बाइडन ने अफ़ग़ानिस्तान के हालात के लिए वहां के नेताओं को ठहराया ज़िम्मेदार
अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने राष्ट्र को संबोधित किया है और कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है.
लाइव कवरेज
मोहम्मद शाहिद, विभुराज, अपूर्व कृष्ण, मानसी दाश and अनंत प्रकाश
ब्रेकिंग न्यूज़, अफ़ग़ानिस्तान के हालात के लिए बाइडन ने नेताओं को ज़िम्मेदार ठहराया
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अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के
क़ब्ज़े के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए
कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान की हालत के लिए उसके नेता ज़िम्मेदार हैं जो देश छोड़कर भाग गए.
बाइडन ने कहा कि अफ़ग़ान सेना को
बेहतर ट्रेनिंग दी गई और हथियार दिए गए लेकिन वो लड़ नहीं पाए और कहीं-कहीं
उन्होंने लड़ने की कोशिश की लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाए.
राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि
अफ़ग़ानिस्तान के नेता देश की भलाई और बेहतरी के लिए साथ नहीं आ सके.
हालांकि, बाइडन ने कहा कि वो अफ़ग़ान के लोगों की मदद जारी रखेंगे.
ब्रेकिंग न्यूज़, ब्रिटेन अपने 200 और जवानों को भेज रहा काबुल
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ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने
पुष्टि की है कि काबुल एयरपोर्ट से लोगों को निकालने में मदद करने के लिए ब्रिटेन
200 अतिरिक्त जवान भेज रहा है.
मंत्रालय का कहना है कि इसके बाद
अफ़ग़ानिस्तान में उसके 900 ब्रिटिश जवान होंगे.
इसके साथ ही रॉयल एयरफ़ोर्स के विमानों का एक छोटा जत्था इस
अभियान में मदद के लिए भेजा जा रहा है.
वहीं, अमेरिका ने घोषणा की है कि
वो अपने जवानों की संख्या 1,000 से 7,000 करने जा रहा है.
उज़्बेकिस्तान ने बताया- 750 अफ़ग़ान जवान भागकर आए
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उज़्बेकिस्तान ने कहा है कि बीते
48 घंटों में उसके देश में 750 अफ़ग़ान सैन्य कर्मी भागकर आए हैं.
600 जवान अफ़ग़ान सैन्य विमान के ज़रिए यहां पर पहुंचे हैं
जबकि 158 रविवार को सीमा पार कर आए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के साथ उत्तर में
उज़्बेकिस्तान की बेहद तंग सीमा है.
उज़्बेक प्रशासन का कहना है कि दक्षिण शहर तेरमेज़ में 46
सैन्य विमान उतरे हैं.
उज़्बेक प्रोसिक्यूटर जनरल के कार्यालय
के मुताबिक़, इनको एस्कॉर्ट कर रहे एक अफ़ग़ान विमान और उज़्बेक लड़ाकू विमान में
टक्कर हुई है. दोनों ही विमानों के पायलट बाहर आ गए थे.
सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए
वीडियो में एक अफ़ग़ान ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर ज़मीन पर पड़ा है.
पाकिस्तानी दूत से पूछा गया- तालिबान की सरकार को मान्यता देगा पाकिस्तान?
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफ़ग़ानिस्तान के हालात को लेकर हुई बैठक
से अलग संवाददाता सम्मेलन में पाकिस्तान ने कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान में
राजनीतिक सुलह के लिए कोशिशें कर रहा है और इसलिए अफ़ग़ानिस्तान का राजनीतिक
प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में नेताओं से मिला है.
पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में स्थाई प्रतिनिधि मुनीर अकरम से पूछा गया था
कि ‘क्या
पाकिस्तान तालिबान कोअफ़ग़ानिस्तान
की सरकार के रूप में एक बार फिर मान्यता देगा?’
इस पर मुनीर अकरम ने कहा, “तालिबान ने स्वीकार किया है कि वो एक साझी
सरकार को स्वीकर करेंगे और हमने इसलिए अफ़ग़ानिस्तान की पार्टियों को बातचीत के
लिए दावत दी है.”
