काबुल के बेहद नज़दीक तालिबान, दो और प्रांतीय राजधानियों पर क़ब्ज़ा
अगर काबुल पर तालिबान का क़ब्ज़ा होता है तो यह अफ़गान सरकार और सेना के लिए बहुत बड़ा झटका होगा.
लाइव कवरेज
INDvsENG: लॉर्ड्स टेस्टः जो रूट का जलवा, इंग्लैंड को पहली पारी में बढ़त

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लॉर्ड्स में भारत-इंग्लैंड टेस्ट सिरीज़ के दूसरे मैच में कप्तान जो रूट के डेढ़ सौ रनों की मजबूत पारी की बदौलत इंग्लैंड ने तीसरे दिन चायकाल के बाद भारत पर बढ़त बना ली है. भारत ने पहली पारी में 364 रन बनाए थे.
इंग्लैंड की पारी के लगभग आधे रन कप्तान जो रूट के बल्ले से निकले. रूट 165 रन बनाकर बल्लेबाज़ी कर रहे हैं. यह उनका 22वां टेस्ट शतक है.
इस दौरान उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपने नौ हज़ार रन पूरे किए. इंग्लैंड के दूसरे सबसे अधिक टेस्ट रन बनाने वाले रूट 9000 रन बनाने वाले दुनिया के 16वें क्रिकेटर हैं.
रूट ने सिरीज़ के पहले टेस्ट में भी शतक बनाया था. 2021 में रूट शानदार फॉर्म में चल रहे हैं. इस साल अब तक उन्होंने 1200 से अधिक रन बनाए हैं.
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रूट के नाम तीसरा दिन
मैच के तीसरे दिन इंग्लैंड ने तीन विकेट पर 119 रन से आगे खेलना शुरू किया. कप्तान जो रूट और बेयरस्टो ने इंग्लैंड के लिए शतकीय साझेदारी निभाई. तीसरे दिन दोनों ने 110 रन जोड़े. 229 के स्कोर पर बेयरेस्टो 57 रन बनाकर आउट हुए. उन्हें मोहम्मद सिराज ने कप्तान कोहली के हाथों कैच आउट कराया.
इसके बाद जोस बटलर ने कप्तान अपने कप्तान के साथ अर्धशतकीय साझेदारी निभाई. 283 के स्कोर पर आउट होने से पहले बटलर ने 23 रन बनाए.
फिर मोइन अली ने भी रूट के साथ अर्धशतकीय साझेदारी की. मोइन अली ने 27 रन बनाए. इंग्लैंड का 7वां विकेट सैम करेन के रूप में गिरा. बटलर, मोइन अली और सैम करेन का विकेट इशांत शर्मा ने लिया.
इंग्लैंड की पहली पारी में अब तक मोहम्द सिराज ने चार, इशांत शर्मा ने तीन विकेट लिए जबकि एक विकेट मोहम्मद शमी को मिला.

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इमेज कैप्शन, के एल राहुल भारत की पहली पारी में 364 रन
इससे पहले भारत ने अपनी पहली पारी में 364 रन बनाए.
भारतीय पारी में केएल राहुल ने 129 रन तो रोहित शर्मा ने 83 और कप्तान विराट कोहली ने 42 रन बनाए.
इंग्लैंड की ओर से जेम्स एंडरसन ने पांच विकेट लिए. जबकि ऑलि रॉबिन्सन और मार्क वुड को दो–दो और मोइन अली को 1 विकेट मिला.
तालिबान काबुल से 'बस 11 किलोमीटर दूर', दो और प्रांतीय राजधानियों पर क़ब्ज़ा

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तालिबानी लड़ाकों ने शनिवार को अफ़ग़ानिस्तान की आधी से ज़्यादा प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा जमा लिया है.
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़, तालिबानी लड़ाके अब काबुल से सिर्फ 11 किलोमीटर की दूरी पर हैं.
ताज़ा जानकारी के मुताबिक़, अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाओं के बाद अब ऑस्ट्रेलियाई सेना की एक टुकड़ी काबुल पहुंचने वाली है.
ये टुकड़ियां अपने-अपने देशों के नागरिकों और दूतावास कर्मचारियों को वापस लेकर जाने के लिए आ रही हैं.
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काबुल में डर, निराशा और अफ़रातफरी
शनिवार को काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई हड्डे पर भारी अफ़रातफरी का माहौल रहा.
जहां एक ओर अफ़ग़ानिस्तान में काम कर रहे विदेशी नागरिक, दूतावास कर्मचारी और अफ़ग़ानी लोग किसी न किसी तरह बाहर निकलने की जुगत लड़ा रहे हैं.
वहीं, हज़ारों हज़ार लोग काबुल की सड़कों के किनारे बने अस्थाई कैंपों में मौजूद हैं जो तालिबानी गुटों के क़ब्जे़ वाले इलाकों से भागकर काबुल पहुंचे हैं.

