अफ़ग़ानिस्तान: पेंटागन के अनुसार, काबुल से रोज 9,000 लोग निकाले जाएंगे

अमेरिकी रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों और तालिबान के निशाने पर रहे अफ़ग़ानियों को निकालने की योजना बनाई है.

लाइव कवरेज

विभुराज, मानसी दाश, अनंत प्रकाश and अपूर्व कृष्ण

  1. अफ़ग़ानिस्तान: पेंटागन के अनुसार, काबुल से रोज 9,000 लोग निकाले जाएंगे

    अफ़ग़ानिस्तान

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    अमेरिकी रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों और तालिबान के निशाने पर रहे अफ़ग़ानियों को निकालने की योजना बनाई है.

    पेंटागन की एक प्रेस ब्रीफिंग में मरीन मेजर जनरल विलियम टेलर ने बताया कि रोज 9,000 लोगों को वहां से निकालने की योजना बनाई गई है.

    इस दौरान, किर्बी ने बताया कि अमेरिका का यह मिशन 31 अगस्त तक चलेगा.

    काबुल में हवाई क्षेत्र के अब सुरक्षित हो जाने के बाद, अमेरिका राजधानी काबुल से हर घंटे कम से कम एक निकासी उड़ान शुरू करने की योजना बना रहा है.

    ऐसा होने पर हर रोज वहां से 9,000 लोग निकल सकेंगे. हालांकि किर्बी ने इस महीने के अंत तक अफ़ग़ानिस्तान से निकाले जाने वाले लोगों की कुल संख्या के बारे में कोई आंकड़ा देने से मना कर दिया.

    दूसरी ओर, पेंटागन के अधिकारियों ने फिर से यह सवाल टाल दिया कि तालिबान की तेज प्रगति और एयरपोर्ट पर दिखने वाली अराजकता, क्या ख़ुफ़िया की विफलता थी या किसी साफ योजना की.

  2. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान: पाकिस्तान में कहीं मिठाइयाँ बँटी, तो कहीं चिंता भी

    इमरान ख़ान

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    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का नियंत्रण हो जाने के बाद दक्षिण एशिया में फिर से राजनीतिक अनिश्चितता के बादल छा गए हैं. तालिबान के वहाँ के राष्ट्रपति भवन में प्रवेश करते ही अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण और साजो-सामान पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के ख़र्च किए गए अरबों डॉलर बेकार हो गए.

    काबुल का भी पतन होता देखने वाले अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी अब सोच रहे हैं कि इसके बाद उनका क्या होगा. पाकिस्तान की बात करें, तो वहाँ बड़ी तादाद में अफ़ग़ान शरणार्थी रहते हैं. तालिबान के साथ पाकिस्तान के बड़े जटिल संबंध रहे हैं. वास्तव में, 90 के दशक की शुरुआत में तालिबान को बढ़ाने में पाकिस्तान ने प्रमुख भूमिका निभाई थी.

    पाकिस्तान के एक अख़बार ट्रिब्यून ने लिखा है कि वहाँ के सिविल और सैन्य नेतृत्व ने अफ़ग़ानिस्तान के मामले में 'देखो और इंतज़ार करो' का नज़रिया अपनाया है.

    अख़बार ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा है कि वे काबुल में नई सरकार को मान्यता देने के लिए बेताबी नहीं दिखाएँगे.

  3. तालिबान की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस: 'इस्लामी क़ानून के तहत महिलाओं को काम करने का अधिकार'

    अफ़ग़ानिस्तान, तालिबान

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    अफ़ग़ानिस्तान पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने के बाद तालिबान का पहला संवाददाता सम्मेलन मंगलवार को काबुल में आयोजित हुआ.

    कैमरों के सामने पहली बार आए तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुज़ाहिद ने कहा, "20 साल के संघर्ष के बाद हमने देश को आज़ाद कर लिया है और विदेशियों को देश से बाहर निकाल दिया है."

    उन्होंने इसे पूरे देश के लिए गौरव का पल बताया है.

    शरिया के अनुसार होंगे महिलाओं के हक़

    जबीहुल्लाह मुज़ाहिद कहते हैं, ''हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त करना चाहते हैं कि किसी को नुक़सान नहीं होने देंगे.''

    तालिबान के प्रवक्ता ने कहा, "हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कोई उलझन नहीं चाहते. हमें हमारे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काम करने का अधिकार है. दूसरे देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण, नियम और कानून हैं. हमारे मूल्यों के अनुसार, अफ़ग़ानों को अपने नियम और कानून तय करने का अधिकार है."

