कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद अपनी पुरानी पार्टी पर कई आरोप लगाए हैं.
उन्होंने कहा है कि कांग्रेस ने पंजाब को जाति, समुदाय और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश करके राज्य में भाईचारे की भावना का अपमान किया है.
किसान नेता बलराम जाखड़ के बेटे और गुरदासपुर के पूर्व सांसद ने अपने परिवार के कांग्रेस से पांच दशकों के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने उसी दिन पार्टी छोड़ने का फ़ैसला कर लिया था जिस रोज़ उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश की गई थी.
सुनील जाखड़ उस 'कारण बताओ नोटिस' का जिक्र कर रहे थे जो उनके किसी बयान को लेकर पार्टी ने जारी किया था.
उन्होंने कहा, "कांग्रेस के साथ रिश्ता ख़त्म करना आसान नहीं था. तीन पीढ़ियों पुराना रिश्ता था... 1972 से अब तक. हम अच्छे-बुरे वक़्त में कांग्रेस के साथ रहे थे."
सुनील जाखड़ का कहना था कि सिद्धांतों पर आधारित संबंधों का उन्होंने साथ दिया लेकिन जब सिद्धांतों के साथ समझौता होने लगा, हम अपनी विचारधारा को छोड़ने लगे तो मुझे लगता है कि ये सही समय है फिर से सोचने का.
"अगर सुनील जाखड़ को 50 साल पुराना रिश्ता तोड़ना पड़ा तो.... कुछ बुनियादी मुद्दे रहे होंगे. कोई निजी मतभेद नहीं था. मतभेद राष्ट्रवाद और पंजाब की अखंडता को लेकर था. पंजाब का भाईचारा एक-47 की गोलियों से नहीं तोड़ा जा सकता है."
"मैंने ये कहा था कि पंजाब को जाति, संप्रदाय और धर्म के नाम पर बांटा नहीं जा सकता है तो मुझे कटघरे में खड़ा कर दिया गया. इसके बाद मैंने भारी दिल से पार्टी छोड़ी है."
सुनील जाखड़ पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को पहले दलित मुख्यमंत्री के तौर पर कांग्रेस की ओर से पेश करने का हवाला दे रहे थे. जाखड़ ने कुछ दिनों पहले कहा था कि चन्नी पार्टी के लिए कोई ट्रंप कार्ड नहीं हैं जैसा कि पार्टी उन्हें बता रही थी.
पिछले साल जब पंजाब कांग्रेस में कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह नए नेता चुने जाने की बात चल रही थी तो सुनील जाखड़ इस रेस में शामिल थे लेकिन अंतिम फ़ैसला चन्नी के पक्ष में हुआ.
पार्टी के एक तबके ने सुनील जाखड़ का ये कहते हुए विरोध किया था कि कोई सिख ही पंजाब का मुख्यमंत्री हो सकता है.