मोदी 2024 में पीएम बनें इसके लिए यूपी में योगी का सीएम बनना ज़रूरी- अमित शाह
अमित शाह ने लखनऊ में कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी का लक्ष्य 300 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करना है.
लाइव कवरेज
पवन सिंह अतुल, अनंत प्रकाश, कीर्ति दुबे and मानसी दाश
मर्दों के दबदबे वाले काम में एक औरत ने कैसे हासिल किया मक़ाम
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जामनगर की ललिताबेन पिछले दो दशकों से पीतल की फ़ैक्ट्री में काम करती हैं.
कम उम्र में ही उन्होंने ये काम करना शुरू किया था.
अमूमन पीतल कारखानों में पुरुष ही काम करते नज़र आते हैं, लेकिन ललिताबेन ने वहां काम करके पैसा और इज़्ज़त दोनों कमाई.
देखिए ललिताबेन के जज़्बे की कहानी हमारी सहयोगी दरशन ठक्कर की इस रिपोर्ट में.
पाकिस्तान में किस हाल में हैं चीन से लाए गए कर्मचारी
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विदेशी मुल्क और कभी भी आतंकी हमले का शिकार होने का डर... ये हैं पाकिस्तान में CPEC प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे चीनी कर्मचारियों की दिक़्क़तें.
हाल ही में कुछ चीनी कर्मचारियों पर एक आतंकी हमला भी हुआ था, जिसके बाद पाकिस्तानी सरकार ने इनकी सुरक्षा बढ़ा दी थी.
पाकिस्तान में कैसे रह रहे हैं चीनी... देखिए सारा अतीक़ और नैयर अब्बास की रिपोर्ट.
पाकिस्तान में फिर आमने-सामने इमरान सरकार और तहरीक-ए-लब्बैक
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पाकिस्तान में इमरान ख़ान हुकूमत और तहरीक-ए-लब्बैक संगठन आमने-सामने आ गए हैं.
पाकिस्तान में प्रतिबंधित धार्मिक-राजनीतिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक ने फ़्रांसीसी राजदूत पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए उन्हें पाकिस्तान से निर्वासित करने की मांग की है.
इस मुद्दे पर इमरान सरकार से बातचीत नाकाम होने के बाद संगठन के लोगों ने 'लॉन्ग मार्च' फिर शुरू कर दिया है.
जुलूस में पुलिस से झड़पों की ख़बरें भी हैं, जिनमें पांच पुलिसकर्मियों की मौत हुई है और सैकड़ों घायल हुए हैं.
पाकिस्तान से और जानकारी दे रहे हैं संवाददाता शहज़ाद मलिक...
Cover Story: भारत में कहां और क्यों डूब रहे हैं कुछ गांव?
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जलवायु परिवर्तन का ख़तरा दुनिया में बढ़ रहा है. दुनियाभर के नेता इस पर मंथन के लिए अगले हफ़्ते ग्लास्गो शहर में जुट रहे हैं.
भारत की 80 फ़ीसदी आबादी भी ख़तरे की ज़द में है.
असम, बिहार, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों समेत भारत के 463 ज़िलों में बाढ़, चक्रवात या सूखे का ख़तरा बढ़ रहा है.
ये बात क्लाइमेट वलनरेबिलिटी इंडेक्स में सामने आई है, जिसे काउंसिल ऑन एनर्जी एनवायरमेंट एंड वॉटर ने जारी किया है.
दिखाएंगे कैसे ख़तरा नज़दीक पहुंच चुका है...
गुजरात से लेकर आंध्र प्रदेश तक कैसे गांव समंदर में समा रहे हैं... इसकी चर्चा कवर स्टोरी में.
इसराइल ने वेस्ट बैंक में 3000 घर बनाने का काम शुरू किया, अमेरिका ने की थी आलोचना
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इसराइल सरकार ने कब्जे
वाले वेस्ट बैंक इलाके में बसी यहूदी बस्तियों में 3100 नए घर बनाने की अपनी योजना को मूर्त रूप देने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं.
इस मामले से जुड़ी एक योजना समिति ने 1800 घरों के लिए अपनी अंतिम सहमति दे दी है. और 1344 घरों के लिए प्राथमिक सहमति दी है.
ये घोषणा बाइडन प्रशासन
द्वारा इसराइली नीति की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने के बाद की गयी है.
बाइडन प्रशासन ने कहा है कि उसने “बस्तियों के विस्तार
का कड़ा विरोध किया है” क्योंकि इस कदम ने इसराइल और फ़लस्तीन क्षेत्र के बीच शांति
की संभावनाओं को ठेस पहुंचाई है.