    मुज़ाहिद ने कहा, "हम शरिया व्यवस्था के तहत महिलाओं के हक़ तय करने को प्रतिबद्ध हैं. महिलाएं हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने जा रहे हैं. हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि उनके साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा."

  4. अफ़ग़ानिस्तान पर राष्ट्रपति बाइडन के बयान का फ़ैक्ट चेक

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

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    सोमवार की शाम को दिए अपने भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी नीति और सेना वापस लेने के अपने फ़ैसले के पीछे के कारणों के बारे में कई दावे किए.

    बीबीसी न्यूज़ ने उनके कुछ दावों का फ़ैक्ट-चेक किया है. उन्होंने जो कुछ कहा, उसकी तुलना अफ़ग़ानिस्तान के बारे में उनके पहले के बयानों और ज़मीनी हालात से की है.

    'अफ़ग़ानिस्तान में हमारा मिशन कभी भी 'राष्ट्र निर्माण' के लिए नहीं था.'

    राष्ट्रपति बाइडन ने जोर देकर कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी हस्तक्षेप के पीछे का असल उद्देश्य "अमेरिका पर आतंकवादी हमले को रोकना" था. इसका मकसद कभी भी एक मज़बूत केंद्रीकृत लोकतंत्र का निर्माण नहीं था."

    जो बाइडन को यह बयान साफ तौर पर अफ़ग़ानिस्तान पर अमेरिका के पहले के बयानों के ठीक विपरीत है.

  5. अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान ने अपने लड़ाकों को लोगों के घरों में न घुसने का आदेश दिया

    तालिबान

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    तालिबान ने मंगलवार को एक बयान जारी कर अपने लड़ाकों को किसी के घर में प्रवेश न करने का आदेश जारी किया है. ख़ासकर काबुल में दूतावास की गाड़ियों के साथ किसी तरह के हस्तक्षेप से बचने को कहा गया है.

    तालिबान के उप-नेता मौलवी याक़ूब की ओर से वॉयस नोट के ज़रिए लड़ाकों को यह आदेश भेजा गया है. बताया जा रहा है कि यह आदेश उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि तालिबान के लोग कल लूटपाट कर रहे थे.

    इस बीच, तालिबान धीरे-धीरे अफ़ग़ानिस्तान में अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है. तालिबान ने सभी सरकारी कर्मचारियों को काम पर लौटने को कहा गया है. उसने यह भी कहा है कि लूटपाट में शामिल लोगों के पकड़े जाने पर उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी.

    मंगलवार को राजधानी काबुल के कुछ हिस्सों में बेकरी और दवा की दुकानें खुल गई हैं. सड़कों पर पिछले कुछ दिनों से ज़्यादा ट्रैफ़िक पाई गई. उधर, काबुल में टीवी पर एक महिला एंकर ने एक तालिबान नेता का साक्षात्कार लिया.

    बीस साल पहले के तालिबानी शासन के लिहाज़ से इस घटना को कई लोग सोच से परे बता रहे हैं. हालांकि काबुल के कैफे या कारों में कोई संगीत नहीं बज रहा है. वहीं विज्ञापन में महिलाओं की तस्वीरों पर पेंट कर दिया गया है.

    मंगलवार को तालिबान के कुछ वरिष्ठ नेताओं के काबुल में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने की उम्मीद है. इसमें देश के भविष्य और नई सरकार के गठन की तालिबान की योजनाओं को पेश किया जा सकता है.

  6. अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का क़ब्ज़ा क्या चीन और पाकिस्तान के लिए ख़ुशख़बरी है?

    तालिबान

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    "चीन तालिबान के साथ दोस्ताना और आपसी सहयोग के रिश्ते विकसित करने के लिए तैयार है. चीन अफ़ग़ानिस्तान में शांति और पुनर्निर्माण के लिए रचनात्मक भूमिका निभाना चाहता है."

    (चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनियांग)

    "अभी जो हो रहा है अफ़ग़ानिस्तान में, वहाँ ग़ुलामी की ज़ंजीरें तोड़ दीं उन लोगों ने. आप जब किसी की संस्कृति अपनाते हैं, तो आप मानने लगते हैं कि वो संस्कृति आपसे ऊँची है और आख़िर में आप इसके ग़ुलाम हो जाते हैं."