“अफ़ग़ानिस्तान के लोग ही चुनाव करेंगे कि उन्हें कैसा
प्रशासन चाहिए. उन्हें ही अपना संविधान बनाना चाहिए.”
उनका कहना था कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद
पाकिस्तानी नागरिकों के साथ-साथ ‘तमाम राजनयिक
कर्मचारियों, विदेशी सहायता संगठनों के कर्मचारियों और ऐसे लोग जो ख़तरे में महसूस
कर रहे हैं, उन्हें अफ़ग़ानिस्तान से निकलने में मदद कर रहा है.’
नई अफ़ग़ान सरकार में महिलाओं की भूमिका?
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महिलाओं की नई अफ़ग़ान सरकार में किस तरह की भूमिका होगी इस सवाल के जवाब में
उनका कहनाथा ‘ये अहम है कि अफ़ग़ान महिलाएं तरक़्क़ी के
लिए अपना किरदार अदा करती रहें और हम उम्मीद करते हैं कि तालिबान और सरकार उन्हें
ये किरदार अदा करने देगी.’
“इस्लाम में
महिलाओं को समान अधिकार हासिल है. उम्मीद है कि उनके अधिकारों पर ध्यान दिया
जाएगा.”
उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की है कि महिलाएं भी नई अफ़ग़ान सरकार का हिस्सा
होंगी.
अमेरिका काबुल एयरपोर्ट को ले रहा नियंत्रण में, सभी हवाई उड़ानें रोकी गईं
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अमेरिकी
रक्षा मंत्रालय पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है कि काबुल एयरपोर्ट पर
सभी सैन्य और नागरिक उड़ानों को स्थगित कर दिया गया है.
यह अभी तक
साफ़ नहीं है कि ये कब तक शुरू होंगी. उन्होंने बताया कि अमेरिकी सुरक्षाबल
एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर काम कर रहे हैं.
इसके साथ ही
पेंटागन ने कहा है कि अमेरिकी कार्रवाई में दो हथियारबंद लोगों की मौत हुई थी.
किर्बी ने
बताया है कि वर्तमान में 2,500 अमेरिकी सुरक्षाबल एयरपोर्ट पर मौजूद हैं जिनमें
500 और अभी वहां पर पहुंच रहे हैं.
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इसके साथ ही
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ घंटों में एयरपोर्ट पर हवाई ऑपरेशन फिर से
शुरू हो जाएगा.
पेंटागन इस
समय अमेरिकी विदेश मंत्रालय की मदद पर ध्यान लगाए हुए है जो अमेरिकी और अफ़ग़ान
नागरिकों को निकालने पर काम कर रहा है.
अमेरिकी
सुरक्षाबलों के साथ काम करने वाले अफ़ग़ान नागरिकों के लिए स्पेशल इमीग्रेंट वीज़ा
बनाया गया है.
पेंटागन प्रवक्ता
जॉन किर्बी ने कहा है कि अमेरिका द्वारा एयरपोर्ट को वापस नियंत्रण में लेने के
बाद अमेरिका अफ़ग़ान की राजधानी से ‘हज़ारों’ लोगों को निकाल सकेगा.
अफ़ग़ानिस्तान से पीछे नहीं हटेंगे: अफ़ग़ान रेड क्रॉस
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अफ़ग़ान रेड क्रॉस के प्रमुख इलोइ फिलियन ने कहा है कि उनका संगठन अफ़ग़ानिस्तान में अपना काम जारी रखेगा.
सोमवार को जारी किए गए एक बयान में उन्होंने कहा, "काबुल में इस समय कोई लड़ाई नहीं चल रही है. अगर काबुल में कोई संघर्ष की स्थिति होती तो आमलोगों के जानोमाल का बेहिसाब नुक़सान होता."
