अमेरिका ने कहा, ISIS-K को तबाह करने के लिए हम हमले जारी रखेंगे

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा- हमने साप्ताहांत में जिस तरह के अभियान किए हैं, वैसा आगे भी करते रहेंगे.

लाइव कवरेज

विभुराज, मोहम्मद शाहिद, शुभम किशोर and चंदन शर्मा

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  2. पाकिस्तान ने भारतीय रक्षा मंत्री के आरोपों को निराधार बता किया ख़ारिज

    पाकिस्तान

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    पाकिस्तान ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पाकिस्तान के ख़िलाफ़ चरमपंथ संबंधी आरोपों को निराधार बताते हुए ख़ारिज किया है.

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में पाकिस्तान ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को आधारहीन बताया है.

    जारी विज्ञप्ति के मुताबिक़, पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत के पाकिस्तान के ख़िलाफ़ प्रायोजित चरमपंथ और हिंसा के कई अकाट्य साक्ष्य रखे हैं. विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत चरमपंथ को स्टेट-पॉलिसी के एक साधन के तौर पर इस्तेमाल करता है.

    विज्ञप्ति में भारत पर आरोप लगाते हुए दावा किया गया है कि अकेले सिर्फ़ इस साल ही जौहर टाउन, लाहौर और डासू में पाकिस्तानी-चीनी कामगारों के ख़िलाफ़ चरमपंथी हमलों में भारत शामिल रहा है.

    विज्ञप्ति के अनुसार, भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी और आरएसएस मुस्लिम विरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी एजेंडा रखते हैं.

    विज्ञप्ति में आरोप लगाते हुए कहा गया है कि वे वैचारिक कारणों और राजनीतिक लाभ दोनों के लिए झूठे प्रचार अभियानों में पाकिस्तान को निशाना बनाया जाता है.

    विज्ञप्ति के मुताबिक़, भारत की तथाकथित "सर्जिकल स्ट्राइक" और फरवरी 2019 में बालाकोट हमला झूठ और छल के अलावा कुछ भी नहीं था और यह उजागर भी हो चुका है.

    विज्ञप्ति में कहा गया है कि पाकिस्तान एक ज़िम्मेदार देश है जो भारत के ग़ैर-ज़िम्मेदार व्यवहार के बावजूद इस क्षेत्र में शांति बनाए रखना चाहता है. हालांकि शांति की इच्छा के बावजूद पाकिस्तान भारत की किसी भी आक्रामक साज़िश के ख़िलाफ़ दृढ़ता से अपनी रक्षा करेगा.

  3. अफ़ग़ानिस्तान: पूर्व ब्रितानी राजनयिक बोले- बदला नहीं है तालिबान

    तालिबान

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    15 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्ज़ा करने के बाद तालिबान ने कहा है कि महिलाओं के प्रति उनके रवैये में बदलाव आया है.

    माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तालिबान अपनी सरकार के लिए मान्यता चाहता है और दुनिया के सामने अपनी एक नई छवि पेश करना चाहता है.

    लेकिन ब्रिटेन के सेवानिवृत सैन्य और राजनयिक ने कहा है कि ऐसा नहीं है.

    साल 2017 से 2019 के बीच अफ़ग़ानिस्तान के लिए ब्रिटेन के दूत रह चुके सर निकोलस के ने टाइम्स रेडियो से कहा, "मुझे नहीं लगता कि तालिबान बदला है."

    उन्होंने कहा, "आप मानें न मानें एक तरह की उनकी सोच और अपनी धार्मिक आस्था पर उनका दृढ़ विश्वास उनकी ताकतों में से एक है. वो जो कुछ भी कर रहे हैं वो सही है, इसका उन्हें पूरा विश्वास है."

    वहीं साल 2006 से 2009 तक चीफ़ ऑफ़ जनरल स्टाफ रह चुके जनरल लॉर्ड रिचर्ड डैनेट कहते हैं, "मैं इस बात को लेकर अधिक आशावादी नहीं हूं कि हमें दो दशकों के बाद एक नया और बदला हुआ तालिबान देखने को मिलेगा."

    वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने रविवार को कहा है कि तालिबान के साथ वो चर्चा करेंगे लेकिन इस आधार पर नहीं कि वो क्या कहते हैं, बल्कि इस आधार पर कि वो क्या करते हैं.

