यूक्रेन के विदेश मंत्री से मिल कर क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री?
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा से मुलाक़ात कर यूक्रेन की संप्रभुता और अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया.
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भूमिका राय, अनंत प्रकाश, वात्सल्य राय and अभिजीत श्रीवास्तव
योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी को कहा 'दंगेश'
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इमेज कैप्शन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को
बहराइच में एक जनसभा को संबोधित करते समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया है.
भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता इस चुनाव में समाजवादी
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पार्टी को अपराध से लेकर परिवारवाद
जैसे मुद्दों पर घेरते रहे हैं.
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “समाजवादी
पार्टी ने माफ़िया और आतंकियों को शरण दी. अब यूपी में दंगे और कर्फ़्यू नहीं लगाए
जाते. पिछली सरकार कर्फ़्यू लगाती थी. लेकिन हम कांवर यात्रा निकालते हैं. आपने
रामायण में लंकेश का ज़िक्र सुना होगा, इसी तरह सपा को भी 'दंगेश' कहना चाहिए.”
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उन्होंने कहा था कि अगर यूपी में किसी भी तरह साइकिल आ गई तो पूरे देश में यहाँ से आतंकवाद की सप्लाई होने लगेगी.
यूक्रेन को लेकर रूस के ख़िलाफ़ जर्मनी ने उठाया ये बड़ा क़दम
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यूक्रेन संकट को लेकर रूस के ख़िलाफ़ क़दम उठाते हुए जर्मनी ने नॉर्थ स्ट्रीम2 गैस पाइपलाइन को शुरू करने की प्रक्रिया रोक दी है.
जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ शल्ट्स ने बर्लिन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यूक्रेन में रूस ने जो क़दम उठाएँ हैं, उसके जवाब में उनकी सरकार ये कार्रवाई कर रही है.
जर्मनी पर अमेरिका और अन्य यूरोपीय देश इस पाइपलाइन परियोजना पर रोक लगाने के लिए दबाव डाल रहे थे, लेकिन जर्मनी इससे सहमत नहीं था. लेकिन अब इस परियोजना की प्रक्रिया पर उसने रोक लगा दी है, जो काफ़ी अहम फ़ैसला माना जा रहा है.
अमेरिका कई वर्षों से ये तर्क देता रहा है कि नेचुरल गैस लाने के लिए रूस और जर्मनी के बीच एक और पाइपलाइन बनाने से यूरोपीय देशों की निर्भरता रूस पर बढ़ेगी.
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शल्ट्स ने कहा कि ताज़ा घटनाक्रम को देखते हुए इस पाइपलाइन को प्रमाणित करने की प्रक्रिया का फिर से मूल्यांकन करने का फ़ैसला किया है. हालाँकि ये पाइपलाइन अभी शुरू नहीं हुआ है. जर्मनी अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का क़रीब एक चौथाई हिस्सा प्राकृतिक गैस से पूरा करता है.
लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले समय में ये हिस्सा और बढ़ेगा क्योंकि जर्मनी अपने तीन बचे हुए परमाणु पॉवर प्लांट को बंद कर रहा है, साथ ही चरणबद्ध तरीक़े से कोयले का इस्तेमाल भी रोका जा रहा है. जर्मनी में इस्तेमाल हो रही प्राकृतिक गैस का आधा हिस्सा रूस से आता है.
रूस के हमले के बीच क्या बोला यूक्रेन?
रूस ने कहा- यूक्रेन ने कूटनीतिक संबंध तोड़े, तो स्थिति और बिगड़ेगी
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रूस का कहना है कि यूक्रेन के उसके साथ संबंध तोड़ने से स्थिति और बिगड़ेगी.
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि रूस यूक्रेन को लेकर कूटनीतिक संपर्क के लिए तैयार है.
क्रेमिलन का बयान ऐसे समय आया है, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमिर ज़ेलेन्स्की ने कहा है कि वे विदेश मंत्रालय के उस अनुरोध पर विचार कर रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि रूस के साथ सभी कूटनीतिक संबंधों को तोड़ लेना चाहिए.
