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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीएम मोदी और चुनाव आयोग से यूपी चुनाव टालने की अपील की

एक नियमित सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को देखते हुए कड़े क़दम उठाने की ज़रूरत.

लाइव कवरेज

कमलेश मठेनी, पंकज प्रियदर्शी and चंदन शर्मा

  1. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीएम मोदी और चुनाव आयोग से यूपी चुनाव टालने की अपील की

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग से ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश चुनाव को टालने की अपील की है.

    इलाहाबाद कोर्ट ने टिप्पणी की- हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री, जिन्होंने भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में कोरोना मुफ़्त टीकाकरण का जो अभियान चलाया, वो प्रशंसनीय है. न्यायालय उसकी प्रशंसा करती है और माननीय प्रधानमंत्री से अनुरोध करती है कि इस भयावह महामारी की स्थिति को देखते हुए कड़े क़दम उठाते हुए रैली, सभाएँ और होने वाले चुनाव को रोकने एवं टालने के बारे में विचार करें, क्योंकि जान है तो जहान है.

    जस्टिस शेखर यादव की खंडपीठ एक ज़मानत आदेश पर सुनवाई कर रही थी. खंडपीठ ने चुनाव आयोग से भी अपील की कि वो राजनीतिक रैलियाँ रोकने के लिए तुरंत निर्देश जारी करे. इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट को ऐसा लगा कि नियमित मामलों के अलावा उसके सामने क़रीब 400 मामले सुनवाई के लिए हैं. इस कारण अदालत में बड़ी संख्या में वकील मौजूद हैं. कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी लिखा है कि वकील सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं. ख़ासकर उस स्थिति में जब ओमिक्रॉन के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

    जस्टिस शेखर यादव ने अपने आदेश में ये भी अपील की है कि राजनीतिक दल दूरदर्शन या समाचार पत्रों के माध्यम से चुनाव प्रचार करें. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी में होने हैं. लेकिन पिछले कुछ महीनों से वहाँ राजनीतिक दलों की रैलियाँ चल रही है. इस बीच भारत में ओमिक्रॉन के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अब ये संख्या बढ़कर क़रीब 300 हो गई है. पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ओमिक्रॉन की स्थिति को देखते हुए एक समीक्षा बैठक की, जिसमें टेस्टिंग पर ज़ोर दिया गया. सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सतर्क रहने को कहा है. कई राज्यों ने ओमिक्रॉन के मामलों के मद्देनज़र क्रिसमस और नए साल की पार्टी पर रोक लगा दी है.

  2. भड़काऊ भाषण मामले में वसीम रिज़वी उर्फ़ जितेंद्र नारायण त्यागी पर मुक़दमा

    धर्म संसद में भड़काऊ भाषण के वीडियो वायरल होने के एक दिन बाद उत्तराखंड पुलिस ने एक मुक़दमा दर्ज़ किया है.

    उत्तराखंड पुलिस के अनुसार, इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए 'वसीम रिज़वी उर्फ़ जितेंद्र नारायण त्यागी' और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ कोतवाली हरिद्वार में आईपीसी की धारा 153ए के तहत मुक़दमा दर्ज़ किया गया है.

    आईपीसी की यह धारा, धर्म के आधार पर समाज के विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाने के आरोप में लगाई जाती है

    इस वीडियो में धर्मगुरु यति नरसिंहानंद हिंदू युवकों से "प्रभाकरन" और "भिंडरावाले" बनने की अपील कर रहे हैं.

    बताया जाता है कि यह भडकाऊ भाषण हाल में हरिद्वार में आयोजित हुए 'धर्म संसद' कार्यक्रम के दौरान दिया गया था.

  3. नाराज़ ममता का एलान, प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में नहीं होंगी शामिल

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को एलान किया कि वो शुक्रवार को प्रधानमंत्री के साथ होने वाले मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगी.

    यह बैठक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और दार्शनिक अरबिंद घोष के जन्म की 150वीं सालगिरह मनाने के लिए हो रही है.

    माना जा रहा है कि ममता बनर्जी की नाराज़गी की वजह इसी मसले पर बुधवार को हुई बैठक है. उस बैठक में ममता शामिल तो हुईं, लेकिन उन्हें बोलने का मौक़ा नहीं दिया गया.

