उद्धव ठाकरे से शिवसेना के बाग़ी विधायक का सवाल, कभी पूछा कि हमारा क्या हाल है

भरत गोगावले ने कहा, पानी में से मछली निकालने के बाद जो हाल मछली का होता है वैसा ही हाल फिलहाल महाविकास अघाड़ी सरकार के नेताओं का है.

लाइव कवरेज

भूमिका राय and अभिनव गोयल

  1. महाराष्ट्र संकट LIVE: शिव सेना में बग़ावत के बाद अब क्या कदम उठाएंगे उद्धव ठाकरे

  2. नरेंद्र मोदी समेत 59 लोगों को क्लीन चिट दिए जाने के ख़िलाफ़ ज़किया जाफ़री की याचिका ख़ारिज

    मोदी

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    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ज़किया जाफ़री की याचिका को ख़ारिज कर दिया है.

    इस याचिका में 2002 के गुजरात दंगे के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 59 लोगों को एसआईटी से मिली क्लीन चिट को चुनौती दी गई थी.

    जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फ़ैसला सुनाया.

    गुजरात दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जाँच दल ने तत्कालिक मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी थी.

    ज़किया जाफ़री ने सुप्रीम कोर्ट में बीते साल 9 दिसंबर 2021 को याचिका दाख़िल की थी. ज़किया कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी हैं.

    ज़किया जाफ़री

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    'सबूतों के अभाव में मिली थी क्लीनचिट'

    विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 8 फ़रवरी 2012 को मामला बंद करने के लिए रिपोर्ट दाखिल की थी. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी समेत 59 लोगों को क्लीनचिट देते हुए कहा था कि उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने योग्य कोई साक्ष्य नहीं हैं.

    इसके साथ ही निचली अदालत ने एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर इनको क्लीन चिट दे दी थी.

  3. अग्निपथ के लिए एयर फ़ोर्स में आज से आवेदन शुरू

    भारतीय वायु सेना

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    भारतीय वायु सेना में आज, 24 जून से केंद्र सरकार की ‘अग्निपथ योजना’ के तहत ‘अग्निवीरों’ की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है. आज, शुक्रवार से प्रतिभागी अग्निपथ योजना के तहत भारतीय वायुसेना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं.

    आवेदन करने की आख़िरी तारीख़ 5 जुलाई 2022 है.

    परीक्षा ठीक एक महीने बाद यानी 24 जुलाई से शुरू होंगी.

    वायुसेना

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    आवेदक ऑनलाइनफॉर्म भर सकते हैं. इसके लिए भारतीय वायु सेना की वेबसाइट पर पूरी जानकारी शेयर की गई है. आवेदन कर रहे छात्रों को ऑनलाइन अपनी दसवीं की मार्कशीट, सर्टिफ़िकेट और इंटरमीडिएट की मार्कशीट अपलोड करनी होगी.

    ऑनलाइन परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के दौरान आवेदकों को 250 रुपये की परीक्षा फ़ीस जमा करनी होगी. यह रकम डिजिटल पेमेंट या चालान के माध्यम से जमा हो सकती है.

    अग्निपथ योजना

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    क्या है अग्निपथ योजना

    अग्निपथ योजना भारतीय सेना के तीनों अंगों थलसेना, वायुसेना और नौसेना में क्रमश: जवान, एयरमैन और नाविक के पदों पर भर्ती के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा लाई गई एक नई योजना है.

    एक बार भर्ती हो जाने के बाद उन्हें अग्निवीर के रूप में जाना जाएगा और उनका कार्यकाल चार सालों का होगा.

    अब से इन पदों पर भर्ती के लिए चलने वाली दूसरी अन्य योजनाएं ख़त्म हो जाएंगी.

    यदि आप 17.5 साल से 21 साल की उम्र के बीच के हैं, तो आप इस योजना के तहत भर्ती होने के लिए आवेदन दे सकते हैं.

    कोरोना काल में भर्ती प्रक्रिया के रुके रहने के चलते, अपवाद के तौर पर, केवल इस साल उम्र की अधिकतम सीमा में दो सालों की छूट दी गई है.

    इसका मतलब यह हुआ कि इस साल 23 साल तक की उम्र वाला कोई भी युवा भर्ती की इस प्रक्रिया के लिए आवेदन कर सकता है.

  4. भारत की तुलना अर्जेंटीना से अर्थशास्त्री कौशिक बासु ने क्यों की

  5. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा- “नहीं सहेंगे शरद पवार का अपमान”

    संजय राउत

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    शिवसेना नेता संजय राउत ने आज पत्रकारों से कहा कि एनसीपी नेता शरद पवार को धमकियां दी जा रही हैं.

