गोडसे के हिन्दुस्तान के साथ नहीं रह सकते, हमें गांधी-नेहरू का हिन्दुस्तान चाहिए: महबूबा मुफ़्ती

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने एक बार फिर कहा है कि भारत को कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान से बात करनी चाहिए.

लाइव कवरेज

अभिजीत श्रीवास्तव and भूमिका राय

  1. ब्रेकिंग न्यूज़, किसानों की बाक़ी मांगों पर बोले अनुराग ठाकुर

    अनुराग ठाकुर

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    बुधवार को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया के सामने आए. उन्होंने कैबिनेट के दो फ़ैसलों के बारे में बताया.

    एक फ़ैसला यह कि अगले साल मार्च तक प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण अन्न योजना जारी रहेगी और दूसरा, कैबिनेट ने तीनों कृषि क़ानून वापस लेने की औपचारिकता पूरी कर ली है. इसके बाद सवाल पूछने की बारी आई तो पत्रकारों ने एमएसपी को लेकर पूछा.

    क्या सरकार एमएसपी को क़ानून का रूप देगी? इस सवाल के जवाब में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, ''प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी और प्राथमिकता के आधार इसे कैबिनेट में लाया गया. प्रधानमंत्री जी ने 19 नवंबर को विस्तार से बात कही थी और कैबिनेट में हमने औपचारिकता पूरी कर ली है. संसद के शीत सत्र में पहले हफ़्ते में इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.''

    किसानों की अन्य मांगों के सवाल पर अनुराग ठाकुर बार-बार इसी बात को दोहराते रहे लेकिन उन्होंने किसानों की अन्य मांगों पर सरकार का क्या रुख़ है, इसे ज़ाहिर नहीं किया.

    अनुराग ठाकुर से ये भी पूछा गया कि क्या किसानों को अब विरोध प्रदर्शन छोड़ वापस चले जाना चाहिए तो उन्होंने पत्रकार से ही पूछ दिया कि आपको क्या लगता है.

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    केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक हुई. इस बैठक में कोविड महामारी के चलते प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण अन्न योजना को अगले साल 22 मार्च तक बढ़ा दिया गया है. अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस योजना के तहत देश के क़रीब 80 करोड़ लोगों को मुफ़्त में पाँच किलो गेंहू या चावल मिलता है.

    अनुराग ठाकुर ने कहा, ''तीनों कृषि बिल अगले हफ़्ते की शुरुआत में संसद का शीत सत्र आएगा और वहां बची प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. इसके साथ ही तीनों कृषि क़ानून औपचारिक रूप से ख़त्म हो जाएंगे.''

  2. राहुल गांधी ने मोदी सरकार से की दो मांग

    राहुल गांधी

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    कांग्रेस नेता और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी कोविड-19 से मरने वालों के परिवार को चार लाख रुपये मुआवजा देने के लिए सरकार पर दबाव डालेगी.

    उन्होंने एक वीडियो ट्वीट में कहा, "कोविड-19 से गुजरात और हिंदुस्तान में लाखों लोगों की मौत हुई है. कांग्रेस चाहती है कि सरकार मृतकों के परिवारों को चार लाख रुपये मुआवजा दे. इसके लिए कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाएगी."

    राहुल ने कहा, "कोविड के समय सबसे बड़े उद्योगपतियों के लाखों रुपये का टैक्स माफ़ किया गया. चुने हुए दो तीन उद्योगपतियों को पूरा हिंदुस्तान दिया जा रहा है. मगर हिंदुस्तान की ग़रीब जनता को कोविड का मुआवजा नहीं दिया जा रहा है."

    ट्विटर पर जारी एक वीडियो में राहुल ने गुजरात में कोरोना महामारी की वजह से जान गंवा चुके कुछ परिवारों का पक्ष रखते हुए दावा किया कि वहां (गुजरात में) इसके संक्रमण से क़रीब तीन लाख लोगों की जानें गई हैं.

    उन्होंने बीजेपी के गुजरात मॉडल पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "हमने जिन परिवारों से बात की, सब ने ये कहा कि कोविड न उनको हॉस्पिटल बेड मिला, न ऑक्सीजन मिला, न उनको वेंटिलेटर मिला. कोरोना महामारी के दौरान अस्पताल में दाखिला नहीं मिला. ऑक्सीजन नहीं मिली, वेंटिलेटर नहीं मिले."

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    और क्या कहा राहुल गांधी ने?