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोफ़ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे ये नहीं बता सकते कि क्या रूस की सेना पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों में पहले ही घुस चुकी हैं. उन्होंने कहा कि सेना भेजने का फ़ैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि कैसे स्थिति आगे बढ़ती है. इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेन्स्की ने कीएफ़ में प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि रूस का अलगाववादी इलाक़ों को मान्यता देना यूरोप के अन्य देशों के लिए भी ख़तरा है.
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उन्होंने कहा- एक देश की सीमा की सुरक्षा दूसरे देश की सुरक्षा निर्धारित करती है. हम यूरोपीय संघ के सदस्य नहीं हैं और न ही हम नेटो के सदस्य हैं. लेकिन अगर ये तनाव बढ़ता है और रूस हम पर हमला करता है, तो हमारे पड़ोसी देशों माल्दोवा, लिथुआनिया, लात्विया और एस्टोनिया जैसे देशों पर भी ख़तरा पैदा होगा. ज़ेलेन्स्की ने कहा कि कोई भी युद्ध नहीं चाहता. यूक्रेन में लोग सिर्फ़ शांति चाहते हैं. लेकिन हमें किसी भी आक्रमण के लिए तैयार रहना होगा.
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ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी के सलमान रावी और प्रेम भूमिनाथन
नरेंद्र मोदी से टीवी पर बहस करना चाहते हैं पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि भारत ने अब नाज़ियों से प्रेरित नस्लवादी विचारधारा अपना ली है.
रूस के समाचार चैनल आरटी (रसिया टुडे) के साथ बातचीत में इमरान ख़ान ने भारत पर आरोप लगाया कि उनकी पहल के बावजूद भारत ने उस पर सकारात्मक जवाब नहीं दिया.
इमरान ख़ान ने कहा- जब मेरी पार्टी 2018 में सत्ता में आई, तो पहली चीज़ मैंने ये कि भारत की ओर हाथ बढ़ाया. मैंने उनसे कहा कि हमारे बीच कश्मीर ही एक मुद्दा है. चलिए बैठकर बातचीत करते हैं और इसका हल निकालते हैं. हमें एक रोडमैप बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वे किसी भी अन्य व्यक्ति के मुक़ाबले भारत को बेहतर समझता हूँ. क्योंकि क्रिकेट इस उप महाद्वीप में एक पैशन है.
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इमरान ने कहा- मैंने क्रिकेट टीम की कप्तानी की है और भारत के साथ क़रीब 10 साल क्रिकेट खेली है. लेकिन जब मैंने भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया, तब मुझे ये लगा कि ये वो भारत नहीं, जिसे मैं जानता हूँ. क्योंकि भारत पर अब एक उग्र विचारधारा का क़ब्ज़ा है. भारत पर एक नस्लवादी विचारधारा का क़ब्ज़ा है, जो नाज़ियों से प्रेरित है.
उन्होंने कहा कि इस विचारधारा के संस्थापकों ने नाज़ियों की सराहना की है. इमरान ख़ान ने कहा कि वे पीएम नरेंद्र मोदी के साथ टीवी पर बहस करना चाहेंगे और इससे एक अरब से ज़्यादा की आबादी का भला होगा.
पुतिन सोवियत संघ को दोबारा ज़िंदा करना चाहते हैं - यूक्रेन के रक्षा मंत्री
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इमेज कैप्शन, यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेज़नीकोव
यूक्रेन के रक्षा
मंत्री ओलेक्सी रेज़नीकोव ने मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर सोवियत
संघ को पुराने स्वरूप में लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.
कीव की सशस्त्र
सेनाओं को संबोधित पत्र में ओलेक्सी रेज़नीकोव ने लिखा है कि पूर्वी यूक्रेन में
दो अलग हुए सूबों को स्वीकार करने का फैसला बताता है कि रूस ने 1991 में ढहे
सोवियत संघ को पुनर्जीवित करने की ओर एक कदम और बढ़ा दिया है.
उन्होंने लिखा, “रूस ने सोवियत संघ को पुनर्जीवित करने की ओर एक कदम और बढ़ा दिया है. नए वारसॉ पैक्ट और नई बर्लिन वॉल के साथ सिर्फ यूक्रेन और यूक्रेन की सीमा इस दिशा में
आख़िरी रोड़ा है.”
