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आज़ादी के 100 साल पूरे होने तक 'नया भारत' बनाने का लक्ष्यः पीएम मोदी

ब्रितानी सरकार ने चौंकाते हुए औपचारिक बयान जारी कर रूस द्वारा यूक्रेन में अपने समर्थक नेता को स्थापित करने को लेकर चेताया है.

लाइव कवरेज

मोहम्मद शाहिद, मानसी दाश and अनुराग कुमार

  1. गोडसे पर बनी फ़िल्म पर क्यों छिड़ी सियासी गलियारों में बहस

    नाथूराम गोडसे पर बनी एक फ़िल्म 'व्हाई आई किल्ड गांधी' (मैंने गांधी को क्यों मारा) को लेकर विवाद छिड़ गया है.

    कांग्रेस नेता नाना पटोले का कहना है कि गांधी के हत्यारे को हीरो के तौर पर दिखाना सरासर ग़लत है.

    नाना पटोले ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "अगर गांधी जी के हत्यारे को हीरो के तौर पर दिखाया जाता है तो ये ग़लत है. गांधी और उनके विचार से हमारे देश को पहचाना जाता है इसलिए कांग्रेस इस फ़िल्म का विरोध करेगी. महाराष्ट्र में ये फ़िल्म रिलीज न हो इसके लिए हम मुख्यमंत्री से गुज़ारिश करेंगे."

    शॉर्ट फ़िल्म 'व्हाई आई किल्ड गांधी' 30 जनवरी 2022 को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ होने वाली है. इसी दिन महात्मा गांधी को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी.

    इस फ़िल्म में गोडसे का किरदार शिरूर से एनसीपी सांसद अमोल कोल्हे ने निभाई है. और इसी बात से इस फ़िल्म को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

    2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन में एनसीपी अहम हिस्सा रही है.

    ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (एआईसीडब्लूए) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने की गुज़ारिश की है. ट्विटर पर पोस्ट किए इस पत्र में असोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा है कि इस फ़िल्म में गोडसे के किरदार को गौरवान्वित किया गया है.

    पत्र में लिखा है, "फ़िल्म में गोडसे का किरदार लोकसभा के एक सांसद ने निभाया है जिन्होंने संविधान की शपथ ली है. इस फ़िल्म की रिलीज़ पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए."

    फ़िल्म पर बहस शुरू होने के बाद समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में एनसीपी नेता अमोल कोल्हे ने कहा है कि वो गांधी की विचारधारा को मानते हैं कि किसी भी हत्या को कभी सही नहीं ठहराया जा सकता.

    उन्होंने कहा, "निजी तौर पर मैं मानता हूं कि गांधी की हत्या उन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में से एक है जिसको कतई सही नहीं ठहराया जा सकता. मैं उनकी विचारधारा को मानता हूं."

    हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि "एक कलाकार के तौर पर कभी-कभी आपको ऐसे किरदार निभाने पड़ते हैं जिनकी विचारधारा आपकी अपनी विचारधारा से अलग होती है और कैमरे के सामने जाते ही आपको इसे परे रखकर काम करना होता है."

    वहीं एक भारतीय अख़बार के अनुसार फ़िल्म निर्माता का कहना है कि फ़िल्म गोडसे के उस बयान को आधार बनाकर बनाई गई है, जो उन्होंने गांधी की हत्या के मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट में दिया था.

    निर्माता का कहना है कि ये 20वीं सदी के भारतीय इतिहास को अलग नज़रिए से देखने की कोशिश है.

  2. भारत ने फ़िलिपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेचने का सौदा क्यों किया?

    भारत ने पहली बार फ़िलीपींस के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल बेचने का समझौता किया है.

    आखिर भारत इस सौदे से क्या हासिल करना चाहता है?

  3. केजरीवाल का दावा- आने वाले दिनों में ईडी सत्येंद्र जैन को करेगी गिरफ़्तार

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को सोशल मीडिया के ज़रिए कहा कि सूत्रों से पता चला है कि आने वाले दिनों में सत्येंद्र जैन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) गिरफ़्तार करेगा.

    सत्येंद्र जैन आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं में से एक हैं और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री हैं.

