नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी ने सोमवार शाम कश्मीर
के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज़ को गिरफ़्तार किया है.
बताया जा रहा है कि खुर्रम परवेज़ के ख़िलाफ़
यूएपीए और आईपीसी की बेहद गंभीर धाराओं के साथ मुकदमा दर्ज किया गया है.
अरेस्ट मेमो के मुताबिक़, खुर्रम परवेज़ के
ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 120बी, 121, 121ए और यूएपीए की धारा 17, 18, 18बी, 38 और 40 के तहत केस दर्ज किया गया है.
खुर्रम के ख़िलाफ़ लगी आईपीसी यानी भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी आपराधिक साजिश रचने, धारा 121 भारत सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने, युद्ध छेड़ने की कोशिश करने या युद्ध छेड़ने के लिए उकसाने के मामले में लगाई जाती है.
इसी तरह धारा 121ए उन अपराधों की साजिश रचने के मामलों में लगाई जाती है जिनके लिए धारा 121 के तहत सजा दी जाती है.
खुर्रम के ख़िलाफ़ अनलॉफ़ुल ऐक्टिविटिज (प्रिवेंशन) क़ानून के तहत भी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं.
यूएपीए की धारा 17 आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने, धारा 18 साजिश रचने और 18बी किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को आतंकी गतिविधि के लिए इकट्ठा करने के मामले में लगाई जाती है.
वहीं, यूएपीए की धारा 38 किसी आतंकी संगठन के सदस्य होने और धारा 40 आतंकी संगठन के लिए फंड जुटाने के मामलों में लगाई जाती है.
जेरोमी पॉवेल दूसरी बार बनाए गए अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन
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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने सोमवार को एलान किया कि जेरोमी पॉवेल दूसरी बार फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन होंगे.
इसका अर्थ ये हुआ कि पॉवेल फिर से अगले चार साल के लिए इस पद पर रहेंगे.
राष्ट्रपति बाइडन के इस एलान का बाज़ार पर सकारात्मक असर देखा जा रहा है.
ख़बर लिखे जाने तक सोमवार के शुरुआती कारोबार में एसएंडपी 500 सूचकांक में 0.5 फ़ीसदी की तो नैस्डैक सूचकांक में 0.6 फ़ीसदी की बढ़त देखी गई.
इसके अलावा, दूसरे देश की मुद्राओं के मुक़ाबले डॉलर में भी मजबूती दर्ज की गई. वहीं सोने की क़ीमत में इस ख़बर के बाद कमी देखी गई.
माना जा रहा है कि कोरोना महामारी के दौरान अपनी नीतियों से अमेरिका के केंद्रीय बैंक को संभालने के जेरोमी पॉवेल के प्रयासों पर राष्ट्रपति बाइडन ने अपनी मुहर लगाई है. इससे बाज़ार का भरोसा बढ़ाने में मदद मिली.
पॉवेल ने महामारी के दिनों में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों के काफ़ी कम रखा, जिससे लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने और जॉब मार्केट को फिर से खड़ा होने में मदद मिली.
बाइडन ने साथ ही कहा कि वो फेडरल रिज़र्व के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अकेले डेमोक्रेट सदस्य लेल ब्रेनार्ड को उपाध्यक्ष पद पर नामित कर रहे हैं.
बेंगलुरू में भारी बारिश से आम जनजीवन प्रभावित, सैकड़ों लोग निकाले गए
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इमरान क़ुरैशी
बेंगलुरू से, बीबीसी हिन्दी के लिए
रविवार रात को हुई भारी बारिश से उत्तरी बेंगलुरू की दो प्रमुख झीलों के भर जाने के बाद वहां की एक इमारत से कम से कम 200 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया.
भारी बारिश से सबसे ज्यादा नुक़सान जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफ़िक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) में हो रहे रिसर्च और विकास के काम को हुआ है.
इसके पास की राचेनहल्ली झील का पानी संस्थान में भर गया.
