पीएम मोदी बोले, अफ़ग़ानिस्तान को आतंकवाद का स्रोत बनने से रोकना होगा

अफ़ग़ानिस्तान के हालात पर जी-20 सम्मेलन में पीएम मोदी ने वर्चुअली हिस्सा लिया. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान को 'आतंकवाद' का स्रोत बनने से रोकने की बात कही.

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सिंधुवासिनी, पवन सिंह अतुल and शुभम किशोर

  1. लखीमपुर खीरी: मारे गए किसानों के लिए अंतिम अरदास, प्रियंका गांधी होंगी शामिल

      • Author, अनंत झणाणे
      • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, लखीमपुर खीरी से
    लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए किसानों के लिए अंतिम अरदास

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    उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में खाड़ी से कुचलकर मारे गए किसानों की याद में आज अंतिम अरदास रखा गया है.

    मारे गए किसान लवप्रीत सिंह और नक्षत्र सिंह लखीमपुर के निवासी थे जबकि गुरविंदर सिंह और दलजीत सिंह पड़ोसी बहराइच ज़िले के रहने वाले थे.

    संयुक्त किसान मोर्चा ने तिकुनिया के महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज में इस कार्यक्रम का आयोजन किया है. इसमें आस पास के ज़िलों जैसे सीतापुर, पीलीभीत और बहराइच से भी किसान जुट रहे हैं.

    इस आयोजन में शामिल होने के लिए प्रियंका गांधी भी सुबह लखनऊ पहुँच चुकी हैं और अब लखीमपुर खीरी पहुँच रही हैं.

    किसान नेता राकेश टिकैत सोमवार रात ही तिकुनिया पहुँच चुके हैं. उन्होंने ट्वीट करके यह जानकारी और अपनी एक तस्वीर शेयर की है.

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    पुलिस

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    सुरक्षा बढ़ाई गई, बड़ी संख्या में पुलिस तैनात

    मारे गए किसानों की तरफ़ से टिकैत ने उत्तर प्रदेश प्रशासन से बातचीत की थी जिसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हुआ और किसानों का अंतिम संस्कार हुआ

    मृतक के परिवार वालों को 45-45 लाख का मुआवज़ा मिला और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की माँग आख़िरकार पूरी हुई थी.

    आयोजन के मद्देनज़र लखीमपुर में मंगलवार को भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं.

    लखनऊ से लखीमपुर के रास्ते में जगह जगह पुलिस गाड़ियों की चेकिंग कर रही है.

    लखनऊ-लखीमपुर रास्ते में लगे पोस्टर

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    लखनऊ-लखीमपुर रास्ते में लगे पोस्टर

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    कांग्रेस के ख़िलाफ़ लगे पोस्टर

    दूसरी तरफ़ लखनऊ से लखीमपुर के रास्ते में कई सारे पोस्टर लगे हैं जिनमें कुछ सिख समुदाय के लोगों तरफ़ से कांग्रेस पर निशाना साधने वाले संदेश छपे हैं.

    एक पोस्टर पर लिखा है- नहीं चाहिए फ़र्ज़ी सहानुभूति. 1984 के दंगों के ज़िम्मेदारों से लखीमपुर के किसानों को सहानुभूति नहीं चाहिए.”

    एक अन्य पोस्टर का यह संदेश है, “नहीं चाहिए फ़र्ज़ी सहानुभूति. खून से भरा है दमन तुम्हारा, तुम क्या दोगे साथ हमारा? नहीं चाहिए साथ तुम्हारा.”

    यह पोस्टर राज्य सरकार के अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परविंदर सिंह के नाम से लगाया गया है.

  2. राकेश झुनझुनवाला की एयरलाइन को मिली मंज़ूरी, 2022 से शुरू हो सकती हैं उड़ानें

    राकेश झुनझुनवाला के साथ पीएम मोदी

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    अरबपति शेयर कारोबारी राकेश झुनझुनवाला के सहयोग वाली एयरलाइन Akasa Airline ने कहा है कि इसे नागरिक उड्डयन मंत्रालय से हरी झंडी मिल गई है और ये अगले साल से उड़ानें शुरू कर सकती है.

    झुनझुनावाला ने कुछ दिनों पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी जिसकी ख़ूब चर्चा हुई थी.

    Akasa Airline को ऐसे वक़्त में मंज़ूरी मिली है जब देश में उड्डयन उद्योग कोविड-19 महामारी के प्रभाव से उबर रहा है.

    लॉकडाउन और यात्रा से जुड़ी पाबंदियों के कारण कई एयरलाइंस को अरबों डॉलर का घाटा हुआ है.