“अपने देश, अपने घर, और रिश्तेदारों की रक्षा करने की दिशा में हमारे सामने बहुत आसान विकल्प है. हमारे लिए कुछ नहीं बदला है. हमारे सामने
कुछ कड़ी चुनौतियां हैं."
बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के अलगाववादियों के नियंत्रण वाले दो क्षेत्रों को मान्यता दे दी है.
पुतिन ने जिस शासनादेश पर दस्तख़त किए हैं उसके मुताबिक़ रूसी सेनाएं लुहान्स्क और दोनेत्स्क में शांति क़ायम करने का काम करेंगी. हालाँकि, आशंका है कि सेनाएं जल्दी ही सीमा पार कर लेंगी.
इसी बीच ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री साजिद जावेद ने कहा है कि यूक्रेन पर रूस का हमला शुरू हो चुका है और इसे ध्यान में रखते हुए अब ब्रिटेन रूस पर प्रतिबंध लगाएगा.
यूक्रेन संकट पर पूर्व राजदूत- जब तक पुतिन सत्ता में हैं, तब तक कूटनीतिक समाधान असंभव
इमेज कैप्शन, रूस में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत रहे सर एंड्र्यू वुड
रूस में ब्रिटेन
के राजदूत रहे सर एंड्र्यू वुड ने कहा है कि जब तक पुतिन सत्ता में रहेंगे
तब तक यूक्रेन संकट का कूटनीतिक हल निकलना असंभव रहेगा.
बीबीसी से बात
करते हुए सर एंड्र्यू वुड ने कहा, “पुतिन कूटनीतिक समाधान को स्वीकार नहीं कर सकते. और
उनके बयानों का कोई अर्थ नहीं है.”
उन्होंने कहा, “उनके लिए कूटनीतिक समाधान का मतलब सिर्फ़ ये नहीं होगा कि हम यूक्रेन को नेटो
में आमंत्रित न करें. इसका मतलब ये होगा कि हम उस देश पर उनके पूर्ण नियंत्रण को
स्वीकार करें.”
प्रतिबंधों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि रूस के ख़िलाफ़ तत्काल प्रभाव से सभी प्रतिबंध
लगाने चाहिए.
उन्होंने पश्चिमी देशों के नेताओं को रूसी बैंकों को निशाना बनाने के लिए
आग्रह किया ताकि नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन को शुरू करने की योजनाओं पर एकाएक
विराम लग सके.
उन्होंने ये भी कहा कि पृथकतावादी सूबों को स्वतंत्र राज्यों के रूप में स्वीकार
किया जाना पुतिन के लिए एक ख़तरनाक मोड़ है क्योंकि रूस के लोग युद्ध नहीं चाहते
हैं और अब वह पुतिन के प्रति उतने वशीभूत नहीं हैं, जितने पहले थे.
बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन
के अलगाववादियों के नियंत्रण वाले दो क्षेत्रों को मान्यता दे दी है.
पुतिन ने जिस
शासनादेश पर दस्तख़त किए हैं उसके मुताबिक़ रूसी सेनाएँ लुहान्स्क और दोनेत्स्क
में शांति क़ायम करने का काम करेंगी.
हालाँकि, आशंका है कि सेनाएँ जल्दी ही सीमा पार कर
लेंगी.
इसी बीच ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री साजिद जावेद ने कहा है कि यूक्रेन पर रूस
का हमला शुरू हो चुका है और इसे ध्यान में रखते हुए अब ब्रिटेन रूस पर प्रतिबंध
लगाएगा.
परमबीर सिंह को सुप्रीम कोर्ट से फ़िलहाल बड़ी राहत
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मुंबई के पूर्व पुलिस
कमिश्नर को सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ी राहत दी है.
परमबीर सिंह बनाम
महाराष्ट्र सरकार मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परमबीर सिंह
के ख़िलाफ़ सभी तरह की कार्रवाई को 9 मार्च तक रोक दिया जाए.
कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ चल रही
अलग-अलग कार्रवाइयों पर रोक लगा दी है.
परमबीर सिंह का मामला सीबीआई
को सौंपा जाए या नहीं- इस पर कोर्ट अंतिम फ़ैसला 9 मार्च को सुनाएगी. कोर्ट ने कहा है कि तब तक महाराष्ट्र
सरकार सारे केसों की जाँच को रोक दे.