संस्थान के कम से कम 65 फ़ीसदी इलाक़े में दो-तीन फ़ीट पानी जमा हो गया है. पानी से रिसर्च और विकास के कामों को हुए नुक़सान को लेकर सबसे अधिक चिंता जताई जा रही है.
जेएनसीएएसआर के अध्यक्ष प्रो. जीयू कुलकर्णी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "नुक़सान तो हुआ है और रिसर्च और विकास के काम भी प्रभावित हुए हैं. लेकिन कितना हुआ है, इसका अंदाज़ा लगा पाना अभी जल्दबाज़ी होगी."
उन्होंने कहा, "हम जैव नमूनों को डीप फ्रीजर में सहेजकर उन्हें अन्य संस्थानों में भेज सकते हैं. हमारे लैब में एक-दो फ़ीट पानी भर गया है."
बृहत बेंगलुरू महानगर पालिका (बीबीएमपी) के मुख्य आयुक्त गौरव गुप्ता ने संवाददाताओं को बताया कि येलहंका इलाक़े में बीती रात 13 सेंटीमीटर बारिश हुई. यह एक महीने में बरसने वाले पानी के बराबर है.
प्रशासन ने नीचे की मंजिल पर रह रहे कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. कई जगह तो मकान की बेसमेंट में चार फ़ीट से ज्यादा पानी भर गया. वहीं बुज़र्गों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई.
त्रिपुरा हिंसा: तृणमूल नेता और टॉलीवुड अभिनेत्री सयानी घोष को मिली जमानत
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पिनाकी दास
अगरतला से, बीबीसी हिंदी के लिए
तृणमूल कांग्रेस की युवा नेता और बांग्ला फ़िल्मों की अभिनेत्री सयानी घोष को अगरतला के अपर सीजेएम और सिविल जज की अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी. पार्टी के लिए यह राहत की ख़बर है.
इससे पहले त्रिपुरा पुलिस ने रविवार की दोपहर को उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था. उन पर ग़ैर-जमानती धाराओं के तहत हत्या की साजिश रचने और शत्रुता फैलाने के आरोप लगाए गए. और इसके लिए उनके ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153, 153ए, 307, 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया.
सोमवार को क़रीब 11.30 बजे उन्हें अदालत लाया गया और दोपहर बाद अदालत में पेश किया गया. सरकारी वक़ील बिश्वजीत देब ने अदालत से उन्हें पूछताछ के लिए दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने का अनुरोध किया.
हालांकि सयानी का बचाव करने वाले वक़ील शंकर लोध ने अदालत से कहा कि पुलिस के तर्क विरोधाभासी हैं. उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज कराने वाले ने ख़ुद को प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए कहा कि सयानी अपनी गाड़ी से पत्थर फेंक रही थीं.
उनके अनुसार, पुलिस ने बताया है कि सयानी गाड़ी से निकल कर उस पर चढ़कर पत्थर फेंक रहीं थी. उन्होंने आगे कहा कि लेकिन मीडिया में जो वीडियो सामने आए उसमें सयानी ऐसा करती हुई नहीं दिख रही हैं.
सयानी के वक़ील ने ऐसी परिस्थिति में अदालत से अपील की कि धारा 437 की उपधारा 1 के तहत उन्हें जमानत दे दी जाए. और अदालत ने उनके तर्क स्वीकार करते हुए अभिनेत्री को जमानत दे दी.
अदालत से बाहर निकलकर अपने समर्थन के लिए लोगों को शुक्रिया कहा और दावा किया कि सत्य की जीत हुई.
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आख़िर ये मामला है क्या?
रविवार सुबह 11:30 बजे घोष समेत अन्य तृणमूल कांग्रेस नेता ईस्ट अगरतला महिला पुलिस स्टेशन पहुंचे थे जहां उनकी गाड़ियों पर ईंटों और लाठियों से हमला किया गया.
इस हमले का आरोप बीजेपी समर्थकों पर लगाया जा रहा है.
