ज़ाकिर नाइक की संस्था ने यूएपीए ट्रिब्यूनल के सामने रखा अपना पक्ष
विवादास्पद इस्लामी प्रचारक और उपदेशक ज़ाकिर नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फ़ाउंडेशन (आईआरएफ़) ने केंद्र सरकार द्वारा अपनी संस्था को ग़ैरक़ानूनी क़रार देने को मनमाना और अवैध बताया है.
आईआरएफ़ ने यूएपीए ट्रिब्यूनल को दिए अपने जवाब में शनिवार को कहा, "यह साबित करने के तनिक भी सबूत नहीं है कि यह फ़ाउंडेशन अतीत में कभी किसी ग़ैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है. फ़ाउंडेशन की किसी ग़ैर-क़ानूनी गतिविधि या आईपीसी की धारा 153 (ए) या 153 (बी) के तहत दंडनीय किसी गतिविधि में हाथ नहीं रहा है."
मालूम हो कि यह फ़ाउंडेशन रजिस्टर्ड है और परोपकारी कामों के लिए काम करने वाला एक सार्वजनिक ट्रस्ट है. यह परोपकारी कामों के अलावा शैक्षिक और सामाजिक-आर्थिक विकास के काम भी करता है.
इससे पहले यूएपीए ट्रिब्यूनल ने शुक्रवार को डॉ. ज़ाकिर नाइक को निर्देश दिया था कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार वे अपना वकालतनामा दाख़िल करें. मलेशिया में रह रहे नाइक से कहा गया था कि वे मलेशिया के भारतीय दूतावास के ज़रिए हस्ताक्षर सत्यापित करने के बाद अपना वकालतनामा दाख़िल करें.
ट्रिब्यूनल ने केंद्र सरकार से अपने गवाहों और जांच प्रमुख के बारे में अगली सुनवाई से पहले बताने को कहा था. इस मामले की विस्तृत सुनवाई 10 फ़रवरी को होगी.