    पत्रकारों से बात करने के साथ ही उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट भी किया है.

    उन्होंने आरोप लगाते हुए लिखा है, "भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि अगर महाविकास अघाड़ी सरकार को बचाने का प्रयास किया गया तो शरद पवार को घर नहीं जाने दिया जाएगा."

    संजय राउत ने कहा, “महाविकास अघाड़ी सरकार रहे या न रहे लेकिन शरद पवार के लिए ऐसी भाषा स्वीकार्य नहीं है.”

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    संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संख्या बल कागज़ पर ज़्यादा हो सकती है लेकिन अब यह लड़ाई क़ानूनी लड़ाई होगी.

    उन्होंने कहा,”हमारे जिन 12 लोगों ने बग़ावत शुरू की है उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है जिसके लिए हमारे लोगों ने सभापति से मुलाकात की है.”

    संजय राउत ने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से सवाल करते हुए कहा, “पवार साहब को धमकियां देने का काम चल रहा है. अमित शाह और मोदी जी आप के मंत्री पवार साहब को धमकी दे रहे हैं. क्या ऐसी धमकियों को आपका समर्थन है?”

    आज होगी बैठक

    महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना ने आज दोपहर 12 बजे शिवसेना भवन में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में पार्टी के जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई गई है.

  6. अमेरिकी सांसद ने भारत-विरोधी प्रस्ताव किया पेश

    इलहान उमर

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    अपने भारत विरोधी रुख़ को बनाए रखते हुए अमेरिका में डेमोक्रेटिक दल की नेता इलहान उमर ने अमेरिकी सदन में एक प्रस्ताव पेश किया है.

    यह प्रस्ताव अमेरिकी विदेश मंत्री को भारत को ऐसे देश के रूप मे नामित करने के लिए कहा है जहां धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के कथित उल्लंघन को लेकर स्थिति चिंताजनक है.

    इलहान उमर का भारत के प्रति यह रुख़ नया नहीं है. इससे पहले उन्होंने इसी साल अप्रैल महीने में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का दौरा किया था. उनका ये दौरा सुर्खियों में रहा था. भारत ने इलहान के इस दौरे की काफी आलोचना की थी.

    सांसद रशीदा तालिब और जुआन वर्गस ने भी प्रस्ताव को सह-प्रस्तावित किया है. इस प्रस्ताव में बाइडन प्रशासन से अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की सिफारिशों को लागू करने का आग्रह किया गया है. आयोग बीते तीन सालों से भारत को ‘धार्मिक आज़ादी को लेकर विशेष चिंता वाला देश” घोषित करने की मांग की है.

    मंगलवार को पेश किए गए इस प्रस्ताव को आवश्यक कार्रवाई के लिए सदन के विदेश मामलों की समिति के पास भेजा गया है.

    इलहान

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    भारत ने जताई थी आपत्ति

    इलहान की पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की यात्रा पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने नाराज़गी जताई थी.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इसे भारतीय क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया था.

    उन्होंने कहा, "उन्होंने जम्मू-कश्मीर के एक ऐसे हिस्से का दौरा किया है, जिसपर वर्तमान में पाकिस्तान का अवैध क़ब्ज़ा है. अगर कोई राजनेता अपनी संकीर्ण मानसिकता की राजनीति करना चाहती हैं तो ये उनका काम हो सकता है लेकिन हमारी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है."

    कौन हैं इलहान

    हिजाब पहनने वाली इलहान उमर ने अपना बचपन कीनियाई शरणार्थी शिविर में बिताया था जहां उनका परिवार सोमालिया से माइग्रेट करके आया था. उन्होंने इस शरणार्थी शिविर में चार साल बिताए.

    फिर, साल 1997 में एक स्पांसर की मदद से वह अमेरिकी राज्य मिनेसोटा पहुंचीं.

    साल 2016 में, 36 वर्षीय इलहान उमर पहली सोमाली-अमेरिकन कांग्रेसवुमेन बन गईं. अपनी जीत के बाद उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि ''यह जीत उस आठ साल की बच्ची की है, जो शरणार्थियों के कैंप में थी. यह जीत उस लड़की की है, जिसे ज़बरदस्ती कम उम्र में ही शादी के लिए मजबूर किया गया था. यह जीत उन सभी की है जिन्हें सपने देखने से रोका गया."

  7. राष्ट्रपति चुनाव 2022: जगनमोहन रेड्डी देंगे द्रौपदी मुर्मू को समर्थन

    जगन मोहन रेड्डी

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    आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन देने का फ़ैसला किया है.