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जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे तालिबानी लड़ाके राजधानी काबुल के क़रीब आता जा रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के एक स्थानीय प्रशासक ने समाचार एजेंसी एपी को बताया है कि तालिबानी लड़ाके अब राजधानी काबुल से महज़ 11 किलोमीटर दूर रह गये हैं.
एपी के मुताबिक़, तालिबान अब काबुल से दक्षिण में कुछ ही दूरी पर स्थित असयाब चार इलाके तक पहुँच गया है.
अगर अफ़गान सरकार इसकी पुष्टि करती करती है तो यह काबुल से सबसे कम दूरी पर तालिबान की बढ़त होगी.
अगर काबुल पर तालिबान का क़ब्ज़ा होता है तो यह अफ़गान सरकार और सेना के लिए बहुत बड़ा झटका होगा.
इसके साथ ही मज़ार -ए-शरीफ़ में भी सेना और तालिबानी लड़ाकों के बीच भयानक गोलीबारी जारी है.

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दो प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा
इसके साथ ही तालिबानी लड़ाकों ने शनिवार को पक्तिका और कुनार प्रांत की राजधानियों पर कब्जा कर लिया है.
पक्तिका के परिषद अध्यक्ष ने बताया है कि शनिवार सुबह शरन पर कब्जा जमा लिया गया है.
उन्होंने बताया है कि ख़ुफिया विभाग, राज्यपाल का दफ़्तर, पुलिस हेड क्वार्टर और स्थानीय जेल तालिबानी नियंत्रण में हैं. शरन काबुल के दक्षिण में 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
वहीं, एक स्थानीय सांसद ने बीबीसी को बताया है कि कुनार प्रांत की राजधानी असदाबाद पर भी तालिबान का कब्जा हो गया.
ट्विटर पर अपुष्ट वीडियो में लोग तालिबानी झंडे के साथ चलते हुए दिख रहे हैं.
असदाबाद काबुल के पूर्व में 235 किलोमीटर दूरी पर स्थित है.
इस तरह शनिवार तक तालिबानी लड़ाकों ने उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के ज़्यादा हिस्सों पर कब्जा कर लिया है. और अफ़ग़ानिस्तान की आधे से ज़्यादा प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लिया है.

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युद्ध की रणनीति - तालिबानी दुष्प्रचार?
बीबीसी मॉनिटरिंग का विश्लेषण
तालिबानी नेतृत्व और सोशल मीडिया पर सक्रिय समर्थकों की ओर से बताया जा रहा है कि तालिबानी नियंत्रण वाले इलाकों में स्थिति सामान्य होती जा रही है.
तालिबानी गुटों की ओर से लगातार संदेश दिया जा रहा है कि अगर अफ़ग़ान सुरक्षाकर्मी अपने आप आत्मसमर्पण करते हैं तो उनके ख़िलाफ़ कोई कदम नहीं उठाया जाएगा.
इसके साथ ही ये भी बताया जा रहा है कि तालिबान सभी नस्लों और समुदायों के लिए काम करता है.
इस मैसेज़ का उद्देश्य तालिबान के हमले से पहले सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए तैयार करना है.
इसके साथ ही ये मैसेज़ उन रिपोर्ट्स का खंडन करने की कोशिश करता है जिसमें ये सामने आ रहा है कि तालिबानी लड़ाके बंदी बनाए गए लोगों को मार रहे हैं और लड़कियों को तालिबानी लड़ाकों से शादी करने के लिए बाध्य किया जा रहा है.
इसके साथ ही तालिबानी लड़ाकों ने अब तक महिलाओं की शिक्षा, काम, ड्रेस कोड पर ज़्यादा बात नहीं की है.
इसके साथ ही भविष्य की सरकार के चयन के लिए चुनावों को लेकर कोई संकेत दिए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान के साथ जंग का अवाम की आंखों में बढ़ता ख़ौफ़, एक भारतीय महिला पत्रकार की आंखों देखी