    उन्होंने कहा कि अगर तालिबान चाहता है कि उसकी सरकार को मान्यता मिले तो उसे देश छोड़ कर जाना चाह रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता देना होगा और देश को आतंक की फैक्ट्री बनने से बचाना होगा.

  4. अफ़ग़ानिस्तान: अमेरिका ने कहा, हम हमले जारी रखेंगे

    अमेरिका

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    अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा है कि काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले के बाद वो अफ़ग़ानिस्तान पर हमले जारी रखेंगे.

    रविवार को सीबीएस न्यूज़ से उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति अफ़ग़ानिस्तान में एक नई जंग शुरू नहीं करना चाहते. लेकिन हम अपने कमांडरों से बात करेंगे कि हमारे सैनिकों पर हमला करने वालों से निपटने के लिए उन्हें किस तरह की मदद की ज़रूरत है, ताकि ये सुनिश्चित हो कि आईएसआईएस-के (इस्लामिक स्टेट खुरासान) को तबाह किया जा सके.”

    "इसलिए हां, हम उनके पीछे जाएंगे और हमने साप्ताहांत में जिस तरह के अभियान किए हैं, वैसा आगे भी करते रहेंगे. हम दूसरे अभियान के बारे में भी सोचेंगे ताकि उन्हें जंग के मैदान से हटाया जा सके.”

    सुलिवन ने कहा कि वो किसी तरह के हमलों के संभावित ख़तरे को भांपने के “बहुत क़रीब पहुंच चुके हैं.”

    “हमारे ख़ुफिया विभाग का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान के आतंकी संगठन वहां से बाहर किसी तरह की गतिविधि करने की क्षमता नहीं रखते, लेकिन हां, वो ये क्षमता विकसित कर सकते हैं.”

    अफ़ग़ानिस्तान

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    इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि रविवार को उन्होंने काबुल एयरपोर्ट पर हमला करने जा रहे एक आत्मघाती हमलावर पर ड्रोन से हमला किया था.

    बीबीसी के अमेरिकी पार्टनर सीबीएस को एक सैन्य अधिकारी ने कहा, “हमें पूरा भरोसा है कि हमने टारगेट को मार दिया है. शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक़ हमले में कोई भी आम नागरिक हताहत नहीं हुआ है.”

    “गाड़ी में हुए एक दूसरे विस्फोट से ये पता लगता है कि उसके अंदर काफ़ी मात्रा में विस्फोटक थे.”

    समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक़, तालिबान ने भी कहा है कि एक आत्मघाती हमलावर अमेरिकी हवाई हमले का शिकार हुआ है.

    ये ख़बर एयरपोर्ट के निकट एक रॉकेट हमले के बाद सामने आई. हालांकि अभी ये साफ़ नहीं हैं कि दोनों घटनाएं एक दूसरे से जुड़ी हैं या नहीं.

    बीते गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट पर एक हमला हुआ था जिसमें 170 लोगों की मौत हो गई थी, इनमें 13 अमेरिकी सैन्य अधिकारी थे. इस हमले की ज़िम्मेदारी आईएसआईएस-के ने ली थी.

  5. तालिबान ने कश्मीर और भारत-पाक के रिश्तों पर क्या कहा?

    तालिबान के प्रवक्ता जबीबुल्लाह मुजाहिद ने 'पाकिस्तान को तालिबान का दूसरा घर' बताया है.

    पाकिस्तानी न्यूज़ वेबसाइट एआरवाई न्यूज़ टीवी के मुताबिक़, मुजाहिद ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान दूसरा घर है और अपने घर के ख़िलाफ़ कुछ नहीं होने देंगे.

    एआरवाई न्यूज़ टीवी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में मुजाहिद ने अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथी संगठनों की उपस्थिति, भारत प्रशासित कश्मीर और इस्लामिक स्टेट से लेकर भारत-पाकिस्तान संबंधों पर भी अपनी राय रखी.

    मुजाहिद ने अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक स्टेट और तहरीक-ए-तालिबान (पाकिस्तान) के मुद्दे पर कहा, "हम अपनी ज़मीन किसी के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं होने देंगे."

    वीडियो कैप्शन, तालिबान ने कश्मीर और भारत-पाक के रिश्तों पर क्या कहा?
  6. भारत भरोसा दिलाए कि वो अफ़ग़ानिस्तान के मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा - गुलबुद्दीन हिकमतयार

    गुलबुद्दीन हिकमतयार

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    अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री गुलबुद्दीन हिकमतयार ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में ऐसी सरकार होनी चाहिए जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों से मान्यता मिल सके.

