बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान के हालात के लिए वहां के नेताओं को ठहराया ज़िम्मेदार
अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने राष्ट्र को संबोधित किया है और कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है.
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मोहम्मद शाहिद, विभुराज, अपूर्व कृष्ण, मानसी दाश and अनंत प्रकाश
ब्रेकिंग न्यूज़, अमेरिका ने काबुल एयरपोर्ट को क़ब्ज़े में लिया, मची अफ़रातफ़री
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तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर क़ब्ज़े के एक दिन बाद वहाँ के एयरपोर्ट पर ज़बरदस्त अफ़रातफ़री मच गई है जिसके बाद अमेरिकी सेना ने वहाँ का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है.
अमेरिकी सेना ने अपने और अपने सहयोगी देशों के कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए एयरपोर्ट परिसर और एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल को हाथ में लिया है.
लेकिन काबुल के हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सभी आम व्यावसायिक उड़ानें स्थगित कर दी गई हैं जिससे वहाँ सैकड़ों अफ़ग़ान और दूसरे देशों के नागरिक फँस गए हैं.
वहाँ से आ रहे वीडियो में दिख रहा है कि लोग किसी स्थानीय बस अड्डे की तरह दौड़कर एयरपोर्ट और विमानों की ओर भाग रहे हैं.
अमेरिका ने कहा है कि उसने अपने सभी दूतावास कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए एयरपोर्ट पर बुला लिया है.
उसने अपने लोगों को निकालने के लिए 6,000 सैनिकों को भी अफ़ग़ानिस्तान भेजा है.
ब्रेकिंग न्यूज़, काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों ने हवा में दाग़ी गोलियाँ, उड़ानें स्थगित
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अफ़ग़ानिस्तान के काबुल एयरपोर्ट पर सोमवार सुबह अमेरिकी सैनिकों के हवा में गोलियाँ चलाने की ख़बर आ रही है.
एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि अमेरिकी सैनिकों को काबुल एयरपोर्ट पर हवा में गोलियां चलानी पड़ीं
ताकि आम लोगों को हवाई जहाज़ में चढ़ने से रोका जा सका.
इस अधिकारी ने कहा है, “भीड़ अनियंत्रित हो गई थी. और ये फायरिंग सिर्फ भीड़ को
तितर-बितर करने के लिए की गयी है.”
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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो क्लिप्स में गोलियाँ चलने की आवाज़ सुनी जा सकती है.
इसके साथ ही लोग बेबसी में हवाई जहाजों के आसपास और सीढ़ियों से चढ़ने की कोशिश करते देखे जा सकते हैं.
अमेरिकी सैन्य टुकड़ियां एयरपोर्ट पर मौजूद हैं जहां वे कथित रूप से सैन्य विमानों से दूतावास कर्मचारियों को निकालने को प्राथमिकता दे रहे हैं.
अमेरिका ने इससे पहले कहा था कि उसने अपने सभी दूतावास कर्मचारियों को एयरपोर्ट पहुंचा दिया है.
इस बीच समाचार एजेंसियों के मुताबिक़ काबुल एयरपोर्ट पर व्यापारिक उड़ानों को स्थगित कर दिया गया है.
अफ़ग़ान टीवी चैनल टोलो न्यूज़ के अनुसार काबुल के हामिद करज़ई इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने एक बयान में लोगों से एयरपोर्ट पर भीड़ ना लगाने की अपील की है.
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काबुल नहीं
जाएगी एयर इंडिया की फ़्लाइट
इस बीच भारत की हवाई सेवा एयर इंडिया ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा
है कि काबुल का एयरस्पेस बंद होने की वजह से अब एयर इंडिया की फ़्लाइट काबुल नहीं जाएगी.
इससे पहले एयर इंडिया ने बताया था कि दोपहर 12:30 जाने वाले
फ़्लाइट शाम 8:30 तक जाएगी.
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एयर इंडिया ने बताया
है कि एआई 126 शिकागो – दिल्ली फ़्लाइट को अफ़ग़ान एयरस्पेस बंद होने की वजह से गल्फ़
एयरस्पेस की तरफ डायवर्ट कर दिया गया है.