    इस वीडियो में अमरेली के नरेशभाई, अहमदाबाद के क़ादरी, वलसाड के देवानी जैसे कई परिवारों ने अपनी आपबीती सुनाई.

    राहुल ने कहा, "जब उनकी अस्पतालों में मदद करनी थी तब आप नहीं थे और जब परिवार में किसी की मौत हुई, 10-15 लाख रुपये उनका बर्बाद हुआ और जब उनको मुआवजे की ज़रूरत है तब भी आप नहीं हैं."

    किस प्रकार की सरकार है ये? गुजरात की सरकार कहती है कि कोविड के कारण 10 हज़ार लोगों की मृत्यु हुई है. हमने कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को घर घर भेजा और सच्चाई गुजरात की ये है. तीन लाख लोग कोविड के कारण मरे हैं. गुजरात के आधिकारिक रिकॉर्ड में सरकार कहती हैं 10 हज़ार सच्चाई तीन लाख. यानी मुआवजा तीन लाख लोगों को मिलना चाहिए. मगर आज के गुजरात में 10 हज़ार लोगों को पचास हज़ार दिए जा रहे हैं."

    उन्होंने पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री के पास हवाई जहाज ख़रीदने के लिए 8,500 करोड़ रुपये हैं. मगर गुजरात में जो लोग कोविड से मरे हैं. उनके परिवारों के लिए सरकार के पास कोई पैसा नहीं है."

    इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी की दो मांगे बताईं. उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी की दो मांग हैं- कोविड से मरने वालों के सही आंकड़े बताए जाएं. अपने प्रियजनों को कोविड में खो चुके परिवारों को चार लाख रुपये का हर्जाना दिया जाए. सरकार को चार लाख रुपये पीड़ित परिवारों को देना ही होगा. हम सरकार पर पूरा दबाव डालकर यह काम करवा के रहेंगे."

  3. भारत-पाक के बीच दूरियां कम करते सिंधी कलाकार

  4. अमेरिका ने ताइवान को बुलाया, भड़का चीन

    जिनपिंग

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    अमेरिका की बाइडन सरकार द्वारा अगले महीने आयोजित 'लोकतंत्र सम्मेलन' में ताइवान को आमंत्रित करने पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है.

    चीन में स्टेट काउंसिल ताइवान अफ़ेयर्स ऑफ़िस ने कहा है कि ‘यह एक ग़लती है’ और अमेरिका ने दोहराया है. चीन अमेरिका और इस द्वीप (ताइवान) के बीच किसी भी आधिकारिक बातचीत के ख़िलाफ़ है.

    रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार विदेश मंत्रालय ने 9-10 दिसंबर के बीच होने वाले इस वर्चुअल सम्मेलन में 110 भागीदारों को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सम्मेलन में ताइवान को भी आमंत्रित किया है, हालांकि, अमेरिका उसे एक देश के तौर पर मान्यता भी नहीं देता है.

    चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़, ताइवान अफ़ेयर्स ऑफ़िस की प्रवक्ता जू फेंगलियान ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका ने लोकतंत्र विषय पर आधारित जिस सम्मेलन में ताइवान को भी बुलाया है वो ‘एक ग़लती है.’

    बाइडन और जिनपिंग

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    “अमेरिका और ताइवान के बीच किसी भी तरह के आधिकारिक बातचीत का हम पुरज़ोर विरोध करते हैं.”

    उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार ‘वन चाइना पॉलिसी’ को मानता आया है और ताइवान के सवाल पर अमेरिका और चीन ने आधिकारिक तौर पर तीन बार संयुक्त विज्ञप्तियां जारी की हैं.

    16 नवंबर को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच एक वर्चुअल सम्मेलन हुआ था.

    इस दौरान चीन के शीर्ष नेता ने चेताते हुए कहा था कि कुछ अमेरिकी चीन को नियंत्रित करने के लिए ताइवान का उपयोग कर रहे हैं. ये ‘आग के साथ खेलने जैसा है’ और ‘जो भी आग से खेलेगा वो जलेगा.’

  5. लालू यादव को आपने गाड़ी चलाते हुए देखा क्या? देखिए

    लालू यादव

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    बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपनी गाड़ी चलाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया है. इस वीडियो को ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा है, ''आज वर्षों बाद अपनी प्रथम गाड़ी को चलाया. इस संसार में जन्मे सभी लोग किसी ना किसी रूप में ड्राइवर ही तो हैं. आपके जीवन में प्रेम, सद्भाव, सौहार्द, समता, समृद्धि, शांति, सब्र, न्याय और ख़ुशहाली रूपी गाड़ी सबको साथ लेकर सदा मज़े से चलती रहे.''

