यूक्रेन के विदेश मंत्री से मिल कर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री?
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा से मुलाक़ात कर यूक्रेन की संप्रभुता और अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया.
लाइव कवरेज
भूमिका राय, अनंत प्रकाश, वात्सल्य राय and अभिजीत श्रीवास्तव
ऑस्ट्रेलिया ने अपने दूतावास के कर्मचारियों को यूक्रेन से बाहर निकाला
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यूक्रेन
और रूस के बीच गहराते संकट को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया ने यूक्रेन में अपने दूतावास
के अधिकारियों और कर्मचारियों को वहाँ से निकालने का फ़ैसला किया है.
कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों को रोमानिया और पोलैंड भेजा गया है.
विदेश
मंत्री मैरिस पायन ने बयान जारी करके इस बात की जानकारी दी.
यूक्रेन
में ऑस्ट्रेलियाई दूतावास और वहाँ का कामकाज फ़िलहाल बंद है.
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यूक्रेन छोड़ने की कोशिश कर रहे ऑस्ट्रेलियाई लोगों की मदद के लिए कर्मचारियों को रोमानिया भेजा गया है.
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पुष्टि की है कि सुरक्षा कारणों के मद्देनज़र, यूक्रेन में मौजूद शेष राजनयिकों को पोलैंड के लुव्यो जाने के लिए कहा गया है.
उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि ये राजनयिक रात पौलैंड में बिताएंगे.
एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि उनका जाना स्थायी नहीं है वे यूक्रेन में अपने काम को आगे भी जारी रखने के लिए और आपातकालीन कॉन्सुलर सर्विसेज़ के लिए नियमित तौर पर लौटते रहेंगे.
यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिकों को लाने के लिए एयर इंडिया का विशेष विमान रवाना
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यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें वापस लाने के लिए एयर इंडिया का एक विशेष विमान रवाना हो चुका है.
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पीबीएनएस की ख़बर के अनुसार, एयर इंडिया भारत-यूक्रेन के बीच तीन विमानों को संचालित करेगा.
एक विमान आज यानी 22 फ़रवरी को उड़ान भर चुका है. वहीं दूसरा विमान 24 फ़रवरी को और तीसरा विमान 26 फ़रवरी को उड़ान भरेगा.
एयर इंडिया के हवाले से न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने ख़बर दी है कि यूक्रेन से भारत आने के वाले नागरिक एयर इंडिया के बुकिंग ऑफ़िस, वेबसाइट, कॉल सेंटर या फिर आधिकारिक ट्रैवल एजेंट्स के माध्यम से बुकिंग करा सकते हैं.
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एयर इंडिया के पहले विमान ने आज सुबह उड़ान भरी. यह ड्रीमलाइनर बी-787 एयरक्राफ़्ट है जिसे विशेष सेवाओं में इस्तेमाल किया जाता है. इस विमान में 200 से ज़्यादा सीटें होती हैं. यह विशेष विमान यूक्रेन से आज रात ही दिल्ली एयरपोर्ट लौटेगा.
दरअसल, रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने एक आदेश जारी किया है जिसके मुताबिक़, रूस की सेनाएं लुहांस्क और दोनेत्स्क में शांति कायम करने का काम करेंगी. राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के दो पृथकतावादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहांस्क को मान्यता दे दी है. इस आदेश के बाद से युद्ध की आशंका और बढ़ गयी है. ऐसे में सुरक्षा के मददेनज़र यह क़दम उठाया गया है.
ब्रेकिंग न्यूज़, यूक्रेन संकट: चीन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की
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रूस के राष्ट्रपति ने सोमवार रात राष्ट्र को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कई अहम बातों पर टिप्पणी की और संबोधन के बाद उन्होंने एक आदेश-पत्र पर हस्ताक्षर किए.
इस आदेश-पत्र के मुताबिक़, रूस की सेनाएं लुहांस्क और दोनेत्स्क में शांति कायम करने का काम करेंगी. राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के दो पृथकतावादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहांस्क को मान्यता दे दी है.
इनका नियंत्रण रूस समर्थित अलगाववादी करते हैं.
इस घोषणा के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक हो रही है.
इस बैठक में अमेरिका ने जमकर रूस पर हमला बोला है.