''जिस दौरान मैं और मेरी टीम कुंदूज़ में थी हमें मोर्टार और गोलीबारी की आवाज़ें सुनाई देती थीं. गोलियों की आवाज़ सुन कर हम अक्सर चौंक जाते थे, लेकिन हमने देखा कि यहां के लोगों को इस तरह के माहौल की आदत पड़ चुकी है, गोलियों की आवाज़ पर उनमें कोई प्रतिक्रिया ही नहीं नज़र आती.''
बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये का आंखों देखा हाल पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करिए.

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का देश के नाम संबोधन: बड़ी बातें
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- टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों, ख़ासकर महिला खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर बधाई.
- कोरोना महामारी की मुश्किलें, कोरोना योद्धाओं को नमन और केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख.
- जम्मू-कश्मीर में ‘नव जागरण’. युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने की अपील.
- भारतीय लोकतंत्र और संसदीय प्रणाली का गर्व का विषय. नए संसद भवन के निर्माण का ज़िक्र.
- भारत ने पैरिस जलवायु समझौते पालन किया. गगनयान मिशन का विशेष महत्व.
- देश के लिए जान गँवाने को तैयार रहने वाले सशस्त्र सुरक्षाबलों को नमन.
- सभी भारतीयों और प्रवासी भारतीयों की प्रशंसा. सशक्त, समृद्ध और शांतिपूर्ण भारत की परिकल्पना.
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टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों से मुलाकात
देश के नाम अपने संबोधन से पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने टोक्यो ओलंपिक में मेडल जीतने और बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रपति भवन में ‘हाई टी’ के लिए आमंत्रित किया था.
उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित किया और कहा कि उन पर देश को गर्व है.
इस मौके पर टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा, सिल्वर मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू और ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाली पीवी सिंधु समेत हॉकी की पुरुष और महिला टीम के खिलाड़ी शामिल थे.
समारोह में भारत की स्टार बॉक्सर मैरी कॉम ने भी शिरकत की.
बीबीसी इंडिया बोल, सुनिए मोहनलाल शर्मा के साथ
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नया संसद भवन देशवासियों के लिए गर्व की बात: राष्ट्रपति कोविंद
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राष्ट्रपति ने देश के नाम अपने संबोधन में सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट नए संसद भव के निर्माण का भी ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, “हमारा लोकतन्त्र संसदीय प्रणाली पर आधारित है, अतः संसद हमारे लोकतन्त्र का मंदिर है. स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस नए भवन के उदघाटन को विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक प्रस्थान बिन्दु माना जाएगा.”
राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, “हमारा लोकतन्त्र संसदीय प्रणाली पर आधारित है. अतः संसद हमारे लोकतन्त्र का मंदिर है.यह सभी देशवासियों के लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारे लोकतंत्र का यह मंदिर निकट भविष्य में ही एक नए भवन में स्थापित होने जा रहा है.”
जम्मू-कश्मीर में नव जागरण दिखाई दे रहा है: राष्ट्रपति कोविंद
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के नाम अपने संबोधन में कहा कि अब जम्मू-कश्मीर में ‘नव-जागरण’ दिखाई दे रहा है.
उन्होंने कहा, “सरकार ने लोकतंत्र और कानून के शासन में विश्वास रखने वाले सभी पक्षों के साथ परामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है.''
राष्ट्रपति ने कहा, ''मैं जम्मू-कश्मीर के निवासियों, विशेषकर युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से अपनी आकांक्षाओं को साकार करने के लिए सक्रिय होने का आग्रह करता हूँ.”
राष्ट्रपति का संबोधन: केंद्र सरकार की योजनाओं का ज़िक्र और विकास की बात
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कोरोना महामारी के कारण पैदा हुई समस्याओं का ज़िक्र और टीकाकरण के लिए भारत की कोशिशों का ज़िक्र करने के अलावा केंद्र सरकार की कई योजनाओं का भी उल्लेख किया.