कौन हैं परमबीर सिंह?
पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले परमबीर सिंह की शिक्षा दिल्ली में हुई. यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद उन्हें पहली बार आईआरएस कैडर में चुना गया था लेकिन, उन्होंने फिर से परीक्षा दी और आईपीएस बने.
मुंबई के नए पुलिस आयुक्त हेमंत नांगले होंगे. उन्होंने पहला कार्यभार साल 1989-92 में नक्सल प्रभावित चंद्रपुर जिले में बतौर एएसपी राजुरा के रूप संभाला था.
उन्हें साल 1992 में सोलापुर शहर में बाबरी मस्जिद मामले के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के लिए जाना जाता हैं.
बीते साल मार्च महीने में परमबीर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया था. परमबीर सिंह 29 फरवरी, 2020 को मुंबई पुलिस के कमिश्नर बने थे.
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने होम गार्ड विभाग में ट्रांसफर किए जाने के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
एंटीलिया मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाझे की गिरफ्तारी के बाद से परमबीर सिंह पर भी सवाल उठाए जा रहे थे.
परमबीर सिंह ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से उन आरोपों की जांच कराये जाने की भी मांग की है जिसका जिक्र उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखी चिट्ठी में किया था.
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में परमवीर सिंह ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को आदेश देने की मांग की है, "ताकि सीबीआई महाराष्ट्र सरकार के गृह मंत्री श्री अनिल देशमुख के भ्रष्ट आचरण की तुरंत निष्पक्ष, बिना किसी के प्रभाव के, तटस्थ और साफ-सुथरी जॉंच कर सके."
कर्नाटक के शिमोगा में हिंसा के बाद आज क्या-क्या हुआ?
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कर्नाटक के शिमोगा ज़िले में 26 वर्षीय बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की हत्या से
उपजे तनाव, हिंसा और आगजनी की घटनाओं के बाद पुलिस ने अब तक तीन लोगों
को गिरफ़्तार किया है.
इसके साथ ही हिंसा और आगजनी की
घटनाओं में पुलिस ने अब तक तीन एफ़आईआर दर्ज कराई हैं.
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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, कर्नाटक के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रताप रेड्डी ने बताया , "हमने 14 अलग-अलग घटनाओं की पहचान की है
जिनमें एफआईआर दर्ज कराने की ज़रूरत है. इनमें से तीन मामलों में एफआईआर दर्ज कराई
जा चुकी है. कुछ मामलों में हम उन लोगों की तलाश कर रहे हैं जिनकी संपत्तियों और
मोटरसाइकिलों को नुकसान पहुँचा है.”
कर्नाटक की
राजधानी बेंगलुरू से क़रीब 250 किलोमीटर दूर शिमोगा में सोमवार को मोटरसाइकिल और
गाड़ियों में आग लगाए जाने की घटनाएँ सामने आई थीं.
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इमेज कैप्शन, 26 वर्षीय बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा
हत्या के मामले में तीन गिरफ़्तार
इसके साथ ही बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा की हत्या के मामले में अब तक तीन लोगों
को गिरफ़्तार किया जा चुका है.
इस मामले में डीजीपी प्रताप रेड्डी ने कहा, “सभी अभियुक्तों की पहचान हो चुकी है. हमारी कई टीमें शिमोगा ज़िले के अंदर और
बाहर तैनात हैं. तलाश जारी है और हम जल्द ही अभियुक्तों का पता लगाकर उन्हें
गिरफ़्तार करने वाले हैं.”
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पुलिस के मुताबिक हर्षा पर रविवार रात कुछ लोगों
ने चाकू से हमला कर दिया था. घटना का वक़्त रात नौ बजे के क़रीब का बताया गया था. इसके
बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.
कर्नाटक की पूर्वी रेंज के डीआईजी डॉ के त्यागराजन ने बताया है कि “हमने अब तक 3-4 लोगों को हिरासत में ले लिया है. फिलहाल हम ये मानते हैं कि
ये हत्या पुरानी दुश्मनी की वजह से हुई है. कानून – व्यवस्था नियंत्रण में है. और जांच
जारी है."
