ब्रिटेन की कंज़र्वेटिव पार्टी के वार्षिक
सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि उनकी पार्टी कोरोना महामारी
के बाद अर्थव्यवस्था में “बदलाव
और सुधार” करेगी.
उन्होंने अर्थव्यव्यस्था के पुननिर्माण के लिए बड़े और कठिन फ़ैसले
लेने की बात कही.
प्रधानमंत्री ने कहा, “हम
कोविड से पहले की यथास्थिति में नहीं जाना चाहते. ‘बिल्ड बैक बैटर’ का मतलब है कि जैसे-जैसे हालत बेहतर
हो तो चीज़ें बदलें और सुधार हो.”
कंज़र्वेटिव पार्टी का चार दिवसीय वार्षिक
सम्मेलन तीन अक्टबूर से मैनचेस्टर में शुरू होने जा रहा है.
इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था, पिछले दिनों
में हुई पेट्रोल-डीज़ल की कमी और ट्रक ड्राइवरों की किल्लत पर बात की.
प्रवासी कामगारों पर निर्भरता पर सवाल
बोरिस जॉनसन ने माल ढुलाई का काम करने वाले उद्योगों पर कम वेतन वाले प्रवासी कामगारों पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहने का आरोप लगाया.
ब्रिटेन में इस समय ट्रक ड्राइवरों की भारी कमी हो गई है, जिसके कारण पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीज़ल नहीं पहुँच पा रहा है. दूसरे सामानों की ढुलाई पर इसका असर पड़ा है.
ब्रिटेन में पेट्रोल पंपों पर लोगों की लंबी-लंबी क़तारें देखी गई हैं. लोग पेट्रोल ख़रीदने के लिए परेशान हो रहे हैं जबकि सरकार का कहना था कि पेट्रोल की कोई कमी नहीं है.
दरअसल, ब्रेग्ज़िट के बाद कई यूरोपीय देशों के ड्राइवर अपने देश लौट गए हैं. वहीं, कोविड-19 महामारी के कारण भी कई ड्राइवर अपने घर लौटे हैं और उनमें से कुछ ही वापस आ पाए हैं.
दूसरी ओर बुज़ुर्ग ड्राइवर रिटायर हुए हैं और उनकी जगह नए नहीं आए हैं और महामारी के कारण भारी संख्या में भारी वाहनों के लिएड्राइवर टेस्ट नहीं हो पाए हैं.
ऐसे में प्रधानमंत्री जॉनसन ने बाहरी ड्राइवरों पर निर्भरता को इसका ज़िम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि ड्राइवर आयात करना कोई दीर्घकालिक समाधान नहीं है.
प्रधानमंत्री ने कहा, “हम ये नहीं चाहते कि हम उस स्थिति में वापस लौटें जब ढुलाई उद्योग कम वेतन वाले अप्रवासी कामगारों पर निर्भर रहे. इसके निर्भरता के कारण कम वेतन होने से इस क्षेत्र को कम आकर्षक और कम गुणवत्ता वाला बना दिया है.”
“"लोग ऐसा नहीं चाहते.वे चाहते हैं कि हमअच्छा भुगतान करें, कुशल, अत्यधिक उत्पादक अर्थव्यवस्था बनें और यही वह जगह है जहां हम जा रहे हैं.”
फिलहाल ब्रिटेन में सेना ने पेट्रोल पंपों तक पेट्रोल पहुंचाने का ज़िम्मा उठाने वाली है.
करीब 200 महिला और पुरुष सैन्यकर्मी इस काम में लगाए जाएंगे. इनमें से 100 ड्राइवर जो मौजूदा स्थिति में अस्थाई तौर पर सहयोग देंगे.
सरकार ने विदेशी लॉरी ड्राइवरों के लिए पांच हज़ार अस्थायी वीज़ा भी जारी किए हैं ताकि ड्राइवरो की कमी को पूरा किया जा सके.