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  6. अमेरिका ने चीन को फिर छेड़ा, पाकिस्तान को बुलावा पर तुर्की को नहीं

    बाइडन

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    अमेरिका की बाइडन सरकार ने अगले महीने 'लोकतंत्र सम्मेलन' में शामिल होने के लिए ताइवान को भी आमंत्रित किया है. बाइडन सरकार का यह क़दम चीन को क्रोधित करने वाला साबित हो सकता है.

    इसी महीने राष्ट्रपति बाइडन के साथ वर्चुअल मुलाक़ात में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि ताइवान को स्वतंत्र मुल्क मानने की मुहिम आग से खेलने की तरह साबित होगी.

    ताइवान में एक चुनी हुई सरकार है लेकिन चीन उसे अपना हिस्सा बताता है. बाइडन ने सत्ता में आने के बाद कहा था कि अमेरिका वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में वापसी करेगा.

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय की आमंत्रण सूची में 110 देशों के नाम हैं. यह सम्मेलन 9 और 10 दिसंबर को है. इस सम्मेलन में दुनिया भर में लोकतंत्र को बढ़ावा देने और मानवाधिकारों की सुरक्षा पर बात होगी.

    इस लिस्ट में चीन और रूस का नाम नहीं है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ताइवान इसमें शामिल होगा. ताइवान के डिज़िटल मंत्री एंड्र्यू तांग ने कहा, ''हमारे मुल्क को लोकतंत्र सम्मेलन में बुलाया जाना बताता है कि ताइवान वर्षों से लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों को लेकर प्रतिबद्ध है.''

    चीन ने हाल के दिनों में ताइवान को लेकर पूरी दुनिया में सख़्ती रखी है कि कोई भी मुल्क ताइवान से स्वतंत्र संबंध ना बढ़ाए. ताइवान ने कहा है कि चीन को उसके मामले में बोलने का कोई अधिकार नहीं है.

    हालाँकि अमेरिका ने वन चाइना पॉलिसी को मानना बंद नहीं किया है. वन चाइना पॉलिसी के तहत ताइवान चीन का हिस्सा है जबकि हाल के सालों में अमेरिका ने ताइवान से स्वतंत्र रूप से द्विपक्षीय संबंध बढ़ाने की कोशिश की है.

    हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने ये भी कहा था कि ताइवान की यथास्थिति में एकतरफ़ा किसी भी तरह के परिवर्तन को अमेरिका स्वीकार नहीं करेगा.

    लोकतंत्र सम्मेलन वर्चुअल होना है. भारत को भी अमेरिका ने इस समिट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. इसके अलावा पाकिस्तान और इराक़ को भी बुलाया गया है.

    तुर्की को अमेरिका ने नहीं बुलाया है जबकि तुर्की नेटो का सदस्य है. इस कॉन्फ़्रेंस में मध्य-पूर्व से केवल इसराइल और इराक़ को बुलाया गया है. अमेरिका के रणनीतिक साझेदार सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, क़तर और यूएई को भी नहीं बुलाया गया है.

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  7. यूरोपीय देशों में कोरोना की वजह से एक बार फिर बिगड़ने लगे हैं

  8. तुर्की की मुद्रा लीरा एक दिन में 15 फ़ीसदी गिरी, निशाने पर अर्दोआन

    अर्दोआन

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    तुर्की की मुद्रा लीरा में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, तुर्की की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता ने कहा है कि मुल्क तबाही से जूझ रहा है.

    मंगलावर को लीरा में 15 फ़ीसदी की गिरावट आई थी. तुर्की में विपक्षी रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी के नेता केमाई कुलेस्तरो ने कहा कि तुर्की के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ.

    उन्होंने मुद्रा में गिरावट के लिए राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन को ज़िम्मेदार ठहराया. अर्दोआन 2003 से सत्ता में हैं. केमाई ने कहा कि अर्दोआन अभी तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मूल समस्या बन गए हैं. इस साल लीरा में 42 फ़ीसदी तक की गिरावट आई है.

    अब एक डॉलर की क़ीमत 13 लीरा से भी पार हो गई है. फ़ाइनैंशियल टाइम्स से इस्तांबुल के विश्लेषक ने कहा, ''यह किसी डरावनी फ़िल्म की तरह है. यह कहना मुश्किल है कि यह गिरावट कहाँ जाकर थमेगी.''

