बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान के हालात के लिए वहां के नेताओं को ठहराया ज़िम्मेदार

अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने राष्ट्र को संबोधित किया है और कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है.

लाइव कवरेज

मोहम्मद शाहिद, विभुराज, अपूर्व कृष्ण, मानसी दाश and अनंत प्रकाश

  1. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े का भारत पर क्या होगा असर?

    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर जिस तेज़ी से तालिबान का क़ब्ज़ा हुआ है, इसका अंदाज़ा शायद कई देशों और ख़ुद अफ़ग़ानिस्तान की सरकार को नहीं थी.

    नहीं तो एक दिन पहले अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी देशवासियों को वीडियो संदेश से संबोधित कर के अगले ही दिन देश छोड़कर नहीं जाते. न ही अमेरिका अपात स्थिति में अपने दूतावास को बंद कर लोगों को आनन-फानन में यूँ निकलाता.

    ऐसे में अफ़ग़ानिस्तान की ग़नी सरकार और अमेरिका का साथी भारत भी आज ख़ुद को अजीब स्थिति में पा रहा है.

    जहाँ एक ओर चीन और पाकिस्तान, तालिबान से अपनी दोस्ती के चलते काबुल के नए घटनाक्रम को लेकर थोड़े आश्वस्त दिख रहे हैं, वहीं भारत फ़िलहाल अपने लोगों को आनन-फानन में काबुल से निकालने में लगा हुआ है.

    तालिबान को आधिकारिक तौर पर भारत ने कभी मान्यता नहीं दी, लेकिन इस साल जून में दोनों के बीच 'बैकचैनल बातचीत' की ख़बरें भारतीय मीडिया में छाई रहीं. भारत सरकार ने "अलग-अलग स्टेकहोल्डरों" से बात करने वाला एक बयान ज़रूर दिया, ताकि मामले को तूल देने से रोका जा सके.

  2. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 16 अगस्त 2021, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ

    छोड़िए YouTube पोस्ट
    Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

    पोस्ट YouTube समाप्त

  3. इमरान ख़ान और अर्दोआन ने तालिबान की बढ़त के बाद किस बात पर की चर्चा

    तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप अर्दोआन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप अर्दोआन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान (फ़ाइल)

    रविवार को तालिबान जिस तरह से अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल तक पहुँच रहा था, उसपर पाकिस्तान और तुर्की की भी निगाह टिकी थी.

    और रविवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को फ़ोन भी लगाया.

    रविवार को अर्दोआन ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी के साथ भी चर्चा की जो तुर्की की यात्रा पर हैं.

    इमरान ख़ान ने बाद में बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति अर्दोआन से कहा कि पाकिस्तान राजनयिकों और दूतावास कर्मचारियों तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने में पूरा सहयोग करेगा.

    उन्होंने ये भी कहा कि बदलती स्थिति पर सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी. ये भी जानकारी दी गई कि दोनों नेता इस मीटिंग के बाद दोबारा विचार विमर्श करेंगे.

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    तुर्की-पाकिस्तान दोनों जगह हैं अफ़ग़ान शरणार्थी

    राष्ट्रपति अर्दोआन ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति की मौजूदगी में एक समारोह में कहा, "तुर्की अफ़ग़ान शरणार्थियों की एक नई लहर का सामना कर रहा है जो ईरान के रास्ते आ रहे हैं."

    उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र में जो समस्या है उसका समाधान पाकिस्तान के सहयोग से ही संभव है. अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता क़ायम करने में पाकिस्तान की भूमिका अहम है."

    वहीं पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने कहा, "पिछले तीन से चार दशक से लाखों अफ़ग़ान शरणार्थी पाकिस्तान में रह रहे हैं, और लाखों शरणार्थी तुर्की में हैं. ये दिखाता है कि हम दोनों देशों और हमारे लोगों का दिल बड़ा है."

    संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर के अनुसार इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में चार लाख से ज़्यादा लोग अपने घरों से भाग चुके हैं.

    हालाँकि, अफ़ग़ानिस्तान से बहुत कम ही लोग बाहर निकल सके हैं. उसका अनुमान है कि दुनिया भर में 26 लाख अफ़ग़ान शरणार्थी हैं. इनमें 14 लाख पाकिस्तान में हैं और 10 लाख ईरान में.

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

  4. तालिबान का सैन्य ढांचा कैसा है?

