मध्य प्रदेश में 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
राज्य में लोकसभा की खंडवा सीट के अलावा विधानसभा की पृथ्वीपुर, जोबट और रैगांव सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं.
वैसे तो ये केवल एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों
उपचुनाव है लेकिन शिवराज सिंह चौहान के लिए ये किसी परीक्षा से कम नहीं है.
मध्य प्रदेश से बाहर के मुद्दे जैसे लखीमपुर खीरी में
हिंसा, बढ़ती महंगाई और उर्वरकों की कमी, उपचुनाव को प्रभावित कर सकते हैं जबकि
इनका सीधा संबंध मध्य प्रदेश से नहीं है.
अगर दो या तीन सीटों पर भी शिवराज सिंह चौहान की जीत
हो जाती है तो उनकी स्थिति मज़बूत हो जाएगी.
बीजेपी ने हाल ही में चार राज्यों में मुख्यमंत्री
बदले हैं. ऐसे में शिवराज सिंह चौहान को भी बदले जाने के क़यास लगाए जा रहे हैं. लेकिन,
उपचुनाव की जीत उनके आलोचकों को चुप करा सकती है.
अंग्रेज़ी अख़बार ‘द हिंदू’ में एक वरिष्ठ मंत्री ने
कहा, “शिवराज जी और
योगी जी दोनों जनता के नेता है, वो अन्य राज्यों में बदले गए मुख्यमंत्रियों से
अलग हैं.”
एक वरिष्ठ पार्टी सदस्य ने कहा “ये चुनाव शिवराज सिंह चौहान के लिए बेहद महत्वपूर्ण
हैं. उनकी लोकप्रियता, खासतौर पर सत्ता विरोधी लहर को मात देने की योग्यता अब भी
मतदाताओं को प्रभावित करती है.”
सितंबर के दूसरे हफ़्ते में शिवराज सिंह चौहान ने एक जन दर्शन यात्रा निकाली थी जिसमें लोगों से सीधे संपर्क करके पूछा गया कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है या नहीं. साथ ही चुनावी क्षेत्रों में मतदाताओं के रुझान का जायज़ा भी लिया गया.
इस यात्रा के दौरान और बाद में उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप में तीन अधिकारियों का निलंबन भी किया.
उन्होंने रैगांव के सिंघपुर इलाक़े में नल जल योजना के तहत गांव वालों को नलके का पानी ना पहुंचाने को लेकर अधिकारियों की खिंचाई की. रैगांव उपचुनाव भी होना है.
वहीं, विपक्षी पार्टी कांग्रेस की बात करें तो उपचुनाव में जीत से दो साल बाद आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिए उसका मनोबल बढ़ेगा.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने बढ़ती महंगाई के लिए सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है.
खंडवा लोकसभा सीट पर एक सभा के दौरान उन्होंने कहा, “लोगों को हर बार मूर्ख नहीं बनाया जा सकता. लोग बढ़ती महंगाई और आर्थिक गिरावट के कारण परेशान हैं.”