    पिछले सोमवार को अर्दोआन ने केंद्रीय बैंक से ब्याज़ दर में कटौती के लिए कहा था जबकि अर्थशास्त्रियों का कहना था कि इससे महंगाई और बढ़ेगी. तुर्की में महंगाई दर 20 फ़ीसदी पहुँच गई है. इसका मतलब यह हुआ को तुर्कों को अब ज़रूरी सामान ख़रीदने में ज़्यादा पैसे ख़र्च करने होंगे.

    अर्दोआन ने कहा है कि तुर्की के ख़िलाफ़ एक वैश्विक साज़िश है लेकिन वो मौक़ापरस्तों के सामने हथियार नहीं डालेंगे. अर्दोआन ने अभी के हालात की तुलना पहले विश्व युद्ध के बाद 1923 में आधुनिक तुर्की बनने के दौरान से की है.

    अर्दोआन ने कहा है कि अल्लाह और तुर्की के लोगों की मदद से उनका मुल्क आर्थिक स्वतंत्रता की जंग जीतने में कामयाब रहेगा. अर्दोआन ने केंद्रीय बैंक पर ब्याज़ दर में कटौती के लिए दबाव बनाया था.

    लीरा

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  9. राकेश टिकैत ने बताया कब तक दिल्ली की सीमाओं से हट सकते हैं किसान

    राकेश टिकैत

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    किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि अगर सरकार 26 जनवरी से पहले उनकी सारी मांगे मान ले तो वे दिल्ली की सीमाएं छोड़कर वापिस अपने घरों को लौट जाएंगे.

    उन्होंने कहा कि ये तभी होगा जब सरकार एमएसपी और आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों के मुद्दे का हल भी करे.

    उन्होंने कहा, “सरकार ने घोषणा की है तो वो प्रस्ताव ला सकते हैं लेकिन MSP और 700 किसनों की मृत्यु भी हमारा मुद्दा है। सरकार को इसपर भी बात करनी चाहिए। 26 जनवरी से पहले तक अगर सरकार मान जाएगी तो हम चले जाएंगे। चुनाव के विषय में हम चुनाव आचार संहिता लगने के बाद बताएंगे.”

    दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसान बीते लगभग एक साल से प्रदर्शन कर रहे हैं.

    वे केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन खेती क़ानूनों का विरोध कर रहे थे. अब प्रधानमंत्री मोदी ने इन तीनों कानूनों को रद्द करने की घोषणा की है.

    लेकिन किसान अब भी बॉर्डर पर जमे हुए हैं. किसानों का कहना है कि MSP को अनिवार्य बनाने की उनकी मांग अब भी पूरी नहीं हुई है. और साथ ही आंदोलन में मारे गए क़रीब 700 किसानों के बारे में भी सरकार को कुछ करना चाहिए.

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  10. दिल्ली पुलिस: गौतम गंभीर को 'इस्लामिक स्टेट कश्मीर' ने दी जान से मारने की धमकी, सुरक्षा बढ़ाई गई

    गौतम गंभीर

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    समाचार एजेंसियों के मुताबिक पूर्व क्रिकेटर और पूर्वी दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी के सांसद गौतम गंभीर ने दिल्ली में इस्लामिक स्टेट कश्मीर की ओर से जान से मारने की धमकी की शिकायत की है.

    एएनआई ने डीसीपी श्वेता चौहान के हवाले से बताया, “पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद और पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी गौतम गंभीर ने दिल्ली पुलिस से ‘इस्मालिक स्टेट कश्मीर’ द्वारा जान से मारने की धमकी के बारे में बात की है. इस विषय पर जांच जारी है. गौतम गंभीर के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है.”

    इंडिया टूडे के मुताबिक गंभीर को ये धमकियां ईमेल के ज़रिए दी गई हैं लेकिन इस बारे में पुलिस अधिकारियों ने कोई डिटेल साझा नहीं किए हैं.

    गौतम गंभीर 2019 के लोकसभा चुनावों में पूर्वी दिल्ली से बीजेपी के टिकट पर जीते हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 15 साल तक भारतीय क्रिकेट का प्रतिनिधित्व किया है. वे साल 2018 में क्रिकेट से रिटायर हो गए थे.

    गंभीर क्रिकेट में दो वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीमों का हिस्सा रहे हैं. वे 2007 में टी 20 वर्ल्ड कप की टीम में थे और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में भी उन्होंने अहम पारी खेली थी.

