एकनाथ शिंदे ने कहा- बग़ावत के फ़ैसले को राष्ट्रीय पार्टी का समर्थन

गुवाहाटी में विधायकों को संबोधित करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि ये राष्ट्रीय पार्टी है और उन्होंने कहा कि आपने जो निर्णय लिया है वो ऐतिहासिक है.

लाइव कवरेज

भूमिका राय and अभिनव गोयल

  1. एकनाथ शिंदे ने शेयर किया उद्धव ठाकरे के नाम लिखा पत्र और कहा- ये विधायकों की भावना

    विधायक

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    शिवसेना के बाग़ी विधायक एकनाथ शिंदे ने सीएम उद्धव ठाकरे को लिखा एक खुला ख़त ट्विटर पर शेयर किया है.

    एकनाथ शिंदे शिवसेना के कई विधायको के साथ गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल में हैं. यह ख़त संजय शिरसाट ने लिखा है. एकनाथ ने इस ख़त को ट्विटर पर शेयर किया है और लिखा है कि ये विधायकों की भावना है.

    ख़त में लिखा है- असल मायनों में कल मातोश्री के दरवाज़े खुले. ये दरवाज़े पिछले ढाई साल से बंद थे. हम शिवसेना के विधायक हैं लेकिन फिर भी ये दरवाज़े हमारे लिए भी बंद ते.हमें आपके आस-पास के लोगों को मनाना पड़ता था कि वे आपसे हमारी मुलाक़ात करवा दें. जो लोग विधानसभा या राज्यसभा गए, वे हमारी वजह से वहाँ पहुँचे. उन्होंने हमें पूरी तरह से दरकिनार करते हुए विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाई.”

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    पत्र में आगे लिखा गया है, “हमें आपसे वर्षा या मंत्रालय में कभी भी मिलने का मौक़ा नहीं मिला. लेकिन एकनाथ शिंदे वो शख़्स थे जिनके दरवाज़े हमारे लिए हमेशा खुले थे. उन्होंने हमें हमेशा सुना. हमने ही एकनाथ शिंदे से ये फ़ैसला, हमारे लिए लेने को कहा.”

    “भले ही हिंदुत्व शिवसेना का एजेंडा है लेकिन जब आदित्य ठाकरे अयोध्या जा रहे थे तो उन्होंने हमे अपने साथ अयोध्या जाने से रोक दिया. हममे से कई लोगों को व्यक्तिगत तौर पर फ़ोन करके यात्रा पर ना जाने के लिए कहा गया. हम पहले से ही चेक-इन कर चुके थे और विमान में थे, तब आपने एकनाथ शिंदे को फ़ोन करके कहा कि वे विधायकों को अयोध्या जाने से रोक दें.”

    चिट्ठी में आगे लिखा गया है कि हम आपसे नहीं मिल सकते थे लेकिन कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायकों की आप तक पहुँच थी. वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में काम करने, वित्तीय सहायता के लिए और दूसरे कामों के लिए पूरी तरह सक्षम थे. वहीं हमारे निर्वाचन क्षेत्र के लोग हमसे सवाल किया करते थे कि कैसे हमारे मूल विरोधी (कांग्रेस और राकांपा) अपने क्षेत्र में विकास कर रहे हैं लेकिन हम नहीं... और हमारे पास इसका कोई जवाब नहीं होता था.

    आपका कल का भाषण बेहद भावनात्मक था. लेकिन उसमें हमारे सवालों के जवाब नहीं थे. इसलिए मैं आपको अपनी भावनाओं से अवगत कराने के लिए यह ख़त लिख रहा हूं.

    उद्धव ठाकरे

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    बुधवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जनता को संबोधित किया था.

    अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने कहा, "लोग कह रहे थे कि मुख्यमंत्री मिलते नहीं हैं. शिवसेना कौन चला रहा है. मेरा ऑपरेशन हुआ था, इस वजह से मैं लोगों से मिल नहीं पाया. वो समय काफ़ी मुश्किल था. मैं हॉस्पिटल से ऑनलाइन काम कर रहा था. शिवसेना और हिंदुत्व एक दूसरे से जुड़े हुए शब्द हैं. शिवसेना हिंदुत्व से दूर नहीं हो सकती, क्योंकि शिवसेना प्रमुख ने मंत्र दिया है कि हिंदुत्व हमारी सांस है."

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    उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हैं लेकिन इसके लिए शिवसेना के विधायकों को उनके सामने आकर बोलना होगा.

