अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की अंतरिम सरकार बने हफ़्तों बीत गए हैं लेकिन लड़कियों के लिए स्कूल खोले जाने को लेकर अभी कोई फ़ैसला नहीं
हुआ है.
घरों में जहाँ भाइयों ने फिर से पढ़ाई शुरू कर दी है वहीं,
लड़कियां अब भी फ़ैसले के इंतज़ार में हैं.
पिछले दो हफ़्तों से छठी कक्षा के लड़कों ने स्कूल जाना
शुरू कर दिया है. सरकार कहना है कि वो लड़कियों के लिए भी स्कूल शुरू करने पर काम
कर रही है.
काबुल में रहने वाली एक लड़की मारवा ने न्यूज़ एजेंसी
रॉयटर्स से कहा, “इस्लामिक अमीरात से मेरा अनुरोध है कि लड़कियों को भी
स्कूल जाने दिया जाए. साथ ही महिला शिक्षकों को भी स्कूल जाने और पढ़ाने की अनुमति
दी जाए.”
मारवा कहती हैं, “मैंने अपने लोगों, अपने देश और अपने परिवार की सेवा के लिए डॉक्टर बनने और समाज
के लिए काम करने का सपना देखा था लेकिन अब ये नहीं पता कि मेरा भविष्य क्या होगा.”
लड़कियों की शिक्षा को लेकर चिंता
अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों की पढ़ाई का मुद्दा अहम बनता जा रहा है क्योंकि जिस दुनिया से तालिबान को आर्थिक मदद चाहिए उसकी नज़र इस बात पर है कि तालिबान सरकार महिलाओं और लड़िकयों को अपने पिछले शासन के मुक़ाबले ज़्यादा आज़ादी देगी या नहीं.
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने 21 सितंबर को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था, “शिक्षा मंत्रालय हाई स्कूल की लड़कियों की शिक्षा के लिए जल्द से जल्द आधार तैयार करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है.”
लेकिन, मंत्रालय ने अपने फ़ेसबुक पेज पर 24 सितंबर को एक बयान जारी कर कहा था कि लड़कियाँ कब स्कूल जाएंगी इसे लेकर अभी कोई फ़ैसला नहीं किया गया है. इस मुद्दे पर काम जारी है और जल्द से जल्द जानकारी दी जाएगी.
पिछले तालिबान शासन के ख़त्म होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा और साक्षरता दर में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई थी. लेकिन, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि तालिबान की वापसी के बाद पिछले 20 सालों की मेहनत बर्बाद हो सकती है.
हालांकि, अफ़ग़ानिस्तान फ़िलहाल गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जिससे निकलने के लिए बड़ी विदेशी सहायता की ज़रूरत होगी. ऐसे में तालिबान सरकार अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने के लिए कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है.