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अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के नेतृत्व वाली सरकार गिर चुकी है और मिल रही ख़बरों के अनुसार अशरफ़ ग़नी उज़्बेकिस्तान भाग गए हैं.
दूसरी तरफ पूर्व राष्ट्रपति रहे हामिद करज़ई ने तालिबान को शांतिपूर्वक सत्ता हस्तांतरण के लिए बातचीत की अगुवाई की पेशकश की है.
काबुल में तालिबान का कब्ज़ा होने के बाद आम नागारिक और विदेशी नागरिक देश छोड़ कर जाने की कोशिश कर रहे हैं. रविवार रात से काबुल एयरपोर्ट पर भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और वहां अफ़रा-तफ़री का माहौल है.
काबुल के हामिद करज़ई एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों को रद्द कर दिया गया है. अमेरिका सैन्य उड़ानों के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान में फंसे अपने दूतावास के कर्मचारियों को निकाल रहा है. इससे पहले अमेरिका ने अपने दूतावास के सभी कर्मचारियों को दूतावास से निकाल कर एयरपोर्ट पहुंचा दिया था.
60 से अधिक देशों ने एक साझा बयान जारी कर अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा और नागरिक व्यवस्था को तुरंत बहाल करने की अपील की है और तालिबान से गुज़ारिश की है कि जो लोग वहां से बाहर जाना चाहते हैं उनका रास्ता न रोका जाए.
देश के कुछ हिस्सों में महिलाओं के कपड़े पहनने और काम करने को लेकर लगाई जा रही पाबंदियों के बीच कार्यकर्ताओं ने अफ़ग़ान महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई है.
तालिबान दिखा रहा उदार चेहरा, मुजाहिदीनों से कहा, 'अवाम को तंग ना किया जाए'
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में रहने वाली एक छात्रा आयशा खुर्रम में ट्वीट किया कि सोमवार सवेरे उनके घर के सामने चीख़ने-चिल्लाने और गोलियों की आवाज़ों के कारण उनकी नींद टूटी.
उन्होंने कहा, ख़ुद को मुजाहिदीन कहने वाले कुछ लड़ाके "घर-घर जा रहे थे और लोगों से उनका सामान और कार छीन रहे थे," लेकिन तालिबान के अधिकारियों के आने की ख़बर सुन कर भाग गए.
काबुल पर कब्ज़ा करने के बाद एक बार फिर तालिबान ने कहा है कि उनसे अपने लड़ाकों को आदेश दिया है कि वो अफ़ग़ान नागरिकों को परेशान न करें.
काबुल पर जीत के बीच तालिबान पहले के मुक़ाबले उदार चेहरा दिखाने की कोशिश कर रहा है.
तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सुहैल शाहीन ने ट्वीट कर बताया है "तालिबान ने एक बार फिर मुजाहिदीनों से कहा है कि कोई भी बिना अनुमति के किसी के घर के भीतर प्रवेश ना करे. मुजाहिदीनों की ज़िम्मेदारी है कि वो लोगों के जीवन, संपत्ति और उनके सम्मान को हानि न पहुंचाएं."
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अफ़ग़ान महिलाओं ने कहा 'टूट गए हमारे सपने'
विकास पांडे
बीबीसी संवाददाता
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इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर
बल्ख़ प्रांत की ज़ेब हनीफ़ा ने साल 2013 में कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर पीआर कंसल्टेंट और लेखिका के तौर पर काम करना शुरू किया.
वो कहती हैं कि उनकी पहली नौकरी ने उन्हें "जैसे नए पंख दे दिए थे."
उनके मुताबिक़ नौकरी करते हुए उन्होंने कुछ पैसे बचाए और उससे किसी दूसरे देश की अकेले यात्रा की जो उनके लिए गर्व का मौक़ा था. उनकी मां कभी अपने शहर से बाहर नहीं गई थीं, उनके लिए भी ये गर्व करने का अवसर था.
वो कहती हैं कि नौकरी में उनकी तरक्क़ी हुई और उन्हें नई बातें सीखने को मिलीं और उनके लिए ये अनुभव बेहद बढ़िया रहा है.
वो कहती हैं, "ऐसा लग रहा था मेरी मां मेरे साथ अपने सपनों को जी रही थीं. लेकिन उन्हें बार-बार ये डर सता रहा था कि कहीं कुछ गड़बड़ न हो और उन्हें संघर्ष के माहौल में न जीना पड़े. मैं अब समझ सकती हूं कि उनके लिए जीवन कैसा रहा होगा."