    उन्होंने कहा, "एकनाथ शिंदे को सूरत जाकर बात करने की क्या ज़रूरत थी. कुछ विधायक यहाँ नहीं हैं. कुछ लोग फ़ोन कर रहे हैं कि वे लौटना चाहते हैं. मैंने हमेशा अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाया है. मैं सीएम पद छोड़ने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मेरे बाद कोई शिवसैनिक मुख्यमंत्री बने तो मुझे ख़ुशी होगी. लापता विधायक यहाँ आएँ और मेरे त्यागपत्र के साथ राजभवन जाएँ."

  2. नवीन पटनायक ने बताया- द्रौपदी मुर्मू के नामांकन के समय मौजूद रहेंगे उनके दो मंत्री

    नवीन पटनायक

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    ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बताया है कि उनकी कैबिनेट के दो सहयोगी राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए द्रौपदी मुर्मू के नामांकन के दौरान मौजूद रहेंगे. उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है.

    नवीन पटनायक ने लिखा है कि बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनसे इस बारे में बात की है. उन्होंने बताया कि उनकी सरकार में मंत्री जगन्नाथ सराका और टुकुनी साहू नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे और शुक्रवार को नामांकन के दौरान मौजूद भी रहेंगे.

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    नवीन पटनायक ने बुधवार को प्रदेश के सभी विधायकों से एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने को कहा था. उन्होंने ट्वीट कर लिखा था कि वे ओडिशा विधानसभा के सभी सदस्यों से अपील करते हैं कि पार्टी लाइन से अलग ओडिशा की बेटी द्रौपदी मुर्मू को सर्वसम्मति से समर्थन दें.

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    मंगलवार को बीजेपी की अगुआई में एनडीए ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया था. इसकी घोषणा बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने की थी. इस घोषणा के बाद नवीन पटनायक ने ट्वीट कर इस फ़ैसले का स्वागत किया था और ख़ुशी जताई.

    द्रौपदी मुर्मू

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    उन्होंने लिखा- द्रौपदी मुर्मू को देश के सर्वोच्च पद के लिए एनडीए का उम्मीदवार घोषित किए जाने पर बधाई. मुझे प्रसन्नता हुई जब पीएम नरेंद्र मोदी जी ने इस मामले पर मुझसे चर्चा की. ये ओडिशा के लोगों के लिए गौरव का क्षण है.

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    द्रौपदी मुर्मू ओडिशा की ही रहने वाली हैं और वे झारखंड की राज्यपाल भी रह चुकी हैं. एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के सामने हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा. ममता बनर्जी की पहल पर क़रीब 17 विपक्षी दलों ने यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है.

  3. महाराष्ट्र के सियासी संकट पर शिवराज सिंह चौहान ने ली कमलनाथ पर चुटकी

    शिवराज सिंह चौहान

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    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र में कांग्रेस के पर्यवेक्षक कमलनाथ पर चुटकी ली है. कांग्रेस ने महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच कमलनाथ को पार्टी का पर्यवेक्षक बनाकर मुंबई भेजा है.

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    बुधवार को कमलनाथ ने कांग्रेस विधायकों की बैठक की और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से फ़ोन पर बात भी की. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को उज्जैन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा- कांग्रेस ने कमलनाथ को महाराष्ट्र में सरकार बचाने के लिए भेजा है. जो मध्य प्रदेश में अपनी सरकार नहीं बचा पाया, वो महाराष्ट्र की सरकार बचाने जा रहा है. ये कांग्रेस कभी आपका भला नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अंतिम साँसें गिन रही है और उनके सबसे बड़े नेता ईडी के चक्कर लगा रहे हैं.

    शिवराज सिंह चौहान का इशारा कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर था. नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी ने उनसे कई दिनों तक पूछताछ की है. शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे के बग़ावत के कारण महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन इस समय संकट में है. शिंदे शिवसेना के कई विधायकों और कुछ निर्दलीय विधायकों के साथ गुवाहाटी में मौजूद हैं.

    कमलनाथ

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    असम में बीजेपी का शासन है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार को एफ़बी लाइव के ज़रिए लोगों को संबोधित किया था. उन्होंने कहा था कि अगर शिवसेना का कोई भी विधायक उनके सामने आकर इस्तीफ़ा मांगेगा, तो वो इस्तीफ़ा दे देंगे. उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में हिंदुत्व का भी ज़िक्र किया. फ़िलहाल वो अपना सरकारी आवास छोड़कर मातोश्री चले गए हैं.

