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"हमने ब्रिटेन की सेना के लिए काम किया है और अब हम नरक में हैं"

अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकलने की कोशिश में काबुल एयरपोर्ट के पास फंसे लोगों ने बयान की अपनी दिक्कत.

लाइव कवरेज

अनंत प्रकाश, मोहम्मद शाहिद, विभुराज and अभिजीत श्रीवास्तव

  1. अफ़ग़ानिस्तान में फंसे 146 लोग भारत पहुंचे, अब तक 400 लोग निकाले गए

    अफ़ग़ानिस्तान में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत का अभियान जारी है.

    सोमवार को 146 भारतीय नागरिकों का दल दोहा के रास्ते भारत पहुंचा. रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी लोग तीन अलग-अलग उड़ानों से दिल्ली पहुंचे हैं.

    इसके साथ ही बीते हफ़्ते से अब तक भारत तक़रीबन 400 लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से निकाल चुका है.

    15 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद देश से भारी संख्या में लोग भागने की कोशिश कर रहे हैं.

    हालांकि, तालिबान कह चुके हैं कि वे ‘बदले की भावना’ से कोई कार्रवाई नहीं करेंगे. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस संगठन के क्रूर इतिहास को देखते हुए उन पर भरोसा कर लेना बहुत जल्दी होगा.

    कल 168 लोगों को लाया था वायु सेना का विमान

    नए शासन के आने के बाद काबुल एयरपोर्ट के बाहर हज़ारों की भीड़ इकट्ठा है और यह देश में आम लोगों के जाने के लिए इकलौता चालू हवाई अड्डा है.

    भारत पहले ही अपने राजदूत और राजनयिकों को सुरक्षित बाहर निकाल चुका है और अब वहां पर फंसे हुए अन्य भारतीय नागरिकों को निकालने की भागदौड़ में लगा हुआ है.

    रविवार को 168 लोगों को लेकर भारतीय वायु सेना का सी-17 विमान दिल्ली के नज़दीक हिंडन एयरबेस पर उतरा था.

    इस समूह में 24 अफ़ग़ान सिख और हिंदू भी शामिल थे जिनमें अफ़ग़ानिस्तान में गिर चुकी सरकार के दो सांसद भी हैं.

    अफ़ग़ान सांसद ने बताई दर्दनाक दास्तां

    अफ़ग़ान सांसद नरेंद्र सिंह खालसा ने हिंडन एयरबेस पर उतरने के बाद पत्रकारों से कहा था कि ‘अफ़ग़ानिस्तान में 20 साल में जो कुछ हासिल किया गया था वो अब ज़ीरो हो चुका है.’

    उन्होंने बताया कि 72 अफ़ग़ान सिख और हिंदू शुक्रवार से ही काबुल एयरपोर्ट पर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे लेकिन तालिबान ने उन्हें रोक लिया और वापस भेज दिया.

    शनिवार को दोबारा समूह एयरपोर्ट पर गया था और वहां पर लोगों की भीड़ देखी.

    खालसा कहते हैं, “एयरपोर्ट के हर दरवाज़े पर 5,000-6,000 लोग मौजूद थे.”

    खालसा ने बताया कि शुरुआत में वे एयरपोर्ट में घुस नहीं पा रहे थे लेकिन बाद में उन्हें वीआईपी चेकपॉइंट से निकलने की अनुमति दी गई.

    वो कहते हैं, “देश छोड़ना बहुत कठिन और दर्दनाक फ़ैसला था. हमने ऐसी स्थिति नहीं देखी थी. सब कुछ छिन गया है. सब ख़त्म हो गया है.”

  2. तालिबान को मान्यता दे या नहीं भारत? सामने खड़ी हैं बड़ी चुनौतियाँ

    अफ़ग़ानिस्तान में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम और मौजूदा हालात से ऐसा लगता है कि तालिबान लंबे समय तक सत्ता में लौट आया है. ऐसे में सुरक्षा को लेकर मध्य और दक्षिण एशिया के देशों की चिंताएं भी बढ़ रही हैं. भारत के लिए भी ये सब बहुत चुनौतीपूर्ण है.

    सामरिक मामलों के जानकारों को लगता है कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि वो तालिबान की हुकूमत को मान्यता दे या नहीं. वैसे, इसको लेकर राय बंटी हुई भी है.