    हालाँकि इसके बावजूद आने वाले दिनों में भारत को एयरलाइंस के लिए 'हॉट मार्केट' के तौर पर देखा जा रहा है.

    Akasa Air ब्रैंड के तहत आने वाले एसएनवी एविएशन ने एक बयान में बताया है कि उसे नागरिक उड्डयन मंत्रालय से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट’ मिल गया है.

    बयान में उम्मीद जताई गई है कि एयरलाइन 2022 की गर्मियों से उड़ानें शुरू कर देगी.

    राकेश झुनझुनवाला

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    प्रधानमंत्री से मुलाकात की तस्वीरें हुई थीं वायरल

    शेयर बाज़ार में अपने सफल निवेश के कारण ‘भारत के वॉरेन बफ़ेट’ के नाम से जाने जाने वाले राकेश झुनझुनवाला ने इंडिगो के पूर्व सीईओ आदित्य घोष और जेट एयरवेज के पूर्व सीईओ विनय दुबे के साथ मिलकर भारत में घरेलू उड़ानों के लिए एयरलाइन शुरू करने की योजना बनाई थी.

    झुनझुनवाला ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं.

    हालाँकि यह पूछे जाने पर पीएम मोदी से उनकी क्या बातें हुई थीं, झुनझुनवाला ने कुछ भी बताने से इनाकर कर दिया था.

    प्रधानमंत्री ने ख़ुद भी इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी.

    उन्होंने लिखा था, “वन ऐंड ओनली राकेश झुनझुनवाला से मिलकर बहुत ख़ुशी हुई. वो ज़िंदादिल, बुद्धिमान और भारत को लेकर विश्वास से भरपूर हैं.”

  3. वीडियो: म्यांमार की सेना पर विरोधियों के दमन के आरोप, गंभीर हालात

    वीडियो कैप्शन, COVER STORY: म्यांमार की सेना पर दमन के आरोप

    म्यांमार के मौजूदा हालात पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने गंभीर चिंता जताई है.

    ख़बरें हैं कि म्यांमार की सेना, विरोधियों के दमन के लिए गांवों पर छापा मार रही है, घरों में आग लगा रही है और लोगों की हत्याएं भी कर रही है.

    सेना पर आरोप लग रहे हैं कि लोगों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार करके उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.

    लेकिन प्रदर्शनकारी इसके बावजूद पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है और नए-नए तरीकों से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं.

  4. नोबेल पुरस्कार में जेंडर के आधार पर आरक्षण नहीं होगा: प्रमुख वैज्ञानिक

    गोरेन हैनसन
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    नोबेल पुरस्कार देने वाली स्वीडेन की ऐकेडमी के प्रमुख वैज्ञानिक गोरेन हैनसन ने कहा है कि पुरस्कार में जेंडर या नस्ल के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाएगा.

    उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि लोग ये पुरस्कार सबसे महत्वपूर्ण खोज करने के लिए जीतें न कि जेंडर या नस्ल की वजह से.”

    नोबेल पुरस्कार मिलने का सिलसिला 1901 से यानी आज से करीब 120 साल पहले शुरू हुआ था और अब तक सिर्फ़ 59 महिलाएं ही इसे हासिल कर सकी हैं.

    इस साल भी नोबेल पुरस्कार विजेताओं में सिर्फ़ एक महिला ही शामिल हैं.

    फ़िलीपींस की पत्रकार मारिया रेस्सा को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के लिए उनके प्रयासों को देखते हुए शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

    उन्होंने यह पुरस्कार रूसी पत्रकार दिमित्री मुरातोव के साथ साझा किया.

    मारिया रेस्सा

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    'समाज का अन्याय दिखाता है कम महिलाओं को नोबेल मिलना'

    गोरेन हैनसन ने कहा,“इतनी कम महिला नोबेल विजेताओं को देखकर दुख होता है और यह हमारे समाज की अन्यायपूर्ण स्थिति को दर्शाता है, ख़ासकर अतीत की अन्यायपूर्ण स्थिति. लेकिन यह अब भी जारी है और हमें इस दिशा में अभी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.”

    उन्होंने कहा, “हमने तय किया है कि हम नोबेल पुरस्कार में जेंडर या नस्ल के आधार पर आरक्षण नहीं देंगे.”

    हैनसन ने यह भी कहा कि ऐसा करने का फ़ैसला अल्फ़्रेड नोबेल की आख़िरी इच्छा के अनुसार ही लिया गया है.

    स्वीडन के कारोबारी और वैज्ञानिक अल्फ़्रेड नोबेल ने अपनी मौत से एक साल पहले 1895 में अपनी वसीयत में नोबेल पुरस्कार की रूपरेखा तय की था.

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