  4. शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा- ईडी के दबाव में पार्टी छोड़ने वाले नहीं हो सकते बालासाहेब के भक्त

    संजय राउत

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    शिवसेना के सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि उनकी पार्टी आज भी पूरी तरह मज़बूत है.

    उन्होंने मीडिया से बात करते हुए दावा किया, “आज भी हमारी पार्टी मज़बूत है. किस हालात और किस दबाव में उन लोगों ने हमारा साथ छोड़ा उसका खुलासा जल्द होगा.”

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    संजय राउत ने दावा किया कि क़रीब 20 विधायक उनके संपर्क में हैं और जब वे मुंबई आएँगे तब इसकी जानकारी सामने आएगी.

    उन्होंने तंज़ किया कि जो लोग प्रवर्तन निदेशालय के दबाव में पार्टी छोड़ते हैं, वह बाला साहेब को मानने वाले नहीं हो सकते.

    संजय राउत ने कहा, “ईडी की जाँच के दबाव में पार्टी छोड़ने वाले बाला साहेब के भक्त नहीं हो सकते.”

    उन्होंने कहा, “हम असल में बाला साहेब के भक्त हैं. हमारे ऊपर भी प्रवर्तन निदेशालय का दबाव है लेकिन हम उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहेंगे.”

    शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत ने एकबार फिर फ़्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने का दावा किया.

    उन्होंने कहा कि हम लड़ने वाले लोग हैं और अंत में सत्य की जीत होगी.

    साथ ही उन्होंने कहा कि अगर विश्वास प्रस्ताव पेश किया जाता है तो हम बहुमत साबित करेंगे.

    ठाकरे

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    एकनाथ शिंदे को मिला चार और विधायकों का साथ

    शिवसेना नेता एकनाथ शिंदें के नेतृत्व में क़रीब 30-35 विधायक गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल में ठहरे हुए हैं. इस बीच चार और विधायक बुधवार देर रात होटल पहुँच गए.

    दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे अपना सरकारी आवास 'वर्षा' छोड़कर मातोश्री चले गए हैं.

    शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को लोगों से बात की.

    उद्धव ठाकरे ने कहा, "लोग कह रहे थे कि मुख्यमंत्री मिलते नहीं हैं. शिवसेना कौन चला रहा है. मेरा ऑपरेशन हुआ था, इस वजह से मैं लोगों से मिल नहीं पाया. वो समय काफ़ी मुश्किल था. मैं हॉस्पिटल से ऑनलाइन काम कर रहा था. शिवसेना और हिंदुत्व एक दूसरे से जुड़े हुए शब्द हैं. शिवसेना हिंदुत्व से दूर नहीं हो सकती, क्योंकि शिवसेना प्रमुख ने मंत्र दिया है कि हिंदुत्व हमारी सांस है."

    उन्होंने कहा, "एकनाथ शिंदे को सूरत जाकर बात करने की क्या ज़रूरत थी. कुछ विधायक यहाँ नहीं हैं. कुछ लोग फ़ोन कर रहे हैं कि वे लौटना चाहते हैं. मैंने हमेशा अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाया है. मैं सीएम पद छोड़ने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मेरे बाद कोई शिवसैनिक मुख्यमंत्री बने तो मुझे ख़ुशी होगी. लापता विधायक यहाँ आएँ और मेरे त्यागपत्र के साथ राजभवन जाएँ."

  5. इमरान ख़ान ने नए सेना प्रमुख की नियुक्ति को लेकर सरकार के डर का किया ज़िक्र

    इमरान ख़ान

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    पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ़ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान ने बुधवार को दावा किया है कि गठबंधन की सरकार इस बात से डरी हुई थी कि कहीं वे (इमरान ख़ान) अपने कार्यकाल में लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हमीद को सेना का अगला प्रमुख न नियुक्त कर दें.

    उन्होंने कहा, “वे डरते थे कि मैं लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ैज़ को नियुक्त करना चाहता हूँ. उन्हें डर था कि अगर ऐसा हुआ तो उनका भविष्य तबाह हो जाएगा.”

    जियो न्यूज़ की ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि मौजूदा शासक सेना और इंटर-सर्विसेज़-इंटेलिजेंस (आईएसआई) से डरते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का इल्म है कि उनका भ्रष्टाचार किसी ना किसी बिंदु पर ज़रूर पकड़ा जाएगा.

    इमरान ख़ान ने कहा, “क्योंकि इमरान ख़ान अपने भ्रष्टाचार छिपाना नहीं चाहता, वह अपना सेना प्रमुख नियुक्त नहीं करना चाहता था.”