इस मामले में कम से कम पांच तृणमूल कांग्रेस समर्थक जख़्मी हुए, जिन्हें इलाज़ के लिए अस्पताल ले जाया गया. इसी बीच सयानी घोष के साथ पूछताछ के बाद रविवार 4 बजे उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
तृणमूल कांग्रेस सांसद सुष्मिता देब ने कहा, “ये एक पूरी तरह से झूठा मुकदमा है. और उन्होंने इस युवती के साथ जो बर्ताव किया है, वह दुर्भाग्यशाली है. पुलिस ने जानबूझकर उसे कोर्ट में पेश नहीं किया ताकि उसे रात भर थाने में रखा जा सके. ये डराने-धमकाने की रणनीति है. हमें पुलिस के अत्याचार से डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है.”
“हम जमीन पर लड़ रहे हैं. क्या बीजेपी राज्य के लोगों से ज़्यादा ताक़तवर है? नहीं. लोग अपना फैसला करेंगे. बीजेपी अपनी ज़मीन खो रही है और इसी वजह से वह इस तरह के कदम उठा रही है. अगर वह हार नहीं रहे होते तो ऐसा क्यों करते. लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं हैं.”
बिश्वजीत देबनाथ नामक शख़्स ने सयानी घोष के ख़िलाफ़ शिकायत अगरतला पूर्व थाने में दर्ज कराई.
देबनाथ ने अपनी शिकायत में दावा किया कि सयानी घोष ने कथित रूप से 20 नवंबर 2021 को लगभग सात बजकर दस मिनट पर आश्रम चौमुहानी से सफेद रंग की स्कॉर्पियो में गुजरते हुए सीएम बिप्लव कुमार देव के चुनावी रैली पर हमले का नेतृत्व किया, शांति भरे वातावरण को ठेस पहुंचाई और दो पक्षों के बीच शत्रुता पैदा की.
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पाकिस्तान ने राजनाथ सिंह के बयान पर जताई नाराज़गी
दो दिनों पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दिए बयान पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पाकिस्तानी ज़मीन पर मिलिट्री कार्रवाई की धमकी बेहद ग़ैरजिम्मेदाराना बयान है.
शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि अगर भारत के पश्चिमी पड़ोसी ने परेशानियां खड़ी कीं तो भारत अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान के क्षेत्र में कार्रवाई को अंजाम दे सकता है.
रविवार को इसका जवाब देते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दावे को खारिज करते हुए कहा कि भारत सरकार पड़ोसियों को निशाना बनाकर भ्रम फैला रही है.
आज का कार्टून: हम भी ट्राई करें?
कृषि बिल के बाद सीएए के विरोध की तैयारी पर आज का कार्टून.
उत्तर कोरिया और पश्चिम बंगाल, दुनिया में इन दो जगहों पर जंगल राज: बंगाल बीजेपी अध्यक्ष
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भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने सोमवार को दावा किया कि दुनिया में दो जगहों उत्तर कोरिया और पश्चिम बंगाल में जंगल राज जारी है.
कुछ समय पहले तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी के शासन को लेकर यही दावा किया था.
कोलकाता में बीजेपी के दफ़्तर के बाहर तृणमूल कांग्रेस की ओर से आयोजित धरना प्रदर्शन की भी सुकांत मजूमदार ने आलोचना की.
तृणमूल ने ये विरोध प्रदर्शन त्रिपुरा में उसके कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ कथित हिंसा और पार्टी की यूथ विंग की नेता सयानी घोष की रविवार को हुई गिरफ़्तारी के विरोध में किया था.
सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि तृणमूल समर्थकों ने धरने के दौरान बीजेपी दफ़्तर में लगे पोस्टर-बैनर फाड़ डाले थे.
उन्होंने उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से तुलना करते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल में जंगल राज का माहौल है. दुनिया में दो ऐसी जगहें हैं, उत्तर कोरिया और पश्चिम बंगाल जहां जंगल राज है."