    तालिबान का सैन्य ढांचा
  5. तालिबान के कब्ज़े पर इमरान ख़ान ने कहा- ग़ुलामी की ज़ंजीरें टूटीं

    इमरान ख़ान (फ़ाइल तस्वीर)

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, इमरान ख़ान (फ़ाइल तस्वीर)

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने काबुल पर तालिबान के नियंत्रण की हिमायत करते हुए कहा है कि अफ़ग़ान लोगों ने "गु़लामी की बेड़ियाँ तोड़" दी हैं.

    इमरान ख़ान ने सांस्कृतिक उपनिवेशवाद के बारे में एक भाषण देते हुए कहा, "अभी जो हो रहा है अफ़ग़ानिस्तान में, वहाँ ग़ुलामी की ज़ंजीरें तोड़ दीं उन लोगों ने, मगर जो ज़हनी ग़ुलामी होती है वो नहीं टूटती."

    इमरान ख़ान ने अपने भाषण पाकिस्तान में शिक्षा की स्थिति और अंग्रेज़ी शिक्षा की आलोचना करते हुए ये टिप्पणी की.

    उन्होंने अपने भाषण में कहा, ”आप जब किसी की संस्कृति अपनाते हैं, तो आप मानने लगते हैं कि वो संस्कृति आपसे ऊँची है और आख़िर में आप इसके ग़ुलाम हो जाते हैं.”

    इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ज़हनी तौर पर ग़ुलाम होना वास्तव में गु़लाम होने से ज़्यादा बुरा है जिससे कि ग़ुलाम दिमाग़ बड़े फ़ैसले नहीं ले सकते.

    पाकिस्तान उन तीन देशों में से एक था जिन्होंने 1996 में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सरकार को मान्यता दी थी.

    पाकिस्तान की बड़ी धार्मिक पार्टियों जमात-ए-इस्लामी और जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को उनकी हाल की कामयाबियों के लिए बधाई दी है और उन्हें पूरा सहयोग देने की बात की है.

    इन पार्टियों के कुछ सदस्यों ने तालिबान की बढ़त से ख़ुश होकर मिठाईयाँ भी बाँटीं.

    अफ़ग़ानिस्तान में काबुल पर तालिबान के कब्ज़े के एक दिन बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने अफ़ग़ान नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात की है.

    उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "आज मोहम्मद युनूस क़ानूनी की अगुआई में अफ़ग़ान नेताओं के एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल से एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय में मुलाक़ात हुई, इन सभी नेताओं की अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका होगी."

    शाह महमूद क़ुरैशी ने साथ ही ताज़ा स्थिति पर अपने देश का रुख़ भी स्पष्ट किया.

    ट्विटर पर कहा, "पाकिस्तान का इस मसले पर रुख साफ़ है. हम ये मानते हैं कि बातचीत से राजनीतिक समझौता ही आगे का रास्ता है. हम अफ़ग़ानिस्तान में लगातार गृह युद्ध नहीं देख सकते हैं. हम अफ़ग़ान लोगों को केवल जीवित नहीं बल्कि फलते-फूलते देखना चाहते हैं."

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

  6. अफ़ग़ानिस्तान मिलिट्री का विमान उज़्बेकिस्तान में दुर्घटनाग्रस्त: उज़्बेक रक्षा मंत्रालय

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    उज़्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि अफ़ग़ानिस्तान की मिलिट्री का एक विमान उसकी सीमाओं के भीतर क्रैश हो गया है.

    उज़्बेक मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगने वाले उज़्बेकिस्तान के सुर्खोंडारयो प्रांत में ये घटना रविवार रात को हुई थी.

    उज़्बेक रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता बाखरोम ज़ुल्फिकारोव ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "ये सैनिक विमान उज़्बेकिस्तान की सीमा अवैध रूप से पारकर के भीतर चला आया था. घटना की जांच की जा रही है."

  7. अफ़ग़ानिस्तान से हिंदुओं, सिखों को जल्द भारत लाने की माँग, सरकार ने दिया भरोसा

    काबुल से निकलने की कोशिश कर रहे आम लोग

    इमेज स्रोत, Reuters

    इमेज कैप्शन, काबुल से निकलने की कोशिश कर रहे आम लोग

    पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से अफ़ग़ानिस्तान में फंसे भारतीयों को जल्द से जल्द वहां से निकालने की अपील की.