    ख़ान ने कहा, “मैंने कभी किसी को सेना प्रमुख के तौर पर नियुक्त करने के बारे में नहीं सोचा था. मैंने कभी कोई ऐसा फ़ैसला लेने के बारे में नहीं सोचा जो योग्यता के आधार पर ना हो.”

    पीटीआई नेता ने कहा कि मौजूदा सत्ताधारी कथित तौर पर संस्थानों का गला घोंट रहे हैं. उन्होंने विभिन्न संस्थानों में अपने लोगों की नियुक्ति पर उनकी निंदा भी की.

  6. महाराष्ट्र सियासी संकट: क्या है ताज़ा हाल

  7. अग्निपथ पर परमवीर चक्र विजेता और सियाचिन के हीरो कैप्टन बाना सिंह खुलकर बोले

  8. चीन में भारतीय राजदूत प्रदीप कुमार रावत से मिल चीनी विदेश मंत्री ने कही कई बातें

    वांग यी- प्रदीप कुमार रावत

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    चीन में भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाक़ात की है.

    वांग यी ने कहा कि चीन और भारत के साझा हित उनके मतभेदों से कहीं अधिक हैं और दोनों पक्षों को एक-दूसरे को कमज़ोर करने के बजाय, एक-दूसरे पर संदेह करने के बजाय, समर्थन करना चाहिए. दोनों देशों को आपसी विश्वास बढ़ाना चाहिए.

    वांग यी ने कहा कि दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण रणनीतिक सहमति का पालन करने का आह्वान किया, जिसमें सीमा मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों से ठीक करने और बातचीत इस मसले का समाधान खोजने पर ज़ोर दिया गया.

    चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने चीन और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी महत्व दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को लाभान्वित करने वाले सहयोग बनाए रखना चाहिए. साथ ही मानवता के बेहतर भविष्य के उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए.

    इस मुलाकात के बाद भारत के राजदूत ने भारत-चीन के बीच आदान-प्रदान के ऐतिहासिक रिश्ते का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति का दृढ़ता से पालन करेगा और रणनीतिक सहमति का पालन करने लिए चीन के साथ मिलकर काम करने, संचार को मज़बूत करने के लिए तत्पर है.

    रावत ने भी आपसी मतभेद, आपसी विश्वास को बढ़ाने और द्विपक्षीय सहयोग को आगे ले जाने पर ज़ोर दिया.

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    प्रदीप कुमार रावत को बीते साल ही चीन में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया है. प्रदीप कुमार रावत मंदारिन यानी चीनी भाषा भी बोलते-समझते हैं. रावत इससे पहले नीदरलैंड्स में भारत के राजदूत थे. प्रदीप की नियुक्ति ऐसे समय में हुई, जबकि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध ऐतिहासिक रूप से ख़राब हैं. पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलओसी पर अप्रैल 2020 से ही दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं.

    कौन हैं प्रदीप कुमार रावत

    विदेश सेवा में रावत 1990 में आए थे और उन्होंने विदेशी भाषा के तौर पर मंदारिन चुनी थी. पहली सेवा उन्होंने हॉन्ग कॉन्ग में दी और फिर बीजिंग में 1992 से 1997 के बीच रहे. चीन, प्रदीप कुमार रावत के लिए कोई नया देश नहीं है. 2003 में रावत चार साल के दूसरे टर्म पर चीन गए थे.

    पहले उनकी नियुक्त काउंसलर के तौर पर हुई थी और बाद में राजनयिक मिशन के उप-प्रमुख बनाए गए थे. इस दौरान भी रावत चीन से लगी सीमा के सवालों पर होने वाली वार्ता में शामिल रहे. रावत इंडोनेशिया में भी भारत के राजदूत रहे हैं.

  9. सऊदी अरब में हज के लिए उड़ानों की संख्या बढ़ी

    अमीरात एयरलाइन्स

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    अमीरात एयरलाइन्स ने जेद्दा और मदीना के लिए रोज़ाना के विमानों की संख्या और उड़ानें बढ़ाने का फ़ैसला किया है. ये फ़ैसला हज-यात्रियों की बढ़ी हुई तादाद के कारण लिया गया है.

    दरअसल, बीते दो साल कोरोना के कारण हज यात्रा के लिए आने वालों की संख्या बेहद सीमित कर दी गई थी लेकिन अब जब कोरोना का कहर कुछ कम हुआ है तो सऊदी अरब बड़े पैमाने पर हज यात्रियों का स्वागत करने के लिए तैयार है.