उन्होंने कहा, “यह तथ्य संतोषजनक है कि चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए एक वर्ष की अवधि में ही 23,220 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं.”
राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा, “मुझे इस बात की खुशी है कि सभी बाधाओं के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेष रूप से कृषि के क्षेत्र में बढ़ोतरी जारी रही है.”
उन्होंने कहा,“जब ‘ईज़ ऑफ डुइंग बिजनेस’की रैंकिंग में सुधार होता है, तब उसका सकारात्मक प्रभाव देशवासियों की ‘ईज़ ऑफ लिविंग’पर भी पड़ता है.”
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन की शुरुआत देश-विदेश में बसे भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देने के साथ किया.
उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों को शानदार प्रदर्शन पर बधाई थी और महिला खिलाड़ियों के कई बाधाओं के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुँचने के लिए तारीफ़ की.
उन्होंने कहा, “मैं हर माता-पिता से आग्रह करता हूं कि वे होनहार बेटियों के परिवारों से शिक्षा लें और अपनी बेटियों को भी आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें.”
ब्रेकिंग न्यूज़, स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का देश के नाम संबोधन
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भारतीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर देश को संबोधित कर रहे हैं.
पीएम मोदी के 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका दिवस' घोषित करने पर भड़का पाकिस्तान
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पाकिस्तान ने भारतीय प्रधानमंत्री के 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाए जाने के फ़ैसले की कड़ी आलोचना की है.
14 अगस्त को पाकिस्तान अपने स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाता है.
पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय कार्यालय ने अपने ट्विटर अकाउंट से इसके विरोध में कई ट्वीट किए.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारतीय प्रधानमंत्री ने साल 1947 की घटनाओं के बारे में जो ट्वीट किया है, उससे यह साबित होता है कि कोई भी आधुनिक देश अपने आप से ऐसे विरोधाभास ज़ाहिर नहीं करता जैसा कि तथाकथित ‘दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र’.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “यह शर्मनाक है कि ‘हिंदुत्व’ विचारधारा को मानने वाले, नफ़रत और हिंसा को बढ़ावा देने वाले अब पाखंडपूर्ण ढंग से 1947 में आज़ादी के दौरान हुए भारी विस्थापन और त्रासदीपूर्ण घटनाओं को इतने एकतरफ़ा तरीके से उठा रहे हैं.”
पाकिस्तानी पक्ष ने कहा, “इतिहास को ग़लत तरीके से पेश करना और सांप्रदायिकता को भड़काना आरएसएस-बीजेपी शासन की दक्षता है. जख़्मों पर मरहम लगाने की बजाय वो चुनावी फ़ायदे के लिए वो किसी भी हद तक जा सकते हैं. हमें विश्वास है कि भारत में लोगों की सद्भावना इस राजनीतिक स्टंट को ख़ारिज कर देगी.”
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पीएम मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस यानी आज ही के दिन ट्वीट कर कहा था कि देश के विभाजन की विभीषिका के शिकार होने वाले लोगों की याद में 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' मनाया जाएगा.
पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में कहा था, ''देश के बँटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता. नफ़रत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी. उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है.’’
उन्होंने लिखा था, ‘’यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को ख़त्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मज़बूत होंगी.''
साल 1947 में ब्रिटिश शासन से मुक्ति और भारत विभाजन एक साथ हुआ था. भारत का धर्म के आधार पर विभाजन हुआ था जिसके बाद पाकिस्तान नाम का एक मुल्क बना था.
इस विभाजन के दौरान भयानक सांप्रदायिक हिंसा और बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ था.
गोवा में नौसेना के झंडा फहराए जाने पर लोगों के विरोध का पूरा मामला क्या है?