कोरोना महामारी पहले हनीफ़ा अपनी मां को विदेश की यात्रा पर ले जाने की योजना बना रही थीं. अब वो कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि उन्हें फिर ऐसा मौक़ा मिल पाएगा या नहीं.
वो कहती हैं, "मैं टूट गई हूं. मुझे नहीं पता कि अब भविष्य में मैं कभी काम कर पाऊंगी या नहीं, या फिर अपनी मर्ज़ी से कुछ कर सकूंगी या नहीं. मेरी तरह कई और महिलाएं हैं जिनके सपने टूट गए हैं. बेहतर भविष्य के हमारे सपने चकनाचूर हो गए हैं."
*सुरक्षा के लिहाज़ से नाम बदला गया है.
अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को लेकर यूएन चिंतित
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेश ने तालिबान और दूसरे समूहों से अपील की है कि वो आम नागरिकों की जान बचाने की कोशिश करें.
संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि आने वाले समय में यहां महिलाओं के अधिकारों को लेकर यूएन चिंतित है. उन्होंने कहा कि यूएन अफ़ग़ानिस्तान में शांति चाहता है.
एंटोनियो गुटरेश ने एक ट्वीट कर कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में जारी संघर्ष और मानवाधिकार के गंभीर उल्लंघन की ख़बरों के वहां से हज़ारों लोग पलायन कर रहे हैं. यहां सालों बाद महिलाओं और लड़कियों को मिले मानवाधिकारों को बचाए जाने की ज़रूरत है.
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इधर ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि वो चाहते हैं कि दूसरे मित्र देश जल्दबाज़ी में तालिबान सरकार को मान्यता न दें.
अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि तालिबान के हाथों सत्ता के हस्तातंरण के लिए एक कोऑर्डिनेशन काउंसिल का गठन किया गया है जिसमें उनके अलावा तालिबान के साथ शांति वार्ता में शामिल अब्दुल्ला अब्दुल्ला और 80 के दशक में मुजाहिदीनों की अगुवाई करने वाले गुलबुद्दीन हिकमतयार शामिल हैं.
एक ज़माने में गुलबुद्दीन हिकमतयार को 'बुचर ऑफ़ काबुल' यानी काबुल का कसाई कहा जाता था. अफ़ग़ानिस्तान के इतिहास में वे सबसे विवादित हस्तियों में से एक हैं.
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इमेज कैप्शन, गुलबुद्दीन हिकमतयार
रविवार को हामिद करज़ई ने ट्वीट पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें वो अपनी तीन बेटियों के साथ खड़े नज़र आ रहे हैं. वीडियो में उन्होंने अफ़ग़ान सरकारी सेना और तालिबान से आम नागरिकों के हितों की रक्षा करने की अपील की.
बीबीसी फ़ारसी सेवा के साथ एक बातचीत में हामिद करज़ई ने कहा कि राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के देश छोड़ कर जाने से एक तरह का 'खालीपन' बन गया है.
उन्होंने कहा कि उन्होंने पूर्व नेताओं से संपर्क कर इस बात पर चर्चा की है कि अब आगे क्या किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि "देश का अगला प्रशासन नागरिकों के समर्थन से चलेगा."
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तालिबान आख़िर हैं कौन?
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अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी नेतृत्व वाली सेना ने तालिबान को साल 2001 में सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया था. लेकिन धीरे-धीरे ये समूह खुद को मज़बूत करता गया और अब एक बार फिर से इसने लगभर पूरे अफ़गानिस्तान पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
तालिबान ने अमेरिका के साथ साल 2018 में बातचीत शुरू कर दी थी.
फरवरी, 2020 में दोहा में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ जहां अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को हटाने की प्रतिबद्धता जताई और तालिबान अमेरिकी सैनिकों पर हमले बंद करने को तैयार हुआ.
समझौते में तालिबान ने अपने नियंत्रण वाले इलाक़े में अल क़ायदा और दूसरे चरमपंथी संगठनों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने की बात भी कही और राष्ट्रीय स्तर की शांति बातचीत में शामिल होने का भरोसा दिया था.
