अमेरिका ने कहा, ISIS-K को तबाह करने के लिए हम हमले जारी रखेंगे

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा- हमने साप्ताहांत में जिस तरह के अभियान किए हैं, वैसा आगे भी करते रहेंगे.

लाइव कवरेज

विभुराज, मोहम्मद शाहिद, शुभम किशोर and चंदन शर्मा

  1. ब्राज़ील: बोलसोनारो बोले- मौत, गिरफ़्तारी या चुनावों में जीत, यही तीन रास्ते बचे हैं

    ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो

    इमेज स्रोत, AFP

    इमेज कैप्शन, ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो

    ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने कहा है कि भविष्य के लिए उनके पास तीन विकल्प हो सकते हैं. पहला विकल्प जेल है, दूसरी मौत और तीसरी अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में जीत.

    दक्षिणपंथी राजनेता बोलसोनारो देश के पूर्व राष्ट्रपति लुइस इनासियो लुला डा सिल्वा से चुनावों में पीछे चल रहे हैं.

    उन्होंने धार्मिक नेताओं से कहा, "भविष्य के लिए मेरे पास तीन विकल्प है. या तो मैं गिरफ़्तार कर लिया जाऊंगा, या मार दिया जाऊंगा या फिर जीत जाऊंगा."

    लेकिन सेना के अधिकारी रह चुके बोलसोनारो ने कहा कि "क़ैद किए जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता है क्योंकि धरती पर कोई भी आदमी मुझे डरा नहीं सकता है."

    साल 2018 में चुनाव प्रचार के दौरान बोलसोनारो पर जानलेवा हमला हुआ था. उन्हें एक शख़्स ने चाकू से मारने की कोशिश की थी.

    ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो

    इमेज स्रोत, EPA

    बोलसोनारो का ये बयान ऐसे वक़्त में आया है जब देश की न्यायपालिका और चुनाव आयोग के साथ उनके गहरे मतभेद चल रहे हैं.

    इस 66 वर्षीय राजनेता को उम्मीद है कि अगले साल होने वाले चुनाव में उन्हें दूसरा कार्यकाल मिल सकता है.

    वे ब्राज़ील के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर सवाल उठाते रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने ये धमकी भी दी है कि राष्ट्रपति चुनाव के नतीज़ों को वो अस्वीकार भी कर सकते हैं.

    बुधवार को ब्राज़ील के इलेक्टोरल कोर्ट के प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि वोटिंग सिस्टम में कोई ख़राबी नहीं है.

    लेकिन शनिवार को देश के ईसाई नेताओं के साथ एक मीटिंग में बोलसोनारो ने टकराव कम करने से इनकार कर दिया.

  2. अफ़ग़ानिस्तान में जो हुआ, वो इराक़ में नहीं होगाः इराक़ी सेना

    इराक़ी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या रसूल

    इमेज स्रोत, SABAH ARAR/AFP via Getty Images

    इमेज कैप्शन, इराक़ी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या रसूल

    इराक़ी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या रसूल ने कहा है कि अफ़ग़ान संकट के अनुभव इराक़ में नहीं दोहराए जाएंगे.

    अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी 31 अगस्त तक पूरी हो जानी है. काबुल पर तालिबान के नियंत्रण स्थापित होने के दो हफ़्ते से भी कम समय के भीतर हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गुरुवार को बम धमाके हुए, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई.

    अफ़ग़ानिस्तान की तरह इराक़ से भी 6000 अमेरिकी सैनिकों की वापसी हो रही है. इराक़ के प्रधानमंत्री मुस्तफा अल-कदीमी ने जुलाई में इस बारे में राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ औपचारिक रूप से समझौता किया है कि साल 2021 के आख़िर तक इराक़ में अमेरिका का सैन्य अभियान ख़त्म हो जाएगा.

    इराक़ी न्यूज़ वेबसाइट 'रुदाव' की रिपोर्ट के मुताबिक़ ब्रिगेडियर जनरल याह्या रसूल ने कहा, "जो अफ़ग़ानिस्तान में हुआ, वो इराक़ में नहीं होगा. दोनों देशों की कोई तुलना नहीं है. हमारे पास एक सशस्त्र सेना है और एक नागरिक सुरक्षा प्रणाली. इराकी की सेना और इराक़ी लोग एकजुट हैं."

    "हम चरमपंथ से लड़े हैं. हम इराक़ और इराक़ी लोगों की हिफाजत कर सकते हैं. इराक़ की तुलना अफ़ग़ानिस्तान से नहीं की जा सकती है. हमने धरती के सबसे ताक़तवर चरमपंथी संगठन से लड़ाई लड़ी है. हमने उनके कब्ज़े वाले इराक़ के 40 फ़ीसदी इलाके को आज़ाद कराया है."