    काबुल में रविवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि “मुझे लगता है कि अमेरिका यहां एक स्थायी सरकार नहीं चाहता है और वो कुछ समय तक यहां किसी सरकार को मान्यता नहीं देगा.”

    हिकमतयार अफ़ग़ानिस्तान के दूसरे बड़े चरमपंथी गुट हिज़्ब-ए-इस्लामी के नेता हैं.

    उन्होंने कहा विदेशी ताकतें चाहती हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में उनकी पसंद की सरकार हो और इसलिए वो तालिबान पर प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं और कह रहे हैं कि वो अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता नहीं देंगे.

    उन्होंने कहा "वो अपने लोगों को सरकार में लाना चाहते हैं लेकिन अपने धार्मिक और राष्ट्रीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए अपनी सरकार के बारे में अफ़ग़ान नागरिक खुद फ़ैसला लेंगे."

    हिकमतियार ने कहा कि उनकी पार्टी तालिबान का समर्थन करती है और उम्मीद करती है कि दुनिया के दूसरे मुल्क अफ़ग़ानिस्तान पर पाबंदियां नहीं लगाएंगे.

    वीडियो कैप्शन, तालिबान पर भारत आख़िर इतना चुप क्यों?

    भारत के बारे में क्या कहा?

    हिकमतियार ने कहा कि भारत की नैतिक और राजनीतिक ज़िम्मेदारी है कि वो पूरी दुनिया को और अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को ये भरोसा दिलाएं कि वो इस देश के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा.

    उन्होंने कहा कि जैसा भारत ने पहले किसी एक समूह का समर्थन किया था, उसे भरोसा दिलाना होगा कि वो ऐसा नहीं कहेगा.

    उन्होंने कहा कि "भारत ने पूर्व में अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत हमले का समर्थन किया था, हम चाहते हैं भारत सरकार इसके लिए उसी तरह माफी मांगे जैसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मांगी थी." हाल में पाक प्रधानमंत्री ने कहा था कि अमेरिका के युद्ध में उनका साथ आना ग़लती था.

    यूरोपीय देशों से की स्वतंत्र पॉलिसी बनाने की अपील

    हिकमतियार ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में एक अमेरिकी अफ़ग़ानिस्तान में स्थायी सरकार नहीं चाहता और यूरोपीय देशों से अपनी स्वतंत्र पॉलिसी बनाने की अपील की है.

    मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि आर्थिक स्थिति समेत आंतरिक हालात ऐसे हैं कि अगर सभी पक्ष नियंत्रण पाने में कामयाब रहे, तो ये बड़ी बात होगी. हम तालिबान से भी कई बातें सुन रहे हैं.”

    उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के मामले में सावधानी से आगे बढ़ें को हालात बेहतर हो सकेंगे.

    हिकमतियार ने कहा, “आपने सुना होगा कि कुछ देशों ने अच्छा फ़ैसला लिया है कि वो अफ़ग़ान सरकार पर दबाव नहीं बनाएंगे, उनका इंतज़ार करेंगे और समय देंगे.”

    “जहां तक आर्थिक हालात की बात है तो हमें मुश्किलें हो रही हैं लेकिन हमारे पास एक मज़बूत सरकार होगी, हमारे पास बड़ी मात्रा में ख़निज पदार्थ मौजूद है जिन्हें अभी तक नहीं निकाला गया है. हमारे पास सोना, तांबा, लोगा, लीथियम, तेल, गैस और दूसरी चीज़ें हैं.”

    उन्होंने कहा कि चीन पहले तांबे के क्षेत्र में निवेश करना चाहता था लेकिन अमेरिका ने उसे ऐसा नहीं करने दिया.

    उन्होंने कहा, “अगर हमारे पास एक मज़बूत सरकार है तो हम बाहरी समस्याओं से निपट लेंगे. अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान और ईरान से ज़्यादा ख़निज संपदा है.”

    वीडियो कैप्शन, तालिबान ने कश्मीर और भारत-पाक के रिश्तों पर क्या कहा?

    'इस्लामिक स्टेट बड़ी समस्या नहीं'

    हिकमतियार ने कहा कि कथित चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट को एक समस्या बताया लेकिन कहा कि ये फिलहाल 'बड़ी समस्या' नहीं है.