लेकिन समझौते के अगले साल से ही तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के आम नागरिकों और सुरक्षाबलों को निशाना बनाना जारी रखा.
अब जब अमेरिकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान से विदा होने की तैयारी कर रहे हैं तब तालिबान अफ़गानिस्तान में हावी हो गया है.
कब हुई थी तालिबान की शुरुआत
पश्तो जुबान में छात्रों को तालिबान कहा जाता है. नब्बे के दशक की शुरुआत में जब सोवियत संघ अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुला रहा था, उसी दौर में तालिबान का उभार हुआ.
माना जाता है कि पश्तो आंदोलन पहले धार्मिक मदरसों में उभरा और इसके लिए सऊदी अरब ने फंडिंग की. इस आंदोलन में सुन्नी इस्लाम की कट्टर मान्यताओं का प्रचार किया जाता था.
जल्दी ही तालिबानी अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच फैले पश्तून इलाक़े में शांति और सुरक्षा की स्थापना के साथ-साथ शरिया क़ानून के कट्टरपंथी संस्करण को लागू करने का वादा करने लगे थे.
इसी दौरान दक्षिण पश्चिम अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का प्रभाव तेजी से बढ़ा. सितंबर, 1995 में उहोंने ईरान की सीमा से लगे हेरात प्रांत पर कब्ज़ा किया. इसके ठीक एक साल बाद तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी क़ाबुल पर कब्ज़ा जमाया.
ब्रेकिंग न्यूज़, काबुल दूतावास के सभी कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला गया- अमेरिका
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि काबुल में मौजूद अमेरिकी दूतावास के सभी कर्मचारियों को वहां से सुरक्षित निकाल कर हामिद करज़ई हवाई अड्डे तक पहुंचा दिया गया है.
इसके बाद अब अमेरिका छोटे-छोटे समूहों में दूतावास के सभी कर्मचारियों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है.
अमेरिका ने इस प्रक्रिया में मदद के लिए 6,000 सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान भेजा है.
मिल रही रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सैनिकों को हवाई अड्डे के बाहर पहरे पर तैनात किया गया है.
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तालिबान के कब्ज़े के बाद काबुल की पहली सुबह में परेशानी की गंध
बेहद तेज़ी से बदलते घटनाक्रम वाले रविवार के बाद अब अफ़ग़ानिस्तान के लागों के सामने एक नई दुनिया और नई चुनौतियां हैं.
तालिबान के राजधानी काबुल के बाहरी इलाक़ों में पहुंचने और फिर कब्ज़ा करनेे के बाद रविवार पूरे दिन और रात राजधानी में अफ़रा-तफ़री का माहौल रहा.
तालिबान की सत्ता में नहीं रहना चाह रहे हज़ारों लोग देश से बाहर जाने की कोशिश में काबुल हवाई अड्डे का रुख़ करते दिखे.
कई लोगों ने देश में तेज़ी से लोकतंत्र के पतन पर दुख जताया.
बीबीसी संवाददाता कवून ख़ामोश ने ट्वीट कर जानकारी दी है, "ऐसा लगता है कि काबुल परेशान चेहरों, हताश युवाओं और ऐसे दुखी परिवारों का गढ़ बन गया है जो काबुल से बाहर जाना चाहते हैं. उनके एक हाथ में फ़ोन है तो दूसरे हाथ के नाखून दांतों तले हैं."
कई महिलाओं ने देश में अपने अनजान भविष्य को लेकर चिंता जताई है.
अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों के एक बोर्डिंग स्कूल की प्रमुख शबाना बासिज-रसीख ने ट्वीट किया है, "मुझे लग रहा है कि मेरे दिल पर साढ़े तीन करोड़ (देश की आबादी) का बोझ पड़ गया है."
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काबुल पर तालिबान का कब्ज़ा: अफ़ग़ानिस्तान में अब तक क्या-क्या हुआ
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रविवार को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल से महज़ कुछ घंटों की दूरी पर मौजूद जलालाबाद शहर पर कब्ज़ा करने के बाद तालिबान के लड़ाके क़ाबुल के बाहरी इलाक़ों तक पहुंच गए.