    (पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान)

    अफ़गानिस्तान पर तालिबान का क़ब्ज़ा होने के बाद चीन और पाकिस्तान की तरफ़ से आए ये बयान तालिबान के लिए उनकी स्वीकृति साफ़ ज़ाहिर करते हैं.

  7. अफ़ग़ानिस्तान के उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने कहा- मैं हूं देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति

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    अफ़ग़ानिस्तान में जारी राजनीतिक संकट के बीच देश के पहले उपराष्ट्रपति के इस बयान से नाटकीय स्थिति पैदा होने के आसार दिखाई दे रहे हैं.

    राष्ट्रपति अशरफ़ गनी की सरकार में उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के संविधान के अनुसार राष्ट्रपति की ग़ैरमौजूदगी, चले जाने, इस्तीफ़े या मृत्यु की सूरत में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाएंगे.

    उन्होंने कहा, "मैं इस समय देश के भीतर ही हूं और देश का वैध कार्यवाहक राष्ट्रपति हूं. मैं आम सहमति बनाने और समर्थन हासिल करने के लिए सभी नेताओं से संपर्क कर रहा हूं."

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    इससे पहले अमरुल्ला सालेह ने ट्विटर पर अफ़ग़ानिस्तान और तालिबान पर एक और ट्वीट किया था.

    उन्होंने लिखा है, "अफ़ग़ानिस्तान मामले पर अब राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ बहस करना बेकार है. उन्हें छोड़ दो. हम अफ़ग़ानों को ये साबित करना होगा कि अफ़ग़ानिस्तान, वियतनाम नहीं है और तालिबान कहीं से भी वियत कांग की तरह नहीं हैं."

    "अमेरिका/नेटो के विपरीत, हमने हौसला नहीं खोया है. आगे हम अपार संभावनाएं देख रहे हैं. फालतू की चेतावनियां अब ख़त्म हो गई हैं. आइए प्रतिरोध में शामिल हों."

  8. अफ़ग़ानिस्तान पर विशेष बैठक में पाकिस्तान भारत पर क्यों भड़का?

    शाह महमूद क़ुरैशी

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    सोमवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैश काफ़ी सक्रिय रहे. ट्विटर पर भी उन्होंने लगातार कई ट्वीट्स करते हुए अफ़ग़ानिस्तान की ताज़ा स्थिति पर पाकिस्तान का रुख़ स्पष्ट करने की कोशिश की.

    अशरफ़ ग़नी के नेतृत्व वाली अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और उनके कई शीर्ष अधिकारियों ने तालिबान के मुद्दे पर पाकिस्तान की भूमिका की आलोचना की थी.

    लेकिन अब अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण है और राजधानी काबुल भी उनके क़ब्ज़े में है. ऐसे में पाकिस्तान के रुख़ पर सबकी नज़र है कि वो आगे क्या करता है.

    सोमवार को पाकिस्तान की शांति और स्थिरता की भूमिका की बात करने वाले पाकिस्तान के विदेश मंत्री देर रात भारत पर भड़क उठे और उन्होंने ट्वीट करके भारत पर गंभीर आरोप लगाए.

  9. तालिबान के राज में क्या अल क़ायदा और आईएस का अड्डा बन सकता है अफ़ग़ानिस्तान?

    तालिबान के लड़ाके

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    अफ़ग़ानिस्तान के सुदूर कुनार प्रांत की एक घाटी में ऑनलाइन जिहादी चैट फ़ोरम पर चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा के समर्थक ख़ुशियाँ मना रहे हैं. ये लोग अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की जीत को 'ऐतिहासिक विजय' मान रहे हैं.

    अफ़ग़ानिस्तान से उन सुरक्षाबलों के बाहर जाने से पूरी दुनिया में फैले पश्चिम विरोधी जिदाही समूहों को बड़ा उत्साह मिला है, जिन्होंने आज से 20 साल पहले यहीं की ज़मीन पर तलिबान और अल-क़ायदा को अस्थायी रूप से खदेड़ दिया था.

    इसके बाद इराक़ और सीरिया में हार के बाद नई ज़मीन तलाश रहे कथित इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी संगठनों से जुड़े लड़ाकों के लिए अब अफ़ग़ानिस्तान के वो अनियंत्रित स्थान पैर जमाने का नया अड्डा बन सकते हैं, जहाँ तालिबान ने बीते दशक बिताए हैं.

    पश्चिमी देशों के सैन्य अधिकारी और राजनेता चेतावनी देते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में अल-क़ायदा पहले से कहीं अधिक ताक़त के साथ वापसी कर सकता है.