    उन्होंने कहा, “विदेशी फ़ौजियों के जाने के बाद पंजशीरी और आईएस कोई बड़ी मुसीबत नहीं खड़ी कर पाएंगे. हम उम्मीद करते हैं कि यूरोपीय देश अपनी पॉलिसी पर फिर से विचार करें और ऐसी ग़लती दोबारा न करें.”

    “मुझे उम्मीद है कि वो अफ़ग़ानिस्तान के प्रति एक स्वतंत्र पॉलिसी बनाएंगे और अमेरिकी की देखादेखी कोई काम नहीं करेंगे.”

    उन्होंने कहा कि वो एक ऐसा अफ़ग़ानिस्तान चाहते हैं जो युद्ध और विदेशी दखलअंदाज़ी से दूर रहे.

    उन्होंने कहा “पहले जंग को ख़त्म होना होगा, उसके बाद एक अंतरिम ढांचा बनाना होगा और फिर पहले सौ दिन के प्लान पर बहस हो सकती है.”

  7. अफ़ग़ानिस्तान में अब भी क़रीब 300 अमेरिकी बचे हैं- एंटनी ब्लिंकन

    अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन

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    अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बताया है कि अफ़ग़ानिस्तान में अभी भी क़रीब 300 अमेरिकी हैं जो वहां से निकाले जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.

    उन्होंने अमेरिकी मीडिया संस्था एबीसी से कहा, "अब वहां हमारे 300 या उससे कम ​नागरिक बचे हैं. हम उन्हें बाहर निकालने के लिए कई दिनों से लगातार प्रयास कर रहे हैं."

    एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका के कुछ नागरिकों ने अफ़ग़ानिस्तान में 31 अगस्त की डेडलाइन के बाद भी रहने का फ़ैसला लिया है. हालांकि उन्होंने कहा कि "वे अफ़ग़ानिस्तान में फंसने वाले नहीं हैं."

    उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास "उन्हें बाहर निकालने का एक तंत्र" है.

  8. अफ़ग़ानिस्तान में हमले के बाद का मंज़र

    ट्विटर पर कुछ वीडियो में अफ़ग़ानिस्तान में हमले के बाद का मंज़र दिखाई दे रहा है.

    ये वीडियो शफ़ी करीमी नाम के एक फ्रीलांस पत्रकार ने शेयर किया है.

    बीबीसी स्वतंत्र रूप से इन वीडियों की पुष्टि नहीं करता.

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  9. काबुल छोड़ने पर विवश हुआ तुर्की?

    अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के फ़ैसले के एक दिन बाद तुर्की ने अपने सैनिकों के पहले ग्रुप को वहाँ से बाहर निकाल लिया है.

    एक निजी टीवी चैनल एनटीवी ने ख़बर दी कि अफ़ग़ानिस्तान से तुर्की के 345 सैनिक राजधानी अंकारा पहुँच गए हैं.

    चैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "अफ़ग़ानिस्तान से निकाले गए तुर्की के सैनिकों को लेकर पहला विमान अंकारा में उतर चुका है."

    वीडियो कैप्शन, तालिबान के कारण काबुल छेड़ने पर विवश हुआ तुर्की?
  10. अमेरिका ने 'काबुल में की सैन्य कार्रवाई' - रॉयटर्स

    अमेरिका ने रविवार को कथित तौर पर अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में सैन्य कार्रवाई की है.

    अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक रिपोर्ट में बताया है कि इसमें इस्लामिक स्टेट समूह की अफ़ग़ान शाखा आईएस-के (इस्लामिक स्टेट-ख़ुरासान) के सदस्यों को निशाना बनाया गया है.

    अमेरिकी ऑपरेशन के बारे में अभी और अधिक ब्यौरा जारी नहीं किया गया है.

    यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस हमले का संबंध एयरपोर्ट के पास एक घर पर हुए रॉकेट हमले से है या नहीं.

  11. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 29 अगस्त 2021, सुनिए वात्सल्य राय से.

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  12. ब्रेकिंग न्यूज़, काबुल एयरपोर्ट के नज़दीक धमाका, अब तक किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं

    बीबीसी संवाददाता सिकंदर किरमानी ने जानकारी दी है कि काबुल में एयरपोर्ट के नज़दीक एक धमाका हुआ है.