इसके बाद तालिबान ने कहा कि वो अफ़ग़ान सरकार के साथ शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण को लेकर बातचीत कर रही है और जब तक बातचीत जारी है उसके लड़ाके राजधानी में प्रवेश नहीं करेंगे. तालिबान की तरफ़ से जारी किए गए अधिकारिक बयान में कहा गया कि काबुल एक घनी आबादी वाला शहरी इलाक़ा है जहां नागरिक आबादी को ख़तरा हो सकता है.
इसी दौरान अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक संदेश पोस्ट कर नागरिकों से भरोसा दिलाया कि राजधानी में स्थिति नियंत्रण में है.
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अफ़ग़ानिस्तान में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए 5,000 अतिरिक्त जवान काबुल भेजे. दूसरी तरफ़ अमेरिका अपने नागरिकों और दूतावास कर्मचारियों को भी काबुल से तेज़ी से निकालने के काम में जुट गया.
अफ़ग़ानिस्तान की महिला सांसद फ़रज़ाना कोचाई ने बीबीसी से कहा है कि लोग राजधानी काबुल छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन भागने के लिए कोई जगह ही नहीं बची है. उन्होंने बीबीसी से कहा कि तालिबान के नियंत्रण में आने वाले इलाक़ों में महिलाओं ने काम पर जाना बंद कर दिया है. वो स्कूल या दफ्तर नहीं जा रही हैं.
बामियान प्रांत भी बिना प्रितरोध के तालिबान नियंत्रण में आया ताजा रिपोर्टों के मुताबिक तालिबान ने बिना किसी ख़ास प्रतिरोध के बामियान प्रांत पर भी कब्ज़ा कर लिया है. तालिबान ने 20 साल पहले यहां मौजूद बुद्ध की प्रसिद्ध मूर्ति को बारुद से उड़ा दिया था.
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अफ़ग़ानिस्तान के कार्यवाहक गृह मंत्री अब्दुल सत्तार मीरज़कवाल ने टोलो न्यूज़ को दिए एक बयान में कहा है कि सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण तरीके से होगा और अंतरिम सरकार बनेगी. उन्होंने कहा कि काबुल पर हमला नहीं होगा.
तालिबान ने काबुल के बाहरी इलाक़े में मौजूद बगराम एयरफ़ील्ड और जेल को क़ब्ज़े में लेने का दावा किया. इसी सैन्य हवाई अड्डे से अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने बीस साल चले युद्ध को संचालित किया था.
इसी बीच ब्रिटेन सकार ने अफ़ग़ानिस्तान के छात्रों की स्कॉलरशिप रोक दी और कहा कि अगले महीने से ब्रिटेन में स्कॉलरशिप पर पढ़ने जा रहे छात्रों का अब दाख़िला नहीं हो पाएगा. हालांकि इसके कुछ घंटों बाद ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि ऐसे अफ़ग़ान छात्रों की मदद के लिए उन्हें वीज़ा देने की कोशिश की जाएगी. सरकार के इस फ़ैसला का असर 35 अफ़ग़ान छात्रों पर पड़ेगा, जिनमें से लगभग आधी महिलाएं हैं.
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भारतीय समयानुसार देर शाम तक अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और उपराष्ट्रपति अमीरुल्लाह सालेह ने देश छोड़ दिया. दूसरी तरफ तालिबान ने एक बयान जारी कर कहा कि उसके लड़ाके अधिकारिक तौर पर काबुल के इलाक़ों में दाख़िल हो रहे हैं और दफ्तरों के कब्ज़े ले रहे हैं. तालिबान के क़ब्ज़े में आने और अफ़गान राष्ट्रपति के देश छोड़ने के बाद वहाँ कई जगहों पर गोलियों की आवाज़ सुनी गई.
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि अमेरिका ने अफ़गानिस्तान स्थित अपना दूतावास काबुल एयरपोर्ट पर शिफ़्ट कर दिया है. दूतावास की इमारत पर लगा झंडा भी उतारकर एयरपोर्ट ले जाया गया है. बाद में इसे अफ़गानिस्तान से हटा लिया जाएगा.