अमेरिका ने कहा कि पुतिन ने मिन्स्क समझौते की धज्जी उड़ा दी है.
यूक्रेन में हो रहे ताज़ा घटनाक्रम पर चीन ने सभी ओर से संयम बरते जाने की अपील की है.
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में चीन ने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतते हुए आगे का सोचना चाहिए.
चीन की ओर से कहा गया है कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से परहेज़ करना चाहिए जिससे यह संकट और उग्र रूप ले ले.
चीन की ओर से सुरक्षा परिषद में मौजूद राजदूत झांग जून ने कहा कि चीन राजनयिक समाधान के लिए किए जा रहे हर प्रयास का समर्थन करता है.
इससे पहले न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक साक्षात्कार में एक वरिष्ठ अमेरिकी राजदूत ने कहा कि हम तब तक कूटनीति की बात करते रहेंगे जब तक कि टैंक चलने शुरू नहीं हो जाते.
अमेरिका रूस पर प्रतिबंधों का कर सकता है एलान
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यूक्रेन में रूस के ताज़ा क़दम के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक चल रही है. अमेरिका ने संकेत दिया है कि वो रूस पर मंगलवार को प्रतिबंधों का एलान कर सकता है.
वहीं अमेरिका रूस पर और अधिक प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है. इन नए प्रतिबंधों के बारे में मंगलवार को घोषणा की जा सकती है.
व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, मॉस्को के नए ‘आदेश’ और ‘कार्रवाई’ के जवाब में अमेरिका रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है जिसकी घोषणा मंगलवार को की जाएगी.
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम उन प्रतिबंधों पर अपने सहयोगी देशों और भागीदारों के साथ संपर्क में हैं और आपसी बातचीत कर रहे हैं.”
ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि ये प्रतिबंध वित्तीय हो सकते हैं.
व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति बाइडन जल्दी ही एक आदेश जारी करेंगे जो अमेरिकी नागरिकों को यूक्रेन के दोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों में नए निवेश और व्यापार करने से प्रतिबंधित करेगा.
यूक्रेन-रूस तनाव के बीच एशियाई शेयर बाज़ार में भगदड़
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यूक्रेन और रूस में बढ़ते तनाव के बीच एशियाई शेयर बाज़ार में भारी
गिरावट आई है. इससे एक बार फिर से मंदी से उबरती अर्थव्यवस्थाओं को झटका लग सकता
है. जापान के निक्केई 225 सूचकांक में दो फ़ीसदी की गिरावट आई है. वहीं दक्षिण
कोरिया के कोस्पी में भी बाज़ार खुलते ही 1.4% की गिरावट आई है.
पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव के कारण तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी
होगी और सप्लाई चेन भी बुरी तरह से प्रभावित होगा. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर
पुतिन ने यूक्रेन के विद्रोही नियंत्रित दो इलाक़ों को स्वतंत्र स्टेट की मान्यता
दे दी है. स्वघोषित पीपल्स रिपब्लिक दोनेत्सक और लुहांस्क रूस समर्थित विद्रोहियों
का घर है और ये 2014 से ही यूक्रेन के बलों से लड़ रहे हैं.
वैश्विक अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस की महामारी से उबर ही रही थी कि
एक नया संकट पैदा हो गया. निवेशकों के बीच डर है. S&P 500 में1.5% की गिरावट आई है और डाउ जोंस 1.3% जबकि
नैसडेक़100 ई-मिनी फ्यूचर्स में 2.2%
गिरावट दर्ज की गई है. यूरोप में भी यही हाल है. जर्मनी के डैक्स इंडेक्स और
फ़्रांस के कैक 40 दो प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए.
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ब्रेकिंग न्यूज़, UN में अमेरिका ने कहा, पुतिन ने मिन्स्क समझौते की धज्जी उड़ा दी है
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दोनेत्स्क और लुहांस्क को रूस ने स्वतंत्र क्षेत्र घोषित कर दिया है. उसके बाद से यूक्रेन संकट और गहरा गया है. इसी संकट पर विचार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक चल रही है.
यूक्रेन संकट पर विचार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की न्यूयॉर्क में आपात बैठक चल रही है.
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफ़ील्ड ने पूर्वी यूक्रेन में विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले दो इलाक़ों को रूस के मान्यता देने की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी है कि इसके नतीजे पूरे यूक्रेन, यूरोप और दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं.