    उन्होंने ट्वीट कर जानकारी दी है कि अफ़ग़ान स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सूत्र ने एयरपोर्ट के पास धमाके की पुष्टि की है. अब तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमाके में कितने लोग हताहत हैं.

    कई लोग सोशल मीडिया पर धमाके के बाद की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं.

    किरमानी ने कहा है कि उनके सूत्र ने उन्हें बताया है कि ये धमाका एक रॉकेट के कारण हुआ जो एयरपोर्ट के नज़दीक एक घर पर गिरा है.

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    समाचार एजेंसी एएफ़पी ने काबुल में मौजूद अपने संवाददाताओं के हवाले से राजधानी में धमाके की आवाज़ सुना जाने की ख़बर दी है.

    इससे पहले शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने काबुल एयरपोर्ट पर हमले की चेतावनी दी थी.

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    रूसी सरकारी न्यूज़ एजेंसी स्पूतनिक ने मीडिया रिपोर्टों के हवाले से ख़बर दी है कि रॉकेट रिहायशी इलाक़े में बने एक घर पर गिरा है.

    समाचार एजेंसी के अनुसार घटना में दो लोगों की मौत हुई है जबकि तीन लोग घायल हुए हैं. हालांकि बीबीसी किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं करता.

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  13. पंजशीर के तालिबान-विरोधियों ने कहा- चर्चा करेंगे, आत्मसमर्पण नहीं

    उज़्बेकिस्तान के कबायली नेता अब्दुल रशीद दोस्तम

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    समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कहा कि काबुल के उत्तर में पंजशीर घाटी में मौजूद तालिबान विरोधी समूहों के हवाले से खबर दी है कि ये समूह तालिबान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं.

    राजधानी काबुल समेत लगभग पूरे अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का कब्ज़ा हो गया है लेकिन पंजशीर के इलाक़े को तालिबान के लड़ाके अभी तक अपने नियंत्रण में ले नहीं पाए हैं. हालांकि इस पूरे इलाक़े को तालिबान ने घेर रखा है.

    समाचार एजेंसी ने बाल्ख़ प्रांत के गवर्नर रहे एक ताकतवर नेता के बेटे ख़ालिद नूर का इंटरव्यू किया है.

    ख़ालिद नूर ने कहा है कि "तालिबान से बातचीत करने के लिए" तलिबान विरोधी नेता आपस में चर्चा कर रहे हैं. इन नेताओं में उज़्बेकिस्तान के कबायली नेता अब्दुल रशीद दोस्तम भी शामिल हैं.

    हालांकि ये तालिबान-विरोधी समूह आपस में कितने एकजुट हैं इसे लेकर भी शंका जताई जा रही है.

    ख़ालिद नूर ने कहा कि अगर विरोधी समूहों के बीच बातचीत बेनतीजा रही तो इससे "बड़ा ख़तरा" पैदा हो सकता है.

    हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसा होने की सूरत में वो "आत्मसमर्पण करने का सवाल पैदा नहीं होता".

    उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि ताकत के बल पर अफ़ग़ानिस्तान पर शासन करने की किसी की कोशिश कभी कामयाब नहीं हुई है.

    वहीं तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है. उनके अनुसार इस बातचीत से सफल होने की उम्मीद 60 फीसदी है.

  14. काबुल एयरपोर्ट पर विमानों की आवाजाही कम हुई - रिपोर्टर

    तालिबान

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    काबुल हवाईअड्डे से जुड़ी अब कम जानकारियां सामने आ रही है. वहां पत्रकारों की संख्या कम हो गई हैं और तालिबान ने सुरक्षा और कड़ी कर दी है.

    साथ ही वहां नए हमलों की आशंका जताई जा रही है.

    अल जज़ीरा की शार्लोट बेलिस, जो अभी भी काबुल में हैं, उनके मुताबिक़ "आज सुबह ... काबुल हवाई अड्डे पर एक भी अमेरिकी विमान नहीं है, और कल की तुलना में यहां बहुत कम विमान है. "

    उन्होंने बताया कि अभी भी सैंकड़ों लोग देश से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं और तालिबान के लड़ाकों के साथ बातचीत कर लोग बस ले रहे हैं ताकि उन्हें एयरपोर्ट में जाने में दिक्कतें न हों.

  15. तालिबान पर भारत आख़िर इतना चुप क्यों?

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का शासन लौट आया है. इसके साथ ही दुनिया के कई देश तालिबान पर अपना रुख भी साफ कर चुके हैं.