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हालांकि, घटना के बाद हर्षा के कुछ समर्थकों ने सड़क पर उतरकर विरोध जाहिर किया था. विरोध की वीडियो फुटेज सामने आई हैं जिनमें कुछ लोग पत्थर फेंकते दिखाई देते हैं.
भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस को हवा में फायर करने पड़े और दो दिन के लिए निषेधाज्ञा
लगाई गयी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, शिमोगा के विधायक और राज्य के मंत्री केएस ईश्वरप्पा
ने आरोप लगाया था कि, "इस घटना के लिए मुसलमान गुंडें ज़िम्मेदार हैं."
कांग्रेस पार्टी की ओर से सिद्धारमैया ने ईश्वरप्पा पर कार्रवाई करने की मांग
की है.
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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, सिद्धारमैया ने कहा है, “सरकार ने शिमोगा में धारा 144 लगा दी थी. उन्होंने इसका उल्लंघन किया (ताकि
बजरंग दल कार्यकर्ता हर्षा के पार्थिव शरीर को उनके घर तक ले जाया जा सके).
उन्होंने ही उकसाने का काम किया. उन पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए.”
इस पर कर्नाटक के गृह मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र ने
कहा है कि “शिमोगा में माहौल शांत
है. केएस ईश्वरप्पा ने जुलूस का नेतृत्व नहीं किया था. वह इस जलूस में एक स्थानीय
विधायक के रूप में मौजूद थे. जिसने भी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, उसके ख़िलाफ़
कदम उठाए जाएंगे.”
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ब्रेकिंग न्यूज़, ब्रिटेन के पीएम ने कहा- रूस ने किया है यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने यूक्रेन संकट पर बुलाई गई आपात बैठक में कहा है कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा है कि जल्द ही रूस पर पाबंदियाँ लगाई जाएँगी.
पीएम जॉनसन ने कहा- ये तो शुरुआती पाबंदियाँ हैं, क्योंकि हमें लगता है कि रूस इस तरह का और तर्कहीन व्यवहार कर सकता है. उन्होंने कहा- सभी सबूत यही कह रहे हैं कि राष्ट्रपति पुतिन सच में यूक्रेन पर एक बड़े पैमाने पर आक्रमण करना चाहते हैं. मेरा मानना है कि ये एक एक स्वतंत्र और संप्रभु यूरोपीय देश का दमन है. ये बिल्कुल स्पष्ट है कि ये बहुत विनाशकारी होगा.
ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने ये भी कहा है कि ब्रिटेन जो पाबंदियाँ लगाने जा रहा है, उससे उनके भी आर्थिक हितों को चोट पहुँचेगी, जो रूस का समर्थन कर रहे हैं.
रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन आख़िर चाहते क्या हैं?, पॉल एडम्स, बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता
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एक मायने में, तो सोमवार रात के रूस के क़दम से कुछ बदला नहीं हैं.
वर्ष 2014 से डोनबास में रूस की सेनाएँ आती-जाती रही हैं.
फरवरी 2015 में देबाल्टसेव पर क़ब्ज़े के बाद चेक प्वाइंट्स की निगरानी कर रहे वॉलिंटियर्स से मिला था.
आठ वर्षों से रूस ने दोनेत्स्क और लुहान्स्क में अलगाववादियों को संगठित किया है, उन्हें वित्तीय मदद दी है और उन्हें हथियारों से लैस किया है.
इसलिए वहाँ तथाकथित शांतिरक्षकों का आना सिर्फ़ रूस के नियंत्रण के ताज़ा और सबसे आधिकारिक चरण को दिखाता है.
पश्चिमी देशों के नेताओं को ये फ़ैसला करने की ज़रूरत होगी कि क्या ये ताज़ा क़दम रूस के अतिरिक्त आक्रमण को दिखाता है, जिसकी वे चेतावनी दे रहे थे.
हालाँकि यूक्रेन की सीमा और आसपास के इलाक़ों में इतनी बड़ी तादाद में सैनिक साजो सामान की मौजूदगी में ये देखना बहुत कठिन है कि व्लादीमिर पुतिन अब क्यों रुकेंगे? बड़ी संख्या में रूस के सैनिक यूक्रेन की सीमा से कुछ ही दूरी पर रणनीतिक रूप से तैनात हैं.