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उन्होंने कहा कि अगर रूस हमला करता है तो उसके मानवीय नतीजे काफ़ी बड़े हो सकते हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, अमेरिकी राजदूत ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति ने मिंस्क समझौते की धज्जियां उड़ा दी हैं और अमेरिका को नहीं लगता कि रूस यहीं रुकेगा.
थॉमस ग्रीनफ़ील्ड दरअसल 2014-15 के उन शांति समझौतों का हवाला दे रही थीं जो पूर्वी यूक्रेन की समस्या का राजनीतिक हल तलाशने और लड़ाई रोकने के लिए किए गए थे.
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत ने पूर्वी यूक्रेन में ‘शांति के लिए’ सशस्त्र सेना भेजने के
पुतिन के आदेश को 'बेकार की बात' कहा है.
उन्होंने कहा कि ये वही शब्द हैं जो ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने
पहले कहे थे.
उन्होंने
कहा, “हम जानते हैं, वे
वास्तव में क्या हैं.”
अमेरिका ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यूक्रेन में मौजूद शेष राजनयिकों को पोलैंड भेजा
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पुष्टि की है कि सुरक्षा कारणों के मद्देनज़र, यूक्रेन में मौजूद शेष राजनयिकों को पोलैंड के लुव्यो जाने के लिए कहा गया है.
उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि ये राजनयिक रात पौलैंड में बिताएंगे.
एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि उनका जाना स्थायी नहीं है वे यूक्रेन में अपने काम को आगे भी जारी रखने के लिए और आपातकालीन कॉन्सुलर सर्विसेज़ के लिए नियमित तौर पर लौटते रहेंगे.
अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा कि यूक्रेन के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता सिर्फ़ किसी स्थान विशेष तक ही सीमित नहीं है.
हालांकि राजनयिकों को लेकर अमेरिका पहले से भी क़दम उठा रहा था.
इस महीने की शुरुआत में ही अमरीका ने कहा था कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है, लिहाज़ा उसके नागरिक तुरंत वहां से निकल जाएं.
व्हाइट हाउस ने कहा था कि हमला हवाई बमबारी के साथ शुरू हो सकता है. इससे अमरीकी नागरिकों का वहां से निकलना मुश्किल हो सकता है. वे ख़तरे में पड़ जाएंगे.
अमरीका के साथ ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नीदरलैंड्स ने भी अपने-अपने नागरिकों को जल्द से जल्द यूक्रेन छोड़ देने को कहा था.
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि रूस और अमरीका दोनों अपने-अपने राजनयिक स्टाफ़ को यूक्रेन की राजधानी कीव से हटा रहे हैं.
एपी की रिपोर्ट में कह गया था कि अमरीकी दूतावास का स्टाफ़ पोलैंड के नज़दीक रहने चला जाएगा. यह इलाका यूक्रेन के सुदूर पश्चिम में स्थित है.
यूक्रेन के विदेश मंत्री ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की
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पूर्वी यूक्रेन में सेना भेजने के रूस के एलान के बाद यूक्रेन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और रूस पर कठोर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है.
यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से वॉशिंगटन में होने वाली मुलाक़ात से पहले बात की है.
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उन्होंने ट्वीट किया, “मुख्य विषय – प्रतिबंध. मैं रूस के अवैध क़दमों के जवाब में उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाने की मांग करता हूं.”
यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेन्स्की ने इससे पहले अपने टीवी संदेश में कहा कि यूक्रेन सिर्फ़ बातचीत नहीं, उससे ज़्यादा की उम्मीद करता है.
उन्होंने कहा, “ये देखना अब अहम है कि कौन हमारा सच्चा मित्र और सहयोगी है, और कौन रूसी संघ को अपने शब्दों से डरा सकता है.”
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा- हमारी सीमाएं अब भी पहले की ही तरह
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने मंगलवार को तड़के सुबह राष्ट्र के नाम संबोधन किया.
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि रूस की कार्रवाई यूक्रेन की अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन है.
उन्होंने कहा कि हमारी सीमाएं अभी भी पहले जैसी ही हैं और बनी रहेंगी क्योंकि रूस के बयानों से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है.