अमेरिका: भीड़ को एसयूवी ने रौंदा, पांच की मौत, 40 घायल
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अमेरिकी पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि विस्कॉन्सिन राज्य में एक तेज़ रफ़्तार कार के भीड़ में घुसने से कम से कम पांच लोगों की मौत और 40 से ज़्यादा लोग घायल हो गए.
लाल रंग की एक एसयूवी विस्कॉन्सिन के वौकेशा शहर में चल रही है क्रिसमस परेड को रौंदती हुई आगे बढ़ गई.
परेड में स्कूल बैंड और डांस ट्रूप शामिल थे. कार की चपेट में आने वाले लोगों में बच्चे भी शामिल थे.
घटना के बाद एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है.
पुलिस का कहना है कि ये घटन फिलहाल चरमपंथी घटना जैसी नहीं लग रही है.
शहर के पुलिस प्रमुख डैन थॉम्पसन ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने संदिग्ध वाहन को अपने कब्ज़े में ले लिया है.
पंग शुआई: चीन की 'गायब' टेनिस खिलाड़ी सामने आईं
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अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति का कहना है कि चीनी टेनिस स्टार पंग शुआई सुरक्षित और स्वस्थ हैं.आईओसी ने एक बयान जारी कर कहा है कि समिति के अध्यक्ष थॉमस बाख ने रविवार को वीडियो कॉल के ज़रिए पंग शुआई से 30 मिनट तक बात की.बयान में कहा गया है पंग शुआई ठीक हैं और समिति की मुख्य चिंता ये थी कि वह ठीक हैं कि नहीं. 35 साल की पंग शुआई ने पूर्व उपराष्ट्रपति के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद लगभग तीन सप्ताह तक लोगों की नज़रों से गायब रहीं.
उनकी अनुपस्थिति ने व्यापक चिंता पैदा कर दी थी. अंतरराष्ट्रीय ख़िलाड़ियों और सरकारों ने चीन से कहा था कि वह इस बात का सबूत दें कि पंग शुआई सुरक्षित हैं.
आईओसी के बयान में वीडियो कॉल की एक तस्वीर भी शामिल जारी की है, जिसमें पंग कैमरे की ओर मुस्कुराती हुई दिखाई दे रही हैं.
आंध्र प्रदेश में तीन राजधानियों के प्रस्ताव वाला विधेयक वापस लिया गया
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आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने उस विवादास्पद विधेयक को वापस ले लिया है जिसमें राज्य में तीन राजधानियों का प्रावधान किया गया था.
इसके तहत अमरावती में राज्य विधानसभा का गठन किया जाना था जबकि विशाखापत्तनम से कार्यपालिका काम करती और कुर्नूल में हाई कोर्ट की स्थापना की जाती.
इससे पहले राज्य के एडवोकेट जनरल एस सुब्रमणियम ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने इस विधेयक को वापस लेने का फ़ैसला किया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी के लिए एक नया क़ानून लाया जाएगा जिसमें कोई ग़लती नहीं होगी.
उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि राजधानियों के विकेंद्रीकरण की आंध्र प्रदेश में बहुत ज़रूरत है. जो विधेयक पहले लाया गया था, सरकार उसे वापस ले रही है. हम एक नया विधेयक लेकर आएंगे जिसमें कोई त्रुटि नहीं होगी."
सऊदी कंपनी अरामको से करार टूटने के बाद रिलायंस के शेयरों में भारी गिरावट
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देश के शेयर बाज़ारों में पिछले कई दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा.
सोमवार को 30 प्रमुख शेयरों के सूचकांक सेंसेक्स 1170.12 प्वॉयंट गिरकर 58,465.89 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 348.25 अंक फिसलकर 17,416.55 पर पहुंच गया.
गिरने वाले शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज़, बजाज फिनांस और कोटक बैंक प्रमुख हैं.
सऊदी तेल कंपनी अरामको को अपनी ऑयल रिफाइनरी में 20 फ़ीसदी हिस्सा बेचने का सौदा रिलायंस ने रद्द कर दिया है.
