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योगी ने कहा- रात में नहीं काटी जाएगी बिजली, नीतीश कुमार क्या बोले?

योगी बोले यूपी में रात में नहीं कटेगी बिजली, तो बिहार में ऊंची कीमत पर बिजली की ख़रीद कर रहे हैं नीतीश.

लाइव कवरेज

पवन सिंह अतुल, भूमिका राय and अभिजीत श्रीवास्तव

  1. 24 घंटे के ब्लैकआउट के बाद लेबनान में बिजली की आई

    24 घंटे तक ब्लैकआउट में रहने के बाद एक बार फिर लेबनान ‘रोशन’ हो गया है.

    अधिकारियों ने सूचना दी है कि 24 घंटे तक आपूर्ति ठप रहने के बाद बिजली बहाल कर दी गई है.

    ऊर्जा मंत्रालय ने जानकारी दी कि केंद्रीय बैंक ने उन्हें ईंधन ख़रीदने और पावर स्टेशनों को दोबारा से चालू करने के लिए 10 करोड़ डॉलर की सहायता राशि ऋण के रूप में दी है.

    लेबनान में कल यानी रविवार को पावर ग्रिड बंद हो गया था. पावर ग्रिड बंद होने के बाद अधिकारियों ने आशंका जताते हुए कहा था कि पावर सप्लाई के कई दिनों तक फिर से शुरू होने की उम्मीद नहीं है.

    लेबनान पिछले 18 महीनों से आर्थिक संकट और ईंधन की कमी से जूझ रहा है. इस कारण देश की आधी आबादी ग़रीबी रेखा पर आ चुकी है. अर्थव्यवस्था धराशाही हो चुकी है और इस कारण देश में राजनेताओं के ख़िलाफ़ प्रदर्शन भी तेज़ हो गए हैं.

    देश में विदेशी मुद्रा की कमी के कारण विदेशी पावर सप्लायरों से बिजली ख़रीदना भी मुश्किल था.

    लेबनान के दो सबसे बड़े पावर स्टेशनों के ईंधन की कमी के चलते बंद हो जाने के कारण ब्लैकआउट हो गया. यह समस्या शनिवार की दोपहर से शुरू हुई थी.

    लेकिन रविवार को एक बयान में अधिकारियों ने कहा कि अब पहले की ही तरह बिजली आपूर्ति की जा रही है.

    हालांकि इस ब्लैकआउट से पहले भी लोगों को अक्सर दिन में सिर्फ़ दो घंटे ही बिजली मिल रही थी.

  2. अमेरिका ने बाताया कि तालिबान से क्या बात हुई

    अमेरिकी सैनिकों की अफ़ग़ानिस्तान से वापसी और देश में तालिबान की सरकार बनने के बाद पहली बार तालिबान सरकार के प्रतिनिधियों और अमेरिकी अधिकारियों ने दोहा में मुलाक़ात की है.

    बैठक के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने इस बैठक को स्पष्ट और पेशेवर बताया है.

    हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा कि तालिबान की अंतरिम सरकार को उनके कामों के आधार पर आंका जाएगा, ना की सिर्फ़ उनके शब्दों के आधार पर.

    अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि दोहा में हुई वार्ता के दौरान अमेरिकी अधिकारियों ने सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ी चिंता, अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षित वापसी, दूसरे विदेशी नागरिकों की सुरक्षा, अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की सुरक्षा और महिलाओं की सार्थक भागीदारी जैसे कई मानवाधिकार प्रेरित मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की.

    उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने अफ़ग़ान लोगों के लिए अमेरिकी मानवीय सहायता के प्रावधानों पर भी चर्चा की.

    प्राइस ने एक बयान में कहा, "यह बातचीत स्पष्ट और पेशेवर थी. इसमें अमेरिका ने एक बार फिर दोहराया कि तालिबान को उनके काम के आधार पर आंका जाएगा, ना की सिर्फ़ शब्दों के आधार पर."

    उन्होंने दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुए किसी समझौते को लेकर कोई जानकारी नहीं दी.

    शनिवार को, कतर स्थित अल जज़ीरा टेलीविज़न ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के विदेश मंत्री के हवाले से बताया था कि तालिबान के प्रतिनिधियों ने अमेरिका से अफ़ग़ान सेंट्रल बैंक से प्रतिबंध हटाने के लिए कहा है.

    ख़बर के मुताबिक़, तालिबान के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी ने यह भी कहा कि अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए कोरोना वायरस के टीके भी उपलब्ध करवाएगा.

    दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने “एक नया अध्याय शुरू”करने को लेकर भी चर्चा की.

    बाइडन प्रशासन के अधिकारियों ने शुक्रवार को न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताया था कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल तालिबान पर अपहृत अमेरिकी नागरिक मार्क फ्रेरिच को रिहा करने के लिए दबाव बनाएगा.