    उन्होंने कहा, "विदेश मंत्री एस जयशंकर से अपील है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के आने के बाद वहां के एक गुरुद्वारे में फंसे 200 सिखों समेत सभी भारतीयों को फौरन वहां से हटाने के लिए इंतजाम किया जाए. मेरी सरकार को उन्हें सुरक्षित लाने की किसी भी कोशिश में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है."

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    रविवार को उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि हमें अपनी सीमाओं पर अतिरिक्त चौकसी बरतने की ज़रूरत है.

    "अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान की पकड़ मजबूत होना हमारे देश के लिए अच्छी ख़बर नहीं है. इससे भारत के ख़िलाफ़ चीन और पाकिस्तान का नेक्सस और मजबूत होगा. ये संकेत अच्छे नहीं मालूम दे रहे हैं और हमें अपनी सीमाओं पर और सतर्क रहने की ज़रूरत है."

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

    उधर, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अफ़ग़ानिस्तान में फंसे सिखों और हिंदुओं को लाने पर कहा है कि विदेश मंत्रालय और जो लोग भी इसके लिए जिम्मेदार हैं, वे सभी ज़रूरी इंतज़ाम करेंगे.

  8. अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान का नेतृत्व

    तालिबान का नेतृत्व
  9. ईरान ने अफ़ग़ान सेना की शिकस्त और अमेरिका की वापसी को बताया 'अच्छा मौक़ा'

    ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी

    इमेज स्रोत, Reuters

    ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में फौज की शिकस्त और अमेरिका की वापसी को शांति और सुरक्षा की बहाली के एक मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए.

    ईरानी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक़ उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़ारिफ़ से बातचीत में अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा, स्थिरता और अफ़ग़ान लोगों की समृद्धि की कामना की.

    उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता बहाल करने के लिए मदद करेगा और फिलहाल ये उसकी पहली ज़रूरत है.

    उन्होंने कहा कि ईरान पड़ोसी और बिरादर देश की हैसियत से अफ़ग़ानिस्तान के सभी गुटों को राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए निमंत्रण देता है.

    उन्होंने कहा कि ईरान ये मानता है कि अफ़ग़ान लोगों की भी यही मर्जी है कि वहां स्थिरता और सुरक्षा का माहौल बने.

    राष्ट्रपति रईसी ने कहा कि ईरान पड़ोसी देश के घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए है.

  10. तालिबान आम लोगों से हथियार वापस ले रहे, वजह भी बताई

    तालिबान

    इमेज स्रोत, Reuters

    तालिबान के एक अधिकारी ने कहा है कि उनके लड़ाके काबुल में आम नागरिकों से उनके हथियार ले रहे हैं क्योंकि लोगों की अब अपनी सुरक्षा के लिए इनकी ज़रूरत नहीं है.

    बीबीसी की अरबी सेवा के मुताबिक़ तालिबान के अधिकारी ने कहा, "हम समझते हैं कि लोग ये हथियार अपनी सुरक्षा के लिए रखते थे. वे अब खुद को सुरक्षित महसूस कर सकते हैं. हम यहां आम लोगों को नुक़सान पहुँचाने के लिए नहीं आए हैं."

    तालिबान के हथियारबंद लड़ाके सोमवार को स्ठानीय टीवी चैनल टोलो न्यूज़ के दफ़्तर भी आए और वहाँ से सुरक्षाकर्मियों के हथियारों को ले लिया.

    टोलो न्यूज़ ने एक ट्वीट में कहा है, "तालिबान काबुल में टोलो न्यूज़ के दफ़्तर आए, हमारे सुरक्षाकर्मियों के हथियारों के बारे में पूछताछ की. जो हथियार सरकार ने दिए थे, उसे वापस ले लिया और कहा कि वो हमारे कैंपस को सुरक्षित रखेंगे."

    चैनल की मालिक कंपनी मोबी के डायरेक्टर साद मोहसेनी ने ट्विटर पर बताया कि उनके चैनल के सारे कर्मचारी ठीक हैं और चैनल का प्रसारण बिना किसी बाधा के जारी रहा.

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

  11. कांग्रेस नेता सुष्मिता देव ने पार्टी छोड़ी, तृणमूल का दामन थामा

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सुष्मिता देव पार्टी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गई हैं.

    सोमवार को उन्होंने तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और राज्य सभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.

    पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे गए अपने इस्तीफ़े में उन्होंने कांग्रेस छोड़ने की कोई वजह नहीं बताई है.

    उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि वे सार्वजनिक जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही हैं.

    सुष्मिता देव असम की सिल्चर सीट की पूर्व सांसद हैं. उनके पिता संतोष मोहन देव कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुआ करते थे.

  12. तालिबान ने अफ़ग़ान हिंदुओं और सिखों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया हैः मनजिंदर सिंह सिरसा

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के आने के बाद जो हमारे सिख भाई गजनी में थे, जलालाबाद में थे, उन सब लोगों ने काबुल गुरुद्वारे में शरण ले रखी है.

    उन्होंने कहा, "इसमें कुल 320 लोग हैं. जिनमें से 50 हिंदू परिवार हैं और बाक़ी सिख हैं. ये सब लोग सुरक्षित हैं. सब लोग गुरुद्वारे के अंदर ही हैं."

    "अभी कुछ पल पहले ही वहां के स्थानीय तालिबान नेताओं ने गुरुद्वारे का दौरा किया. हमारे प्रधान जी के साथ बैठकर चर्चा की और उनको ये आश्वासन दिलाया कि आपको घबराने की ज़रूरत नहीं है."

    "आपकी सुरक्षा की हम जिम्मेवारी लेते हैं. हमें पूरा यकीन है कि गुरु साहब कृपा करेंगे और हमारे परिवार वहां पर सुरक्षित रहेंगे. ये कुछ ही देर पहले की घटना है."

  13. अफ़ग़ान स्पेशल फोर्सेज़ ने कंधार में तालिबान के आगे आत्मसमर्पण किया

    कांधार एयरपोर्ट

    तालिबान ने सोमवार को बयान जारी किया है कि कंधार एयरपोर्ट में डेरा जमाए बैठे अफ़ग़ान सेना के एक विशेष दल के हज़ारों सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया है.

    तालिबानी लड़ाकों ने पिछले तीन दिनों से इस दल को घेरा हुआ था.

    काबुल के दक्षिण में स्थित कंधार शहर में बगराम एयरबेस भी है जो कि अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन दल के अभियान का केंद्र रहा है.

  14. चीन बोला- तालिबान के साथ 'दोस्ताना रिश्ते' बनाना चाहते हैं

    हुआ चुनयिंग

    इमेज स्रोत, @MFA_China

    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान के नियंत्रण के बाद चीन ने सोमवार को कहा है कि वो तालिबान के साथ 'दोस्ताना रिश्ते' बनाने के लिए इच्छुक है.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने संवाददाताओं से कहा, "अफ़ग़ान लोग अपनी किस्मत का फ़ैसला खुद करें, चीन उनके इस हक की इज़्ज़त करता है. चीन अफ़ग़ानिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक रिश्ते विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इच्छुक है."

    इससे पहले चीन ने ये संकेत दिए थे कि वह अफ़ग़ानिस्तान में अपने दूतावास खुले रखेगा.

    चीन ने अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अपने नागरिकों को ये भी कहा है कि वे घर के अंदर रहें और स्थिति के प्रति सचेत रहें.

    इसके साथ ही चीन ने 'अफ़ग़ानिस्तान में भिन्न गुटों' से अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा है. तालिबान के प्रतिनिधि बीती जुलाई में चीन गए थे जहां उनकी मुलाक़ात विदेश मंत्री वांग यी से हुई थी.

    उस समय इस बैठक को राजनीतिक ताकत के रूप में तालिबान की अंतरराष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा गया था चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह अफ़ग़ानिस्तान के आंतरिक मामलों में 'हस्तक्षेप नहीं करने' की नीति का पालन करेगी.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

  15. तालिबान की बढ़त पर पाकिस्तान में हलचल, अफ़ग़ान नेताओं से मिले विदेश मंत्री क़ुरैशी

    अफ़ग़ान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ शाह महमूद क़ुरैशी

    इमेज स्रोत, @SMQureshiPTI

    अफ़ग़ानिस्तान में काबुल पर तालिबान के कब्ज़े के एक दिन बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने अफ़ग़ान नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात की है.

    उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "आज मोहम्मद युनूस क़ानूनी की अगुआई में अफ़ग़ान नेताओं के एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल से एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय में मुलाक़ात हुई, इन सभी नेताओं की अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका होगी."

    शाह महमूद क़ुरैशी ने साथ ही ताज़ा स्थिति पर अपने देश का रुख़ भी स्पष्ट किया.