    ममता बनर्जी ने अपने मुख्य सचिव एचके द्विवेदी से कहा, ''हर मामले का राजनीतिकरण करना उचित नहीं है. मैं कल की बैठक​ में शामिल नहीं हो सकती क्योंकि ऋषि अरबिंद पर हमने पहले ही कई कार्यक्रमों की योजना बना ली है. कृपया एक पत्र लिखकर बता दें कि मैं इसमें शामिल नहीं हो रही.''

    अगले साल 15 अगस्त को जब देश अपनी आज़ादी की 75वीं सालगिरह मनाएगा, उसी दिन अरबिंद घोष के जन्म के 150 साल भी पूरे हो जाएंगे. उनका जन्म 15 अगस्त, 1872 को कोलकाता में हुआ था.

    ममता ने बताया कि आने वाली जनवरी में सुभाष चंद्र बोस के जन्म की 125वीं सालगिरह और महात्मा गांधी की मौत की 75वीं सालगिरह मनाने वाले कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा.

    उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े सभी दस्तावेज़ों चाहे वे राज्य में कहीं भी पड़े हों, उन्हें डिजिटाइज़ करने का ऐलान किया.

    साथ ही आज़ादी की लड़ाई से जुड़े सभी अहम स्थानों को जोड़ते हुए एक 'टूरिज़्म सर्किट' बनाने की भी बात कही है.

  4. हरिद्वार: धर्म संसद में दिए गए विवादित बयानों का पूरा मामला क्या है

    हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर को आयोजित धर्म संसद में हिंदुत्व को लेकर साधु-संतों के विवादित भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.

    इन वीडियो में धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने, मुस्लिम प्रधानमंत्री न बनने देने, मुस्लिम आबादी न बढ़ने देने समेत धर्म की रक्षा के नाम पर विवादित भाषण देते हुए साधु-संत दिखाई देते हैं. महिला संत भी कॉपी-किताब रखने और हाथ में शस्त्र उठाने जैसी बात कहती हुई नज़र आती हैं.

    इस आयोजन से संबंधित वीडियो के वायरल होने के बाद भी पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने के चलते ज़िला प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं.

    धर्म संसद में भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और ग़ाज़ियाबाद के साधु यति नरसिंहानंद सरस्वती, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और दक्षिणवादी संगठन हिंदू रक्षा सेना के स्वामी प्रबोधानंद, निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर मां अन्नपूर्णा समेत धर्म संसद के आयोजक पंडित अधीर कौशिक समेत हज़ार से अधिक महामंडलेश्वर, महंत, साधु-संत जुटे. जूना, निरंजनी, महानिर्वाणी समेत हरिद्वार के सभी प्रमुख अखाड़े इसमें शामिल रहे.

  5. सुष्मिता सेन ने रोहमन शॉल से ब्रेक-अप का किया एलान

    सुष्मिता सेन ने एलान किया है कि अब वो अपने पुरुष मित्र रोहमन शॉल से अलग हो गई हैं. हालांकि उन्होंने कहा है कि वे दोनों एक दूसरे के दोस्त बने रहेंगे.

    सोशल मीडिया वेबसाइट इंस्टाग्राम पर गुरुवार को उन्होंने रोहमन शॉल के साथ एक फ़ोटो शेयर किया. यहां उन्होंने लिखा कि दोनों के 'रिश्ते' अब ख़त्म हो गए हैं.

    उन्होंने लिखा, ''हमने दोस्त के रूप में शुरू किया था, हम दोस्त बने हुए हैं!! हमारे रिश्ते ख़त्म हो चुके हैं...प्यार बचा हुआ है!!''

    इसी पोस्ट को रोहमन शॉल ने भी अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर शेयर किया है. रोहमन शॉल एक मॉडल हैं.

    1994 की मिस यूनिवर्स रह चुकीं सुष्मिता सेन पिछले तीन सालों से रोहमन शॉल के साथ रिश्ते में थी. हालांकि पिछले कई दिनों से अफ़वाहें उड़ रही थीं कि अब दोनों का ब्रेकअप हो चुका है.

    पेशे से फ़िल्म अभिनेत्री सुष्मिता सेन 'सिंगल पैरेंट' हैं. उन्होंने दो लड़कियों को गोद ले रखा है. उनकी हाल में आई वेब सिरीज़ 'आर्या' को काफ़ी सराहना मिली है.