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इमेज कैप्शन, साओ जैंसिटो द्वीप पर फहराया गया तिरंगा भारतीय नौसेना ने शनिवार को गोवा के साओ जैसिंटो द्वीप पर ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ पहल के तहत तिरंगा झंडा फहराया है.
पहले स्थानीय निवासियों की ओर से इसका विरोध किया गया था. इसके बाद नौसेना ने अपना कार्यक्रम निरस्त कर दिया था.
हालांकि गोवा सरकार की ओर से द्वीप वासियों पर दबाव डाले जाने के बाद नौसेना ने इस द्वीप पर झंडा फहराया है.
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने झंडारोहण की तस्वीर ट्विटर पर शेयर की है.
उन्होंने लिखा है, "सेंट जैसिंटो द्वीप के स्थानीय लोगों को भारतीय नौसेना के साथ भारतीय ध्वज फहराते हुए देखकर ख़ुशी हो रही है. मुझे ख़ुशी है कि लोगों ने समझदारी से काम लिया."
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क्या थी विवाद की वजह?
शुक्रवार को गोवा के दक्षिणी हिस्से में स्थित साओ जैसिंटो द्वीप पर झंडा फहराए जाने को लेकर नौसेना और आम लोगों के बीच विवाद खड़ा होने की बात सामने आई थी.
नौसेना ने बताया है कि इस विवाद के बाद उसे इस द्वीप झंडा फहराने का कार्यक्रम निरस्त करना पड़ा था.
नौसेना भारत की आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ पर ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम के तहत 13 से 15 अगस्त के बीच देश के सभी द्वीपों पर झंडा रोहण कार्यक्रम आयोजित कर रही है.
समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए आईएनएस हंसा बेस के प्रवक्ता ने बताया है कि शुक्रवार को गोवा नेवल एरिया की एक टीम ने अखिल भारतीय पहल के तहत गोवा के द्वीपों का दौरा किया था जिसमें साओ जैसिंटो शामिल है.
उन्होंने बताया था कि “साओ जैसिंटो द्वीप के स्थानीय नागरिकों द्वारा विरोध किए जाने के बाद इस द्वीप के लिए तय किया गया कार्यक्रम निरस्त करना पड़ा.”
हालांकि, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने नौसेना के अधिकारियों से ध्वजारोहण के निर्धारित कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया.
इसके साथ ही सावंत ने द्वीप वासियों को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत विरोधी गतिविधियों से सख़्ती से निपटा जाएगा.
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पूरा मामला क्या है?
अब दक्षिण गोवा में स्थित इस द्वीप में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे झंडा फहराए जाने के विरोध में नहीं थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए स्थानीय निवासी एंथनी रोड्रग्वेज़, जिनकी ज़मीन पर झंडा फहराया जाना था, बताते हैं कि उन्होंने नौ सेना के अधिकारियों को अपनी सहमति पहले ही दे दी थी लेकिन कुछ अन्य स्थानीय लोगों ने इस पर आशंकाएं जताईं.
उन्होंने कहा, “कई स्थानीय लोग मेरे घर पर आए और उन्होंने मुझसे पूछा कि मैंने झंडा फहराने की इजाज़त क्यों दी है? उनकी आशंका यह है कि नौसेना भविष्य में ये द्वीप हथिया लेगी. इसके बाद मैंने नौसेना को स्थानीय लोगों द्वारा जताई गई आशंकाओं से अवगत करा दिया.”
एक अन्य स्थानीय निवासी कस्टोडियो डिसूजा कहते हैं कि मसला झंडा फहराए जाने का नहीं है.
उन्होंने कहा, “हमें इस बात पर एतराज़ नहीं है कि नौसेना हमारे साथ स्वतंत्रता दिवस मनाए.”
वह बताते हैं कि इस द्वीप पर रहने वाले इस बात को लेकर परेशान हैं कि केंद्र सरकार भविष्य में मेजर पोर्ट्स अथॉरिटीज़ अधिनियम, 2020 के तहत द्वीप पर कब्ज़ा कर सकती है.
डिसूज़ा कहते हैं कि मोरमुगाओ पोर्ट ट्रस्ट इस क़ानून के तहत द्वीप पर क़ब्ज़ा कर सकता है.
वह बताते हैं कि इस द्वीप में रहने वालों ने कुछ सालों पहले एक कसम खायी थी कि वे अपनी ज़मीन किसी को नहीं बेचेंगे.
एक अन्य स्थानीय निवासी कहते हैं, “हम हर हालत में अपने द्वीप को बचाना चाहते हैं. हम अलग-अलग तरफ़ से जोख़िम का सामना कर रहे हैं जिनमें कोस्टल ज़ोन मैनेजमेंट प्लान भी शामिल है.”
आईएनएस हंसा बेस से चार किलोमीटर दूर स्थित इस द्वीप पर लगभग 100 परिवार रहते हैं.
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गोवा मुख्यमंत्री ने दी चेतावनी और किया हस्तक्षेप
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने शुक्रवार शाम ट्वीट करके इस घटना पर दुख व्यक्त किया था.
उन्होंने लिखा था, “यह दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि सेंट जैसिंटो द्वीप पर कुछ लोगों ने भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय नौसेना द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने पर आपत्ति जताई है. मैं इसकी निंदा करता हूं और आधिकारिक रूप से कहना चाहता हूं कि मेरी सरकार इस तरह के किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेगी.”
उन्होंने ट्वीट करते हुए द्वीप वासियों को चेतावनी भी जारी की थी.
उन्होंने लिखा, “मैंने भारतीय नौसेना से अपनी मूल योजना पर आगे बढ़ने का अनुरोध किया है और गोवा पुलिस से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है. भारत विरोधी गतिविधियों की इन कोशिशों से सख़्ती से निपटा जाएगा.”
इसके बाद शनिवार को भारतीय नौसेना ने इस द्वीप पर अपना झंडा फहरा दिया है.
हिमाचल प्रदेश: किन्नौर भूस्खलन हादसे में मरने वालों की संख्या 23 हुई

