अमेरिका के पूर्व अधिकारियों और राजनयिकों के एक समूह ने कहा है कि राष्ट्रपति जो बाइडन को ईरान के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई करने पर विचार करना चाहिए.
समूह का कहना है कि राष्ट्रपति बाइडन को ईरान पर दबाव बनाना चाहिए ताकि वो अपने परमाणु हथियार और आक्रामक ड्रोन कार्यक्रमों से पीछे हटे.
ये बात बुधवार को राजधानी वाशिंगटन में हुई एक बैठक के बाद नेशनल काउंसिल ऑफ़ रेजिस्टेंस ऑफ़ ईरान (एनसीआरआई) ने कही. इस बैठक के बाद एनसीआरआई के सदस्यों ने संवाददाताओं से बातचीत भी की.
एनसीआरआई के सदस्यों में अमेरिका के पूर्व सीनेटर जोसेफ़ लिबरमैन, हथियार नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के पूर्व अंडर सेक्रेटरी और अप्रसार मामलों के विशेष दूत रॉबर्ट जोसेफ़, डिफ़ेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व कार्यवाहक निदेशक डेविड शेड, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर मैथ्यू क्रोनिग और ज्यूस इंस्टीट्यूट फ़ॉर नेशनल सिक्योरिटी ऑफ़ अमेरिका के विदेश नीति के निदेशक जोनाथन रूह शामिल हैं.
अपने एक विस्तृत अध्ययन में एनसीआरआई ने ईरान के ड्रोन कार्यक्रम पर गंभीर चिंता जताई है. उसने बताया है कि चीन, रूस और वेनेजुएला के साथ गठजोड़ करके ईरान किस तरह से लेबनान, इराक़, यमन और सऊदी अरब के टारगेट पर ड्रोन हमलों को अंज़ाम देने के लिए काम कर रहा है.
इस समूह के अहम सदस्य जोसेफ़ लिबरमैन ने कहा, "इस चलते उस इलाक़े के हमारे सहयोगियों की चिंता है कि वे केवल हम पर निर्भर नहीं रह सकते."
उन्होंने आगे कहा, "परमाणु क़रार फिर से बहाल करने के लिए वियना में हम जो कोशिश कर रहे हैं, वो ग़लत दिशा में है. ये समझौते अच्छी नीयत से किए गए, लेकिन ईरान जो कर रहा है उससे ये मेल नहीं खाते. वे काफ़ी जोख़िम भरे हैं. अमेरिका को अपना रुख़ न केवल सख़्त करना चाहिए, बल्कि उसके ख़िलाफ़ और अधिक नियंत्रण और रुकावटें लगानी चाहिए.”
लिबरमैन के अनुसार, "ईरान ने वियना में परमाणु समझौते पर फिर से बातचीत शुरू कर दी है. लेकिन यूरेनियम संवर्द्धन को ख़तरनाक स्तर तक ले जाकर उसने इस समझौते की सबसे बाध्यकारी और अहम शर्त का ही उल्लंघन कर दिया है."
मालूम हो कि ईरान और दुनिया के ताक़तवर देशों के बीच 2015 में उसके परमाणु कार्यक्रमों पर नियंत्रण के लिए एक समझौता हुआ था.
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप के शासन काल में अमेरिका इस समझौते से पीछे हट गया था. लेकिन इस साल जनवरी में जो बाइडन का कार्यकाल शुरू होने के बाद अमेरिका फिर से उस समझौते को बहाल कराने में लगा है. इसके लिए वियना में सभी पक्षों की बातचीत भी हुई है.