    केजरीवाल ने रविवार को कहा, “पांच राज्यों के चुनाव आ रहे हैं, ज़ाहिर तौर पर केंद्र सरकार की सभी जांच एजेंसियां भी बहुत एक्टिव हो रही हैं. हमें अपने सूत्रों से पता चला है कि पंजाब चुनाव से पहले आने वाले कुछ दिनों में ईडी सत्येंद्र जैन जी को गिरफ़्तार करने वाली है तो उनका स्वागत है.”

    “सत्येंद्र जैन जी के ऊपर पहले भी केंद्र सरकार दो बार रेड करवा चुकी है. उन रेड में उन्हें कुछ नहीं मिला. फिर से वो अगर आना चाहते हैं तो उनका बहुत बहुत स्वागत है क्योंकि चुनाव हैं. जब जब बीजेपी चुनाव कहीं भी हार रही होती है तो सारी एजेंसियों को छोड़ देती है. ज़ाहिर तौर पर रेड भी होगी, गिरफ़्तारियां भी होंगी, उसका हमें कोई डर नहीं है. मुझे लगता है कि जब सच्चाई के रास्ते पर चलते हो तो ये सारी बाधाएं आती हैं.”

    “बीजेपी की केंद्र सरकार अगर ईडी के साथ-साथ और भी एजेंसियां चाहे दिल्ली पुलिस, सीबीआई भेजना चाहे वो भेज सकती है. किसी और को भी चाहे तो गिरफ़्तार कर सकती है. हमने कभी ग़लत काम नहीं किया है.”

    “हमारे 21 विधायकों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और हर बार सब बरी हुए हैं. इस बार भी सत्येंद्र जी जेल जाएंगे और बाहर आ जाएंगे. हमें जेल जाने से डर नहीं लगता है, न ही रेड से डर लगता है. हम चन्नी जी की तरह न रोएंगे, न बोखलाएंगे. वो इसलिए बोखलाए हुए हैं क्योंकि उन्होंने ग़लत काम किए हैं. ईडी के अफ़सर मोटी-मोटी नोटों की गड्डियां गिन रहे थे.”

    “हमने कोई ग़लत काम नहीं किया है इसलिए हमें डर नहीं है. रेड और भी हों हम तैयार हैं. केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी से हमारा निवेदन है कि वो मेरे घर, मनीष सिसौदिया के घर भी एजेंसियां भेजे. आपका स्वागत है.”

  4. ओमिक्रॉन: कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री ने अपनी शादी रद्द की

    न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने नए कोविड प्रतिबंधों के कारण अपनी शादी रद्द कर दी है.

    देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के फैलते संक्रमण के कारण नए कोविड प्रतिबंध लगाए गए हैं.

    इन प्रतिबंधों के तहत किसी कार्यक्रम में 100 वैक्सीनेटेड लोगों के आने की सीमा है. इसके साथ ही दुकानों और सार्वजनिक परिवहन में मास्क पहनना अनिवार्य है.

    न्यूज़ीलैंड में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 15,104 मामले सामने आए हैं जबकि 52 लोगों की मौत हुई है.

    अर्डर्न ने रविवार को पत्रकारों से पुष्टि करते हुए कहा कि वो टीवी होस्ट क्लार्क गेफ़ोर्ड के साथ तय कार्यक्रम के तहत शाही नहीं करने जा रही हैं.

    उन्होंने कहा, “मैं कोई अलग नहीं हूं न्यूज़ीलैंड के हज़ारों लोग महामारी से प्रभावित हुए हैं. सबसे अधिक दुखदायी तब होता है जब अपने क़रीबियों के साथ उनके दुख के समय भी उनके साथ न रह सको.”

    न्यूज़ीलैंड में रविवार से नए प्रतिबंधों की शुरुआत हो रही है. ऐसा देश में ओमिक्रॉन के नौ मामलों की पुष्टि के बाद हो रहा है.

    अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों के सामने आने के बाद समूह में कम्युनिटी ट्रांसमिशन में तेज़ी देखने को मिली है.