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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में बुधवार को हुए भूस्खलन में अब तक कुल 23 लोगों की मौत हो चुकी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए राज्य आपदा प्रबंधन निदेशक सुदेश कुमार मोख्ता ने कहा है कि बचाव अभियान के चौथे दिन निचर तहसील के चौरा गाँव में छह शव बरामद हुए हैं.
उन्होंने बताया कि अभी भी नौ लोग लापता हैं जिनके लिए तलाश और बचाव अभियान चलाया जा रहा है.
शुक्रवार शाम इसी क्षेत्र में पहाड़ से एक बस पर पत्थर गिरने की वजह से दो लोगों को चोटें आई हैं.
मोख्ता ने बताया है कि पत्थर गिरने की वजह से शुक्रवार रात बचाव अभियान रोका गया था जिसे शनिवार सुबह छह बजे एक बार फिर शुरू कर दिया गया है.
राहुल गांधी का ट्विटर अकाउंट आख़िर अनलॉक हुआ, कांग्रेस बोली-सत्यमेव जयते

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माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट को अनलॉक कर दिया है.
इसके साथ ही ट्विटर ने ये भी बताया है कि लगातार छह दिनों तक अकाउंट अनलॉक रखने के साथ ही कांग्रेस के 5,000 अकाउंट लॉक करने के बाद आख़िर किस आधार पर अनलॉक करने का फ़ैसला किया गया है.
ट्विटर लगातार अपनी प्रतिक्रिया में ये कह रहा था कि उसने अपने नियमों का पालन करते हुए ये कदम उठाए हैं.
पिछले दिनों ट्विटर ने एक नाबालिग़ दलित बच्ची के साथ कथित रूप से बलात्कार, हत्या और जबरन दाह संस्कार के बाद पीड़ित परिवार की तस्वीर पोस्ट करने पर राहुल गाँधी समेत कांग्रेस पार्टी से जुड़े कई ट्विटर अकाउंट्स को लॉक कर दिया था.
कांग्रेस ने कहा-सत्यमेव जयते
कांग्रेस पार्टी ने अपनी पहली प्रतिक्रिया एक ट्वीट के माध्यम से दी है. इस ट्वीट में लिखा गया है - ‘सत्यमेव जयते’.
कांग्रेस के सोशल मीडिया इंचार्ज रोहन गुप्ता ने बताया है कि कांग्रेस के इन सभी अकाउंट्स को अनलॉक कर दिया गया है. गुप्ता ने ये बात न्यूज़ चैनल एनडीटीवी से बात करते हुए कही.
हालांकि, अनलॉक करने की कोई वजह नहीं बताई गयी है.
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ट्विटर ने बताई वजह
ट्विटर ने अपने इस फैसले के लिए ज़िम्मेदार वजह का ज़िक्र अपने बयान में किया है.
ट्विटर ने अपने बयान में कहा है, "अपील प्रक्रिया के तहत, राहुल गांधी ने हमारे इंडिया ग्रेवियांस चैनल (भारत में ट्विटर से शिकायत करने का मंच) के माध्यम से संबंधित तस्वीर उपयोग करने के लिए औपचारिक सहमति पत्र की एक प्रति दी है."
ट्विटर ने कहा है कि इस आधार पर अकाउंट अनलॉक करने का फै़सला किया गया है.
मगर साथ ही भारतीय क़ानून को ध्यान में रखते हुए ट्विटर ने संबंधित ट्वीट को भारत में देखे जाने से रोक दिया है.
राहुल ने क्या कहा था?
राहुल गांधी ने शुक्रवार को यूट्यूब पर जारी किए गए अपने बयान में ट्विटर पर आरोप लगाते हुए कहा था , "एक कंपनी अपने बिज़नेस के ज़रिये हमारी राजनीति को परिभाषित कर रही है, और एक राजनेता के बतौर मुझे ये अच्छा नहीं लग रहा."
उन्होंने कहा था, "मेरे ट्विटर को बंद कर वो हमारी राजनीतिक प्रक्रियाओं में दखल दे रहे हैं. ये देश के लोकताँत्रिक ढांचे पर एक हमला है."
"यह राहुल गांधी पर हमला नहीं है. यह केवल मुझे ख़ामोश करने की बात नहीं है. ट्विटर पर मेरे 19-20 मिलियन फ़ॉलोअर्स हैं. आप उनके किसी विचार को जानने के अधिकार को नकार रहे हैं."