    राष्ट्रपति पद के लिए पहली बार किसी आदिवासी और वो भी एक महिला के नामांकन की सराहना करते हुए, वाईएसआरसीपी ने उन्हें अपना समर्थन देने की घोषणा की है.

    ऑल इंडिया रेडियो की ख़बर के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय ने गुरुवार रात को एक बयान जारी करके कहा कि जगन मोहन रेड्डी राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के कारण नामांकन दाख़िल करने के दौरान मौजूद नहीं रहेंगे. यह मीटिंग पहले से ही निर्धारित थी.

    मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी नेता जगनमोहन रेड्डी मुर्मू के नामांकन दाख़िल करने के दौरान दिल्ली नहीं जा रहे हैं.

    वाईएसआरसीपी के अलावा नवीन पटनायक की बीजू जनता दल ने भी मुर्मू को उम्मीदवार बनाए जाने का समर्थन किया है. ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने तो बुधवार को राज्य के सभी विधायकों से पार्टी लाइन से इतर जाकर राज्य की बेटी द्रोपदी मुर्मू के लिए समर्थन की मांग की थी.

    वाईएसआरसीपी की ओर से कहा गया है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी आदिवासी और महिला को देश के सर्वोच्च पद के लिए नामित किया गया है. यह एक सराहनीय क़दम है और इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने मुर्मू को समर्थन देने का फ़ैसला किया है.

    वाईएसआरसीपी ने घोषणा की है कि उनके संसदीय दल के नेता वी. विजयसांई रेड्डी और लोकसभा में उनके नेता पीवी मिधुन, मुर्मू के नामांकन के दौरान मौजूद रहेंगे.

    इससे पहले मुर्मू, गुरुवार को ओडिशा से दिल्ली पहुंचीं. जहां उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की.

  8. उद्धव ठाकरे क्या अब शिव सेना पर नियंत्रण खो चुके हैं?

    उद्धव ठाकरे

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    महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी गठबंधन टूटने की क़गार पर नज़र आ रहा है.

    शिव सेना नेता एकनाथ शिंदे पार्टी के क़रीब 37 बाग़ी विधायकों के साथ गुवाहाटी में मौजूद हैं. ऐसे में आशंकाएं ज़ाहिर की जा रही हैं कि महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार गिर सकती है.

    एकनाथ शिंदे ने वैचारिक मतभेद के आधार पर एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने की अपील की है. ऐसे में सरकार के अस्तित्व को लेकर अटकलें लग रही हैं.

    दूसरी ओर शिव सेना नेता संजय राउत ने गुरुवार को कहा कि हम महाविकास अघाड़ी छोड़ देंगे, लेकिन इसके लिए विधायकों को 24 घंटे में वापस आना होगा.

    उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमें शिव सेना प्रमुख से बात करनी चाहिए. वह मांग उनके सामने रखी जानी चाहिए. हमें वहां बैठकर पत्र-व्यवहार नहीं करना चाहिए. उनकी मांग पर निश्चित रूप से विचार किया जाएगा. हम महाविकास अघाड़ी छोड़ देंगे, लेकिन इसके लिए विधायकों को 24 घंटे में वापस आना होगा.”

    संजय राउत

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    संजय राउत का दावा

    उन्होंने यह दावा भी किया कि उनके विधायकों का अपहरण किया गया है. उन्होंने कहा, “उन्होंने कहा कि वो ये बात वो बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहे हैं. इसके साथ ही कहा कि हमारे विधायकों का अपहरण किया गया है और उद्धव ठाकरे जल्द ही सरकारी निवास 'वर्षा' पर वापस लौटेंगे.”

    उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि हम गुवाहाटी में मौजूद विधायकों में से 21 के संपर्क में हैं और जब वे मुंबई आएंगे तो हमारे साथ होंगे.

    उन्होंने दावे के साथ कहा कि अगर फ़्लोर टेस्ट की बात होगी तो पूरा भरोसा है कि वे महाविकास अघाड़ी के गठबंधन को ही वोट देंगे.

    एकनाथशिंदे

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    बीजेपी के साथ जाने पर एकनाथ शिंदे बोले

    इससे पहले बुधवार रात तक शिवसेना के 32 बाग़ी विधायक एकनाथ शिंदे के साथ सूरत में थे लेकिन सूरत से गुवाहाटी पहुंचने के साथ ही इन विधायकों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है. शिंदे को एक अलग दल बनाने और दलबदल विरोधी क़ानून से बचने के लिए शिवसेना के 55 में से 37 विधायकों का ही समर्थन भी चाहिए.