पश्चिमी देशों के अधिकारी मानते हैं कि सैनिकों की मौजूदगी सिर्फ़ और सिर्फ़ आक्रमण करने के लिए है और उनका इस बात पर ज़ोर देना जारी है कि ये आक्रमण कभी भी हो सकता है. लेकिन मूल सवाल यही है कि व्लादीमिर पुतिन आख़िर चाहते क्या हैं?
रूस के क़दम पर भारत ने साधी चुप्पी, बातचीत के माध्यम से समाधान की वकालत
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भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूक्रेन संकट पर कहा है कि भारत बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है.
उन्होंने कहा कि इलाक़े में शांति स्थापित होनी चाहिए.
पत्रकारों से बातचीत में राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच बातचीत में कोई न कोई समाधान अवश्य निकलेगा.
उन्होंने भारत का पक्ष दोहराते हुए कहा कि भारत हमेशा से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति का पक्षधर रहा है.
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भारत ने यूक्रेन संकट पर चल रही आपात बैठक में भी बातचीत के माध्यम से समाधान की वकालत की. यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि रूस और यूक्रेन की सीमा पर बढ़ रहा तनाव गहरी चिंता की बात है. इन घटनाओं से इलाक़े की शांति और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.
टीएस तिरुमूर्ति ने भारत का पक्ष दोहराते हुए कहा कि सभी पक्ष इस मामले में संयम बरतें. उन्होंने कहा कि सभी देशों के सुरक्षा हितों और इस इलाक़े में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता के लिए तनाव को तुरंत कम करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान सिर्फ़ कूटनीतिक बातचीत से ही हो सकता है. टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि हाल के दिनों में संबंधित पक्षों ने जो पहल की है, तनाव कम करने के लिए उस पर सोचने की आवश्यकता है.
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हालाँकि न राजनाथ सिंह और न ही टीएस तिरुमूर्ति ने रूस के क़दम पर कोई टिप्पणी की है. रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन में अलगाववादियों के नियंत्रण वाले दो क्षेत्रों लुहान्स्क और दोनेत्स्क को मान्यता दे दी है और वहाँ रूसी सेना भेजने का ऐलान किया है. इसके बाद से ही वहाँ स्थिति तनावपूर्ण हो गई है. अमेरिका और कई अन्य देशों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में रूस पर पाबंदी लगाई जा सकती है.
ब्रिटेन ने कहा- यूक्रेन पर रूस का हमला शुरू हो चुका है
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ब्रिटेन के स्वास्थ्य
मंत्री साजिद जावेद ने कहा है कि यूक्रेन पर रूस का हमला शुरू हो चुका है और इसे
ध्यान में रखते हुए अब ब्रिटेन रूस पर प्रतिबंध लगाएगा.
स्काई न्यूज़ से बातचीत में
उन्होंने कहा- “आप यह निष्कर्ष निकाल
सकते हैं कि रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण शुरू कर दिया है.”
साजिद जावेद का यह बयान ऐसे
समय में आया है, जब अमेरिका ने भी घोषणा की है कि वह मंगलवार को रूस पर नए
प्रतिबंधों की घोषणा करेगा.
वहीं ब्रिटेन
के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि रूस के इस क़दम से यूक्रेन की संप्रभुता
का उल्लंघन होगा और ये बेहद ख़तरनाक संकेत हैं.
इससे पूर्व रूस के राष्ट्रपति
व्लादिमिर पुतिन ने सोमवार रात को राष्ट्र के नाम संबोधन में यूक्रेन के दो पृथकतावादी क्षेत्रों को मान्यता दे दी. इनका नियंत्रण रूस
समर्थित अलगाववादी करते हैं.
पुतिन ने
जिस शासनादेश पर दस्तख़त किए हैं उसके मुताबिक़ रूसी सेनाएं लुहान्स्क और
दोनेत्स्क में शांति कायम करने का काम करेंगी. हालांकि आशंका है कि सेनाएं जल्दी
ही सीमा पार कर लेंगी.
यूक्रेन संकट: बीते कुछ घंटों में क्या-क्या हुआ?
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हफ़्तों से जारी यूक्रेन संकट
में अब एक नया मोड़ आ गया है. पिछले कुछ घंटों में वैश्विक स्तर पर कई अहम बदलाव
सामने आए हैं. एक नज़र-
रूस के
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के अलगाववादियों के नियंत्रण वाले दो क्षेत्रों को मान्यता दे
दी है.