    न्यूज़ीलैंड हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इंडोर जगहों पर किसी कार्यक्रम में सिर्फ़ 100 वैक्सीनेटेड लोग या 25 आम लोग भाग ले सकते हैं. यही नियम शादी और जिम पर भी लागू होता है.

    चार साल और उससे अधिक आयु के छात्रों को भी स्कूल में मास्क पहनना अनिवार्य होगा.

  5. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की वो अनूठी प्रेम कहानी

    ये 1934 का साल था. सुभाष चंद्र बोस उस वक्त ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में थे. उस वक्त तक उनकी पहचान कांग्रेस के योद्धा के तौर पर होने लगी थी.

    सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान जेल में बंद सुभाष चंद्र बोस की तबीयत फरवरी, 1932 में ख़राब होने लगी थी. इसके बाद ब्रिटिश सरकार उनको इलाज के लिए यूरोप भेजने पर मान गई थी, हालांकि इलाज का खर्च उनके परिवार को ही उठाना था.

    विएना में इलाज कराने के साथ ही उन्होंने तय किया कि वे यूरोप में रह रहे भारतीय छात्रों को आज़ादी की लड़ाई के लिए एकजुट करेंगे.

    इसी दौरान उन्हें एक यूरोपीय प्रकाशक ने 'द इंडियन स्ट्रगल' किताब लिखने का काम सौंपा, जिसके बाद उन्हें एक सहयोगी की ज़रूरत महसूस हुई, जिसे अंग्रेजी के साथ साथ टाइपिंग भी आती हो.

    नीचे लिंक पर क्लिक कर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

  6. बीजेपी में गए जनरल बिपिन रावत के भाई नहीं लड़ेंगे उत्तराखंड चुनाव

    बीजेपी में शामिल होने वाले दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत के भाई कर्नल (रिटायर्ड) विजय रावत ने घोषणा की है कि वो उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे.

    कर्नल रावत ने रविवार को कहा कि उनसे पार्टी के नेताओं ने चुनाव लड़ने को कहा था लेकिन उन्होंने मना कर दिया.

    उनसे पूछा गया कि अगर उनसे चुनाव लड़ने के लिए फिर निवेदन किया गया तो वो क्या करेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि 99 फ़ीसदी वो इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर देंगे.

    उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ इंटरव्यू में कहा, “मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा. मेरी सिर्फ़ उत्तराखंड की जनता की सेवा करने में दिलचस्पी है.”

    विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में उनके शामिल होने पर यह अनुमान लगाए जा रहे थे कि उन्हें पार्टी का टिकट मिलेगा.

  7. मायावती ने प्रियंका गांधी का नाम लिए बिना उन पर क्या किया तंज़?

    समाचार एजेंसी एएनआई को दिए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के इंटरव्यू के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने प्रियंका गांधी का नाम लिए बग़ैर उन पर निशाना साधा है.

    मायावती ने रविवार को ट्वीट किया, “यूपी विधानसभा आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हालत इतनी ज़्यादा ख़स्ताहाल बनी हुई है कि इनकी सीएम की उम्मीदवार ने कुछ घण्टों के भीतर ही अपना स्टैण्ड बदल डाला है. ऐसे में बेहतर होगा कि लोग कांग्रेस को वोट देकर अपना वोट ख़राब न करें, बल्कि एकतरफा तौर पर बीएसपी को ही वोट दें.”

    “यूपी में कांग्रेस जैसी पार्टियां लोगों की नज़र में वोट काटने वाली पार्टियां हैं. ऐसे में भाजपा को यूपी की सत्ता से बाहर करके यहां सर्वसमाज के हित में व इनके जाने-परखे नेतृत्व वाली सरकार की ज़रूरत है, जिसमें बीएसपी का स्थान वास्तव में नम्बर-एकपर है.”

    प्रियंका गांधी ने क्या कहा था

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इंटरव्यू में कहा था कि वो इस बात को लेकर हैरत में हैं कि मायावती और उनकी पार्टी इस चुनाव में सक्रिय क्यों नहीं हैं.