    ट्विटर पर कहा, "पाकिस्तान का इस मसले पर रुख साफ़ है. हम ये मानते हैं कि बातचीत से राजनीतिक समझौता ही आगे का रास्ता है. हम अफ़ग़ानिस्तान में लगातार गृह युद्ध नहीं देख सकते हैं. हम अफ़ग़ान लोगों को केवल जीवित नहीं बल्कि फलते-फूलते देखना चाहते हैं."

    उन्होंने साथ ही कहा कि काबुल में पाकिस्तान का दूतावास पूरी तरह काम कर रहा है.

    इस बीच अफ़ग़ानिस्तान में लगातार बदलते हालात का जायजा लेने के लिए पाकिस्तान का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व सोमवार को बैठक करने जा रहा है.

    पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की सोमवार को प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास पर बैठक होगी.

    बैठक में ज्वॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अलावा तीनों सशस्त्र बलों के प्रमुख और आईएसआई के अधिकारी भी शामिल होंगे.

    विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक बैठक में भविष्य की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा.

    अगर अफ़ग़ानिस्तान में अशांति फैलती है और लोग वहां से पाकिस्तान चले जाते हैं, तो ऐसे में पाकिस्तान की क्या प्रतिक्रिया होगी, इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

  16. ब्रेकिंग न्यूज़, चीन, रूस, तुर्की, पाकिस्तान नहीं बंद करेंगे काबुल दूतावास

    तालिबानी नेता और चीनी विदेश मंत्री वांग यी

    इमेज स्रोत, CHINESE MINISTRY OF FOREIGN AFFAIRS

    इमेज कैप्शन, तालिबानी नेता मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के साथ चीनी विदेश मंत्री वांग यी

    काबुल पर तालिबान का कब्जा होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अपने दूतावास कर्मचारियों को बाहर निकालना शुरू कर दिया है मगर चीन, रूस, तुर्की और पाकिस्तान ने अपने दूतावासों को बंद नहीं किया है.

    अमेरिका ने सोमवार सुबह बताया है कि अमेरिकी दूतावास को खाली कर दिया गया है और सभी दूतावास कर्मचारी एयरपोर्ट पर शिफ़्ट कर दिए गए हैं.

    लेकिन चीन और रूस ने संकेत दिए हैं कि वह अपने दूतावासों को बंद करने की योजना नहीं बना रहे हैं.

    चीन ने अपने नागरिकों को चेतावनी दी है कि घर के अंदर रहें और स्थिति के प्रति सचेत रहें.

    लेकिन इसके साथ ही चीन ने “अफ़ग़ानिस्तान में भिन्न गुटों” से अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा है.

    वहीं, रूसी विदेश मंत्रालय ने भी रविवार को सरकारी मीडिया से कहा है कि सरकार की दूतावास कर्मचारियों को बाहर निकालने से जुड़ी कोई योजना नहीं है.

    तालिबान के प्रतिनिधि बीती जुलाई में चीन गए थे जहां उनकी मुलाक़ात विदेश मंत्री वांग यी से हुई थी.

    उस समय इस बैठक को राजनीतिक ताकत के रूप में तालिबान की अंतरराष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा गया था

    चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह अफ़ग़ानिस्तान के आंतरिक मामलों में "हस्तक्षेप नहीं करने" की नीति का पालन करेगी.

    वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा कि वो "स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं" और उनका काबुल दूतावास पाकिस्तानी, अफ़ग़ान और कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दूतावास संबंधी कामों और पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के विमानों के बारे में "ज़रूरी मदद देता रहेगा".

    वहीं तुर्की ने भी कहा है कि उनका काबुल दूतावास अपना काम करता रहेगा.

    भारत ने भी अपना काबुल दूतावास बंद नहीं किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने पिछले सप्ताह एक ब्रीफ़िंग में ऐसी किसी संभावना से इनकार भी किया था.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

  17. ब्रेकिंग न्यूज़, तालिबान ने जारी किया वीडियो, कहा- आज़माइश का वक़्त आ गया, ज़िंदगी बेहतर बनाएँगे

    तालिबान का वीडियो

    इमेज स्रोत, Reuters

    तालिबान चरमपंथियों ने काबुल पर क़ब्ज़े और फ़तह का एलान करने के एक दिन बाद एक नया वीडियो जारी किया है.

    इस वीडियो में तालिबान के उपनेता ने कहा है कि अब अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए कुछ करने और उनकी ज़िंदगी बेहतर करने का समय आ गया है.