"हालांकि जो बात साफ़ है, वो ये है कि कंधार, हेरात और लश्कार गाह जैसे शहरों में हफ़्तों तक चली भारी लड़ाई के बाद वहां बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता की ज़रूरत है. हज़ारों लोग घायल हुए हैं. लोगों के घर उजाड़ दिए गए हैं. अस्पतालों को नुक़सान पहुंचा है."
"इंटरनेशनल कमेटी ऑफ़ रेड क्रॉस इन ज़रूरतों को पूरा करने में मदद कर रही है. हम अफ़ग़ानिस्तान में अपनी मौजूदगी को कम करने नहीं जा रहे हैं. हम इस मुल्क में 30 सालों से काम कर रहे हैं और ये नहीं रुकेगा."
अफ़गानिस्तान में सोमवार को क्या क्या हुआ?
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पंद्रह अगस्त को तालिबान के शहर में दाख़िल होने और राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के देश से भाग जाने के बाद, आज दिन भर क्या क्या हुआ -
*अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के हवाई अड्डे पर सोमवार को अफ़रा-तफ़री मची रही जहां लोगों ने विमानों के ज़रिए भागने की कोशिश की.
हवाई अड्डे पर कई लोगों के मारे जाने की ख़बरें हैं.
*एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें नज़र आ रहा है कि एक सैन्य विमान रनवे पर चल रहा है और उसके साथ कई अफ़गान नागरिक भाग रहे हैं. कुछ लोग चलते विमान पर चढ़ भी गए.
*वीडियों में नज़र आ रहा है कि विमान ने जब उड़ान भरी तो कुछ लोग नीचे गिरे.
पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति लाने के लिए वो तालिबान के संपर्क में हैं.
*उज़्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसके हवाई सुरक्षाबलों ने सीमा करके आए अफ़ग़ान सेना के एक जेट विमान को मार गिराया है.
*कई पश्चिमी देशों ने काबुल से लोगों को निकालने के लिए उड़ान सेवाएं शुरू की हैं.
साठ से अधिक देशों ने एक संयुक्त बयान जारी करके तालिबान से कहा है कि वो लोगों को जाने दें.
*इससे पहले, अमेरिका ने काबुल में दूतावास से अपने सभी लोगों को निकाल लिया और डिप्लोमैटिक क्वार्टर्स पर अपना झंडा उतार दिया.
*अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अब कुछ घंटों के भीतर (17 अगस्त 1:15 AM) अफ़ग़ानिस्तान पर बयान देने वाले हैं.
*अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वे 500 और सैनिक काबुल भेज रहे हैं. पेंटागन ने स्वीकार किया है कि एयरपोर्ट पर उनकी सैन्य कार्रवाई में दो हथियारबंद लोग मारे गए हैं.
मेघालय में एक पूर्व चरमपंथी नेता की मौत के बाद शिलांग में विरोध, हिंसा के बाद लगा कर्फ्यू, दिलीप कुमार शर्मा, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
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पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में एक पूर्व चरमपंथी नेता की मौत के बाद हुई हिंसा से राजधानी शिलांग की कानून-व्यवस्था चरमरा गई है.
इस बीच मेघालय सरकार ने कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए पूर्वी खासी हिल्स जिले के शिलांग क्षेत्र में लगाए गए कर्फ्यू को और 24 घंटे के लिए बढ़ाने का फैसला किया है. अब कर्फ्यू 18 अगस्त की सुबह 5 बजे तक जारी रहेगा. इसके साथ ही इलाके में अगले कुछ दिनों के लिए इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है.
दरअसल बीते शुक्रवार को हैन्नीवट्रेप नेशनल लिबरेशन काउंसिल नामक चरमपंथी संगठन के पूर्व नेता चेरिस्टरफील्ड थांगख्यू की उनके घर पर पुलिस छापेमारी के दौरान हुई एक मुठभेड़ में मौत हो गई थी. जबकि थांगख्यू के परिवार के लोगों का आरोप है कि उनकी मौत को 'पुलिस द्वारा की गई निर्मम कार्रवाई' के दौरान हुई.