  11. सिख बनकर कैसे सिखों के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर चलाया गया अभियान?

  12. पुंछ एनकाउंटर: एक ऐसा ऑपरेशन जिसमें सवाल ज़्यादा हैं और जवाब कम

    इस एनकाउंटर के जुड़े कई सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिले हैं.

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  13. बीते 24 घंटे में भारत में कोरोना की स्थिति

    कोरोना

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  14. बाइडन लोकतंत्र पर करेंगे सम्मेलन, 110 देशों को बुलाया पर चीन और रूस को न्योता नहीं

    बाइडन

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    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने दुनियाभर के 110 देशों को लोकतंत्र पर होने वाले एक वर्चुअल समिट के लिए न्योता भेजा है.

    यह समिट 9-10 दिसंबर को होना है लेकिन ख़ास बात यह है कि इस समिट के लिए चीन को न्योता नहीं दिया गया है.

    लेकिन ताइवान इस सम्मेलन में हिस्सा लेगा. अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी एक पत्र में यह जानकारी दी गई.

    अमेरिका के इस क़दम से चीन को नाराज़ कर सकता है. क्योंकि चीन, ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है.

    इसके साथ ही तुर्की को भी अमेरिका की ओर से निमंत्रण नहीं भेजा गया है. रूस को भी इस सूची में जगह नहीं दी गई है. इसके साथ दक्षिण एशियाई क्षेत्र में अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका को भी बाहर रखा गया है.

    राष्ट्रपति बाइडन ने लोकतंत्र की रक्षा को अपनी विदेश नीति का अहम हिस्सा बनाना चाहते हैं.

  15. सऊदी अरब की चेतावनी - यमन पर हवाई हमले शुरु होंगे, आम लोग विद्रोही ठिकानों से दूर रहें

    सउदी

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    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा है कि वह यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के नियंत्रित सैन्य शिविरों हवाई हमले शुरु कर रहा है.

    गठबंधन ने लोगों से लक्षित क्षेत्रों के आसपास इकट्ठा ना होने की अपील की है.

    सऊदी समाचार एजेंसी के मुताबिक़, गठबंधन ने ड्रोन हमलों के लिए नए लक्ष्य तय किये हैं, जिसमें से एक निर्माणाधीन इमारत भी है जिसे यमन के ईरान-समर्थित हूती लड़ाके ड्रोन के लिए एक ख़ुफ़िया प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल करते हैं.

    यमन 2015 में शुरू हुए गृहयुद्ध के बाद से बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है.

    हूती विद्रोहियों के देश के अधिकतर पश्चिमी हिस्सों पर नियंत्रण करने और सऊदी अरब समर्थित राष्ट्रपति अब्दूरब्बू मंसूर हादी को देश छोड़कर भागने पर मजबूर करने के बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने यमन के युद्ध में हस्तक्षेप किया था.

    इसके बाद से यमन के हालात और बिगड़ते होते चले गए. इस लड़ाई के कारण अब तक 110,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

    इसके अलावा दसियों हज़ार नागरिकों की मौत ऐसे कारणों से हुई है जिन्हें रोका जा सकता था. इनमें कुपोषण, बीमारी और भुखमरी शामिल हैं.

  16. इसराइली जासूसी सॉफ़्टवेयर पेगासस के ख़िलाफ़ अदालत पहुँचा ऐप्पल

    ऐप्पल

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    इमेज कैप्शन, एनएसओ के दफ़्तर के बाहर आईफ़ोन पर बात करती एक महिला

    ऐप्पल ने हैकिंग टूल से आईफ़ोन को कथित रूप से टार्गेट करने के लिए इज़राइली स्पाइवेयर फर्म NSO ग्रुप और उसे चलानी वाली कंपनी पर मुकदमा दायर किया है.

    एनएसओ का पेगासस सॉफ्टवेयर आईफोन और एंड्रॉइड डिवाइस, दोनों को संक्रमित कर सकता है, जिससे ऑपरेटरों को संदेश, फोटो और ईमेल निकालने, कॉल रिकॉर्ड देखने,माइक्रोफोन और कैमरों को गुप्त रूप से सक्रिय करने की अनुमति मिलती है.