    कुछ ने तालिबान का विरोध किया तो कुछ ने उसकी सत्ता को मानने का फैसला किया. लेकिन भारत ने अभी तक इस मसले पर चुप्पी साधे रखी है. जबकि बीते लंबे वक़्त से भारत का अफ़ग़ानिस्तान से काफी गहरा रिश्ता रहा है.

    देखिए इसी मुद्दे पर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार वुसअतुल्लाह ख़ान की यह टिप्पणी. ॉ

    वीडियो एडिटः रुबाइयत बिस्वास

    वीडियो कैप्शन, तालिबान पर भारत आख़िर इतना चुप क्यों?
  16. अगर आप अभी बीबीसी हिंदी के लाइव पन्ने से जुड़े रहे हैं तो जानिए रविवार को अब तक क्या-क्या हुआ-

    तालिबान के लड़ाके

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    • अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से अपनी सेना को बाहर निकालने के आख़िरी चरण में पहुंच गया है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सभी सैनिकों को वहां से किस वक्त तक निकाला जाएगा ये अभी बताया नहीं जा सकता.
    • अमेरिकी सेनिकों के काबुल एयरपोर्ट से जाने के बाद वहां का नियंत्रण अपने हाथों में लेने के लिए तालिबान तैयारी में जुट गया है. तालिबान ने कहा कि इसके लिए वो अमेरिका से मंज़ूरी मिलने का इंतज़ार कर रहा है.
    • दो सप्ताह पहले काबुल से एयरलिफ्ट शुरु होने के बाद ये अब तक वहां से एक लाख दस हज़ार लोगों को बाहर निकाला जा चुका है.
    • बताया जा रहा है कि सैनिकों के अलावा अब वहां केवल एक हज़ार आम नागरिक बचे हैं जो अफ़ग़ानिस्तान से बाहर जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.
    • शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि काबुल एयरपोर्ट पर एक और हमला हो सकता है.
    • ब्रिटेन ने अपने सभी सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकाल लिया है. ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि बीते दो दशकों में अफ़ग़ानिस्तान की तरफ से न तो ब्रिटेन पर और न ही किसी और पश्चिमी देश पर हमले हुए, इसके लिए ब्रिटेन के बहादुर सैनिक ज़िम्मेदार हैं.
    • अमेरिका ने दावा किया है कि काबुल पर हुए हमले के जवाब में शुक्रवार को उसने जो ड्रोन हमले किए थे उसमें इस्लामिक स्टेट- खुरासान के दो 'हाई प्रोफ़इल' सदस्य मारे गए हैं.
    • गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट पर हुए बम धमाके की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट- खुरासान ने ली थी. इस बम धमाके में 170 लोगों की मौत हुई थी.
    • तालिबान ने अमेरिकी ड्रोन हमले की निंदा की है. तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा है कि हमला करने से पहले अमेरिकियों को उसने बात कर लेनी चाहिए थी.
  17. ब्रेकिंग न्यूज़, अफ़ग़ानिस्तान से ब्रिटेन की सेना पूरी तरह बाहर निकली, ब्रितानी पीएम ने की पुष्टि

    ब्रिटेन

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    इमेज कैप्शन, ब्रिटेन के राजदूत सर लॉरी ब्रिस्टो

    अफ़ग़ानिस्तान से सेना और लोगों को निकालने के मिशन के तहत, ब्रिटेन के आख़िरी सैन्य विमान ने शनिवार देर रात काबुल से उड़ान भरी. इसके साथ ही पिछले 20 सालों से ब्रिटेन की सेना की अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदगी ख़त्म हो गई है.

    ब्रिटेन ने रक्षा मंत्री ने कहा, “ब्रिटिश सैनिकों के साथ ब्रिटेन की सेना का आख़िरी विमान अफ़ग़ानिस्तान से उड़ चुका है.”

    अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटेन के राजदूत भी इस आख़िरी विमान से वापस आ चुके हैं. राजदूत सर लॉरी ब्रिस्टो लोगों को वहां से निकलने में मदद कर रहे थे. वो रविवार को ब्रिटेन बहुंचे.