इस घटना को लेकर लोगों के विरोध को देखते हुए मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने विद्रोही समूह के पूर्व नेता की मौत की मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया है. मेघालय में हुई इन हिंसक घटनाओं के बाद रविवार की शाम राज्य के गृह मंत्री लखन रिंबुई ने इस्तीफा दे दिया था.
सुरक्षा परिषद में अफ़ग़ानिस्तान के हालात पर क्या कहा भारत ने
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा, "अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी और अफ़ग़ान लोगों के दोस्त के तौर पर वहां जो हालात हैं, उसे लेकर भारत बेहद फिक्रमंद है. अफ़ग़ान पुरुष, महिलाएं और बच्चे लगातार डर के साये में जी रहे हैं."
उन्होंने कहा, "काबुल एयरपोर्ट पर हमने परेशान लोगों को देखा है. हम अफ़ग़ानिस्तान में एक नाटकीय बदलाव देख रहे हैं."
उन्होंने इस बात की उम्मीद जताई कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात जल्द ही स्थिर होंगे.
टीएस तिरुमूर्ति ने ये भी कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात चुनौतीपूर्ण हैं.
उन्होंने ये बात ज़ोर देकर कही कि हमें ये सुनिश्चित करना चाहिए कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन से किसी देश पर हमला न हो.
उन्होंने कहा, "भारत ने हाल के सालों में अफ़ग़ानिस्तान की मदद के लिए बहुत कुछ किया है. हमें अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के मिशन को अपना समर्थन जारी रखना होगा."
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस की तालिबान से अपील
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने सोमवार को तालिबान से लोगों के जानोमाल की खातिर संयम बरतने की अपील की.
उन्होंने मानवाधिकार ख़ासकर महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के संरक्षण का भी मुद्दा उठाया.
उन्होंने अन्य देशों से अफ़ग़ान शरणार्थियों को पनाह देने की भी अपील की.
एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि बाक़ी देशों को अफ़ग़ान शरणार्थियों को वापस लौटाने से परहेज करना चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "इस संघर्ष ने हज़ारों लोगों को अपना घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया है."
सुरक्षा परिषद में भारत की अध्यक्षता के अंतर्गत ये दूसरी बैठक थी.
तालिबान ने अफ़ग़ान हुकूमत के किस तरह के हथियारों को अपने कब्ज़े में लिया है?, जोशुआ चीथम, बीबीसी न्यूज़
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इस साल की शुरुआत से तालिबान लड़ाके सरकारी सुरक्षा बलों से ज़ब्त किए गए सैनिक हथियारों की तस्वीरें जारी कर रहे हैं.
इनमें हेलिकॉप्टर से लेकर बख़्तरबंद गाड़ियां तक शामिल हैं.
डिफेंस थिंक टैंक आरयूएसआई के मुताबिक़ तालिबान के हाथ ड्रोन, गोलाबारूद, राइफ़ल, पिस्टल और नाइट विज़न गॉगल्स और दूसरे सैन्य साज़ोसामान हाथ लगे हैं.
इनमें से कुछ अफ़ग़ान मिलिट्री बेस से ज़ब्त किए गए हैं.
अफ़ग़ान हुकूमत की वफादारी से पाला बदलकर तालिबान की शरण में जाने वाले सैनिकों ने भी कुछ हथियार सरेंडर किए हैं.
हेलिकॉप्टरों की ज़ब्ती की ख़बरें सुर्खियों में आई थीं.
लेकिन आरयूएसआई के रिसर्च फ़ेलो डॉक्टर जैक वाटलिंग कहते हैं कि तालिबान के पास इनके रखरखाव और इस्तेमाल का हुनर नहीं है.
इससे जंग के मोर्चे पर शायद ही कोई असर पड़े.
लेकिन बड़ी चिंता थर्मल इमेज़िंग और नाइट विज़न गॉगल्स तक तालिबान की पहुंच बनने को लेकर जताई जा रही है.
कहा जा रहा है कि इससे निशाना लगाने की उनकी क्षमता में सुधार हो सकता है.