पुतिन ने जिस
शासनादेश पर दस्तख़त किए हैं उसके मुताबिक़ रूसी सेनाएँ लुहान्स्क और दोनेत्स्क
में शांति क़ायम करने का काम करेंगी. हालाँकि आशंका है कि सेनाएँ जल्दी ही सीमा पार
कर लेंगी.
इस घोषणा के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र
सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई. यह बैठक कई देशों के अनुरोध के बाद हो रही है.
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संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत ने कहा कि रूस राजनयिक समाधान के लिए तैयार है लेकिन उन्होंने पुतिन के उन आरोपों को भी दोहराया, जिसमें पुतिन ने यूक्रेन पर बढ़ते तनाव के लिए आरोप लगाया था. यूक्रेन इसका खंडन कर रहा है.
जानकारों का कहना है कि पुतिन ने जो घोषणा सोमवार को की, उससे संभावित सैन्य कार्रवाई की नींव रखी गई है.
रूस के राष्ट्रपति ने दावा किया कि यूक्रेन का एक असल राष्ट्र होने का कोई इतिहास नहीं है और आधुनिक यूक्रेन का जो स्वरूप है वो रूस का बनाया हुआ है.
उन्होंने यूक्रेन की निंदा करते हुए कहा कि वहाँ एक कठपुतली शासन है और यूक्रेन अमेरिकी उपनिवेश बन चुका है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि रूस की कार्रवाई यूक्रेन की अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन है. उन्होंने कहा, “हम डरते नहीं हैं.”
अमेरिका मंगलवार को रूस के ख़िलाफ़ और सख़्त प्रतिबंधों की घोषणा करेगा.
यूक्रेन और रूस में बढ़ते तनाव के बीच तेल की क़ीमत में भारी उछाल
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यूक्रेन और रूस के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल की क़ीमतों में तेज़ी आ रही है.
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत सात साल से सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई. मंगलवार को इसकी क़ीमत थी प्रति बैरल 97.44 डॉलर.
रूस ने यूक्रेन के अलगाववादियों के नियंत्रण वाले दो क्षेत्रों को मान्यता दे दी है और इन इलाक़ों में अपने सैनिकों को भेजने का आदेश दिया है. रूस के इस फ़ैसले के बाद ब्रिटेन और कई अन्य पश्चिमी देशों ने रूस पर पाबंदी लगाने की चेतावनी दी है.
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इसके बाद ऐसी आशंका जताई जा रही है कि दुनिया भर में तेल का सप्लाई चेन प्रभावित हो सकता है. रूस सऊदी अरब के बाद तेल निर्यात करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. रूस प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक भी है.
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विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संकट का दूरगामी असर पड़ेगा. मैन्यूलाइफ़ इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट की सू ट्रिन ने बीबीसी को बताया कि रूस पर किसी तरह की पाबंदी लगी, तो दुनिया में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कम सप्लाई होगी और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा. ये भी आशंका जताई जा रही है कि कच्चे तेल की क़ीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है.
सिख्स फ़ॉर जस्टिस से जुड़े ऐप्स, वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स भारत में ब्लॉक
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भारत में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने प्रतिबंधित संगठन सिख्स फ़ॉर जस्टिस से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स, वेबसाइट और ऐप्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया है.
आरोप लगाया गया है कि इन माध्यमों से संगठन ने चल रहे राज्य विधानसभा चुनावों में क़ानून व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश की.
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इस संगठन को 1967 में प्रतिबंधित किया गया था. प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मंत्रालय ने आईटी नियमों के तहत मिले आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये फ़ैसला किया है. ये भी कहा गया है कि जिन ऐप्स, वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है, उनका कंटेंट देश में सांप्रदायिक वैमनस्य और अलगाववाद को भड़का सकता था. ये भारत की संप्रभुता और अखंडता, देश की सुरक्षा और क़ानून व्यवस्था की स्थिति के लिए नुक़सानदेह हो सकता था.
