कांग्रेस ने रविवार को जीएसटी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. 143 चीज़ों पर जीएसटी को बढ़ाए जाने के कथित प्रस्ताव पर कांग्रेस ने इसे मध्यम और निम्न वर्ग के साथ ''धोखेबाज़ी'' बताया है.
कांग्रेस की ये सख़्त प्रतिक्रिया एक मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर आई है जिसमें कहा गया है कि जीएसटी काउंसिल की तरफ़ से 143 चीज़ों के जीएसटी स्लैब को बढ़ाने का प्रस्ताव है और इसके लिए राज्यों से राय मांगी गई है.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, रिपोर्ट में कहा गया है कि 143 चीजों में से 92% चीजें ऐसी हैं जिन्हें 18% के स्लैब से 28% के स्लैब में ले जाने की बात है. पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जीएसटी काउंसिल ने टैक्स रेट में बढ़ोतरी के लिए राज्यों से विचार नहीं मांगा है.
सूत्रों ने बताया है कि जीएसटी रेट को तर्कसंगत बनाने पर विचार कर रहे मंत्रियों के पैनल ने अभी तक काउंसिल को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है.
सूत्रों ने ये भी कहा है कि आधे से अधिक चीज़ों को 28% के जीएसटी स्लैब में करने का भी कोई प्रस्ताव नहीं है.
वहीं रिपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का दावा है कि जिन चीजों पर जीएसटी बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है उनमें पापड़, गुड़, चश्मा, जूता, सूटकेस, 32 इंच से छोटी कलर टीवी जैसी चीजें शामिल हैं. सिंघवी का कहना है कि जीएसटी टैक्स में इस तरह की वृद्धि से मध्यम और निम्न वर्ग पर सबसे ज़्यादा मार पड़ेगी.
सिंघवी का कहना है कि ये बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है जब सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़, जीएसटी कलेक्शन सबसे उच्च स्तर पर है. टारगेट से ज़्यादा जीएसटी कलेक्शन हुआ है लेकिन इसके बावजूद इज़ाफ़ा किया गया है.
उन्होंने कहा है, ''ये बड़ा ही रहस्यमयी और विचित्र प्रस्ताव है, ऐसा लगता है कि सरकार का दायां हाथ जो कर रहा है वो बाएं हाथ को पता नहीं है. 143 चीज़ों में से कई आइटम ऐसे हैं जिनपर जीएसटी स्लैब में 2018 में कटौती की गई थी. ''
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाल ने एक ट्वीट कर कहा है, ''मोदी सरकार ने रोज़मर्रा की 143 वस्तुओं पर GST बढ़ाने का फ़ैसला लिया ताकि हर महीने ₹1,42,000 करोड़ से अधिक वसूली हो.''
उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए ट्विटर पर लिखा है, ''क्या फ़र्क़ पड़ता है अगर -जेब में पैसा नहीं, बजट बिगड़ गया है, क्योंकि…भाजपा है तो यही मुमकिन है''