इसके बाद तालिबान ने दावा किया कि उसने काबुल में राष्ट्रपति भवन को अपने नियंत्रण में ले लिया है. इसके कुछ घंटों बाद अल जज़ीरा ने एक वीडियो जारी किया जिसमें तालिबान के लड़ाके राष्ट्रपति भवन के भीतर नज़र आए. तालिबान ने ये भी दावा किया कि उसने काबुल के कई ज़िला केंद्रों में अपनी पहुंच बना ली है और उनमें से 11 को अपने नियंत्रण में ले लिया है.
काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सभी कमर्शियल उड़ानों को निलंबित कर दिया गया. वहां से केवल सैन्य विमानों के संचालन की अनुमति दी गई.
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अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने एक वीडियो फ़ेसबुक पर जारी करते हुए अपने प्रशंसकों से कहा है कि वो काबुल में ही रहेंगे. अमेरिका के देश में सैन्य अभियान के बाद 2001 में करज़ई देश के नेता बने थे.
अफ़ग़ानिस्तान से भागने के बाद राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि देश में रक्तपात रोकने के लिए उन्होंने यह क़दम उठाया है.
अफ़ग़ानिस्तान को लेकर चौतरफ़ा आलोचनाओं से घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्तीफ़े की मांग की है. उन्होंने दावा किया कि अगर वो राष्ट्रपति होते तो अमेरिका का वहां से निकलना ‘बेहद अलग और बहुत सफलतापूर्वक होता.’ वहीं, बाइडन प्रशासन ने उन पर जवाबी हमला करते हुए कहा है कि अमेरिका-तालिबान सौदा ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल में ही हुआ था.
तालिबान ने कहा- अफ़ग़ानिस्तान में 'युद्ध ख़त्म हुआ'
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तालिबान के एक प्रवक्ता ने रविवार को समाचार चैनल अल जज़ीरा से कहा है कि ‘अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध समाप्त हो गया है’.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अल जज़ीरा को दिए एक इंटरव्यू में तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम ने कहा कि संगठन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते रखना चाहता है और 'उनके साथ किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है.'
अल जज़ीरा ने अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति भवन में तालिबान के लड़ाकों का वीडियो भी जारी किया है.
मोहम्मद नईम ने कहा कि तालिबान अलग-थलग हो कर नहीं रहना चाहता. उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में किस तरह की शासन व्यवस्था होगी इसके बारे में जल्द स्पष्ट हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि संगठन शरिया क़ानून के तहत महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है.
मोहम्मद नईम ने कहा कि तालिबान किसी के मामले में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाएगा बशर्ते कोई अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में हस्तक्षेप न करे.
उन्होंने कहा, “20 साल के इंतज़ार के बाद हम उस मुक़ाम तक पहुंच गए हैं जहां हम पहुंचना चाहते थे. हम अपने देश की स्वतंत्रता और अपने लोगों की स्वतंत्रता चाहते थे. न हम किसी पर निशाना साधने के लिए अपनी सरज़मीन का इस्तेमाल होने देंगे और न ही किसी को नुक़सान पहुंचाना चाहते हैं."
उन्होंने कहा कि तालिबान नहीं सोचता है कि विदेशी सेनाएं "अफ़ग़ानिस्तान में अपने नाकाम अनुभव को दोहराएंगी."
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रॉयटर्स के अनुसार रविवार को तालिबान के राजधानी काबुल में प्रवेश करने के बाद राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी देश छोड़ कर भाग गए हैं.
उन्होंने कहा कि रक्तपात न हो इसलिए उन्होंने ये फ़ैसला लिया है.
मोहम्मद नईम ने इंटरव्यू में कहा कि अशरफ़ ग़नी के देश छोड़ने की उम्मीद "उनके क़रीबी लोगों ने भी नहीं की थी."
वहीं, रविवार को दिन में अल जज़ीरा ने तस्वीरें जारी की थीं जिनमें तालिबान राष्ट्रपति भवन के अंदर नज़र आए थे.
तालिबान का दावा है कि उन्होंने राजधानी के 11 ज़िला केंद्रों का नियंत्रण संभाल लिया है.
तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि राजधानी में उन्होंने किसी दूतावास या किसी मुख्यालय को निशाना नहीं बनाया है. जो राजनयिक या आम नागरिक यहां से जाना चाहते हैं तालिबान उन्हें सुरक्षित बाहर जाने का रास्ता देगा.
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