    कुछ एक विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत को फ़िलहाल कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखानी चाहिए क्योंकि तालिबान की विचारधारा में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है. वो तब भी लोकतंत्र लागू करने के ख़िलाफ़ थे और वो अब भी लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हैं.

    तालिबान देश को शरिया के क़ानून के हिसाब से ही चलना चाहते हैं.

  3. भीमा कोरेगाँव मामला: 15 लोगों पर 'देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने' के आरोप का प्रस्ताव

    राष्ट्रीय जांच आयोग ने एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार 15 लोगों के ख़िलाफ़ देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाने का फैसला किया है. इस मामले में अधिकतम सज़ा मृत्युदंड है.

    अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस मेंछपी ख़बरबताती है कि एनआईए ने इस महीने की शुरुआत में एक विशेष अदालत के समक्ष आरोपों का मसौदा पेश किया है.

    इसमें बताया गया है कि अभियुक्तों ने "सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की हत्या एवं उसके हालात पैदा करने" के लिए अत्याधुनिक हथियार जुटाने की साजिश रची.

    शुरुआती जाँच करने वाली पुणे पुलिस ने अपनी प्रस्तावित चार्जशीट में बताया था कि हथियार "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या" करने की साजिश से जुड़े थे.

    लेकिन एनआईए ने अपने मसौदे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लिया है.

  4. नीतीश बोले, पीएम मोदी ने जाति जनगणना से इनकार नहीं किया

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य के दस राजनीतिक दलों का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रव्यापी जातिगत जनगणना कराने के मुद्दे पर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला.

    इस प्रतिनिधिमंडल में नीतीश कुमार के साथ आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और बीजेपी समेत अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल थे. दोनों ही नेता जाति के आधार पर जनगणना कराए जाने की पुरजोर तरीके से मांग कर रहे हैं.

    नीतीश कुमार ने संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी बात ध्यान से सुनी. प्रधानमंत्री का इस मुद्दे पर क्या रुख है, नीतीश कुमार ने बताया, "उन्होंने इससे इनकार नहीं किया और सबकी बात ध्यान से सुनी."

    "बिहार के लोग और पूरा देश ही इस मुद्दे पर एकमत हैं. हम प्रधानमंत्री के आभारी हैं कि उन्होंने हमारी बात ध्यान से सुनी. अब उन्हें इस बारे में फ़ैसला लेना है."

    उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना कराने से विभिन्न विकास योजनाओं को असरदार तरीके से बनाने में मदद मिलेगी.

    इसके समर्थन में अपनी बात रखते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि ग़रीब लोगों की मदद करने में ये ऐतिहासिक कदम होगा. उन्होंने कहा कि अगर जानवर और पेड़ गिने जा सकते हैं तो लोगों को क्यो नहीं गिना जा सकता है.

    "हमारे प्रतिनिधिमंडल ने बिहार में ही नहीं बल्कि पूरे देश में जातिगत जनगणना के मुद्दे पर आज प्रधानमंत्री जी से मुलाकात की. हम लोग इस बारे में फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं."

    ये पूछे जाने पर कि क्या जेडीयू और आरजेडी इस मुद्दे पर एक दूसरे के करीब आ रहे हैं तो तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के विपक्ष ने हमेशा ही जनसमर्थक और राष्ट्रहित के मुद्दों पर सरकार का समर्थन किया है.

  5. कमला हैरिस का सिंगापुर दौरा क्यों है चीन के लिए चिंता की बात

    अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस ने सोमवार से अपने सिंगापुर दौरे की शुरुआत की है. उन्होंने आज देश के शीर्ष नेताओं से मुलाक़ात की.

    दक्षिण पूर्व एशिया के दौरे पर निकलीं हैरिस का उद्देश्य साइबर ख़तरों, आपूर्ति में बाधा और कोविड-19 महामारी से निपटने के रास्ते तलाश करना है.

    राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन के ये मुद्दे शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल हैं. हैरिस ने इस दौरान सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग और राष्ट्रपति हलीमा याकूब से मुलाक़ात की.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ अमेरिका का उद्देश्य इस क्षेत्र में साझेदारों के साथ रिश्ते मज़बूत करके चीन के बढ़ते आर्थिक और सुरक्षा प्रभावों से निपटना है.

    एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासन के अधिकारी ने बैठक की जानकारी साझा की और हैरिस सोमवार की शाम को प्रधानमंत्री ली के साथ एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सकती हैं.

    इसके अलावा वो चांगी नेवल बेस और यूएसएस टुल्सा कॉम्बैट शिप का भी दौरा करेंगी. सिंगापुर अमेरिका का संधि साझेदार नहीं है लेकिन इस क्षेत्र में वो उसका मज़बूत सुरक्षा साझेदार है जिसके साथ गहरे व्यापारिक रिश्ते भी हैं.

    हालांकि, उसे अमेरिका और चीन के साथ रिश्तों में तालमेल रखना पड़ता है ताकि वो किसी का पक्ष लेता न दिखे. उत्तर पूर्व एशिया में इस देश के पास सबसे बड़ा बंदरगाह है और वो इस क्षेत्र में मुक्त नौपरिवहन का समर्थन करता.

    इसी जगह पर चीन लगातार अपना दबदबा बना रहा है. हैरिस के इस क्षेत्र में सात दिवसीय दौरे के दौरान यह मुद्दा मुख्य रूप से छाया रहेगा. इस दौरान हैरिस वियतनाम के दौरे पर भी जाएंगी.

    दक्षिण चीन सागर का मुद्दा फिर छाएगा?

    एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बैठक से इतर कहा कि दोनों देश क्षेत्र में 'सामान्य सुरक्षा चुनौतियों' का सामना करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं.

    एक अधिकारी ने कहा कि वे किसी को अमेरिका और चीन में से 'किसी एक देश को चुनने के लिए नहीं कर रहे हैं.'

    अधिकारी ने कहा, "हम साझेदारियों को सकारात्मक कारणों से आपसी हितों के लिए विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं. हम यह भी कह चुके हैं कि हम दक्षिणी चीन सागर में मुक्त नौपरिवहन के स्पष्ट सिद्धांतों के लिए खड़े हैं, हम भी कोई संघर्ष तलाश नहीं कर रहे हैं."

    दक्षिण चीन सागर एक रणनीतिक समुद्र मार्ग के अलावा संभावित तेल और गैस जैसे प्राकृतिक खनिज से भरा है और इस पर चीन, वियतनाम, फिलीपींस, ताइवान, मलेशिया और ब्रूनेई अपना-अपना दावा करते आए हैं.

    इस दौरे से माना जा रहा है कि एक बार फिर दक्षिण चीन सागर का मुद्दा गरमाएगा और चीन दक्षिण चीन सागर को लेकर हमेशा से गंभीर रहा है.

  6. ‘दुनियावालों, क्या तुम्हें परवाह है जो यहां हो रहा है’- एक अफ़ग़ान लड़की का दर्द

    अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के एक सप्ताह के बाद अभी भी देश में उथल-पुथल की स्थिति है लोगों को अपनी ज़िंदगी की चिंता है.

    यहां पर एक महिला छात्र ने अपने डर और भविष्य के बारे में कुछ विचार साझा किए हैं. बीबीसी ने उनकी सुरक्षा के मद्देनज़र उनकी पहचान ज़ाहिर नहीं की है.

    आगे पढ़िए छात्रा की आपबीती उन्हीं के शब्दों में..

    देश को ढेर हुए सात दिन हो चुके हैं, राष्ट्रपति भाग चुके हैं और तालिबान एक बार फिर सत्ता में आ चुके हैं.

    हमें पीछे छोड़ दिया गया है....

  7. ये पाँच अफ़गान औरतें तालिबान से कुछ कहना और कुछ पूछना चाहती हैं

    20 साल पहले अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर तालिबान ने जब पहली बार राज किया तब महिलाओं के प्रति उनकी क्रूरता जैसे कि सिर काट देना, पत्थर से मार-मारकर हत्या और बुर्का पहनने के लिए मजबूर करना उनकी पहचान रही.

    जब ये चरमपंथी सत्ता से बेदख़ल किए गए, उसके बाद से अफ़ग़ान महिलाओं ने बहुत तरक्की की है- वो मंत्री, मेयर, जज और पुलिस अधिकारी जैसे पदों तक जा पहुंचीं.