    इसके अलावा अमेरिकी प्रतिनिधियों ने यह भी कहा था कि वे तालिबान से इस बात पर भी चर्चा करेंगे कि अफ़ग़ानिस्तान आतंकवादियों का गढ़ ना बने और तालिबान अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए ना होने देने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन करे.

    हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि तालिबान के प्रतिनिधियों के साथ बैठक का मतलब समूह को "मान्यता देना या वैधता प्रदान करना" बिल्कुल नहीं.

  3. जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने इसराइल में ईरान को लेकर की अहम घोषणा

    16 सालों तक जर्मनी की सत्ता में रहने के बाद एंगेला मर्केल अपना पद छोड़ रही हैं .लेकिन पद छोड़ने से पहले वह बतौर चांसलर अपने अंतिम इसराइल दौरे पर हैं.

    रविवार को उन्होंने इसराइल के प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बेनेट के साथ मुलाक़ात की.

    इस मुलाक़ात के बाद एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेस में जर्मन चांसलर ने कहा कि ईरान के साथ न्यूक्लियर डील को लेकर होने वाली बातचीत एक बेहद निर्णायक दौर में है.

    उन्होंने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को दोबारा से अस्तित्व में लाने को लेकर जर्मनी की प्रतिबद्धता पर भी ज़ोर दिया.

    उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे न्यूक्लियर डील के लिए एक-एक दिन बीत रहा है, वैसे-वैसे हर रोज़ ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन को बढ़ा रहा है.

    मर्केल ने ईरान को वियना समझौते के तहत दोबारा वार्ता के लिए लाने को लेकर विश्व शक्तियों की भागीदारी का आह्वान किया.

    उन्होंने कहा, "मैं रूस और चीन के लिए इसे एक बड़ी ज़िम्मेदारी के तौर पर देखती हूँ."

    अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हर जर्मन सरकार के लिए इसराइल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी.

    अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने एकतरफ़ा फ़ैसले लेते हुए ईरान से परमाणु समझौता तोड़ दिया था. इसकी प्रतिक्रिया में ईरान ने भी ख़ुद को परमाणु समझौते से अलग कर लिया था. सत्ता में बाइडन के आने के बाद से अमेरिका और यूरोपीय देश ईरान को दोबारा से इस समझौते के तहत लाने में लगे हैं.

    हालांकि मर्केल ने कहा, "मैंने कभी भी जेसीपीओए को आदर्श नहीं माना, लेकिन कोई समझौता ना होने से तो यह बेहतर ही है."

    इसराइल के पीएम बेनेट ने भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दुनिया के लिए ख़तरा बताया और कहा कि इसराइल, ईरान को रोकने के लिए जो होगा वो करेगा.

    इससे पहले एक विशेष कैबिनेट बैठक के दौरान बेनेट ने कहा कि हमारे लिए यह एक रणनीतिक समस्या नहीं बल्कि अस्तित्व की समस्या है.

    बेनेट ने कहा कि पिछले तीन सालों में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम संवर्धन को को तेज़ी से बढ़ाया है.

    हालांकि मर्केल और बेनेट ने भविष्य के फ़लीस्तीन को लेकर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई.

    मर्केल ने फ़लीस्तीन के मुद्दे पर कहा, "मुझे लगता है कि भले ही आज इस बिंदु पर दो राज्य समाधान की बात निराशाजनक लगती है लेकिन फिर भी इसे बातचीत के दौरान नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. इसे दफ़न नहीं किया जाना चाहिए. साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि फ़लस्तीनी सुरक्षित रह सकें.”

    उन्होंने आगे कहा कि फ़लस्तीनी जिन क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों की मांग कर रहे हैं उस पर इसराइली बंदोबस्त निर्माण व्यर्थ था.

    इसके जवाब में बेनेट ने कहा, "हम फ़लस्तीनियों की अनदेखी नहीं कर रहे हैं."

    “वे हमारे पड़ोसी हैं. ना तो वे कहीं जा रहे हैं और ना तो हम कहीं जा रहे हैं."

    वेस्ट बैंक के संदर्भ में बेनेट ने कहा कि भले ही फ़लीस्तीन हमारा पड़ोसी है लेकिन अपने अनुभवों से हमने सीखा है कि फ़लीस्तीनी राज्य को पनपने देने का मतलब है कि एक आतंकवादी राज्य को अपने घर से महज़ सात मिनट की दूरी पर पनपने देना.

    बेनेट ने कहा, “मैं एक बहुत ही व्यवहारिक शख़्स हूँ और हम सभी के लिए चीज़ों को आसान बनाने के लिए ज़मीनी स्तर पर काफ़ी कुछ कर रहे हैं.”

    बतौर चांसलर यह मर्केल की आठवीं और अंतिम इसराइल यात्रा है, क्योंकि वह अब पद छोड़ रही है.

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