डॉक्टर जैक वाटलिंग का कहना है कि तालिबान इन चुराये हुए हथियारों को विदेशों में पहले ही बेचना शुरू कर चुका है. ये हथियार मध्य एशिया और मध्य पूर्व में बेचे जा रहे हैं और ये पूर्वी अफ्रीका तक भी पहुंच सकते हैं. इसके गंभीर नतीज़े हो सकते हैं.
अफ़ग़ान मिलिट्री का जेट विमान उज़्बेकिस्तान में मार गिराया गया
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उज़्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने अफ़ग़ानिस्तान के एक सैनिक विमान को मार गिराया है.
उज़्बेक रक्षा मंत्रालय का कहना है कि अफ़ग़ान मिलिट्री विमान सीमा पार कर उनके क्षेत्र में चला आया था.
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जेट विमान ने उसके वायु क्षेत्र में अवैध तरीके से घुसपैठ करने की कोशिश की थी.
उज़्बेक मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगने वाले उज़्बेकिस्तान के सुर्खोंडारयो प्रांत में ये घटना रविवार रात को हुई थी.
हालांकि रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने ये नहीं बताया है कि जहाज पर कितने लोग सवार थे और घटना में जानोमाल का कितना नुक़सान हुआ और कितने बच पाए.
सुर्खोंडारयो प्रांत के एक डॉक्टर बेकपुलट ओकबोयेव ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि अफ़ग़ान मिलिट्री की यूनिफॉर्म पहने दो लोगों को रविवार शाम अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति के पास पैराशूट था और उसे फ्रैक्चर हुआ था.
इससे पहले समाचार एजेंसी एएफ़पी ने उज़्बेक रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया था कि अफ़ग़ानिस्तान की मिलिट्री का एक विमान उसकी सीमाओं के भीतर क्रैश हो गया है.
एएफ़पी ने उज़्बेक रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता बाखरोम ज़ुल्फिकारोव के हवाले से कहा था कि "ये सैनिक विमान उज़्बेकिस्तान की सीमा अवैध रूप से पारकर के भीतर चला आया था. घटना की जांच की जा रही है."
रविवार को ही उज़्बेक अधिकारियों ने बताया था कि सीमा पार कर उज़्बेकिस्तान में दाखिल होने वाले 84 अफ़ग़ान सैनिकों को हिरासत में लिया गया है.
अफ़ग़ानिस्तान पर क्या लिख रहा है पाकिस्तान का मीडिया?
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अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर रविवार को क़ब्ज़े के बाद पूरे अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण हो चुका है. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी देश छोड़कर चले गए हैं.
अख़बार के अनुसार, विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने पाकिस्तान में अफ़ग़ान प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा, "हमें अफ़ग़ानिस्तान और क्षेत्र की बेहतरी के लिए रणनीति विकसित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए. हमारा अंतिम लक्ष्य एक शांतिपूर्ण, एकजुट, लोकतांत्रिक, स्थिर और समृद्ध अफ़ग़ानिस्तान है. मुझे पूरी उम्मीद है कि हम सब मिलकर शांति और सुलह को आगे बढ़ा सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्पष्ट रूप से अफ़ग़ानिस्तान में शांति और सुलह के पक्ष में है. अफ़ग़ान नेतृत्व को इस ऐतिहासिक अवसर का उपयोग अफ़ग़ानिस्तान में व्यापक आधार वाले और व्यापक राजनीतिक समाधान का मार्ग प्रशस्त करने के लिए करना चाहिए."
आज का कार्टून: ओह! आप तो बिज़ी हैं!
अमेरिका के अफ़ग़ान मिशन सफल होने के दावे पर आज का कार्टून.
अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं को सता रहा है तालिबान का डर
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अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथी संगठन तालिबान ने काबुल पर क़ब्ज़ा करने के बाद देश के लोगों के लिए कुछ करने और उनकी ज़िंदगी सुधारने की बात कही है.