    लेकिन तालिबान की वापसी से महिलाओं के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं.

    ये कहना है बीबीसी से बात करने वालीं उन पांच जानी-मानी महिलाओं का जिन्होंने हमसे अपना डर साझा किया.

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, अफ़ग़ानिस्तान: काबुल हवाई अड्डे के बाहर गोलीबारी में एक अफ़ग़ान गार्ड की मौत

    काबुल हवाई अड्डे के उत्तरी द्वार पर अज्ञात बंदूक़धारियों, अफ़ग़ान सुरक्षा बलों और पश्चिमी देशों के सैनिकों के बीच गोलीबारी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, जर्मन सेना ने एक ट्विटर संदेश में कहा कि गोलीबारी में एक अफ़ग़ान गार्ड की मौत हो गई. समाचार एजेंसी एएफपी ने भी एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि की है.

    जर्मन आर्मी ने एक बयान में कहा, "आज सुबह 4 बजकर 13 मिनट पर काबुल एयरपोर्ट के उत्तरी गेट पर अज्ञात हमलावरों और अफ़ग़ान सुरक्षा गार्ड्स के बीच गोलीबारी हुई. एक अफ़ग़ान गार्ड की मौत हो गई और तीन अन्य लोग घायल हो गए. इसके बाद जर्मन सेना और अमेरिकी सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई की."

    देश छोड़ने के इच्छुक हजारों अफ़ग़ान अभी भी काबुल हवाई अड्डे के बाहर जमा हैं.

  9. अमरुल्ला सालेह का दावा, पंजशीर घाटी के पास तालिबान को भारी नुकसान, तालिबान का इनकार

    अफ़ग़ानिस्तान के पहले उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने कहा है कि तालिबान ने पंजशीर घाटी के प्रवेश द्वार के पास अपने लड़ाकों को इकट्ठा करने की कोशिश की है.

    लेकिन उनके अनुसार, तालिबान को पहले ही पास की अंदराब घाटी में भारी नुकसान हुआ है.

    रविवार को ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक संदेश में उन्होंने लिखा कि संघर्ष करने वाली ताकतों ने सालंग राजमार्ग को बंद कर दिया था और ये ऐसे इलाके हैं जिनसे तालिबान को बचना चाहिए था.

    सालेह के ताजा बयान पर तालिबान ने कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने रविवार को बीबीसी को बताया कि वे अपने लड़ाकों के साथ बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.

    बीबीसी उर्दू सेवा ने तालिबान सूत्रों के हवाले से कहा है कि उनका एक कमांडर कारी फसीहुद्दीन इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं.

    दूसरी ओर, तालिबान विरोधी ताक़तों ने दावा किया है कि उन्होंने लगभग 300 तालिबान लड़ाकों को मार डाला है, लेकिन तालिबान ने इस दावे का खंडन किया है.

  10. दिल्ली में यूएन शरणार्थी मिशन कार्यालय के बाहर अफ़ग़ान शरणार्थियों से बातचीत

    दिल्ली के वसंत विहार स्थित संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी मिशन कार्यालय के बाहर अफ़ग़ान शरणार्थियों का प्रदर्शन.

    ज़्यादा जानकारी के साथ बीबीसी संवाददाता सलमान रावी (कैमरा- पीयूष नागपाल)

  11. जातिगत जनगणना पर पीएम मोदी से मिलने पहुंचे नीतीश, तेजस्वी और मांझी

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार सुबह जातिगत जनगणना के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए उनके आवास पहुंचे हैं.

    नीतीश कुमार के साथ – साथ बिहार की राजनीति के तमाम दूसरे नेता भी इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं.

    इनमें बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्रील जीतनराम मांझी शामिल हैं.

    तेजस्वी यादव ने पीएम मोदी से मुलाक़ात के ठीक पहले मीडिया को बताया है, “बिहार विधानसभा में दो बार जातिगत जनगणना पर प्रस्ताव पास हो चुका है. इस तरह की जनगणना से समाज के अलग – अलग तबकों के कल्याण के लिए योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी.”

  12. तालिबान पर भरोसे के सवाल पर क्या बोले जो बाइडन?