    एनएसओ समूह का कहना है कि उसके उपकरण आतंकवादियों और अपराधियों को निशाना बनाने के लिए तैयार किए गए थे. लेकिन जासूसी सॉफ़्टेवेयर का इस्तेमाल कथित तौर पर कार्यकर्ताओं, राजनेताओं और पत्रकारों पर भी किया गया है.

    एनएसओ ग्रुप का कहना है कि केवल अच्छे मानवाधिकार रिकॉर्ड वाले देशों के सैन्य, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और ख़ुफ़िया विभागों को ही अपना सॉफ़्टवेयर बेचता है.

    लेकिन इसी महीने अमेरिका ने इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है.अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सॉफ्टवेयर ने "विदेशी सरकारों को अंतरराष्ट्रीय दमन करने में मदद की. तानाशाह सरकारों द्वारा अपने विरोधियों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को टार्गेट की पुरानी रीत है, जिसमें ये सॉफ़्टवेयर मदद करता है.”

    ऐप्पल की यह कार्रवाई माइक्रोसॉफ़्ट, मेटा प्लेटफॉर्म्स (फ़ेसबुक) गूगल के मालिक कंपनी एल्फ़ाबेट और सिस्को सिस्टम जैसी अन्य बड़ी टेक्नोलॉजी फ़र्मों की आलोचना के बाद हुई है.

    ऐप्पल ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि वो एनएसओ ग्रुप और उसकी मूल कंपनी ओएसवाई टेक्नोलॉजी को "ऐप्पल का इस्तेमाल करने वालों की निगरानी और उन्हें टार्गेट करने के लिए जवाबदेही" तय करना चाहता है.

    ब्लॉग में लिखा है, " भविष्य में ऐप्पल एनएसओ समूह को किसी भी ऐप्पल सॉफ़्टवेयर, सेवाओं या उपकरणों का उपयोग करने से प्रतिबंधित करने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा की मांग रहा है."

  17. कोरोना पर WHO ने दी चेतावनी, कहा- मार्च तक हो सकती हैं लाखों मौतें

    कोरोना

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    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना संक्रमण पर एक गंभीर चेतावनी जारी की है.

    यूएन के संगठन ने कहा है कि यूरोप और एशिया के कुछ हिस्सों में अगले साल मार्च तक सात लाख लोगों की कोविड संक्रमण के कारण मौत हो सकती है.

    कोरोना महामारी की शुरुआत से अभी तक 53 देशों में मरने वालों की संख्या पहले से ही 15 लाख से अधिक है. ये वे 53 देश हैं जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन अपना यूरोप क्षेत्र बताता है.

    डब्ल्यूएचओ ने कोरोना की आगामी स्थिति को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले साल मार्च तक 49 देशों में आईसीयू संकट पैदा हो सकता है.

    यूरोप में लगातार कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं.

    कोरोना

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    यूरोप के कई देशों ने अपने यहां कोरोना नियमों को सख़्त करते हुए नए प्रतिबंध लागू कर दिये हैं. ऑस्ट्रिया में तो पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की जा चुकी है जबकि कई देश लॉकडाउन लागू करने पर विचार कर रहे हैं.

    फ्रांस, जर्मनी और मिस्र समेत कई देश जल्दी ही बूस्टर वैक्सीन को भी आवश्यक करने पर विचार कर रहे हैं.

    हालांकि कई देशों में कोरोना प्रतिबंधों को लागू करने के विरोध में प्रदर्शन भी हो रहे हैं. नीदरलैंड में लॉकडाउन के विरोध में तो हिंसक झड़पें तक होने की ख़बर है.

    मंगलवार को डब्ल्यूएचओ ने कहा कि मौजूदा हालात के आधार पर लगता है कि अगले साल मार्च तक कुल मौतों की संख्या 2.2 मिलियन तक भी पहुंच सकती है.

    अपने बयान में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण होने वाली मौतों में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है. औसतन लगभग 4200 मौतें हर रोज हो रही हैं.

    अकेले रूस में ही कोरोना से मरने वालों की संख्या 1200 से अधिक थी.

    डब्ल्यूएचओ ने माना है कि इन बढ़ते मामलों और मौतों के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि अभ भी एक बड़ी आबादी ने वैक्सीन की पूरी डोज़ नहीं ली है. साथ ही डेल्टा वेरिएंट भी यूरोप क्षेत्र में तेज़ी से फैला.

    डब्ल्यूएचओ यूरोप के निदेशकडॉ हैंज़ क्लूज ने लोगों से वैक्सीन लगवाने का आग्रह किया है.

  18. नमस्कार,

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