    दुबई स्थित यह एयरलाइन्स, जेद्दा के लिए 31 अतिरिक्त एयरलाइन्स शुरू कर रहा है. इसके साथ ही 23 जून से 23 जुलाई के बीच में मदीना के लिए उड़ानों को भी दोगुना कर दिया गया है.

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    एयरलाइन्स की ओर से यह फ़ैसला, उस आधिकारिक घोषणा के बाद लिया गया है जिसमें कहा गया था कि इस साल तीर्थ-यात्रियों की संख्या 10 लाख तक हो सकती है.

    आमतौर पर दुनिया के इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए लाखों में लोग जुटते हैं. हालांकि साल 2019 में लगभग में करीब 25 लाख लोगों ने हज-यात्रा की थी. हालांकि 2020 में, अधिकारिक घोषणा के बाद सिर्फ़ हज़ार यात्रियों को ही हज करने की अनुमति मिली थी.

    हज और उमराह मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की है कि इस साल हज-यात्रा में 65 साल से कम के वही लोग शामिल हो सकेंगे, जिनका कोविड टीकाकरण हो चुका है.

    जो लोग दूसरे देशों से हज करने आ रहे हैं, उनके लिए ज़रूरी होगा कि वे अपनी 72 घंटे पहले की रिपोर्ट पेश करें.

    इस बार हज यात्रा के लिए सबसे अधिक लोग इंडोनेशिया, पाकिस्तान, भारत , बांग्लादेश, नाइजीरिया, तुर्की, मिस्र, इथोपिया, मलेशिया से हैं.

  10. श्रीलंका के पीएम ने क्यों कहा- भारत की मदद कोई ख़ैरात नहीं है

  11. महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे ने छोड़ा मुख्यमंत्री आवास

    उद्धव ठाकरे

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    शिव सेना नेता संजय राउत बुधवार तक दावा कर रहे थे कि वे पार्टी के बाग़ी नेताओं के संपर्क में हैं और कोई कहीं नहीं जाने वाला है.

    लेकिन महाराष्ट्र में मचे राजनीतिक घमासान के तीसरे दिन भी कोई बाग़ी मंत्री वापस नहीं लौटा है. शिव सेना नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में क़रीब 30-40 विधायक गुवाहाटी के एक होटल में मौजूद हैं.

    इस लिहाज से आंकड़े, उद्धव ठाकरे के पक्ष में नहीं हैं. उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी गठबंधन सरकार को बचाने के लिए संघर्ष करते नज़र आ रहे हैं.

    बुधवार देर रात उद्धव ठाकरे ने अपने परिवार के साथ सीएम आवास भी छोड़ दिया और मातोश्री लौट आए हैं.

    देर रात उद्धव ठाकरे अपनी पत्नी रश्मि, बेटे आदित्य और तेजस के साथ आधिकारिक आवास से निकलते दिखाई दिए. इस दौरान मातोश्री पहुँचने तक, पूरे रास्ते शिव सैनिकों ने नारेबाज़ी की.

    बुधवार शाम को कैबिनेट बैठक के बाद उन्होंने राज्य को संबोधित करते हुए कहा कि अगर उनके विधायक और कार्यकर्ता चाहते हैं और कहते हैं तो वह अपने पद से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हैं. राजनीतिक घमासान के बाद से यह उनका पहला संबोधन था.

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    उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में क्या कहा

    शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने फेसबुक लाइव के जरिए लोगों से बात की.

    उद्धव ठाकरे ने कहा, "लोग कह रहे थे कि मुख्यमंत्री मिलते नहीं हैं. शिव सेना कौन चला रहा है. मेरा ऑपरेशन हुआ था, इस वजह से मैं लोगों से मिल नहीं पाया. वो समय काफ़ी मुश्किल था. मैं हॉस्पिटल से ऑनलाइन काम कर रहा था. शिव सेना और हिंदुत्व एक दूसरे से जुड़े हुए शब्द हैं. शिव सेना हिंदुत्व से दूर नहीं हो सकती, क्योंकि शिव सेना प्रमुख ने मंत्र दिया है कि हिंदुत्व हमारी सांस है."

    उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हैं लेकिन इसके लिए शिव सेना के विधायकों को उनके सामने आकर बोलना होगा.