    तालिबान के दूसरे लड़ाकों के साथ बैठे मुल्ला बरादर अखुंद ने इस वीडियो में कहा है- "अब आज़माइश का वक़्त आ गया है, हम सारे देश में अमन लाएँगे, हम लोगों की ज़िंदगी बेहतर बनाने के लिए जहाँ तक बन पड़ेगा प्रयास करेंगे."

    उन्होंने साथ ही कहा, "हम जिस तरह यहाँ तक पहुँचे उसकी हमें उम्मीद नहीं थी और जिस मुक़ाम पर हैं उसकी भी उम्मीद नहीं थी."

    तालिबान के एक अधिकारी ने ये भी दावा किया है कि देश में स्थिति बिल्कुल शांतिपूर्ण है और कहीं भी कोई संघर्ष नहीं हो रहा.

    इस अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हमें जो रिपोर्ट मिल रही है उसके हिसाब से स्थिति शांतिपूर्ण है."

  18. मुल्ला बरादर और अख़ुंदज़ादा में कौन संभालेगा तालिबान की सत्ता, क्या है इनकी शख़्सियत?

  19. ब्रेकिंग न्यूज़, काबुल एयरपोर्ट पर गोलीबारी में तीन लोगों की मौत की ख़बरें

    अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक़, काबुल एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल पर सोमवार सुबह हुई गोलीबारी की घटना में तीन लोगों की मौत हो गयी है.

    वॉल स्ट्रीट जनरल ने बताया है कि प्रत्यक्षदर्शियों ने ज़मीन पर खून में सनी लाशें देखी हैं.

    हालांकि, इस रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया है कि ये गोलियां किस ओर से चलाई गयी हैं.

    इससे पहले ख़बर आई थी कि काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों ने सोमवार सुबह हवा में गोलियाँ चलाईं.

    एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी सैनिकों को काबुल एयरपोर्ट पर हवा में गोलियां चलानी पड़ीं ताकि आम लोगों को हवाई जहाज़ में चढ़ने से रोका जा सका.

  20. मलेशिया के प्रधानमंत्री मुहयिद्दीन यासीन ने डेढ़ साल बाद ही दिया इस्तीफ़ा

    मलेशिया के प्रधानमंत्री मुहयिद्दीन यासिन

    इमेज स्रोत, Reuters

    इमेज कैप्शन, मलेशिया के प्रधानमंत्री मुहयिद्दीन यासिन

    मलेशिया के प्रधानमंत्री मुहयिद्दीन यासीन ने शपथ लेने के 18 महीने बाद बहुमत का समर्थन खोने के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

    इसके साथ ही वह सबसे छोटे कार्यकाल वाले मलेशियाई प्रधानमंत्री बन गए हैं.

    मलेशिया के विज्ञान मंत्री खैरी जमालुद्दीन ने इंस्टाग्राम पर लिखा है कि राजा के साथ बैठक करके मुहियिद्दीन यासिन द्वारा राजमहल छोड़ने के कुछ देर बाद कैबिनेट ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

    उप खेल मंत्री वान अहमद फैसल वान अहमद कमल ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री यासिन को उनकी सेवा और नेतृत्व के लिए धन्यवाद दिया है.

    लेकिन यासिन के इस्तीफ़े से मलेशिया में एकाएक नया राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है. मलेशियाई नेताओं के बीच सबसे ऊंची कुर्सी हासिल करने के लिए रस्साकसी शुरू हो गयी है.

    इस कोशिश में यासिन के सहयोगी इस्माइल सबरी प्रधानमंत्री पद हासिल करके सरकार को गिरने से बचाने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, अन्य नेता भी रेस में लगे हुए हैं.

    और ये सब ऐसे दौर में हो रहा है जब मलेशिया बुरी तरह कोविड 19 महामारी की मार झेल रहा है.

    मलेशियाई जनता महामारी को लेकर सरकार के ख़राब प्रबंधन पर नाराज़ थी. इसी वजह से यासिन ने इस्तीफ़ा दिया है.

    मलेशिया दुनिया के सबसे ज़्यादा कोरोना संक्रमित देशों में से एक है. यहां पर प्रतिदिन आने वाले मामलों की संख्या 20 हज़ार के पार जा रही हैं. और ये तब हो रहा है जब पिछले सात महीने से लगे आपातकाल के साथ-साथ जून से लॉकडाउन जारी है.