  10. तालिबान के ख़िलाफ़ जंग में अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों को कितना नुक़सान हुआ?

    अफ़ग़ानिस्तान, अमेरिका

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    इमेज कैप्शन, अमेरिका ने तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर करने के लिए उस पर पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को हमला बोला

    अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी ताकतों के लौटने के बाद देश पर फिर से तालिबान का शासन कायम हो गया है.

    इस मुक़ाम पर यह देखना दिलचस्प हो सकता है कि अमेरिका और नेटो के उसके सहयोगियों ने अफ़ग़ानिस्तान में 20 सालों तक चले सैन्य अभियानों पर कितना खर्च किया है?

    कितने तरह के सुरक्षा बल वहां थे?

    अमेरिका ने तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर करने के लिए उस पर पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को हमला बोला था. अमेरिका का आरोप था कि तालिबान ने अमेरिका में 9/11 का हमला कराने वाले ओसामा बिन लादेन और अल-क़ायदा के अन्य चरमपंथियों को अपने यहां पनाह दी थी.

    बाद में, वहां अमेरिकी सैनिकों की संख्या में लगातार वृद्धि होती चली गई. वॉशिंगटन ने तालिबान से लड़ने के लिए अफ़ग़ानिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश किया. इससे 2011 तक सैनिकों की संख्या बढ़कर क़रीब 1,10,000 तक पहुंच गई.

    हालांकि 2020 में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटकर केवल 4,000 रह गई थी. वैसे आधिकारिक आंकड़ों में, स्पेशल ऑपरेशन फ़ोर्सेज़ और अन्य अस्थायी इकाइयों का हिसाब हमेशा शामिल नहीं हो सकता.

  11. तालिबान शासन कैसा होता है, इस महिला से सुनिए

    वीडियो कैप्शन, तालिबान शासन कैसा होता है, इस महिला से सुनिए

    राहिला पिछले हफ्ते अफ़ग़ानिस्तान से इलाज कराने दिल्ली आई हैं. उनका पूरा परिवार उनके साथ है. वो अब वापस लौटना नहीं चाहती. वो भारत सरकार से अपने वीजा में एक्सटेंशन देने की मांग कर रही हैं.

    अफ़ग़ानिस्तान से भारत में इलाज कराने आए लोग, यहां पढ़ रहे छात्र और शरणार्थी कार्ड पर रह रहे लोग गुज़ारिश कर रहे हैं कि उन्हें यहीं रहने दिया जाए.

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का नियंत्रण होने के बाद भारत का वीज़ा मांगने की वालों की तादाद बहुत ज़्यादा बढ़ी है.

    भारत ने काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया है और राजदूत समेत अन्य कर्मचारियों को वापस बुला लिया है. भारत ने मंगलवार को अफ़ग़ान नागरिकों के लिए आपात वीजा की घोषणा की है.

    भारत के गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि भारत आने की इच्छा रखने वाले अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक वीज़ा के लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं.

    भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में फंसे हिंदू और सिखों को त्वरित वीज़ा देने और वहां से निकालने की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है.

    वहीं विदेश मंत्रालय के एक शीर्ष सूत्र ने बताया कि आपात वीज़ा धर्म के आधार पर नहीं होगा. उन्होंने कहा, 'अफ़ग़ानिस्तान में बहुत से लोगों ने भारत की मदद की है, यदि वो भारत आना चाहेंगे तो भारत उनकी मदद करेगा.'

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद से लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. सबसे ज़्यादा चिंता महिलाओं की सुरक्षा की है. तालिबान ने कहा है कि वो किसी को निशाना नहीं बनाएंगे लेकिन लोगों को तालिबान पर बहुत भरोसा नहीं है.

    मीरवाइज़ कहते हैं, 'हमने तालिबान के जवान लड़कियों को घर से उठाने की रिपोर्टें सुनी हैं. बदख़्शा और तख़र प्रांत से ऐसी रिपोर्टें आई हैं. हमें अपनी बेटी को लेकर बहुत डर है. अफ़ग़ानिस्तान तो हम नहीं लौटेंगे.'

  12. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 17 अगस्त 2021, सुनिए संदीप सोनी के साथ

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  13. अफ़ग़ानिस्तान का हाल देख तुर्की अपनी ईरान सीमा पर खड़ी करने लगा दीवार

    ईरान सीमा पर दीवार का निरीक्षण करते तुर्की के रक्षा मंत्री

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    अफ़ग़ानिस्तान से हज़ारों लोगों के पलायन के बीच तुर्की ने कहा है कि वो ईरान से लगी सीमा पर एक दीवार बना रहा है ताकि अफ़ग़ानिस्तान से शरणार्थियों की एक नई लहर को नियंत्रित किया जा सके.