मंत्रालय के मुताबिक़ ये भी पाया गया कि इस समय चल रहे राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान नए ऐप्स और सोशल मीडिया शुरू करने का मकसद समय का फ़ायदा उठाना भी था. प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़ भारत सरकार इस मामले में पूरी तरह सतर्क है और वो देश में सूचना के माहौल को सुरक्षित करने को लेकर प्रतिबद्ध है.
अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा- यूक्रेन को लेकर रूस की हरकत बेहद शर्मनाक
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अमेरिकी
विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने रूस के हालिया क़दम को शर्मनाक बताया है. उन्होंने
कहा कि ‘ऐसा ही होगा’ इसका अनुमान पहले से ही था.
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उन्होंने ट्वीट कर लिखा है, “रूस का यह क़दम शर्मनाक और पहले से नियोजित है. हम रूस के इस क़दम की बेहद कड़े शब्दों में निंदा करते हैं.”
उन्होंने रूस पर अलगाववादी क्षेत्रों का समर्थन करने का आरोप लगाया है और कहा है कि पर्दे के पीछ से वह ख़ुद इसे नियंत्रित कर रहा है.
ब्लिंकन ने यह आरोप रूस के राष्ट्रपति के उस शासनादेश के संदर्भ में लगाया है जिसके तहत उन्होंने यूक्रेन के दो पृथकतावादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहान्स्क को मान्यता दे दी है.
आदेश में यह भी कहा गया है कि रूस की सेनाएँ लुहान्स्क और दोनेत्स्क में शांति क़ायम करने का काम करेंगी.
इन क्षेत्रों का नियंत्रण रूस समर्थित अलगाववादी करते हैं.
यूक्रेन संकट पर सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में चीन ने दिया ये बयान
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यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में चीन ने बातचीत जारी रखने की अपील की है.
संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत ज़ांग जुन ने कहा कि उनका देश चाहता है कि सभी पक्ष आपस में बातचीत और सलाह-मशविरा जारी रखें.
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उन्होंने अपील की कि समानता और आपसी सम्मान के आधार पर ही एक दूसरे की चिंताओं और उसका हल निकालने की कोशिश होनी चाहिए. चीन के राजदूत ने कहा कि मौजूदा स्थिति कई जटिल कारणों की वजह से है.
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उन्होंने कहा- हम चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत सभी देश शांतिपूर्ण माध्यमों से अंतरराष्ट्रीय विवादों का हल निकालें. पिछले दिनों चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की थी कि वे नए शीत युद्ध की किसी की कोशिश को सफल न होने दें.
यूक्रेन संकट पर सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने क्या कहा
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यूक्रेन संकट पर चल रही सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने कहा है कि सभी पक्ष इस मामले पर संयम बरतें.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत यूक्रेन से संबंधित घटनाओं पर नज़र रखे हुए है.
उन्होंने कहा- यूक्रेन की पूर्वी सीमा पर चल रहे घटनाक्रम और रूस की ओर से की गई घोषणा पर भारत की नज़र है.
रूस और यूक्रेन की सीमा पर बढ़ रहा तनाव गहरी चिंता की बात है. इन घटनाओं से इलाक़े की शांति और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.
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टीएस तिरुमूर्ति ने भारत का पक्ष दोहराते हुए कहा कि सभी पक्ष इस मामले में संयम बरतें. उन्होंने कहा कि सभी देशों के सुरक्षा हितों और इस इलाक़े में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता के लिए तनाव को तुरंत कम करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का समाधान सिर्फ़ कूटनीतिक बातचीत से ही हो सकता है. टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि हाल के दिनों में संबंधित पक्षों ने जो पहल की है, तनाव कम करने के लिए उस पर सोचने की आवश्यकता है.
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उन्होंने मिन्स्क समझौते का भी ज़िक्र किया और कहा कि ये समझौता बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान का आधार देता है. टीएस तिरुमूर्ति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस मामले में इसका जोखिम नहीं लिया जा सकता कि मामला सैन्य स्तर तक चला जाए.
उन्होंने कहा कि तनाव को कम करने के लिए रचनात्मक कूटनीति की आवश्यकता है. यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने यूक्रेन में रह रहे और पढ़ाई कर रहे 20 हज़ार से अधिक भारतीय नागरिकों का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत का ध्यान उनकी बेहतरी पर भी है.