  3. तालिबान काबुल एयरपोर्ट पर कब्ज़ा करने के लिए तैयार है: जबीहुल्ला मुजाहिद

    तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद

    इमेज स्रोत, Reuters

    इमेज कैप्शन, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद

    तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि वे काबुल एयरपोर्ट पर नियंत्रण हासिल करने को लेकर अमेरिकियों के संकेत का इंतजार कर रहे हैं.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पास तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों की एक टीम है जो एयरपोर्ट सिस्टम को चला सकते हैं.

    जबीहुल्ला मुजाहिद ने शनिवार को कहा कि तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के 34 प्रांतों में से 33 के गवर्नर और पुलिस प्रमुखों के नाम तय कर लिए हैं और जल्द ही देश की आर्थिक स्थिति से निपटने के लिए काम शुरू कर दिया जाएगा.

  4. अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका का वापसी अभियान पूरा होने के क़रीब

    अफ़ग़ानिस्तान, तालिबान

    इमेज स्रोत, Reuters

    अफ़ग़ानिस्तान से आम लोगों को निकालने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर गई है और काबुल हवाई अड्डे पर लगभग एक हज़ार के करीब आम लोग रह गए हैं जिन्हें अमेरिकी सैनिकों से पहले रवाना कर दिया जाएगा.

    अफ़ग़ानिस्तान के नए शासक एयरपोर्ट की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं.

    एक सुरक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ऑपरेशन के अंतिम समय को लेकर अभी कोई फ़ैसला नहीं किया गया है.

    लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन पहले ही कह चुके हैं कि उनकी फौज 31 अगस्त की डेडलाइन पर कायम है.

    काबुल एयरपोर्ट पर तैनात इस सुरक्षा अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, "हम सभी विदेशी नागरिकों और जोखिम में पड़े लोगों को आज ही यहां निकालना चाहते हैं. सैनिकों की रवानगी इसके बाद होगी."

    इससे पहले, एक अमेरिकी अधिकारी ने शनिवार को रॉयटर्स को बताया कि हवाई अड्डे पर अब 4,000 से कम सैनिक हैं.

  5. काबुल एयरपोर्ट पर हमला अमेरिका नहीं तालिबान के लिए धक्का: रूस

    तालिबान

    इमेज स्रोत, Getty Images

    अफ़ग़ानिस्तान में रूस के राजदूत दमित्री ज़िर्नोव का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान और दाएश (इस्लामिक स्टेट) के बीच कभी न ख़त्म होने वाला युद्ध चल रहा है.

    रूसी समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट के अनुसार दमित्री ज़िर्नोव ने कहा है कि काबुल एयरपोर्ट पर हुए धमाके अमेरिका के बजाय तालिबान के लिए चुनौती हैं.

    शनिवार को दमित्री ज़िर्नोव ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा, "इस लड़ाई को कोई नतीज़ा नहीं निकलने जा रहा है. अगर काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले के पीछे दाएश का हाथ था तो ये तालिबान के लिए चुनौती है. क्योंकि इस समय अफ़ग़ानिस्तान की ज़िम्मेदारी तालिबान ने ले रखी है."

    उन्होंने कहा कि इस हमले से तालिबान की साख को धक्का पहुँचा है. "इसमें कोई शक नहीं कि काबुल एयरपोर्ट के पास जो कुछ हो रहा है, उसके लिए पूरी तरह से तालिबान को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. लेकिन जो नुक़सान हुआ है, वो उनकी छवि को हुआ है. लोग कहेंगे कि तालिबान काबुल में दाखिल हुआ और ये हो गया."

    "जहाँ तक मेरी जानकारी है कि तालिबान ने इस्लामिक स्टेट के दो चरमपंथियों को पकड़ा है. कथित रूप से वे मलेशियाई नागरिक हैं. इसलिए मैं समझता हूं कि वे अपनी कार्रवाई तेज़ करेंगे और दाएश के ख़िलाफ़ कड़ा रुख अपनाएंगे."

  6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान से ‘तालिबान’ शब्द ग़ायब, क्या है मामला?

    तालिबान

    इमेज स्रोत, Getty Images

    तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़े के बाद इस संगठन पर दुनिया की राय में कोई तब्दीली आएगी या नहीं यह तो वक़्त ही बताएगा लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक बयान के बाद यह माना जाने लगा है कि इस संगठन को लेकर अब गंभीरता बरती जा रही है.

    द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, सुरक्षा परिषद ने अपने एक पुराने बयान में तब्दीली करते हुए एक पैराग्राफ़ में संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल किया गया ‘तालिबान’ शब्द को हटा दिया है.