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि रूस की कार्रवाई शांति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही वार्ता-प्रक्रियाओं को असफल कर रही है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूक्रेन शांति चाहता है और राजनीतिक-कूटनीतिक समझौते से मामले का हल निकालने का समर्थन करता है.
उन्होंने कहा, “हम डरते नहीं हैं.”
ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगी देशों के समर्थन और प्रभावी क़दम को लेकर पूरी उम्मीद रखता है.
ज़ेलेंस्की ने संबोधन के दौरान वादा किया कि यूक्रेन किसी भी क़ीमत पर किसी को कुछ भी नहीं देगा.
पूर्वी यूक्रेन में सेना भेजेगा रूस, संयुक्त राष्ट्र ने बुलाई आपात बैठक
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बीती रात टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधित किया. इसके बाद उन्होंने कई अहम घोषणाओं के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए.
राष्ट्रपति के शासनादेश के मुताबिक़, रूस की सेनाएं लुहान्स्क और दोनेत्स्क में शांति कायम करने का काम करेंगी. राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के दो पृथकतावादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता दे दी है.
इनका नियंत्रण रूस समर्थित अलगाववादी करते हैं.
इस घोषणा के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई है.
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यह बैठक न्यूयॉर्क में मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे होगी. यह बैठक कई देशों के अनुरोध के बाद की जा रही है. वहीं यूक्रेन ने एक पत्र के माध्यम से मांग की है कि उनका एक प्रतिनिधि भी इस बैठक में शामिल हो.
हालांकि यूक्रेन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों में शामिल नहीं है.
यह बैठक सार्वजनिक होगी.
लेकिन रूस, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास दूसरे स्थायी सदस्यों की तरह ही वीटो पावर है. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि इस बैठक का परिणाम आख़िर क्या होगा.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन में सेना भेजने का दिया आदेश
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बीती रात टेलीविज़न पर राष्ट्र को संबोधित किया. पुतिन ने कहा कि रूसी सेनाएं पूर्वी यूरोप में दाखिल होंगी और वे अलगाववादी क्षेत्रों में शांति स्थापित करने की दिशा में काम करेंगी.
राष्ट्रपति के शासनादेश के मुताबिक़ रूसी सेनाएं लुहान्स्क और दोनेत्स्क में शांति कायम करने का काम करेंगी.
राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के दो पृथकतावादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता दे दी है. इनका नियंत्रण रूस समर्थित अलगाववादी करते हैं.
उन्होंने यूक्रेन की निंदा करते हुए कहा कि वहां एक कठपुतली शासन है और यूक्रेन अमेरिकी उपनिवेश बन चुका है.
रूस के राष्ट्रपति ने दावा किया कि यूक्रेन का एक असल राष्ट्र होने का कोई इतिहास नहीं है और आधुनिक यूक्रेन का जो स्वरूप है वो रूस का बनाया हुआ है.
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यूक्रेन को नेटो में शामिल करने की बात का ज़िक्र करते हुए उन्होंने इसे रूस की सुरक्षा को सीधे तौर पर ख़तरा पहुंचाने के क़दम के तौर पर परिभाषित किया.
अपने संबोधन में उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि नेटो ने रूस की सुरक्षा चिंताओं की अनदेखी की है.
अपने संबोधन को समाप्त करने से पहले उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रूस विद्रोहियों के कब्ज़े वाले क्षेत्रों को मान्यता देगा. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि यूक्रेन को विद्रोही ठिकानों पर हमले करना बंद कर देना चाहिए वरना उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे.
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हालांकि अपने पूरे संबोधन के दौरान उन्होंने जितने भी दावे किए उनमें से अधिकांश दावों को लेकर उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया. अपने संबोधन के तुरंत बाद उन्होंने विद्रोहियों को मान्यता देने के कागज़ात पर हस्ताक्षर किए.
इसके अनुसार रूसी सशस्त्र बल इन क्षेत्रों शांति कार्य करेंगे. हालांकि यह बहुत स्पष्ट नहीं है कि इसके क्या मायने हैं लेकिन यूक्रेन और रूस के जानकारों का मानना है कि इन दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर के साथ ही पुतिन अब आधिकारिक तौर पर यूक्रेन के विद्रोही कब्ज़े वाले इलाक़े में रूस की सेना भेज सकते हैं.
नमस्कार!
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