शिरोमणि अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के ख़िलाफ़ ड्रग मामले में एक एफ़आईआर दर्ज की गई है. इसे पंजाब के मोहाली में दर्ज किया गया है.
पुलिस सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि मामला एनडीपीएस की धारा 25,27ए और 29 के तहत दर्ज किया गया है जो बेहद गंभीर मामला है.
यह भी संभव है कि मजीठिया की गिरफ़्तारी हो सकती है. उन्होंने कहा कि यह प्राथमिकी मोहाली ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने दर्ज की है.
मजीठिया अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के भाई हैं.
इसके बाद से राज्य में सियासत तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने इसे प्रतिशोध की राजनीति क़रार देते हुए कहा कि इसे अंजाम देने के लिए तीन डीजीपी (पुलिस प्रमुख) का तबादला किया गया था.
पिछले कई दिनों से अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल कह रहे थे कि कांग्रेस पार्टी मजीठिया के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने की कोशिश कर रही है और उन्होंने अधिकारियों को इस बारे में चेतावनी भी दी थी.
अकाली दल ने विशेष रूप से सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की हाल ही में डीजीपी के रूप में नियुक्ति के बाद यह चिंता व्यक़्त की थी.
वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, “यह क़दम उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो सालों से नशे से जुड़ी रिपोर्ट दबा कर बैठे थे. यह ईमानदार अधिकारियों को कमान देने का नतीजा है. ये उस दिशा में पहला क़दम है.”
ड्रग्स और बेअदबी के मुद्दों पर अकाली दल के नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करने पर कांग्रेस के कई मंत्री तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से नाराज़ भी थे.
उन्होंने कैप्टन पर अकालियों से मिले होने का भी आरोप लगाया था,हालांकि अमरिंदर सिंह ने आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि दोनों मामलों में कानूनी कार्यवाही जारी है.
पंजाब पुलिस ने साल 2013 में हजारों करोड़ रुपए के ड्रग रैकेट का पर्दाफ़ाश किया था. इस मामले को कई सालों से ‘भोला ड्रग केस’ के नाम से जाना जाता रहा है. यह मामला ड्रग माफ़िया का है जो कथित तौर पर पंजाब में सक्रिय है और इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हुए हैं.
पिछले कुछ दिनों से कुछ अधिवक्ता अदालत से अपील करते रहे हैं कि यह मामला पंजाब के युवाओं के भविष्य से जुड़ा है और इस पर तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत है.
ये मामला पंजाब के पूर्व डीजीपी (जेल) शशिकांत के साल 2003 में उच्च न्यायालय को लिखे गए एक पत्र से शुरू हुआ, इसे एक जनहित याचिका के तौर पर दायर किया गया था.
कुछ नेता इस मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम लेते रहे हैं. हालांकि अतीत में बिक्रम सिंह मजीठिया ने इन नेताओं पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया था.
मजीठिया के अलावा अकाली नेतृत्व भी उन्हें किसी भी अदालत द्वारा दोषी न ठहराने की बात करते रहे हैं.