  6. चार्ल्स शोभराज की रिहाई को लेकर नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस

    कुख्यात सीरियल किलर चार्ल्स शोभराज की रिहाई को लेकर नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने वहां की सरकार को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आख़िर नेपाल की जेल में 18 साल बिताने के बाद चार्ल्स शोभराज को क्यों नहीं छोड़ दिया जाए.

    चार्ल्स शोभराज हत्या और फ़र्ज़ी पासपोर्ट के मामले में नेपाल की जेल में उम्र क़ैद की सज़ा भुगत रहे हैं. उन पर अपनी गर्लफ्रेंड सहित कई लोगों की हत्या के आरोप लगाए गए थे.

    उसके बाद उन्हें हत्या के लिए 20 साल और फ़र्ज़ी पासपोर्ट के लिए एक साल यानी कुल 21 साल की सज़ा सुनाई गई. फ़िलहाल वे काठमांडु की जेल में क़ैद हैं. हालांकि एक मामले में सज़ा सुनाना अभी बाक़ी है.

    कौन हैं चार्ल्स शोभराज?

    फ्रांस के नागरिक चार्ल्स शोभराज के पिता भारतीय और माता वियतनामी मूल की थीं. कई लोग उन्हें ​'बिकिनी किलर' भी कह कर बुलाते हैं.

    उन्हें नेपाल में सितंबर 2003 में एक जुआघर के सामने तब गिरफ़्तार किया गया जब एक अख़बार ने उनकी फ़ोटो छापी थी.

    शोभराज की उम्र अब 77 साल की हो गई है. इसलिए रिहाई के लिए उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई है. शकुंतला थापा और सरोज घिमरे शोभराज की अपील की पैरवी कर रहे हैं.

    अधिकारियों के अनुसार, इस याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने सरकार से तीन दिनों के भीतर जवाब दाख़िल करने को कहा है.

  7. प्रदीप कुमार रावत की चीनी मीडिया में इतनी चर्चा क्यों है?

    प्रदीप कुमार रावत को चीन में भारत का नया राजदूत बनाया गया है. सोमवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति को लेकर प्रेस रिलीज़ जारी किया था. प्रदीप कुमार रावत मंदारिन यानी चीनी भाषा भी बोलते-समझते हैं.

    रावत की नियुक्ति के बाद उनके मंदारिन जानने वाली बात प्रमुखता से रेखांकित की जा रही है. रावत इससे पहले नीदरलैंड्स में भारत के राजदूत थे और अब चीन में विक्रम मिस्री की जगह लेंगे. चीन में बतौर भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री का तीन साल का कार्यकाल इसी महीने ख़त्म हुआ है.

    रावत की नियुक्ति चीन में तब हो रही है जब दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध ऐतिहासिक रूप से ख़राब हैं. पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलओसी पर अप्रैल 2020 से ही दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं. अब भी गतिरोध में कोई कमी नहीं आई है और आए दिन ख़बरें आती रहती हैं कि चीन एलओसी पर कंस्ट्रक्शन का काम कर रहा है.

    अब भी इसका कोई समाधान नहीं हो पाया है और एलएसी पर दोनों देशों के हज़ारों सैनिक तैनात हैं. हालाँकि प्रदीप कुमार रावत चीन के साथ सीमा पर तनाव को लेकर कोई अजनबी नहीं हैं. चीन के मामलों में उनकी भागीदारी कई मामलों में रही है. रावत विदेश मंत्रालय में 2014 से 2017 तक ईस्ट एशिया के मामलों में संयुक्त सचिव थे और चीन को लेकर नीतियों का ज़िम्मा उनके ही पास था.

  8. भारतीय नागरिकता मांगने वालों में 70 फ़ीसदी अकेले पाकिस्तानी नागरिक: केंद्र सरकार

    केंद्र सरकार ने बताया है कि देश की नागरिकता के लिए अब तक जितने भी आवेदन आए हैं, उसमें से क़रीब 70 फ़ीसदी अकेले पाकिस्तानी नागरिकों के हैं.

    केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को संसद में बताया कि पाकिस्तान से भारत की नागरिकता के लिए 14 दिसंबर तक केंद्र के पास 7,000 से ज़्यादा मामले लंबित हैं.

    राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर इस संबंध में डाले गए दस्तावेज़ के अनुसार, केंद्र सरकार के पास भारतीय नागरिकता के लिए कुल 10,635 मामले अब तक लंबित हैं.

    दूसरे नंबर पर अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक हैं, जहां से 1,152 लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन दिया है. तीसरा स्थान ऐसे लोगों का है ​जो किसी भी देश के नागरिक नहीं हैं. ऐसे लोगों की संख्या 428 है.

    वहीं श्रीलंका और अमेरिका के 223.223 लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन दिया है. आवेदन के लिहाज़ से बाद के पांच देशों में नेपाल, बांग्लादेश, केन्या, ब्रिटेन और ईरान के नागरिक हैं.

    सरकार ने यह भी बताया कि 2018 से 2021 के बीच पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से कुल मिलाकर 8,244 हिंदू, सिख, जैन और ईसाई अल्पसंख्यकों ने आवेदन दिया. इनमें से केंद्र ने अब तक 3,117 लोगों को भारत की नागरिकता दे दी है.

    2021 में 1.11 लाख लोगों ने छोड़ी नागरिकता

    केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि 2021 में 1,11,287 लोग अपनी भारतीय नागरिकता छोड़कर किसी और देश के नागरिक बन गए हैं. वहीं पिछले पांच साल में ऐसा करने वालों की तादाद 6 लाख से भी ज़्यादा हो गई है.

  9. सऊदी अरब में संगीत समारोहों पर आख़िर महिलाएं क्यों खड़े कर रही हैं सवाल

    सऊदी अरब की राजधानी रियाद के बाहरी इलाक़े में बीते रविवार को चार दिनों तक चले MDLBeast के 'साउंडस्टॉर्म' संगीत समारोह का समापन हो गया.

    इस समारोह को मध्य पूर्व का सबसे बड़ा संगीत समारोह बताया जा रहा है.

    आयोजकों का दावा है कि इन चार दिनों में कुल सात लाख से अधिक दर्शकों ने इस समारोह में शिरक़त की. इसमें सबसे ज़्यादा भागीदारी युवा पुरुषों और महिलाओं की रही.

    इस समारोह के आयोजकों ने दावा किया है कि आयोजन स्थल पर यौन हिंसा सहित अन्य किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को रोकने के लिए अतिरिक्त उपाय किए गए थे.

  10. अलीगढ़ और बनारस की लड़कियों ने योगी सरकार को कितने नंबर दिए?

    उत्तर प्रदेश के दो शहर, पूर्व में अलीगढ़ और पश्चिम में बनारस. अलीगढ़ मुस्लिम विद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ रहीं छात्राओं से हमने मौजूदा सरकार का आकलन मांगा.

    कुछ महीनों में होनेवाले विधानसभा चुनाव से पहले वो उसे दस में में से कितने नंबर देंगी और क्यों...

  11. प्रशांत किशोर के साथ मतभेद की ख़बरों का तृणमूल कांग्रेस ने किया खंडन

    ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और प्रशांत किशोर की संस्था आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) के बीच मतभेद पनपने की ख़बरों का तृणमूल कांग्रेस ने खंडन किया है.

    गुरुवार को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए एक ट्वीट में मतभेद की ख़बरों को अटकलबाज़ी क़रार देते हुए निराधार बताया है.

    टीएमसी ने दावा किया है कि उनकी पार्टी और आई-पैक एक टीम के रूप में काम करती है और आगे भी करती रहेगी.

    टीएमसी ने अपने ट्वीट में लिखा, ''टीएमसी और आई-पैक के बीच के विचारों या कामकाज़ी रिश्तों में मतभेद की ख़बरों पर हुई रिपोर्टिंग में कोई भी सच्चाई नहीं है. ऐसी ख़बरें बहुत ज़्यादा अटकलों पर आधारित हैं और इसका कोई आधार नहीं है. हम सब ममता बनर्जी के नेतृत्व में एक टीम के रूप में काम करते हैं और आगे भी करते रहेंगे.''

    क्या कहा था डेरेक ओ ब्रायन ने?