    तुर्की के अख़बार हुर्रियत डेली के अनुसार तुर्की के रक्षा मंत्री हुलुसी अकार ने कहा, हम अपना काम तेज़ करेंगे और ये सुनिश्चित करेंगे कि हमारी सीमा को कोई लाँघ नहीं सकता.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार ये दीवार 295 किलोमीटर लंबी होगी जिसपर कँटीले तार लगे होंगे और उसके आगे खाई होगी.

    रक्षा मंत्री ने कहा, इसका एक बड़ा हिस्सा बन चुका है. लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर तक खाई खुद चुकी है. सीमा चौकियों और बेस एरिया में पर अतिरिक्त बंदोबस्त किया जा चुका है.

    संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर के अनुसार इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में चार लाख से ज़्यादा लोग अपने घरों से भाग चुके हैं.

    हालाँकि, अफ़ग़ानिस्तान से बहुत कम ही लोग बाहर निकल सके हैं. उसका अनुमान है कि दुनिया भर में 26 लाख अफ़ग़ान शरणार्थी हैं. इनमें 14 लाख पाकिस्तान में हैं और 10 लाख ईरान में.

    तुर्की में पहले से ही लगभग 37 लाख सीरियाई शरणार्थी रह रहे हैं. वहाँ बड़ी संख्या में अफ़ग़ान प्रवासी भी रह रहे हैं जो तुर्की के रास्ते यूरोप जाना चाहते हैं.

    तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने भी रविवार को एक समारोह में कहा था, "तुर्की अफ़ग़ान शरणार्थियों की एक नई लहर का सामना कर रहा है जो ईरान के रास्ते आ रहे हैं."

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  14. जो बाइडन ने तालिबान को क्या चेतावनी दी?

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    अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान की हालत के लिए उसके नेता ज़िम्मेदार हैं जो देश छोड़कर भाग गए.

    उन्होंने कहा कि तालिबान तेज़ी से अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा कर सका क्योंकि वहां के नेता देश छोड़ कर भाग गए और अमेरिकी सैनिकों द्वारा प्रशिक्षित अफ़ग़ान सैनिक उनसे लड़ना नहीं चाहते.

    उन्होंने कहा, "सच ये है कि वहां तेज़ी से स्थिति बदली क्योंकि अफ़ग़ान नेताओं ने हथियार डाल दिए और कई जगहों पर अफ़ग़ान सेना ने बिना संघर्ष के हार स्वीकार कर ली." जो बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के नए मिशन की भी घोषणा की.

    उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी नागरिकों और आम अफ़ग़ान नागरिकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए 6,000 अतिरिक्त सैनिक भेजे गए हैं.

  15. तालिबान पर चीन ने दिया बड़ा बयान

    वीडियो कैप्शन, तालिबान पर चीन ने दिया बड़ा बयान

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण और राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के देश छोड़ने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने वहाँ के हालात पर टिप्पणी की है.

    चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनियांग ने कहा है कि चीन अफ़ग़ानिस्तान के लोगों का अपने भाग्य और भविष्य का फ़ैसला करने के अधिकार का सम्मान करता है. उन्होंने कहा कि चीन अफ़ग़ानिस्तान के साथ दोस्ताना सहयोग विकसित करना चाहता है.

    हुआ चुनियांग ने कहा, "चीन अफ़ग़ानिस्तान में शांति और पुनर्निर्माण के लिए रचनात्मक भूमिका निभाना चाहता है."

    चीन के विदेश मंत्रालय ने ये भी उम्मीद जताई है कि तालिबान अपना पहले का वादा पूरा करते हुए वहाँ एक खुली और समावेशी इस्लामिक सरकार को बातचीत के माध्यम से स्थापित करेगा. चीन को ये भी भरोसा है कि तालिबान ज़िम्मेदारी पूर्ण कार्य करते हुए अफ़ग़ान नागरिकों और अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी मिशन की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा.

  16. तालिबान क्या है, क्या चाहता है?

    वीडियो कैप्शन, तालिबान क्या है, क्या चाहता है?

    अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी नेतृत्व वाली सेना ने तालिबान को साल 2001 में सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था.