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि तालिबान चाहता है कि उसे वैध माना जाए, इस संबंध में कई वादे भी किए गए हैं लेकिन अमेरिकी सरकार ये देखेगी कि वह उन्हें लेकर कितना गंभीर है.

    जब बाइडन से ये पूछा गया कि क्या वह तालिबान पर भरोसा करते हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वह किसी पर भरोसा नहीं करते हैं.

    इसके साथ ही बाइडन ने बताया कि काबुल एयरपोर्ट से अमेरिकी फ़्लाइट के ज़रिए निकलने वाले शरणार्थियों के साथ क्या होगा.

    उन्होंने कहा, “मैं किसी पर भरोसा नहीं करता हूं. तालिबान को एक मौलिक निर्णय लेना है. क्या तालिबान अफगानिस्तान के लोगों को एकजुट करने और उनकी भलाई के लिए प्रयास करने जा रहा है, जो कि 100 वर्षों से किसी एक समूह ने कभी नहीं किया है?''

    ''अगर वह ऐसा करता है तो उसे आर्थिक मदद और व्यापार से लेकर तमाम अन्य मामलों में मदद की ज़रूरत पड़ेगी''

    बाइडन ने ये सब कुछ तब कहा है जब कई देश अपने नागरिकों को अमेरिकी सुरक्षा घेरे में संचालित किए जा रहे काबुल एयरपोर्ट की मदद से अफ़ग़ानिस्तान से निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

    अमेरिकी सेना ने पिछले 9 दिनों में लगभग 25000 लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकाला है. इस तरह जुलाई से अब तक कुल 30 हज़ार लोगों को बाहर निकाला गया है.

    इस अभियान के तहत अमेरिका पहुंच रहे लोगों के भविष्य के बारे में बाइडन ने कहा है कि वे लोग जो अमेरिकी विमानों में बैठकर काबुल से बाहर जा रहे हैं.

    वे पहले एक सैन्य अड्डे पर जा रहे हैं जहां उनकी स्क्रीनिंग होगी, उनकी पृष्ठभूमि की जाँच की जाएगी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमेरिका में शिफ़्ट किया जाएगा.

    इससे पहले शुक्रवार को बाइडन ने इसे इतिहास में सबसे ज़्यादा बड़ा और ख़तरनाक एयरलिफ़्ट अभियान करार दिया है.

  13. कोरोना: एक दिन में 25 हज़ार से ज्यादा नए मामले, 389 लोगों की मौत

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि पिछले 24 घंटों में भारत में कोरोना संक्रमण के 25,072 नए मामले सामने आए हैं और कुल 389 लोगों की मौत हुई है.

    इसके साथ ही 44,157 लोग कोरोना से ठीक हुए हैं.

    इसके बाद भारत में कोरोना संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 3,24,49,306 हो गयी है. और ठीक होने वालों की संख्या 3,16,80,626 हो गयी है.

    इसके साथ ही फिलहाल संक्रमित लोगों की संख्या 3,33,924 है. और अब तक भारत में कोरोना से 4,34,756लोगों की मौत हो चुकी है.

    मंत्रालय की ओर से जारी किए गए अपडेट में बताया गया है कि पिछले 24 घंटों में 7,95,543 लोगों को वैक्सीन लगाई गयी है.

    अब तक लगाई गई वैक्सीनों की संख्या 58,25,49,595 हो चुकी है.

  14. तालिबान को लेकर एलन मस्क का ट्वीट, क्या कह रहे हैं लोग?

    दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक एलन मस्क ने तालिबान से जुड़ा एक ट्वीट किया है, जिस पर सोशल मीडिया में खासी चर्चा हो रही है.

    अमेरिकी अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने तालिबानी लड़ाकों की एक तस्वीर ट्वीट और उनके मास्क न पहनने के बारे में लिखा.

    इस तस्वीर कुछ तालिबानी नेता और उनके सहयोगी खड़े हुए दिख रहे हैं. इनमें से एक भी शख़्स मास्क लगाए हुए दिखाई नहीं दे रहा है.

    इस तस्वीर के साथ लिखा हुआ है- एक भी मास्क नहीं, हे भगवान!

    इसके बाद एलन मस्क ने यह भी लिखा कि इन्हें डेल्टा वेरिएंट के बारे में जानकारी भी है?