    तृणमूल कांग्रेस की यह सफ़ाई पार्टी के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन के एक बयान के बाद आई है. डेरेक ओ ब्रायन ने ज़ोर देते हुए कहा था कि उनकी पार्टी और प्रशांत किशोर की संस्था आई-पैक में साफ़ अंतर है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, डेरेक ओ ब्रायन ने कहा था कि टीएमसी पहली ऐसी पार्टी थी, जिसने पांच साल के लिए आई-पैक की सेवाएं लेनी शुरू की थी और इसके अपने लक्ष्य थे. आई-पैक की ज़मीन, संचार और सोशल मीडिया पर अच्छी पकड़ है. और इन सबका मूल्यांकन ममता बनर्जी के नेतृत्व में नेशनल वर्किंग कमि​टी ने किया.

    उन्होंने आगे कहा था कि आई-पैक पार्टी की एक राजनीतिक सहयोगी है और उसे टीएमसी के लिए निश्चित काम करने थे. लेकिन ये ज़रूरी नहीं कि इस संस्था और इसके किसी अधिकारी की राय टीएमसी की भी राय हो.

    डेरेक ओ ब्रायन ने यह भी कहा कि हमारे विस्तार का मुख्य मक़सद बीजेपी को हराना और उन जगहों पर पहुंचना है जहां विपक्ष कमज़ोर है. इसलिए टीएमसी तमिलनाडु या महाराष्ट्र नहीं जाएगी, जहां डीएमके या शिवसेना और एनसीपी मज़बूत हैं.

    उनके इस बयान के बाद अटकलें लगाई जाने लगीं कि पश्चिम बंगाल के चुनाव के बाद टीएमसी और आई-पैक के रिश्ते कमज़ोर हो गए हैं और टीएमसी उनसे दूरी बनाने की कोशिश कर रही है.

    पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से ये दावा भी किया था कि प्रशांत किशोर के पश्चिम बंगाल की जीत का श्रेय लेने से टीएमसी के भीतर मतभेद पनप गए हैं.

  12. CAA: दो साल का हुआ क़ानून, मगर पाकिस्तान से आए हिंदुओं की नागरिकता का क्या हुआ

    पूरे देश में विरोध प्रदर्शनों के बीच दो साल पहले दिसंबर के महीने में जब संसद ने नागरिकता संशोधन क़ानून को संवैधानिक मान्यता दी थी तो दिल्ली के 'मजनूं का टीला' के इलाक़े में बसी हुई श्री राम कालोनी में पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी परिवारों ने जमकर जश्न मनाया था.

    ढोल, नगाड़ों और गीतों के साथ सरकार के इस फ़ैसले का स्वागत गर्म-जोशी के साथ किया गया.

    उम्मीद की जाने लगी कि अब इन सबकी परेशानियां दूर हो जाएंगी.

    दयाल दास, पाकिस्तान के सिंध हैदराबाद के रहने वाले हैं जो वर्ष 2013 में अपने परिवार के साथ भारत आये थे.

  13. चीन आधुनिक हथियारों की रेस में दुनिया को पछाड़ देगा

    चीन अपनी सेना को तेज़ी से मज़बूत बना रहा है. मिसाइल टेक्नोलॉजी, परमाणु हथियारों और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में इसकी तेज़ तरक़्क़ी ने पश्चिमी देशों के जानकारों के मन में गहरी चिंता बिठा दी है.

    इनका मानना है कि चीन के चलते दुनिया की सैन्य शक्ति के संतुलन में तेज़ी से बड़ा बदलाव हो रहा है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2035 तक चीन की सेना को आधुनिक बनाने का आदेश दिया है.

    उन्होंने चीन को 'विश्व स्तर' की एक सैन्य शक्ति बनाने को कहा है जो 2049 तक 'युद्धों को लड़ने और जीतने' में सक्षम हो. भले यह लक्ष्य बहुत बड़ा हो, लेकिन चीन इसके लिए सही रास्ते पर चल रहा है.

  14. आधार को वोटर आईडी से लिंक करने वाले बिल पर क्यों हो रहा है हंगामा, इससे क्या बदलेगा?

    मंगलवार को चुनाव कानून (संशोधन) बिल, 2021 राज्यसभा में पास हो गया. इस बिल में सबसे बड़ा बदलाव ये था कि आधार को वोटर आईडी से लिंक किया जाए, विपक्ष के जबरदस्त विरोध के बावजूद ये संशोधित बिल संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है.