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    उद्धव ठाकरे ने इस राजनीतिक घमासान के बाद से अभी तक एक बार जनता को संबोधित किया है. इससे पहले उन्होंने अपना आधिकारिक आवास वर्षा छोड़ दिया था और परिवार समेत मातश्री लौट आए हैं. गुरुवार को पार्टी के विधायकों की बुलाई गई थी जिसमें पुत्र आदित्य ठाकरे समेत सिर्फ़ 18 विधायक ही शामिल हुए. इसके बाद एक बैठक वर्षा में भी हुई.

    दूसरी ओर बीजेपी ने अभी तक अपने रणनीतिक क़दम को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं.

    हालांकि गुरुवार शाम को गुवाहाटी में बाग़ी विधायकों से बात करते हुए एकनाथ शिंदे ने शुरुआती संकेत ज़रूर दिए हैं. उन्होंने हा कि हमारे सुख-दुख एक हैं. जो भी होगा, हम उसका एकता के साथ सामना करेंगे. जीत हमारी है.

    ऐसा कहते हुए उन्होंने बीजेपी का तो नाम नहीं लिया लेकिन परोक्ष रूप से उसका ज़िक्र किया और कहा कि वे उनका समर्थन कैसे करते हैं.

    उन्होंने कहा, "यह राष्ट्रीय पार्टी है. यह महाशक्ति है. उन्होंने मुझे बताया है कि मैंने जो फ़ैसला लिया है वह ऐतिहासिक है और हमारे पास इसके पीछे उनकी पूरी शक्ति है."

  9. भारत ने काबुल में फिर से खोला अपना दूतावास

    काबुल में मुलाक़ात

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    अफ़ग़ानिस्तान में अपनी उपस्थिति को दोबारा से बनाने की दिशा में गुरुवार को भारत ने एक अहम क़दम उठाया. भारत ने काबुल में अपने दूतावास में एक “तकनीकी टीम” की तैनाती की है और इसी के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी में एक बार फिर से अपनी राजनयिक उपस्थिति स्थापित की है.

    इस बीच बुधवार को अफ़ग़ानिस्तान मे आए भूकंप और उससे हुए नुक़सान को देखते हुए भारत की ओर से सहायता की पहली खेप भी भेजी गई है. यह भूकंप इतना भयावह था कि अब तक इससे कम से कम 1000 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की जा चुकी है.

    अफ़ग़ानिस्तान में बीते 10 महीनों के बाद से भारत अपना दूतावास दोबारा खोल रहा है. बीते साल अगस्त महीने में अफ़ग़ानिस्तान में हुए तख़्तापलट और तालिबान के नियंत्रण के बाद से ही भारत समेत दुनिया के कई देशों ने अपने दूतावास बंद कर दिए थे.

    इस क़दम के कुछ दिनों पहले ही, 2 जून को भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव जेपी सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल का दौरा किया था. अफ़ग़ानिस्तान में पिछले साल तालिबान की सरकार बनने के बाद से भारत के किसी सरकारी दल का ये पहला काबुल दौरा था.

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    जेपी सिंह के नेतृत्व में इस शिष्टमंडल ने तालिबान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुतक्क़ी से मुलाक़ात की थी. इसके लगभग 20 दिनों बाद भारत की ओर से यह अहम क़दम उठाया गया है.

    माना जा रहा है कि तालिबान नेताओं से सुरक्षा का आश्वासन मिलने के बाद ही भारत ने यह क़दम उठाया है.

    भारत के इस क़दम के साथ ही काबुल में दूतावास खोलने वाला वह 15वां देश बन गया है. इससे पहले रूस, चीन, पाकिस्तान, ईरान, तुर्की, क़तर,सऊदी अरब, इंडोनेशिया, यूरोपीय संघ पहले ही वहाँ दूतावास को दोबारा से संचालित कर रहे हैं.

    अधिकारियों का कहना है कि काबुल में दूतावास खोलना तालिबान शासन के साथ मिलकर काम करने की दिशा में उठाया गया एक अहम क़दम है. ख़ासतौर पर ऐसे में जबकि भारत चरमपंथी समूहों और ड्रग्स के व्यापार को लेकर चिंतित है.

    सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा और इंजीनियरिंग वर्कर्स की एक टीम को काबुल भेजा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य वहां काउंसलिंग और वीज़ा सुविधा को दोबारा से पटरी पर लाना है. इसके साथ ही यह टीम विकास से जुड़े रख-रखाव के काम देखेगी. ये टीम उन परियोजनाओं की भी देख रेख करेगी जो भारत ने तालिबान से पहले की सरकार के दौर में वहां शुरू की थीं.

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  10. नमस्कार!

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