16 सालों तक जर्मनी की सत्ता में रहने के
बाद एंगेला मर्केल अपना पद छोड़ रही हैं .लेकिन पद छोड़ने से पहले
वह बतौर चांसलर अपने अंतिम इसराइल दौरे पर हैं.
रविवार को उन्होंने
इसराइल के प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बेनेट के साथ मुलाक़ात की.
इस मुलाक़ात के बाद
एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेस में जर्मन चांसलर ने कहा कि ईरान के साथ न्यूक्लियर डील को लेकर होने
वाली बातचीत एक बेहद निर्णायक दौर में है.
उन्होंने ईरान के
साथ हुए परमाणु समझौते को दोबारा से अस्तित्व में लाने को लेकर जर्मनी की
प्रतिबद्धता पर भी ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा कि
जैसे-जैसे न्यूक्लियर डील के लिए एक-एक दिन बीत रहा है, वैसे-वैसे हर रोज़ ईरान
अपने यूरेनियम संवर्धन को बढ़ा रहा है.
मर्केल ने ईरान
को वियना समझौते के तहत दोबारा वार्ता के लिए लाने को लेकर विश्व शक्तियों की भागीदारी का
आह्वान किया.
उन्होंने कहा, "मैं रूस और चीन के लिए इसे एक बड़ी ज़िम्मेदारी
के तौर पर देखती हूँ."
अपने संबोधन में उन्होंने
कहा कि हर जर्मन सरकार के लिए इसराइल
की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी.
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने एकतरफ़ा फ़ैसले लेते हुए ईरान से परमाणु समझौता तोड़ दिया था. इसकी प्रतिक्रिया में ईरान ने भी ख़ुद को परमाणु समझौते से अलग कर लिया था. सत्ता में बाइडन के आने के बाद से अमेरिका और यूरोपीय देश ईरान
को दोबारा से इस समझौते के तहत लाने में लगे हैं.
हालांकि मर्केल ने कहा, "मैंने कभी भी जेसीपीओए को आदर्श नहीं माना, लेकिन कोई समझौता ना होने से तो यह बेहतर ही
है."
इसराइल के पीएम बेनेट ने भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दुनिया के लिए
ख़तरा बताया और कहा कि इसराइल, ईरान को रोकने के लिए जो होगा वो करेगा.
इससे पहले एक विशेष
कैबिनेट बैठक के दौरान बेनेट ने कहा कि हमारे लिए यह एक रणनीतिक समस्या नहीं बल्कि अस्तित्व की समस्या
है.
बेनेट ने कहा कि पिछले तीन सालों में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम संवर्धन को को तेज़ी से बढ़ाया है.
हालांकि मर्केल और बेनेट ने भविष्य के फ़लीस्तीन को लेकर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई.
मर्केल ने फ़लीस्तीन के मुद्दे पर कहा, "मुझे लगता है कि भले ही आज इस बिंदु पर दो राज्य समाधान की बात निराशाजनक लगती है लेकिन फिर भी इसे बातचीत के दौरान नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. इसे दफ़न नहीं किया जाना चाहिए. साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि फ़लस्तीनी सुरक्षित रह सकें.”
उन्होंने आगे कहा कि फ़लस्तीनी जिन क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों की मांग कर रहे हैं उस पर इसराइली बंदोबस्त निर्माण व्यर्थ था.
इसके जवाब में बेनेट ने कहा, "हम फ़लस्तीनियों की अनदेखी नहीं कर रहे हैं."
“वे हमारे पड़ोसी हैं. ना तो वे कहीं जा रहे हैं और ना तो हम कहीं जा रहे हैं."
वेस्ट बैंक के संदर्भ में बेनेट ने कहा कि भले ही फ़लीस्तीन हमारा पड़ोसी है लेकिन अपने अनुभवों से हमने सीखा है कि फ़लीस्तीनी राज्य को पनपने देने का मतलब है कि एक आतंकवादी राज्य को अपने घर से महज़ सात मिनट की दूरी पर पनपने देना.
बेनेट ने कहा, “मैं एक बहुत ही व्यवहारिक शख़्स हूँ और हम सभी के लिए चीज़ों को आसान बनाने के लिए ज़मीनी स्तर पर काफ़ी कुछ कर रहे हैं.”
बतौर चांसलर यह मर्केल की आठवीं और अंतिम इसराइल यात्रा है, क्योंकि वह अब पद छोड़ रही है.