कंपनी के इस फ़ैसले का असर सोमवार को देखने को मिला. कंपनी के शेयरों में आज 4 फीसदी से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई.
इनके अलावा बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी, एसबीआई और टाइटन के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई.
एक तरफ़ जहां शेयर बाज़ार में चौतरफा बिकवाली का दबाव था तो दूसरी तरफ़ भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, पावरग्रिड और इंडसलैंड बैंक के शेयरों में तेज़ी देखी गई.
ब्रेकिंग न्यूज़, किसानों के बाक़ी मसलों के हल निकले बिना हम घर नहीं जाएंगे: राकेश टिकैत
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Author, अनंत झणाणे
पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
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भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने सोमवार को कहा कि तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने के साथ-साथ किसानों के कई मसले हल किए जाने की ज़रूरत है.
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वो इन क़ानूनों को रद्द करने के एलान के बाद अब किसानों के बाक़ी बचे मसले हल करने के लिए उनसे बात नहीं करना चाहती.
राकेश टिकैत लखनऊ के कांशीराम ईको पार्क में आयोजित किसान महापंचायत में बोल रहे थे, जहां बड़ी संख्या में किसान इकट्ठा हुए हैं. 'एमएसपी अधिकार महापंचायत' नाम की इस रैली का आयोजन 'संयुक्त किसान मोर्चा' ने किया है.
राकेश टिकैत ने 'एमएसपी अधिकार महापंचायत' नाम के इस आयोजन में सरकार से मांग की है कि वो उन्हें साफ़ बताए कि क्या तीनों क़ानून सही अर्थों में रद्द हो चुके हैं. उन्होंने ये भी मांग की कि सरकार अन्य मसलों पर भी उनके संगठन से बात शुरू करे ताकि किसान अपने गांव जा सकें.
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बीबीसी हिंदी से क्या कहा टिकैत ने
राकेश टिकैत ने बीबीसी हिंदी को बताया कि किसानों की कई मांगें हैं. इनमें विभिन्न फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को क़ानूनी दर्जा देने की मांग भी शामिल है.
अपनी अन्य मांगों के बारे में कहा कि सरकार गांवों और मंडियों की जमीनें दूसरों को बेच रही है जिस पर रोक लगनी चाहिए. साथ ही 10 साल पुराने ट्रैक्टर चलाने पर रोक लगाने वाले क़ानून पर भी रोक लगनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे कंपनियां आबाद और किसान बर्बाद हो रहे हैं.
टिकैत ने किसानों की रैली को शक्ति प्रदर्शन बताने वाले आरोपों को ग़लत बताया है. उल्होंने कहा कि जब किसानों की मीटिंग बुलाई तो लोग आए हैं जो परेशान हैं. ये कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं है.
उन्होंने उस आरोप को भी ग़लत बताया है कि कृषि क़ानून वापस ले लेने के ऐलान के बाद अब एक-एक करके कई मांगें इसलिए सामने आ रही हैं ताकि आंदोलन को लंबा खींचा जाए.
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'हम छह माह और इंतज़ार कर लेंगे'
राकेश टिकैत ने बीबीसी हिंदी को बताया कि कृषि क़ानूनों पर भले सरकार ने एलान किया है पर उनकी अन्य मांगों पर अभी कुछ नहीं कहा है. हम इसके लिए अगले छह माह और इंतज़ार कर सकते हैं.
साथ ही ये भी कहा कि सरकार के दरवाज़े पांच साल में केवल कुछ महीने ही खुले होते हैं और अभी ऐसा ही समय है. इसलिए हम अपनी मांगें लेकर सरकार के सामने आए हैं.
उन्होंने कहा कि यदि ये मांगें ग़लत हैं तो सरकार बताए कि ये ग़लत हैं.