    उन्होंने कहा था, “मैं यह देखकर बहुत हैरत में हूं कि छह-सात महीने पहले हम यह सोचते थे कि उनकी पार्टी सक्रिय नहीं हैं लेकिन शायद चुनाव के नज़दीक आकर वो सक्रिय होंगे. हम इसलिए भी हैरत में हैं कि चुनाव शुरू हो चुके हैं और हम चुनाव के मध्य में हैं और वो अभी भी सक्रिय नहीं है. जैसा कि आपने कहा कि वो (मायावती) चुप हैं, मुझे ये बात समझ नहीं आ रही है.”

    “यह भी संभव है कि बीजेपी सरकार उन पर दबाव बना रही हो.”

    शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी का युवाओं को लेकर घोषणा-पत्र पेश करते समय प्रियंका गांधी ने ऐसे बयान दिए थे जिससे ऐसा आभास हो रहा था कि वो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का मुख्यमंत्री पद का चेहरा हो सकती हैं.

    एएनआई के साथ इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इस पर सफ़ाई देते हुए कहा था कि ‘मेरी पार्टी कहीं-कहीं पर ये तय करती है कि सीएम का चेहरा कौन बनेगा और कहीं पर तय नहीं करती है. ये पार्टी का तरीका है. मैं ये नहीं कह रही हूं कि सीएम का चेहरा मैं ही हूं. वो मैंने चिढ़ कर कह दिया क्योंकि बार-बार वो ही सवाल पूछे जा रहे हैं.’

  8. नेताजी की मूर्ति इंडिया गेट में वहीं लगेगी जहां जॉर्ज पंचम की मूर्ति थी

    नई दिल्ली के दक्षिणी इलाक़े में अपने फ्लैट में बैठे रेलवे बोर्ड के पूर्व मेंबर डॉ रविन्द्र कुमार ने शुक्रवार को जैसे ही चैनलों पर सुना कि इंडिया गेट की उसी जगह पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति लगेगी जहां पर कभी सम्राट जार्ज पंचम की प्रतिमा लगी थी तो वे अपने बचपन के दिनों में पहुंच गए.

    उन्हें वो दिन अच्छी तरह से याद था जब लाल संगमरमर की छतरी के नीचे सम्राट जार्ज पंचम की प्रतिमा हुआ करती थी. उसके ऊपर रात के वक्त एक चालीस-पचास वाट का बल्ब पीली रोशनी बिखेरता था.

    डॉक्टर रविन्द्र कुमार तब वो 15 जनपथ पर रहते थे. वे अपने पिता और डॉ अंबेडकर के सहयोगी श्री होती लाल के साथ इंडिया गेट में घूमने के लिए आया करते थे.

    ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम की वह मूर्ति 1968 तक इंडिया गेट पर लगी रही थी. मतलब देश के आजाद के होने के दो दशकों से भी अधिक समय तक.

    नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

  9. ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना वायरस संक्रमण के 3.33 लाख नए मामले, बीते दिन की तुलना में 4 हज़ार केस कम

    भारत में रविवार को बीते 24 घंटों के दौरान 3.33 लाख से अधिक कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामलों का पता चला है.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार कोरोना के दैनिक नए मामलों में कमी भी आई है. रविवार को 3,33,533 संक्रमण के नए मामलों का पता चला है जो कि शनिवार की तुलना में 4,171 कम हैं.

    वहीं इसी समय के दौरान 525 लोगों की मौत हुई है. साथ ही 2,59,168 लोग इस बीमारी से ठीक भी हुए हैं.

    देश में इस समय कोरोन वायरस संक्रमण के कुल सक्रिय मामलों की संख्या 21,87,205 हो गई है.

  10. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार से की ये मांग

    स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट करके केंद्र सरकार से उनकी जयंती पर हर साल राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग की है.

    ममता बनर्जी ने रविवार को कई ट्वीट करते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद करते हुए कहा है कि ‘एक राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतीक, नेताजी का बंगाल से उदय भारतीय इतिहास में बेजोड़ है.’

    “वह देशभक्ति, साहस, नेतृत्व, एकता और भाईचारे के प्रतीक हैं.नेताजी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहे हैं और रहेंगे.”

    ममता बनर्जी ने ट्वीट में बताया है कि पश्चिम बंगाल उनकी 125वीं जयंती को ‘देश नायक दिवस’ के रूप में मना रही है. केंद्र सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में घोषित किया हुआ है.