लेकिन सोशल मीडिया पर काबुल के एयरपोर्ट पर भागते लोगों का हुजूम, गोलियों की आवाज़ें और विमान पर चढ़ने कोशिश करते लोगों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं जो अपने आप में ये बताने के लिए काफ़ी है कि वहाँ वाकई में हालात क्या हैं.
महिला और बच्चों की चिंता
इस बात पर भी चर्चा तेज़ है कि अफ़ग़ानिस्तान में अब महिलाओं और बच्चों का क्या होगा? देश की ताज़ा स्थिति का इन लोगों की ज़िंदगी पर होने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई जा रही है.
महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली और अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव आयोग की पूर्व सदस्य ज़ारमीना काकर ने बीबीसी को बताया, ''इन दिनों मुझसे कोई पूछता है कि मैं कैसी हूँ? इस सवाल पर मेरी आँखों में आँसू आ जाते हैं और मैं कहती हूँ ठीक हूँ. लेकिन असल में हम ठीक नहीं हैं. हम ऐसे दुखी पंछियों की तरह हो गए हैं, जिनकी आँखों के सामने धुंध छाई हुई है और हमारे घरौंदों को उजाड़ दिया गया है. हम कुछ नहीं कर सकते, केवल देख सकते हैं और चीख सकते हैं.''
काबुल: अमेरिकी विमान पर लटके लोग, बाद में गिरे
वीडियो कैप्शन, काबुल: अमेरिकी विमान पर लटके लोग, बाद में गिरे
ये अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के एयरपोर्ट का नज़ारा है.
जहां लोग जान बचाने के लिए उड़ान भरने के लिए तैयार विमान पर लटक रहे हैं.
इस वीडियो में अमेरिकी वायुसेना का C-17A विमान दिख रहा है. और रनवे पर उसके साथ-साथ दौड़ लगाते अफ़ग़ान दिख रहे हैं.
इनमें से कुछ इसी विमान पर लटक गए और विमान ने उड़ान भरी. बाद में कुछ लोग इस विमान से नीचे गिरते भी दिखे.
सोमवार को काबुल एयरपोर्ट पर अफ़रातफ़री का आलम रहा.
लोग विमानों में सवार होने के लिए सीढ़ियों पर लटकते दिखे. बाद में एयरपोर्ट को कमर्शियल उड़ानों के लिए बंद कर दिया.
हवाई अड्डे पर गोलीबारी भी हुई, जिसमें कुछ लोगों के मारे जाने की ख़बर है.
'अफ़ग़ानिस्तान अगला सीरिया बनने वाला है'
वीडियो कैप्शन, ‘अफ़ग़ानिस्तान अगला सीरिया बनने वाला है’
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान का कब्ज़ा हो गया है.
इससे भारत में रहने वाले अफ़ग़ान नागरिक बेहद चिंतित हैं.
दिल्ली में बड़ी संख्या में अफ़ग़ान नागरिक शरणार्थी के तौर पर रहे हैं. अफ़ग़ान नागरिक भारत सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं.
भारत अपने लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से लाने के लिए तैयार: विदेश मंत्रालय
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इमेज कैप्शन, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची
अफ़ग़ानिस्तान के हालात पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि काबुल की सुरक्षा की स्थिति पिछले कुछ दिनों में काफी बिगड़ी है और ये तेज़ी से बदल रही है.
उन्होंने कहा, "भारत सरकार अफ़ग़ानिस्तान के घटनाक्रम पर क़रीबी नज़र रखे हुए है. हम वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए समय-समय पर एडवाइज़री जारी कर रहे हैं. हमने उनसे जल्द वापस लौटने की अपील भी की है. हम इस बात से वाकिफ़ हैं कि वहां अभी भी कुछ भारतीय मौजूद हैं जो लौटना चाहते हैं और हम उनके संपर्क में हैं."
"हम अफ़ग़ान हिंदुओं और सिखों के भी लगातार संपर्क में हैं. उनमें से जो भारत आना चाहते हैं, हम उन्हें यहां लाने में मदद करेंगे. वहां ऐसे अफ़ग़ान लोग भी हैं जिन्होंने विकास, शिक्षा और अन्य कामों में हमारे साथ भागीदारी की है, हम उनके साथ खड़े हैं."