रामायण एक्सप्रेस में भगवा वर्दी पहनने वाले वेटरों पर मध्य प्रदेश में छिड़ा विवाद
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भारतीय रेलवे द्वारा चलाई जा रही रेलगाड़ी रामायण एक्सप्रेस ट्रेन में वर्दी को भगवा रंग की वर्दी पहनाने पर विवाद छिड़ गया है.
मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर के कुछ साधु संतों का दावा है कि ये हिंदू धर्म का अपमान है.
उन्होंने ये धमकी दी है कि अगर ये ड्रेस कोड वापस नहीं लिया गया तो वे दिल्ली में 12 दिसंबर को इस ट्रेन का परिचालन रोक देंगे.
उज्जैन अखाड़ा परिषद के पूर्व महासचिव अवधेशपुरी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "हमने दो दिनों पहले केंद्रीय रेल मंत्री को रामायण एक्सप्रेस में भगवा रंग की वर्दी पहनकर खान-पान की चीज़ें परोसने पर अपने विरोध के बारे में चिट्ठी लिखी है. भगवा कपड़े पहनना, साधु जैसी पगड़ी और गले में रूद्राक्ष की माला पहनकर ये काम करना हिंदू धर्म और उसके संत समाज का अपमान है."
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उन्होंने ये भी कहा कि अगर वेटरों का ड्रेस कोड नहीं बदला गया तो संत समाज के लोग दिल्ली के सफ़दरजंग रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोकेंगे. उन्होंने कहा, "हम रेलवे ट्रैक पर बैठेंगे. ये हिंदू धर्म की रक्षा के लिए ज़रूरी है. हमने उज्जैन में इस मुद्दे पर सख़्त स्टैंड लिया है."
उज्जैन शहर में हिंदुओं के अराध्य भगवान शंकर का महाकालेश्वर मंदिर है. यहीं हरेक 12 साल पर सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन भी किया जाता है. देश की पहली रामायण सर्किट ट्रेन 17 दिनों की यात्रा पर सफ़दरजंग रेलवे स्टेशन से 7 नवंबर को रवाना हुई थी.
ये ट्रेन हिंदुओं के अराध्य भगवान राम से जुड़ी 15 जगहों की यात्रा कराती है. 7500 किलोमीटर लंबे सफ़र में ये ट्रेन अयोध्या, प्रयाग, नंदीग्राम, जनकपुर, चित्रकूट, सीतामढ़ी, नासिक, हंपी और रामेश्वरम जैसी जगहों पर रुकती है.
सीएए-एनआरसी से भी पीछे हटेंगे पीएम मोदी?
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इसी साल 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार के तीनों कृषि क़ानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी.
सुनवाई के दौरान मोदी सरकार के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के विरोध-प्रदर्शन में 'ख़ालिस्तानियों' ने अपनी पैठ बना ली है.
केके वेणुगोपाल ने ये बात सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ़ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कही थी. वेणुगोपाल ने कहा था कि वह इस मामले में आईबी के इनपुट के साथ एक हलफ़नामा भी दाख़िल करेंगे.
अटॉर्नी जनरल ने किसानों के आंदोलन में प्रतिबंधित संगठन 'सिख्स फोर जस्टिस' के शामिल होने का दावा किया था.
धर्म, खाना, कपड़े कैसे लोगों को बांटते हैं?
वीडियो कैप्शन, धर्म, खाना, कपड़े कैसे लोगों को बांटते हैं?
दुनिया में हर शख़्स अपनी एक अलग पहचान के साथ आता है लेकिन धीरे-धीरे उसे कई खांचों में बांट दिया जाता है. जैसे उसके पहनावे, खाने, धर्म और आस्था के आधार पर.
ये कौन लोग हैं जो इस तरह से लोगों को बांटते हैं? देखिए पाकिस्तान से वरिष्ठ पत्रकार वुसअतुल्लाह ख़ान की यह ख़ास टिप्पणी.
बिहार में परिवारों को निगलती ज़हरीली शराब
वीडियो कैप्शन, बिहार में परिवारों को निगलती ज़हरीली शराब
बिहार में एक महीने के अंदर 65 से ज़्यादा लोगों की जान ज़हरीली शराब पीने से चली गई. पूरे सूबे में हाहाकार मचा हुआ है. कई परिवार तबाह हो गए हैं.
इस मुद्दे पर विपक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कथित सुशासन सवालों के घेरे में है.
देखिए बीबीसी के लिए बिहार से विष्णु नारायण की रिपोर्ट
यूरोप के कई देशों में कोरोना के बढ़ते मामले के कारण लगाए गए सख़्त प्रतिबंध, प्रदर्शन
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यूरोप में कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और इन्हीं बढ़ते मामलों के ख़तरनाक स्थिति तक पहुंचने से पहले नियंत्रित करने के लिए यूरोप के कई देशों ने अपने यहां नए कोरोना प्रतिबंधों की घोषणा की है.
ऑस्ट्रिया में पूर्णरूप से लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है. लोगों को घरों से काम करने के लिए कहा गया और साथ ही ग़ैर-ज़रूरी चीज़ों की दुकानों को बंद करने के आदेश जारी किये गए हैं.
लेकिन यूरोप में कई जगहों पर नए प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं. नीदरलैंड और बेल्जियम में पुलिस के साथ
लोगों की झड़प की ख़बर है.
इससे पूर्व विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की चेतावनी दी थी कि यूरोप में संक्रमण तेज़ी से पांव पसार रहा है.
डब्ल्यूएचओ के रीजनल निदेशक डॉ हैंस ने बीबीसी को बताया कि अगर यूरोप में सख़्त प्रतिबंध नहीं लगाए गए तो अगली लहर में कम से कम पांच लाख लोगों की मौत हो सकती है.
ऑस्ट्रिया में पिछले सप्ताह कोविड टीकाकरण को क़ानूनी आवश्यकता घोषित कर दिया गया था. ऐसा करने वाला ऑस्ट्रिया पहला देश है. इसके अलावा देश में फ़रवरी में आयी लगर के दौरान लगाए गए प्रतिबंध भी लागू हैं.
इसके अलावा जर्मनी में भी राजनेता इसी तरह के उपायों को लागू करने के मुद्दे पर बहस कर रहे हैं क्योंकि जर्मनी में आईसीयू बेड्स लगभग पूरी तरह भर चुके हैं और संक्रमण के मामले हर रोज़ आ रहे हैं.
पाकिस्तान में कैसे खड़ी हुई एक इस्लामी पार्टी जिसने देश को हिला रखा है
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"सच बात तो यह है कि न तो सरकार और न ही देश उग्रवाद से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है जैसा कि होना चाहिए था. टीएलपी (तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान) के मामले में जिस तरह से सरकार को पीछे हटना पड़ा और यह उस बम की ओर इशारा करता है जो टिक-टिक कर रहा है... जो राज्य क़ानून को लागू नहीं करवा सकता, उसके अस्तित्व पर सवाल उठने लगते हैं. इन हालात में आप गृहयुद्ध की तरफ़ बढ़ते जाएंगे."
कोट लखपत जेल से तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के प्रमुख साद हुसैन रिज़वी की रिहाई के कुछ घंटों बाद, पाकिस्तान के केंद्रीय सूचना मंत्री फ़वाद चौधरी का ऊपर लिखा बयान पाकिस्तान के लगभग सभी टीवी चैनलों की हेडलाइन था.
फ़वाद चौधरी ने ये बयान गुरुवार शाम पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ़ पीस स्टडीज़ द्वारा आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए दिया था.
साद रिज़वी को 12 अप्रैल, 2021 को लोगों के विरोध और हिंसक प्रदर्शन के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. पाकिस्तान सरकार और टीएलपी के बीच 31 अक्टूबर को हुए एक समझौते के तहत उनकी रिहाई हुई है.
इस साल अप्रैल में हुआ विरोध न तो तहरीक-ए-लब्बैक का यह पहला विरोध था और न ही इस संगठन के साथ पाकिस्तान सरकार का पहला समझौता.