    लोगों ने क्या कहा?

    मस्क के इस ट्वीट पर लोगों ने अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दी. कुछ लोगों ने मस्क का समर्थन करते हुए गंभीर टिप्पणियां की हैं.

    वहीं, कुछ लोगों ने मस्क से आग्रह किया है कि वह एक वैज्ञानिक हैं, अच्छे आचरण का परिचय दें.

    एक यूज़र माइकल ब्रेनर लिखते हैं, “वे विकास के बारे में भी नहीं जानते हैं.”

    'द गिटार बॉय' नाम से लिखने वाले एक यूज़र ने ट्वीट किया, “हां, क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता यही है न! एलन मस्क, तू रॉकेट बना भाई”

    एक अन्य यूज़र साई चेतन मुप्पला ने लिखा है, “उन्हें इसकी ज़रूरत नहीं है क्योंकि वे अपरिचित व्यक्ति को अपने पास फटकने भी नहीं देते.”

  15. वीडियो: तालिबान की वापसी क्या चीन-पाकिस्तान के लिए खुशख़बरी है?

    चीन और पाकिस्तान दोनों ही उन चुनिंदा देशों में भी शामिल हैं, जिनके दूतावास अफ़गानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बाद भी सक्रिय हैं.

    एक तरफ़ जहाँ अफ़गानिस्तान से हैरान-परेशान लोगों की चिंताजनक तस्वीरें सामने आ रही है. वहीं, दूसरी तरफ़ चीन और पाकिस्तान का तालिबान के लिए नरम रवैया भी चर्चा का विषय है.

    कई विशेषज्ञ चीन-पाकिस्तान और तालिबान के बीच इस 'रोमांस' पर बिल्कुल हैरान नहीं हैं. वो इसे तालिबान की एक बड़ी 'कूटनीतिक जीत' के रूप में देख रहे हैं.

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और तालिबान को कहीं न कहीं एक दूसरे की ज़रूरत है. वहीं, पाकिस्तान पर तालिबान को समर्थन देने के आरोप पहले से लगते रहे हैं.

    तो क्या ऐसा माना जाए कि अफ़गानिस्तान में तालिबान का क़ब्ज़ा चीन और पाकिस्तान के लिए अच्छी ख़बर है? क्या तालिबान से चीन और पाकिस्तान को कोई ख़तरा भी है?

    देखिए, इस वीडियो रिपोर्ट में.

  16. तालिबान समर्थित मीडिया अफ़ग़ान लोगों को क्या सिखा रहा है?

    अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद उसके समर्थन वाले मीडिया समूह एक ओर हालात सामान्य दिखाने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरी ओर ‘दुश्मनों से आगाह’ करने की चेतावनी भी जारी कर रहे हैं.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, अफ़ग़ानिस्तान के अल-एमाराह स्टूडियो का टीवी क्रू बीते दिनों से काबुल की सड़कों पर उतरा है और लोगों से बात करते हुए वो यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि लोगों की ज़िंदगियां अब सामान्य हो चुकी हैं.

    यह मीडिया संगठन तालिबान समर्थित वीडियो बनाता है.

    सिटी सेंटर मेंअल-एमाराह का माइक्रोफ़ोन लिए एक साक्षात्कारकर्ता ने पूछा, “आप कितने आश्वस्त हैं?” तो उधर से जवाबा आता है कि ‘100 फ़ीसदी. सुरक्षा अच्छी है, यहां कोई चोर नहीं है, हम बहुत ख़ुश हैं.’

    पिछले रविवार को अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के नियंत्रण के बाद काबुल में अराजकता की स्थिति बनी हुई है जिसके बाद यह एक संदेश देने की कोशिश है.

    हज़ारों लोग एयरपोर्ट पर जमा हैं और देश से भागने की कोशिश कर रहे हैं. अल-एमाराह के इन इंटरव्यू को संदेश देने के एक छोटे क़दम की तरह देखा जा रहा है.

    शनिवार को तालिबान के कई प्रवक्ता टीवी स्टूडियो में पहुंचे और उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि सड़कें सुरक्षित हैं.