"काबुल से व्यावसायिक उड़ान सेवाएं आज स्थगित कर दी गई हैं. इससे लोगों को वापस लाने की हमारी कोशिशों में ठहराव आया है. हम विमान सेवाओं की बहाली का इंतज़ार कर रहे हैं."
सऊदी अरब ने अफ़ग़ानिस्तान से अपने राजनयिकों को निकाला
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सऊदी अरब की सरकार ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से उसके सभी राजनयिक सुरक्षित रियाद लौट आए हैं.
सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार विदेश मंत्रालय ने रविवार को ही काबुल से अपने दूतावास के सभी राजनयिकों को बाहर निकालने की घोषणा कर दी थी.
एजेंसी के अनुसार विदेश मंत्रालय ने ये फ़ैसला अफ़ग़ानिस्तान की अस्थिर स्थिति को देखते हुए लिया.
सऊदी अरब उन तीन देशों में शामिल था जिन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में 1996 में तालिबान की सरकार को मान्यता दी थी.
उनके अलावा दो और देश थे - पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई).
तालिबान की जड़ें 1990 के दशक में उन मदरसों में जमीं जो सुन्नी इस्लाम की कट्टर विचारधारा को मानते थे.
ऐसा माना जाता है कि इन मदरसों को सऊदी अरब से पैसा मिलता था.
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान: काबुल से दिल्ली की फ़्लाइट को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
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दिल्ली से काबुल हवाई अड्डे पर पहुंची तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने उसे लैंडिंग के लिए मंज़ूरी दी. हवा में सूरज की तपिश थी और तापमान 35 डिग्री सेल्सियस की ओर बढ़ रहा था.
एयर इंडिया की इस फ्लाइट पर सवार छह सदस्यीय चालक दल को बहुत कम अंदाज़ा था कि काबुल की ज़मीन पर घटनाक्रम कितनी तेज़ी से बदल रहा है. तालिबान लड़ाके अफ़ग़ान सरकार के धराशायी होने के बाद काबुल पर क़ब्ज़ा कर रहे थे. इसके साथ ही अमेरिकी नेतृत्व में गठबंधन सेनाओं की मौजूदगी वाली लगभग 20 साल पुरानी तस्वीर एकदम बदल रही थी.
एयर इंडिया का पायलट लैंडिंग के लिए तैयार था कि तभी एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स ने बिना कोई कारण बताए उन्हें हवा में ही रहने के लिए कहा.
एयरलाइन के सूत्रों का कहना है कि अगले लगभग 90 मिनट तक विमान राजधानी के ऊपर 16000 फीट की ऊंचाई पर चक्कर लगाता रहा.
अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान के डर के साये में जीते अफ़ग़ान लोग
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अफ़ग़ानिस्तान के ताखर प्रांत के एक ग्रामीण इलाके में काम करने वाली नर्स नूरिया हया के रोज़मर्रा के काम में पुरुष डॉक्टरों के साथ बातचीत और सलाह-मशविरा करना भी शामिल था.
इसमें स्थानीय लोगों के लिए इलाज और हेल्थ क्लीनिक की प्राथमिकताओं पर बातचीत होती थी.
ताखर का इश्कामिश ज़िला देश के पूर्वोत्तर में ताजिकिस्तान की सीमा से लगने वाला एक ग्रामीण इलाका है. यहां स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है.
लेकिन हाल ही में 29 साल की नूरिया हया को मालूम चला कि अस्पताल के पुरुष और महिला स्टाफ़ की मीटिंग्स पर रोक लगा दी गई है. नूरिया बताती हैं कि इस क्षेत्र की कमान संभालने के बाद ये तालिबान का पहला फरमान था.
अब वो खुद से बस यही सवाल कर सकती थीं कि और कैसे उनकी ज़िंदगी बदलेगी.