    सोमवार को इस बिल को क़ानून मंत्री किरेन रिजीजू ने लोकसभा में पेश किया महज 20 मिनट में ये बिल ध्वनिमत के साथ पारित कर दिया गया. दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर ये बिल पेश हुआ और 3:10 पर इसे परित कर दिया गया.

    विपक्ष की मांग थी कि इस बिल को संसद की स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए जहां इस बात की स्क्रूटनी की जाए कि क्या इस तरह आधार को वोटर आईडी से जोड़ना सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक़ निजता का हनन नहीं है.

    लेकिन विरोध में उठ रही इन तमाम आवाज़ों के बावजूद ये बिल अब दोनों ही सदनों में पारित हो चुका है और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ संशोधित कानून बन जाएगा.

  15. आज का कार्टून: सिस्टम जोखिमों के अधीन

    राजस्थान में आरटीआई कार्यकर्ता पर हमले पर आज का कार्टून.

  16. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 23 दिसंबर 2021, सुनिए वात्सल्य राय से

  17. चिप बनाने वाली कंपनी इंटेल ने चीन से क्यों मांगी माफ़ी

    अमेरिका की चिप बनाने वाली कंपनी इंटेल ने गुरुवार को चीन में माफ़ी मांगी है. माफ़ी मांगने का कारण कंपनी की ओर से जारी एक पत्र है जिसमें उसने अपने सप्लायरों से कहा था कि चीन के शिनजियांग इलाक़े से सामानों या मज़दूरों को न मंगाएँ.

    इंटेल ने इसी महीने सप्लायरों को जारी एक सालाना पत्र में कहा था, ''यह तय करना ज़रूरी है कि हमारा सप्लाई चेन शिनजियांग इलाक़े के किसी भी सामान या सेवाओं का उपयोग नहीं करती."

    कंपनी ने यह भी बताया कि शिनजियांग इलाक़े पर "कई देशों की सरकारों" द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के ​बाद यह फ़ैसला लिया गया है.

    यह पत्र कंपनी की वेबसाइट पर कई भाषाओं में मौजूद है. इसका चीन की सरकार ने आलोचना की और वहाँ के सोशल मीडिया पर इसकी काफ़ी आलोचना हुई है.

    इससे पहले अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया था कि वो शिनजियांग इलाक़े में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का हनन कर रहा है. चीन पर इस क्षेत्र के वीगर मुसलमानों की प्रताड़ना और उनसे जबरन काम कराने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं.

    पश्चिम के दूसरे देशों ने भी ऐसे आरोप लगाए हैं. इन देशों ने प्रताड़ना से बचकर भागने वाले सैकड़ों वीगर मुसलमानों को अपने यहाँ शरण भी दी है.

    हालाँकि चीन इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है.

  18. कर्नाटक विधानसभा से पास हुआ धर्मांतरण विरोधी विधेयक

    कर्नाटक विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी विधेयक गुरुवार को पारित हो गया. राज्य की बासवराज बोम्मई सरकार इसके चलते पिछले कई दिनों से विपक्ष और अल्पसंख्यक समूहों के निशाने पर बनी हुई थी.

    इससे पहले मंगलवार को गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने विधानसभा में 'धर्म की आज़ादी के अधिकार की सुरक्षा विधेयक, 2021' या धर्मांतरण विरोधी विधेयक को पेश किया था. विधानसभा का शीतकालीन सत्र फ़िलहाल राज्य के बेलगावी में चल रहा है.

    इस विधेयक में जबरन धर्मांतरण करवाने पर सख़्त सज़ा का प्रावधान किया गया है. इसमें शादी की नीयत से धर्म बदलवाने की कोशिश पर लगाम लगाने के उपाय भी किए गए हैं.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, गुरुवार को विधानसभा में चर्चा के दौरान राज्य के संसदीय कार्य मंत्री जेसी मधुस्वामी ने कहा कि इस विधेयक को सबसे पहले उनकी सरकार ने नहीं बल्कि कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार के दौरान 2016 में पेश किया था.

    हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने जो विधेयक पेश किया था, उससे ताज़ा विधेयक पूरी तरह अलग है.

    बहस के दौरान मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा, ''हम एससी और एसटी की दशा जानते हैं. वे उपेक्षित और जोख़िम के दायरे में हैं. हमारी मंशा एससी, एसटी समुदायों के साथ महिलाओं को सु​रक्षित करने की है.''