    उन्होंने अपने अंतिम ट्वीट में लिखा है, “हम फिर से केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि नेताजी के जन्मदिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए ताकि पूरा देश राष्ट्रीय नेता को श्रद्धांजलि दे सके और देश नायक दिवस को सबसे उपयुक्त तरीके से मना सके.”

    वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है, “हर भारतीय को हमारे राष्ट्र के लिए उनके महत्वपूर्ण योगदान पर गर्व है.”

    गृह मंत्री अमित शाह ने भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत की स्वतंत्रता में नेताजी के अतुलनीय योगदान को चिरस्मरणीय बनाए रखने हेतु उनकी जयंती को देशभर में ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाने का अभिनव कार्य किया है.यह आने वाली पीढ़ियों में नेताजी के ओजस्वी विचारों व आदर्शों को सींचने का काम करेगा.”

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर इंडिया गेट पर उनके होलोग्राम स्टैचू का उद्घाटन भी करेंगे. इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ग्रेनाइट की एक विशाल मूर्ति लगाई जाएगी.

  11. यूपी: सीएए विरोधी प्रदर्शनों के लिए वसूली की मार झेल रहे हैं दिहाड़ी मज़दूर

    अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट छापी है जिसमें बताया गया है कि कैसे उत्तर प्रदेश में नागरिकता क़ानून को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों की क़ीमत उन लोगों को चुकानी पड़ रही है जो आर्थिक रूप से तंगी का सामना कर रहे हैं या दिहाड़ी मज़दूरी करके बमुश्किल परिवार चलाते हैं.

    अख़बार लिखता है कि "एक रिक्शा वाला, एक तांगा चलाने वाला, फल बेचने वाला, मुर्गे की दुकान चलाने वाला, दूधवाला, एक नौजवान जो अपने पिता के कपड़ों की दुकान में काम कर रहा था और एक किशोर जिसने स्कूल में पढ़ाई छोड़ दी - ऐसे आठ दिहाड़ी मज़दूर जो मुश्किल से 200-250 रुपये रोज़ाना कमा पाते हैं, इनमें से हर व्यक्ति ने 13,476 रुपये सरकार को दिए."

    नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ें पूरी ख़बर.

  12. भारत में दिए बयान के कारण जर्मन नौसेना प्रमुख को क्यों देना पड़ा इस्तीफ़ा

    जर्मन नौसेना के प्रमुख को भारत में दिए गए एक बयान के कारण शनिवार को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है. जर्मनी के रक्षा मंत्रालय ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से इसकी पुष्टि की है.

    के-आख़िम शुनबेख़ ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कहा था कि यूक्रेन का रूस पर आक्रमण का विचार ‘बकवास’ है और पुतिन सम्मान के पात्र हैं.

    एएफ़पी से रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि वाइस एडमिरल ने तुरंत प्रभाव से अपने पद को छोड़ दिया है.

    नई दिल्ली में एक बैठक के दौरान शुनबेख़ ने कहा था कि ‘पुतिन सम्मान चाहते हैंऔर जैसा वो चाहते हैं वैसा उनको सम्मान दिया जा सकता है और वो इसके हक़दार भी हैं.’

    इस्तीफ़े के बाद क्या कहा

    शूनबेख़ ने इस्तीफ़े के बाद शनिवार को कहा कि उन्होंने ‘आगे किसी नुक़सान को रोकने के लिए तुरंत प्रभाव से’ अपनी भूमिका से इस्तीफ़ा दे दिया है.

    नई दिल्ली में जर्मन नौसेना के प्रमुख ने क्राइमिया प्रायद्वीप पर क़ब्ज़े को लेकर भी अपनी बात रखी थी जिस पर रूस ने 2014 में क़ब्ज़ा कर लिया था. उन्होंने कहा था कि ‘वो जा चुका है और अब कभी भी वापस नहीं आने वाला है.’

    यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कहा था कि शूनबेख़ का बयान ‘स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य है.’

    रूस के संभावित हमले को देखते हुए कई देशों ने यूक्रेन में हथियार सप्लाई किए हैं जिनमें अमेरिका और ब्रिटेन शामिल हैं.