    उन्होंने कहा, "एकनाथ शिंदे को सूरत जाकर बात करने की क्या ज़रूरत थी. कुछ विधायक यहाँ नहीं हैं. कुछ लोग फ़ोन कर रहे हैं कि वे लौटना चाहते हैं. मैंने हमेशा अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाया है. मैं सीएम पद छोड़ने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मेरे बाद कोई शिव सैनिक मुख्यमंत्री बने तो मुझे ख़ुशी होगी. लापता विधायक यहाँ आएँ और मेरे त्यागपत्र के साथ राजभवन जाएँ."

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    एकनाथ शिंदे ने ट्वीट करके दी प्रतिक्रिया

    एकनाथ शिंदे बाग़ी नेताओं के सात गुवाहाटी के एक होटल में मौजूद हैं. बुधवार को उन्होंने ट्वीट करके अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की और एनसीपी और कांग्रेस पर एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा.

    एकनाथ शिंदे ने ट्वीट कर कहा, "पिछले ढाई सालों में महाविकास अघाड़ी सरकार ने केवल घटक दलों को फ़ायदा पहुँचाया है और शिव सैनिकों को भारी नुक़सान हुआ है."

    दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, "पार्टी और शिव सैनिकों के अस्तित्व के लिए अस्वाभाविक मोर्चे से बाहर निकलना ज़रूरी है. महाराष्ट्र के हित में अब निर्णय लेने की ज़रूरत है."

    ऐसा माना जा रहा है कि शिंदे के खेमे में और भी बाग़ी नेता शामिल हो सकते हैं. इससे पहले देर रात चार और विधायक गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल पहुँचे.

    बीजेपी

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    बीजेपी का रुख़

    बीजेपी के लिए निश्चित तौर पर महाराष्ट्र में सत्ता वापसी के लिए यह एक मौक़ा है लेकिन बीजेपी ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. बीजेपी अभी एकनाथ शिंदे के अगले क़दम का इंतज़ार कर रही है.

    एक बीजेपी नेता ने कहा, “गुरुवार तक और शिवसेना विधायकों के शिंदे गुट में शामिल होने की उम्मीद है. ऐसे में उद्धव के पास गिने-चुने विधायक ही बचे रह जाएंगे. उन्होंने अपनी ताक़त खो दी है. इस झटके से बीजेपी के लिए राह आसान ही होगी.”

  12. चीन ने एक बार फिर से पाकिस्तान को मुश्किल वक़्त में बचाया

    मिफ़्ताह इस्माइल

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    पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ़्ताह इस्माइल ने बुधवार को बताया कि चीनी बैंकों के समूह और पाकिस्तान ने 2.3 अरब डॉलर के लोन-सुविधा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

    इसके बाद यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले कुछ दिनों में नक़दी की किल्लत से जूझ रहे देश को कुछ राहत मिल जाए. मिफ़्ताह इस्माइल ने ट्वीट करके इस बारे में जानकारी दी है.

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    उन्होंने लिखा है, “चीन के बैंकों के समूह ने आज 2.3 अरब डॉलर की ऋण सुविधा पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. पाकिस्तान ने इस समझौते पर एक दिन पहले ही हस्ताक्षर कर दिए थे. हम चीन की सरकार को इस ट्रांजेक्शन के लिए धन्यवाद करते हैं.”

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    चीन की सरकार के इस क़दम पर ट्वीट करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने लिखा है, “चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विदेश मंत्री वांग यी और चीन के लोगों के प्रति आभार. चीन के बैंकों के समूह ने 2.3 अरब डॉलर की ऋण सुविधा के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. पाकिस्तान के लोग अपने हमेशा से दोस्त रहे चीन के शुक्रगुज़ार हैं.”

    इस महीने की शुरुआत में ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अच्छी ख़बर साझा करते हुए कहा कि चीन के बैंकों के समूह के साथ लोन सुविधा की शर्तों पर सहमति बन गई है. उस समय उन्होंने दावा किया था कि यह लोन पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में मददगार साबित होगा.

    दो जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इस्माइल ने कहा था कि चीन जो क़र्ज पाकिस्तान को देने वाला था वो उसने 25 मार्च को वापस ले लिया था और कुछ ऐसी शर्तें रखी थीं जिसकी वजह से पाकिस्तान उस कर्ज़ का इस्तेमाल नहीं कर सकता था.

    उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो की चीन यात्रा और पीएम शहबाज़ शरीफ़ के प्रयासों के कारण चीन ना सिर्फ़ लोन देने के लिए राज़ी हो गया है बल्कि ब्याज दरें भी बेहद कम रखी हैं.

  13. नमस्कार!

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