    बीते गुरुवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में इस विधेयक को विधानमंडल में पेश करने की अनुमति दी गई थी. राज्य की बीजेपी सरकार की विधानमंडल के मौजूदा सत्र में ही इस विधेयक को क़ानून बना देने की योजना है.

    अल्पसंख्यक समूहों का डर

    बताया गया है कि इस प्रस्तावित क़ानून को लेकर राज्य के ईसाई और मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों में काफ़ी बेचैनी है. इन समूहों को भय है कि क़ानून बन जाने पर इसके प्रावधानों को उनके समुदाय के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया जा सकता है.

    इन समूहों का तर्क है कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में धर्मांतरण विरोधी विधेयक के सामने आते ही वहां के अल्पसंख्यक समूहों पर हमले बढ़ गए थे.

    जानकारों के अनुसार, कर्नाटक सरकार के इस विधेयक के प्रावधान उत्तर प्रदेश में हाल में बने धर्मांतरण क़ानून की तर्ज पर तय किए गए हैं.

    उत्तर प्रदेश धर्मांतरण विरोधी क़ानून, 2021 के मुताबिक़, ज़बरदस्ती धर्म बदलवाने पर अधिकतम 10 साल की जेल और 50 हज़ार रुपये तक के जुर्माने की सज़ा दी जा सकती है. वहीं केवल शादी के​ लिए धर्म बदलवाने की बात साबित होने पर शादी भी ख़त्म हो सकती है.

    इसके तहत धर्म बदलने के पहले डीएम से अनुमति लेना ज़रूरी हो गया है. वहीं धर्म बदलने वालों को धर्मांतरण के बाद एससी या ओबीसी कैटेगरी के तहत मिलने वाले आरक्षण और अन्य लाभों को नहीं दिया जाता.

    हालांकि इस क़ानून के बनने के बाद उत्तर प्रदेश और उसके बाहर काफ़ी हो-हल्ला मचा.

  19. पुतिन ने कहा- पश्चिमी देश झूठे, यूक्रेन पर नहीं झुकेगा रूस

    पुतिन ने पश्चिमी देशों पर लगाया गंभीर आरोप और यूक्रेन के मामले में भी दी चेतावनी रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने आरोप लगाया है कि नेटो के विस्तार पर पश्चिमी देशों ने रूस से झूठ बोला है. हर साल होने वाले अपने वर्षांत प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पुतिन ने ये भी स्वीकार किया कि अमेरिका के साथ सुरक्षा गारंटी की मांग पर बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है. रूस और पश्चिमी देशों में यूक्रेन को लेकर तकरार चल रही है. पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूप यूक्रेन से लगी अपनी सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर रहा है. साथ ही इन देशों का आरोप है कि रूस यूक्रेन पर आक्रमण करने की योजना बना रहा है.

    एक सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा कि रूस यूक्रेन की ओर से पैदा हुए ख़तरे का जवाब दे रहा था. उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन के मामले में कोई भी कार्रवाई देश की सुरक्षा पर निर्भर करती है न कि इस पर कि अमेरिका के साथ उसकी बातचीत कैसे आगे बढ़ती है. पुतिन ने कहा- हमें इस पर नज़र रखने की आवश्यकता है कि यूक्रेन में क्या हो रहा है और इस पर भी कि वे कब हमला कर सकते हैं. पुतिन ने कहा कि रूस को ये चेतावनी दी जा रही है कि वो पूर्वी यूक्रेन में रूसी बोलने वाले लोगों की रक्षा न करे और इस मामले में दखल न दे, अन्यथा उस पर पाबंदियाँ लगाई जाएँगी, लेकिन हमें उस स्थिति में कुछ न कुछ करना ही होगा.

    अमेरिका से सुरक्षा गारंटी पर होने वाली बातचीत को लेकर पुतिन आशावादी दिखे और उन्होंने कहा कि नए साल में बातचीत हो सकती है. नेटो को लेकर पुतिन ने एक बार ज़ोर देकर कहा कि संगठन का पूरब में विस्तार नहीं होना चाहिए. पुतिन ने कहा कि रूस को इस मुद्दे पर मूर्ख बनाया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस किसी को चेतावनी नहीं दे रहा है.

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