    ग़ौरतलब है कि अगस्त महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भारत के पास ही है और उसने ही इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं.

    इसके बाद से यह माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तालिबान अब काफ़ी समय तक अलग-थलग नहीं पड़ने वाला है.

    दरअसल, तालिबान के काबुल पर नियंत्रण के एक दिन बाद 16 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने UNSC की ओर से बयान जारी करते हुए कहा था, “सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद से लड़ने के महत्व की पुष्टि की है और यह भी माना है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अफ़ग़ानिस्तान के किसी भी क्षेत्र को किसी भी देश को धमकाने या उस पर हमले के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. और यहाँ तक कि तालिबान या किसी भी अफ़ग़ान समूह या किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य देश में सक्रिय आतंकी का समर्थन नहीं करना चाहिए.”

    अगले बयान में ‘तालिबान’ ग़ायब

    सुरक्षा परिषद

    इमेज स्रोत, AFP

    काबुल एयरपोर्ट पर बम धमाकों में 150 से अधिक लोगों के मारे जाने के एक दिन बाद 27 अगस्त को UNSC अध्यक्ष तिरुमूर्ति ने एक बार फिर परिषद की ओर से बयान जारी किया और इसमें हमले की निंदा की थी.

    इस बयान में 16 अगस्त वाले बयान का भी ज़िक्र था लेकिन उसमें ‘तालिबान’ का कहीं कोई ज़िक्र नहीं था.

    इसमें लिखा था, “सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद का मुक़ाबला करने के महत्व को दोहराया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अफ़ग़ानिस्तान के क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी देश को धमकी देने या हमला करने के लिए न हो, और किसी भी अफ़ग़ान समूह या व्यक्ति को किसी भी देश के क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादियों का समर्थन नहीं करना चाहिए.”

    तालिबान को संदर्भ के तौर पर हटाना दिखाता है कि भारत समेत UNSC के सदस्य तालिबान को एक स्टेट एक्टर के रूप में देख रहे हैं.

    इस रिपोर्ट के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी राजदूत रहे सैयद अकबरुद्दीन ने ट्वीट करते हुए कहा है कि ‘कूटनीति में एक पखवाड़ा काफ़ी लंबा समय होता है. ‘टी’ शब्द ग़ायब है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 16 और 27 अगस्त के बयान की तुलना कीजिए.

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    पत्रकार सुहासिनी हैदर ने भी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को रिट्वीट करते हुए लिखा है, “UNSC में भारत की निगरानी में आतंक के संदर्भ में तालिबान शब्द हटा दिया गया. भारत की अध्यक्षता वाली 1988 तालिबान प्रतिबंध समिति में क्या होता है, यह देखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.”

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

  7. अफ़ग़ानिस्तान: अमेरिका की चेतावनी, काबुल एयरपोर्ट पर हो सकते हैं और हमले

    अफ़ग़ानिस्तान

    इमेज स्रोत, Reuters

    अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने चेतावनी दी है कि काबुल एयरपोर्ट पर फिर से हमला किया जा सकता है.

    बाइडन ने बताया कि उनसे अमेरिकी कमांडरों ने कहा है कि रविवार को यह हमला किया जा सकता है.

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नागरिकों से कहा है कि वे एयरपोर्ट के इलाक़े से दूर रहें क्योंकि हमले की पुख्ता सूचना है.

    अमेरिका अब भी अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को निकालने का काम कर रहा है.

    हालाँकि ब्रिटेन ने अपने सैनिकों, राजनयिकों और अधिकारियों को निकाल लिया है.

    गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट के पास एक आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें कम से कम 170 लोगों की मौत हो गई थी.

    गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट के पास एक आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें कम से कम 170 लोगों की मौत हो गई थी

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट के पास एक आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें कम से कम 170 लोगों की मौत हो गई थी

    इस हमले की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट की स्थानीय शाखा इस्लामिक स्टेट ख़ुरासान ने ली थी.

    काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले के जवाब में अमेरिका ने शुक्रवार को पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान में ड्रोन हमला किया था और कहा था कि इसमें आईएस-के के दो सदस्य मारे गए थे.

    जिन दो लोगों को अमेरिका ने मारने की बात कही है उन्हें काबुल एयरपोर्ट पर हमले का साज़िशकर्ता बताया जा रहा है.

    बाइडन ने कहा है, ''यह आख़िरी जवाबी कार्रवाई नहीं थी. जिन्होंने भी काबुल एयरपोर्ट पर हमला किया है, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा. उन्हें क़ीमत चुकानी होगी.''

    कहा जा रहा है कि आईएस-के अफ़ग़ानिस्तान में सबसे हिंसक चरमपंथी संगठन है और तालिबान से खुला मतभेद है.