साल 1967 में हुए मध्य पूर्व युद्ध के बाद वेस्ट बैंक और ईस्ट यरूशलम में
बनी 147 बस्तियों में छह लाख से ज़्यादा यहूदी रहते हैं.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय
क़ानूनों के अंतर्गत अवैध मानता है.
हालांकि, इसराइल इसका खंडन करता रहा है.
फ़लस्तीन क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने दुनिया से आग्रह किया है कि वह बस्तियों
के निर्माण से जुड़ी आक्रामकता पर इसराइल से जवाब मांगे.
पश्चिम बंगाल में पेट्रोल-डीज़ल सौ के पार, बंद रहे पेट्रोल पंप और टैक्सी सर्विस
....में
Author, प्रभाकर मणि तिवारी
पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और आसपास के जिलों में पेट्रोल पंप
मालिकों ने गुरुवार शाम को आधे घंटे तक तमाम बत्तियां बुझा कर पेट्रोल और डीज़ल की
बिक्री बंद रखी.
राज्य में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें सौ के पार पहुंच कर हर रोज़ नया
रिकॉर्ड बना रही हैं.
इनके साथ ही कोलकाता की मशहूर पीली टैक्सी के दर्जनों ड्राइवरों ने भी अपनी
गाड़ी बंद कर सड़कों पर बैठ कर सांकेतिक विरोध जताया.
राज्य में हर महीने 1.3 लाख किलोलीटर पेट्रोल और तीन लाख किलो लीटर डीज़ल
की खपत होती है.
वेस्ट बंगाल पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के सदस्य अनिर्वाण साहा कहते हैं, “कोलकाता और आसपास
के ज़िलों में डीज़ल की कीमत सौ के पार पहुंच गई है. बिक्री घटने की वजह से हमें
नुकसान हो रहा है.”
दूसरी ओर, बस मालिकों के संगठन ज्वाइंट काउंसिल आफ बस सिंडीकेट के महासचिव तपन बनर्जी
कहते हैं,
“तेल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण बसों का संचालन बेहद घाटे का सौदा बन
गया है. शाम को यात्री नहीं होने की वजह से बस मालिक सड़कों पर उतरने के पक्ष में
नहीं हैं.”
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पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के एक सदस्य बताते हैं, “पेट्रोल पर करीब 63 फीसदी यानी करीब 32.90 रुपए केंद्र को टैक्स के तौर पर मिलता है जबकि राज्य का हिस्सा 19.27 पैसा है. इसी तरह डीज़ल में यह अनुपात क्रमशः 31.80 और 13.08 रुपए है.”
पश्चिम बंगाल में पेट्रोल और डीज़ल पर बिक्री कर की दरें क्रमशः 17 और 25 प्रतिशत हैं. पहले इस पर एक रुपए प्रति लीटर का लंप-संप टैक्स भी था. लेकिन ममता बनर्जी सरकार ने वर्ष 2018 में उसे हटा दिया था. पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री से राज्य सरकार को सालाना करीब आठ हजार करोड़ का राजस्व मिलता है.
तृणमूल कांग्रेस सरकार लंबे अरसे से पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि का मुद्दा उठाती रही है. दूसरी ओर, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा है, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में वृद्धि कोई ख़बर नहीं है. उन्होंने इसे जीएसटी के दायरे में शामिल करने का सवाल उठाते हुए राज्य सरकार की खिंचाई की है.
ब्रिटेन ने फिशिंग लाइसेंस से जुड़े विवाद पर फ्रांसीसी राजदूत को तलब किया
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इमेज कैप्शन, ब्रितानी ट्रॉलर (फाइल फोटो)
ब्रिटेन ने गुरुवार को ब्रेक्सिट के बाद मछली पकड़ने से जुड़े अधिकारों को
लेकर शुरू हुए विवाद में फ्रांसीसी राजदूत को तलब किया है.
इसके साथ ही फ्रांस की ओर से पैदा किए गए “अनुचित” ख़तरों की भी
निंदा की है.
ब्रितानी विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने इस मुद्दे पर फ्रांसीसी राजदूत कैथरीन
कोलोना को बातचीत के लिए बुलाया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि कोलोना इन “निराशाजनक एवं असंगत
ख़तरों”
को स्पष्ट करें.
गुरुवार को फ्रांसीसी अधिकारियों ने एक ब्रितानी ट्रॉलर (मछली पकड़ने के
लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली बड़े आकार की नाव) को जब्त कर लिया था.
इसके साथ ही एक अन्य ट्रॉलर पर ले हार्वे में चेक ऑफ़ के दौरान जुर्माना लगाया
था. फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा है कि जिस ट्रॉलर को जब्त किया गया है, उसके
पास लाइसेंस नहीं था.
हालांकि, ब्रितानी पर्यावरण मंत्री जॉर्ज इयुस्टिस ने कहा है कि यूरोपीय संघ
ने ट्रॉलर को लाइसेंस दिया था. उन्होंने कहा कि ये “अस्पष्ट” है कि कुछ ख़बरों
के मुताबिक़, इस ट्रॉलर का नाम उस लिस्ट में से क्यों हटा दिया गया जो कि यूरोपीय संघ को
दी गयी थी.
पिछले महीने ब्रिटेन और जर्सी ने दर्जनों फ्रांसीसी नावों को मछली पकड़ने
का अधिकार देने से इनकार कर दिया था जिससे फ्रांसीसी सरकार नाराज़ थी.
इस पर फ्रांसीसी सरकार का तर्क था कि इस फैसले से ब्रेक्सिट डील का उल्लंघन
किया गया है.
इसके बाद फ्रांस ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर 2 नवंबर तक फिशिंग लाइसेंस का मुद्दा नहीं सुलझा तो वह अगले हफ़्ते कुछ बंदरगाहों को ब्रितानी नावों के लिए प्रतिबंधित
कर देगा और ब्रितानी नावों एवं ट्रकों के लिए नाकों को सख़्त कर देगा.
अनिल अंबानी की कंपनी पर ओडिशा के विद्युत नियामक का चार हज़ार करोड़ का बकाया
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ओडिशा बिजली नियामक आयोग ने गुरुवार को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को
4000 करोड़ रुपये से ज़्यादा बकाया राशि अदा करने का आदेश दिया है.
ये राशि अनिल अंबानी द्वारा नियंत्रित रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की तीन बिजली
वितरण कंपनियों पर बकाया थी जिनके लाइसेंस छह साल पहले रद्द कर दिए गए थे.
ओडिशा सरकार द्वारा संचालित फर्म ग्रिडको ने ओडिशा बिजली नियामक आयोग में
दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि इन कंपनियों के लाइसेंस साल 2015 में लाइसेंस
कंडीशन, शेयरहोल्डर अग्रीमेंट, और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट समेत अन्य नियमों के उल्लंघन
की वजह से रद्द कर दिए थे.
ग्रिडको ने दावा किया था कि आरआईएल एवं इसकी बिजली वितरक कंपनियों पर 4234
करोड़ रुपये बकाया हैं.
वहीं, आरआईएल का दावा है कि बिजली वितरक कंपनियां एक अलग कानूनी इकाई हैं,
ऐसे में उन पर बकाया राशि मूल कंपनी से हासिल नहीं की जा सकती.
हालांकि, बिजली नियामक आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा है, “हम ये मानते हैं
कि आरआईएल द्वारा प्रबंधित तीनों बिजली वितरक कंपनियों के साथ - साथ स्वयं आरआईएल भी याचिकाकर्ता
के उपरोक्त दावे को निपटाने के लिए उत्तरदायी है.”
तेल कंपनियों के अधिकारियों की अमेरिकी कांग्रेस के सामने क्यों हुई पेशी
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी कांग्रेसवुमन अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़
अमेरिका में गुरुवार एक अहम संसदीय सुनवाई
के दौरान तेल कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जनता
को गुमराह करने जैसे आरोपों का सामना किया.
इस दौरान प्रमुख तेल कंपनियों से पूछा गया कि
जिस जीवाश्म ईंधन से वह लाभ कमाते हैं, उसका पर्यावरण पर कितना नकारात्मक असर पड़ता
है.
डेमोक्रेटिक सांसदों ने छह घंटों तक चली इस
सुनवाई को ऐतिहासिक करार दिया है.
ये पहला मौका था जब तेल कंपनियों के प्रमुख
अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से सवालों के जवाब दिए.
डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद अलेक्जेंड्रिया
ओकासियो-कोर्टेज़ ने कहा है कि “हम में से कुछ लोगों को असल
में उस भविष्य में जीना पड़ेगा जिसमें आप लोग आग लगा रहे हैं.”
हालांकि, एक्सोन मोबिल, शेवरॉन,
बीपी, और शेल आदि कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों ने बार-बार स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने
की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का ज़िक्र किया.
इसके साथ ही उन्होंने क्लाइमेट चेंज
के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने से इनकार किया.
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