    सरकारी टीवी चैनल पर चल रहे हैं 'उपदेश'

    बीबीसी मॉनिटरिंग के अनुसार, 20 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान के सरकारी टीवी चैनल पर चेतावनी भरा एक उपदेश प्रसारित किया गया और देश के युवाओं को चेताया गया कि वे ‘इस्लाम के दुश्मनों’ के आगे ढेर होने से बचें.

    अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण के बाद यह चैनल तालिबान के नियंत्रण में है.

    शुक्रवार की नमाज़ के बाद टीवी पर प्रसारित वीडियो में एक मौलवी का कहना है, “इस देश का आप पर अधिकार है. हमारा मुल्क हमारी मां की तरह है. एक मां हमें जन्म देती है और दूसरी हमारी अध्यात्मिक मां है.”

    देश पर क़ब्ज़े के बाद पहले शुक्रवार की नमाज़ के दौरान दिए जाने वाले उपदेश के लिए तालिबान ने मौलवियों को निर्देश जारी किए थे.

    इसमें कहा गया था कि वे अफ़ग़ान लोगों को एक साथ ‘राष्ट्र निर्माण’ के लिए प्रेरित करेंऔर ‘दुश्मनों के प्रोपेगैंडा’ का खंडन करें.

    इस दौरान उपदेशक कहता है कि सरकार और देश के मीडिया की ‘ज़िम्मेदारी’ है कि वे युवाओं का मार्गदर्शन करे.

    एक ओर जहां सरकारी टीवी चैनल उपदेशों को चला रहा है वहीं टोलो न्यूज़, अरियाना न्यूज़ टीवी और वनटीवी जैसे निजी टीवी चैनल अपने सामान्य न्यूज़ प्रोग्राम चला रहे हैं.

  17. वीडियो: शरिया क़ानून क्या है और इससे क्यों डरती हैं अफ़गान औरतें?

    तालिबान ने कहा है कि वे इस्लाम की शरिया क़ानूनी प्रणाली की सख़्त व्याख्या के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान पर शासन करेंगे.

    देश पर अपना नियंत्रण क़ायम कर लेने के बाद बुलाई गई पहली प्रेस वार्ता में, तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि मीडिया और महिलाओं के अधिकारों जैसे मसलों से "इस्लामी क़ानून के ढांचे के तहत" निपटा जाएगा.

    हालांकि तालिबान ने अभी तक यह नहीं बताया कि व्यवहार में इसके क्या मायने होंगे. आइए समझते हैं कि ये शरिया क़ानून आखिर होता क्या है?

  18. तालिबान के ‘सैकड़ों’ लड़ाके पंजशीर पर क़ब्ज़े के लिए निकले

    तालिबान ने रविवार रात को बताया कि उसके ‘सैकड़ों’ लड़ाके पंजशीर घाटी की ओर निकल चुके हैं.

    यह अफ़ग़ानिस्तान के उन कुछ इलाक़ों में से है जिसका नियंत्रण अभी भी तालिबान के पास नहीं है.

    काबुल के उत्तर में मौजूद पंजशीर तालिबान विरोधियों का गढ़ रहा है जिसकी कमान अब पूर्व मुजाहिदीन कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद के हाथों में है.

    अलक़ायदा ने 9/11 अमेरिकी हमले से दो दिन पहले अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी थी.

    तालिबान ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि ‘स्थानीय अधिकारियों के शांतिपूर्ण तरीक़े से पंजशीर प्रांत को उन्हें न देने के बाद इस्लामी अमीरात के सैकड़ों मुजाहिदीन उसके नियंत्रण के लिए बढ़ रहे हैं.’

    राजधानी काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद हज़ारों लोग पंजशीर की ओर गए हैं.

    मसूद के नेतृत्व वाले तालिबान विरोधी बल का दावा है कि उसने तालिबान से जंग के लिए तक़रीबन 9,000 लोगों को इकट्ठा किया है.

    वहीं, मसूद ने सऊदी अरब के मीडिया प्रसारक अल-अरबिया से कहा है कि पंजशीर में कई अफ़ग़ान प्रांतों से सरकारी सुरक्षाबल भागकर आए हुए हैं.

    उन्होंने कहा है कि वे अफ़ग़ानिस्तान की रक्षा के लिए तैयार हैं और वे ख़ून-ख़राबे की चेतावनी देते हैं.

  19. नमस्कार!

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