    हालांकि जर्मनी ने यूक्रेन के हथियार भेजने के निवेदन को अस्वीकार कर दिया है लेकिन उसने एक फ़ील्ड अस्पताल देने का प्रस्ताव दिया है.

  13. रूस आख़िर यूक्रेन को क्यों धमका रहा है और वो नेटो से क्या चाहता है?

    क्या रूस की सेना यूक्रेन पर हमले की तैयारी में जुटी है? यूक्रेन से लगी अपनी सीमा पर रूस ने एक लाख से अधिक सैनिक तैनात किए हैं.

    रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण करने की किसी योजना से इनकार किया है लेकिन इसे लेकर तनाव बढ़ रहा है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन में सैनिक कार्रवाई की आशंका जताई है. बाइडन ने बुधवार को कहा कि उन्हें लगता है कि उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में 'हस्तक्षेप करेंगे', लेकिन एक 'मुकम्मल जंग' से बचना चाहेंगे. असल में उन्होंने रूसी सेना के 'छोटे-से हस्तक्षेप' की आशंका जताई है.

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  14. ब्रिटेन का दावा- यूक्रेन में रूस समर्थक राष्ट्रपति चाहते हैं पुतिन

    ब्रिटेन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आरोप लगाया है कि वो यूक्रेन में रूस समर्थित राष्ट्रपति तैनात करना चाहते हैं.

    ब्रितानी विदेश मंत्रालय ने एक असामान्य क़दम उठाते हुए यूक्रेन के पूर्व सांसद येवेन मुरायेव को रूस का एक संभावित उम्मीदवार बताया है.

    रूस ने यूक्रेनी सीमा पर अपने एक लाख से अधिक जवान तैनात किए हुए हैं और उसने इन दावों को ख़ारिज किया है कि वो यूक्रेन पर धावा बोलने जा रहा है.

    ब्रिटेन के मंत्रियों ने चेतावनी दी है कि अगर हमला किया जाता है तो रूसी सरकार को इसके गंभीर परिणाम देखने होंगे.

    एक बयान में ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने कहा है कि ‘आज जारी की गई सूचना यूक्रेन को उलटने के लिए डिज़ाइन की गई रूसी गतिविधियों को दिखाती है और यह क्रेमलिन की सोच पर प्रकाश डालती है.'

    “रूस को पीछे हटना चाहिए और आक्रामकता और दुष्प्रचार के अपने अभियानों को समाप्त करना चाहिए और कूटनीति के रास्ते को अपनाना चाहिए.”

    “ब्रिटेन और उसके सहयोगी कई बार कह चुके हैं कि रूसी सेना का यूक्रेन पर किसी भी तरह का हमला गंभीर परिणामों के साथ एक बड़ी रणनीतिक ग़लती होगी.”

    2014 में रूस ने यूक्रेनी क्षेत्र क्राइमिया पर क़ब्ज़ा कर लिया था जिसके बाद यूक्रेन ने रूस समर्थक राष्ट्रपति को हटा दिया था.

    कौन हैं मुरायेव

    पेशे से मीडिया व्यवसायी मुरायेव 2019 के चुनावों में यूक्रेनी संसद का चुनाव हार गए थे और उनकी पार्टी 5% वोट भी नहीं ला पाई थी.

    ब्रिटेन का उनको रूस समर्थित उम्मीदवार बताने पर उन्होंने कहा है कि विदेश मंत्रालय ‘कुछ भ्रम में नज़र आ रहा है.’

    “यह बहुत तार्किक नहीं है. रूस ने मुझे प्रतिबंधित किया हुआ है. सिर्फ़ इतना ही नहीं उसने मेरे पिता की फ़र्म को भी ज़ब्त किया हुआ है.”

    ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने चार और अन्य यूक्रेनी राजनेताओं के नाम बताएं हैं जो रूसी ख़ुफ़िया एजेंसियों के संपर्क में हैं.

    कहा गया है कि इनमें से कुछ लोग रूसी ख़ुफ़िया अफ़सरों के साथ हमले की योजना पर काम भी कर रहे हैं.

  15. नमस्कार!

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