    ब्रितानी प्रधानमं बोरिस जॉनसन ने अफ़ग़ानिस्तान में देश की सेना की मैजूदगी ख़त्म होने की पुष्टि की है और रविवार को जारी किए एक वीडियो संदेश में कहा, "अफ़ग़ानिस्तान में जितने भी ब्रितानी सैनिक, राजनयिक और लोकसेवा अधिकारी थे वो सब वहां से बाहर निकल चुके हैं."

    सैनिक

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    बोरिस जॉनसन ने अफ़ग़ानिस्तान में मरने वाले सैनिकों के परिवारों को आश्वासन दिया है कि उनकी कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी. अफ़ग़ानिस्तान में मारे गए 457 ब्रितानी सैनिकों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कुर्बानियों ने दुनिया को अधिक सुरक्षित जगह बनाने में मदद की है.

    उन्होंने कहा, "ये आश्चर्य की बात नहीं है कि बीते 20 सालों में अफ़ग़ानिस्तान की तरफ से ब्रिटेन या फिर किसी और पश्चिमी देश पर आतंकी हमले नहीं हुए हैं. हमारी सशस्त्र सेना की बहादुरी के कारण ये संभव हो पाया है."

    साथ ही उन्होंने कहा,"हमने अफ़ग़ानिस्तान की 36 लाख लड़कियों को शिक्षित करने में मदद की है. भविष्य में उनके लिए क्या रखा है हमें नहीं पता, लेकिन शिक्षा का ये उपहार पूरी ज़िंदगी उनके साथ रहेगा."

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    'अफ़ग़ानिस्तान को आतंक की फैक्ट्री न बनने दे तालिबान'

    भविष्य में तालिबान के साथ ब्रिटेन के संबंधों पर बोरिस जॉनसन ने कहा, "तालिबान के साथ हम चर्चा करेंगे लेकिन इस आधार पर नहीं कि वो क्या कहते हैं, बल्कि इस आधार पर कि वो क्या करते हैं. अगर अफ़ग़ानिस्तान की भावी सरकार चाहती है कि कूटनीतिक तौर पर उसे मान्यता दी जाए या फिर फ्रीज़ कर दिए गए उनके अरबों डॉलर उन्हें वापस मिलें तो उन्हें देश छोड़ कर जाना चाह रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता देना होगा और महिलाओं और लड़कियों के हकों की रक्षा करनी होगी."

    साथ ही उन्होंने कहा कि "तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान को एक बार फिर आतंक की फैक्ट्री बनने से बचाना होगा, क्योंकि ऐसा हुआ तो ये अफ़ग़ानिस्तान के लिए बेहद बुरा होगा."

    उन्होंने कहा, "हम अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की मदद करने के लिए और अपने देश की रक्षा के लिए राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक जैसे सभी रास्ते आज़माने के लिए तैयार हैं."

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    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान से लौटने की समय सीमा 31 अगस्त तय की है. हालांकि ब्रिटेन और सहयोगी देशों से पहले ही वापस लौटने का फ़ैसला किया.

    ब्रिटेन ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने दूतावास को भी फिलहाल बंद कर दिया है.

  18. यूरोप का प्रवासी संकट: इटली के पास 539 प्रवासियों को बचाया गया

    इटली, यूरोप, लीबिया, प्रवासी

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    इमेज कैप्शन, यूरोप जाने के इच्छुक लोगों के लिए लैंपेडुज़ा द्वीप मुख्य अड्डों में से एक है.

    इटली के तटरक्षक जहाजों ने लैंपेडुज़ा द्वीप के पास बीच समुद्र में मछली पकड़ने वाली एक नाव पर फंसे 539 प्रवासियों को बचा लिया है.

    ये प्रवासी लीबिया से इटली के इस द्वीप पर अवैध तरीके से आ रहे थे और इस कोशिश में बीच समुद्र में फंस गए थे.

    बचाए गए प्रवासियों में तीन महिलाएं और कुछ बच्चे भी शामिल हैं. यह बचाव अभियान शनिवार को पूरा किया गया.

    इटली के दो तटरक्षक जहाजों और कस्टम विभाग की एक नाव ने कई फेरे लगाकर छोटे-छोटे समूहों में प्रवासियों को भूमध्य सागर से बचाकर लैंपेडुज़ा पहुंचाया.

    लीबिया में शारीरिक यातना देने का आरोप

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इटली के इस द्वीप पर जाने के लिए प्रवासियों ने लीबिया में कई दिनों तक इंतज़ार किया था. उस दौरान लीबिया में इनके साथ शारीरिक हिंसा होने के प्रमाण मिले हैं. इटली के अधिकारियों ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है.