    लेकिन धीरे-धीरे ये समूह खुद को मज़बूत करता गया और अब एक बार फिर से इसका दबदबा देखने को मिल रहा है.

    क़रीब दो दशक बाद, अमेरिका 11 सितंबर, 2021 तक अफ़ग़ानिस्तान से अपने सभी सैनिकों को हटाने की तैयारी कर रहा है.

    वहीं तालिबानी लड़ाकों का नियंत्रण क्षेत्र बढ़ता जा रहा है.

  17. 24 घंटे में बदली तस्वीर, क्या बोला तालिबान?

    वीडियो कैप्शन, 24 घंटे में बदली तस्वीर, क्या बोला तालिबान?

    अमेरिकी सैनिकों के अफ़ग़ानिस्तान से बाहर जाने के फ़ैसले के बाद तेज़ी से पैर पसारते हुए तालिबान ने महज़ कुछ सप्ताह के भीतर देश की राजधानी काबुल पर कब्ज़ा कर लिया है. इसके बाद राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी देश छोड़ कर भाग गए हैं और तालिबान ने कहा है कि बीस साल के इंतज़ार के बाद वो सत्ता के बेहद क़रीब पहुंचा है.

    तालिबान ने यहां एक के बाद एक शहरों पर कब्ज़ा किया. कई शहरों के गर्वनरों ने उनके सामने खुद की आत्मसपर्मण कर दिया और उसके लड़ाकों को कोई संघर्ष नहीं करना पड़ा. इस बीच कई देश काबुल में मौजूद अपने दूतावासों से अपने राजनयिकों और नागरिकों को निकालने की कोशिशें तेज़ कर रहे हैं.

    राजधानी में अफ़रा-तफ़री का माहौल देखने को मिल रहा है और लोग जल्द से जल्द देश छोड़ कर भागने की कोशिश कर रहे हैं. तालिबान ने एक नया वीडियो जारी कर कहा है कि अब अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की ज़िंदगी बेहतर करने का समय आ गया है.

    तालिबान के गठन में शामिल रहे मुल्ला बरादर अखुंद ने वीडियो में कहा है, "अब आज़माइश का वक़्त आ गया है, हम सारे देश में अमन लाएँगे, हम लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाने के लिए जहाँ तक बन पड़ेगा प्रयास करेंगे. जिस मुक़ाम पर हैं उसकी हमें उम्मीद नहीं थी."

  18. चीन ने अमेरिका पर कसा तंज, अफ़ग़ानिस्तान की वियतनाम से तुलना

    चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग

    इमेज स्रोत, REUTERS/Tingshu Wang

    इमेज कैप्शन, चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग

    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान के दाखिल होने के बाद शहर छोड़ने को लेकर जिस तरह की अफ़रा-तफ़री का मौहाल बना, उसकी तस्वीरें दुनिया भर में देखी गईं.

    काबुल एयरपोर्ट पर बने हालात के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को कई हलकों से आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

    इन सब के बीच अब चीन ने वियतनाम युद्ध की तस्वीरों के जरिए अमेरिका पर निशाना साधा है.

    चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने मंगलवार की दोपहर दो ट्वीट किए, जिनका इशारा अमेरिका को उसकी नाकामी की याद दिलाने की तरफ़ था.

    हाल के दिनों में चीन ने शिनजियांग, मानवाधिकार और कुछ दूसरे मुद्दों पर कभी इशारों में तो कभी साफ़ लफ़्जों में अमेरिकी आलोचनाओं का कुछ इसी तरह से जवाब दिया है.

  19. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बाद रूस से कैसे होंगे रिश्ते?

    पुतिन और और तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन

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    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान का क़ब्ज़ा होने के बाद भारत समेत अधिकतर देशों ने वहाँ से अपने दूतावास कर्मचारियों को बाहर निकालना शुरू कर दिया है.

    लेकिन केवल तीन ऐसे हैं जिनके दूतावास वहाँ अब भी ख़ुले हैं. ये देश हैं - रूस, चीन और पाकिस्तान.

    चीन की तरह तालिबान ने रूस को यह आश्वासन दिया कि वो अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल अपने पड़ोसियों पर हमला करने के लिए नहीं होने देगा.

    पाकिस्तान पर हमेशा से तालिबान का साथ देने का आरोप ख़ुद अफ़ग़ान सरकार लगाती रही है.

  20. आज का कार्टून: अफ़ग़ानिस्तान में दूसरी लहर

    कार्टून

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के कब्जे पर आज का कार्टून.