भारत पारेख: ऐसे LIC एजेंट, जिनके लिए श्मशान घाट बने सबसे ज़्यादा मददगार
भारत पारेख दशकों तक हर रोज़ जीवन बीमा की पॉलिसी बेचने के लिए नागपुर के अख़बारों में छपने वाली मौत की सूचनाओं और श्मशान घाटों को खंगालते हैं.
पारेख कहते हैं, "भारत में आपको अंतिम संस्कार में जाने के लिए किसी न्योते की ज़रूरत नहीं है. आप अर्थी ले जा रहे लोगों को देखकर ही शोक में डूबे परिवार को पहचान लेंगे. आप मृतक के रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलते हैं और अपने बारे में बताते हैं. आप उनसे कहिए कि मरने वाले के जीवन बीमा की रक़म जल्द से जल्द पाने में आप उनकी मदद करेंगे और आप अपना विज़िटिंग कार्ड उनके पास छोड़ जाइए."
तेरहरवीं हो जाने के बाद कुछ परिवार उन्हें फ़ोन करते हैं लेकिन अधिकांश लोगों से वो घर-घर जाकर मिलते हैं. पारेख ये सुनिश्चित करते हैं कि डेथ क्लेम समय पर सेटल हो जाए.
पारेख लोगों से पूछते हैं कि किसी की मौत से उनके परिवार पर क्या वित्तीय असर हुए, क्या उनके ऊपर कोई उधार हैं, क्या उन्होंने पर्याप्त राशि का जीवन बीमा लिया हुआ है और क्या उनके पास बचत या कोई निवेश है?
वो कहते हैं, "मैं किसी की मौत से परिवार पर होने वाले असर को समझता हूँ. मैंने अपने पिता को तब खोया था जब मैं बहुत छोटा था."