    इस बारे में, मानवाधिकार के मुद्दों पर काम करने वाली संस्था मैदिसां सौं फ्रंतिए (यानी डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स) की डॉक्टर अलीदा सेराचिएरी ने बताया कि यूरोप जाने के लिए लीबिया में इंतज़ार करने के दौरान कई प्रवासियों को शारीरिक यातनाएं दी गई थी.

    इटली की मीडिया के अनुसार, जांचकर्ता इस बात का भी पता लगा रहे हैं कि कहीं प्रवासियों को लीबिया में क़ैद में तो नहीं रखा गया था.

    प्रवासियों के लिए लैंपेडुज़ा द्वीप का महत्व

    उधर लैंपेडुज़ा द्वीप के मेयर टोटो मार्टेलो ने इस बचाव अभियान को "हाल के सबसे बड़े अभियान में से एक" बताया है. मई में, कुछ घंटों के भीतर यहां 1,000 से अधिक प्रवासी पहुंचे थे.

    लैंपेडुज़ा द्वीप उन मुख्य अड्डों में से एक है जहां से बड़ी संख्या में प्रवासी जोखिम भरा सफर कर यूरोप में प्रवेश करते हैं. यह द्वीप इटली के दक्षिण और लीबिया और ट्यूनीशिया के उत्तर में भूमध्यसागर के बीचोंबीच स्थित है.

    इस द्वीप पर एक प्रवासी शिविर है, जिसे क़रीब 300 लोगों के रहने के लिए बनाया गया था. लेकिन अब वहां इसके पांच गुना से अधिक लोग रहते हैं. कई लोग तो बाहर सड़क पर रह रहे हैं.

  19. तालिबान ने कहा, काबुल एयरपोर्ट का नियंत्रण लेने के लिए हम तैयार

    तालिबान

    इमेज स्रोत, Haroon Sabawoon/Anadolu Agency via Getty Images

    तालिबान ने कहा है कि उसके पास तकनीकी जानकार और इंजीनियर मौजूद हैं और जैसे की अमेरिकी सेना काबुल एयरपोर्ट से बाहर निकलेगी, वो एयरपोर्ट को अपने कंट्रोल में ले लेंगे.

    तालिबान के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, “हम अमेरिका की तरफ़ से अंतिम मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहे हैं, मंज़ूरी मिलते ही हम पूरा कंट्रोल सुनिश्चित कर लेंगे.”

    अमेरिका ने पहले ही कहा है कि वो तय समय सीमा यानी 31 अगस्त तक अफ़ग़ानिस्तान से पूरी तरह से अपनी सेना निकाल लेगा.

    तालिबान

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    इमेज कैप्शन, काबुल एयरपोर्ट के पास तालिबान के लड़ाके

    तालिबान के प्रवक्ता के मुताबिक उन्हें उम्मीद है कि वो अगले कुछ दिनों में अफ़ग़ानिस्तान में नई सरकार का एलान कर देंगे.

    प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने माना कि काबुल पर तालिबान का कब्ज़ा “अचानक” हुआ जिसकी “उम्मीद नहीं थी”.

    साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार बनाने में “कुछ दिक्कतें हैं” लेकिन इस पर चर्चा जारी है.

  20. जापान ने फिलहाल मॉडर्ना वैक्सीन का इस्तेमाल रोका

    मॉडर्ना, कोरोना वैक्सीन

    इमेज स्रोत, Reuters

    इमेज कैप्शन, बीते सप्ताह वैक्सीन के डोज़ के संभावित संक्रमण के चलते जापान ने मॉडर्ना के 15 लाख डोज़ वापस ले लिए थे.

    मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन के कुछ डोज़ में संक्रमण के निशान मिलने के बाद जापान ने ओकिनावा प्रांत में इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.

    बीते सप्ताह वैक्सीन के डोज़ के संभावित संक्रमण की आशंका में जापान ने इस वैक्सीन के 15 लाख डोज़ वापस ले लिए थे. टीकाकरण के लिए वैक्सीन को टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचा दिया गया था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया.

    जापान में मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज़ लगवाने के बाद दो लोगों की मौत हो गई थी. दोनों की उम्र करीब तीस साल थी.

    अधिकारी मौत के सही कारणों की जांच कर रहे हैं. अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि मौत का कारण वैक्सीन हो सकता है या नहीं.