    अफ़ग़ानिस्तान

    इमेज स्रोत, Getty Images

    अब तालिबान के हाथों में ही अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता है. तालिबान ने अमेरिका की एयर स्ट्राइक की निंदा की है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ तालिबान ने कहा है कि अमेरिका को हमला करने से पहले बताना चाहिए था.

    अमेरिकी सैनिकों ने काबुल एयरपोर्ट भी छोड़ना शुरू कर दिया है. अब काबुल एयरपोर्ट पर 4000 से भी कम सैनिक हैं, जो कि पिछले हफ़्ते 5,800 तक थे.

    व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा है कि अगले कुछ दिन काफ़ी ख़तरनाक होने जा रहे हैं.

    तालिबान ने एयरपोर्ट के चारों तरफ़ कई चेकपॉइंट्स बना दिए हैं ताकि अफ़ग़ान लोगों को एयरपोर्ट जाने से रोका जा सके.

    पिछले दो हफ़्तों में एक लाख दस हज़ार अफ़गान और विदेशी नागरिकों को काबुल से निकाला गया है.

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, भविना पटेल टेबल टेनिस के फ़ाइनल में हारीं, रजत पदक मिलेगा

    भविना पटेल

    इमेज स्रोत, Getty Images

    टोक्यो पैरालंपिक्स में टेबल टेनिस (क्लास 4) के फ़ाइनल मुक़ाबले में भारतीय खिलाड़ी भविना पटेल हार गई हैं जिसके बाद उन्हें सिर्फ़ रजत पदक से संतोष करना होगा.

    उन्हें फ़ाइनल मेंचीन की खिलाड़ी चाओ यिंग ने हराया.

    इससे पहले शनिवार को उन्होंने सेमीफ़ाइनल में चीन की ही खिलाड़ी चांग मियाओ को 7-11, 11-7, 11-4, 9-11, 11-8 से हराया था.

  9. पीएम मोदी बोले- अफ़ग़ानिस्तान से भारत लोगों और पवित्र ग्रंथ को लाया

    मोदी

    इमेज स्रोत, Reuters

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं का ज़िक्र करते हुए कहा है कि भारत अफ़ग़ानिस्तान से सिर्फ़ लोगों को ही नहीं बल्कि पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब को भी लेकर आया है.

    जलियांवाला बाग़ शहीद स्मारक के पुनर्निर्माण के बाद आयोजित कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के दौरान उन्होंने कहा कि चाहे कोविड-19 संकट हो या फिर अफ़ग़ानिस्तान में जारी हालात हों, भारत दुनिया में कहीं भी मुसीबत में फंसे रहे हर भारतीय की मदद को तैयार रहा है.

    उन्होंने कहा कि वहाँ पर चुनौतियां थीं और हालात मुश्किल थे लेकिन ‘हमारे साथ गुरुकृपा थी.’

    ‘नए क़ानूनों’ का किया ज़िक्र

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘गुरुओं की मानवता को लेकर दी गई शिक्षाओं को आगे रखकर ही इस तरह के हालात से मुसीबत में फंसे लोगों के लिए देश में नए क़ानून पास किए गए.’

    हालांकि, इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ‘नए क़ानूनों’ का नागरिकता संशोधन क़ानून, 2019 (CAA) के तौर पर कोई ज़िक्र नहीं किया.

    इस क़ानून के तहत पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदुओं, पारसी, बौद्ध, इसाई और सिखों को नागरिकता देने का प्रावधान है.

    13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग़ नरसंहार को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वो ‘10 मिनट’ जिसमें ब्रितानी सैनिकों ने गोलीबारी की थी वो स्वतंत्रता आंदोलन की अमर कहानी बन गए और जिसकी वजह से भारत अगले साल आज़ादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मनाने जा रहा है.

    पंजाब के लोगों के बलिदान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ पर मुश्किल से ही कोई गाँव या गली होगी जहाँ पर बहादुरी की अपनी कोई कहानी नहीं होगी. पंजाब के बेटे और बेटियां देश के सामने आए ख़तरे के ख़िलाफ़ बिना किसी डर के खड़े रहे.

    उन्होंने कहा कि पंजाब हमेशा से एक प्रेरणा रहा है और अब यह महत्वपूर्ण है कि इसकी प्रगति हर दिशा में हो.

  10. नमस्कार!

    बीबीसी हिंदी के इस लाइव पेज पर आपका स्वागत है.

    हम यहाँ आपको दिनभर की बड़ी ख़बरें और लाइव अपडेट्स देते रहेंगे. यह लाइव पेज 24 घंटे उपलब्ध है. शनिवार, 28 अगस्त के अपडेट्स के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं.