवार को अपने चरम पर थीं. प्रशांत महासागर के बीच में स्थित हवाई, अमेरिका का एक प्रांत है.

    कैलुआ-कोना में समुद्र किनारे शनिवार को एक शादी हो रही थी जब पानी की बड़ी लहरें शादी के लिए लगे सेट के अंदर आ गई. लहरें इतनी भयावह थीं कि वहाँ रखी मेज कुर्सियां सब पानी में बहने लगीं.

    द गार्डियन न्यूज़ वेबसाइट के मुताबिक़ हवाई में पली बढ़ी लेखिका सारा एकरमैन इस शादी में शामिल थीं जिन्होंने लहरों को कैमरे में क़ैद करने का काम किया. उन्होंने बताया कि लहरें बहुत भयावह थीं. जब लहरें आईं तो वहाँ लगी कुर्सी मेज बह गई.

    उन्होंने बताया कि ये शादी शुरू होने से क़रीब पाँच मिनट पहले हुआ. उसने सबको डरा डरा दिया था.

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    होनोलूलू में राष्ट्रीय मौसम सेवा कार्यालय के प्रभारी मौसम विज्ञानी क्रिस ब्रेंचली ने कहा कि इतनी बड़ी लहरें बनाने के लिए एक साथ कई कारक ज़िम्मेदार हैं. लहरें 12 से 15 फीट तक ऊंची थीं. ऐसी लहरें बहुत कम देखने को मिलती हैं. कई दशकों में इस तरह की लहरें पहली बार देखी गई हैं.