राहुल ने ट्विटर पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए कहा था, "हमारे लोकतंत्र पर हमला हो रहा है. हमें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा. हमें लगा था ट्विटर एक आशा की किरण है. मगर अब ये साफ़ है कि ट्विटर एक निष्पक्ष मंच नहीं, ये एक पक्षपाती मंच है, जो उस वक़्त की सरकार की बात सुनती है."
इसके साथ ही राहुल गांधी ने चेतावनी दी थी कि राजनीतिक संदर्भ में पक्षपात करने का ट्विटर पर असर होगा और ये निवेशकों के लिए 'एक ख़तरनाक बात' है.
अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी का देश को संदेश- इस्तीफ़े का ज़िक्र नहीं, क्या-क्या बोले?
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तालिबान की लगातार जीत के बीच अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने कहा है वो कि अफ़गान लोगों पर ‘युद्ध नहीं थोपे जाने’ देंगे.
ग़नी ने कहा, “हमने पिछले 20वर्षों में जो हासिल किया है, उसे अब खोने नहीं देंगे. हम अफ़गानों की और हत्या नहीं होने देंगे और न ही सार्वजनिक संपत्ति को और नष्ट होने देंगे.”
अफ़गान राष्ट्रपति ने एक रिकॉर्डेड संदेश में कहा कि वो जानते हैं कि लोगों को अपने भविष्य की चिंता है.
उन्होंने कहा, “मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि राष्ट्रपति के तौर पर मेरा ध्यान आगे लोगों की अस्थिरता, हिंसा और विस्थापन रोकने पर होगा.”
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इस्तीफ़े का ज़िक्र नहीं
ग़नी के इस सम्बोधन से पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वो अपने इस्तीफ़े का ऐलान कर सकते हैं. हालाँकि उन्होंने अपने संदेश में पद छोड़ने या इस्तीफ़े का कोई ज़िक्र नहीं किया.
अशरफ़ ग़नी ने कहा, “मौजूदा हालात में अफ़गानिस्तान के सुरक्षाबलों और सेना को फिर से एकजुट करना हमारी पहली प्राथमिकता है.”
उन्होंने कहा कि वो अफ़गानिस्तान की स्थिति के बारे में स्थानीय नेताओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी बात कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर कई लोग उनके इस भाषण को ‘अस्पष्ट’ बता रहे हैं.

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पद नहीं छोड़ेंगे अशरफ़ ग़नी: बीबीसी संवाददाता
अफ़गानिस्तान में बीबीसी संवाददाता सिकंदर किरमानी का कहना है कि राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के संदेश से यह स्पष्ट है कि वो पद नहीं छोड़ने वाले हैं.
किरमानी के मुताबिक़, “अशरफ़ ग़नी तालिबान के ख़िलाफ़ सुरक्षाबलों को फिर से एकजुट करने की बात कर रहे हैं लेकिन सरकार की स्थिति बेहद घबराई हुई नज़र आ रही है.''
बीबीसी संवाददाता के अनुसार, कई लोगों को काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े से ज़्यादा काबुल में लड़ाई का डर है, भले ही वो तालिबान के क़ब्ज़े के समर्थन में न हों.”
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी कुछ देर में करेंगे बड़ा ऐलान

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इमेज कैप्शन, अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ गनी अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ गनी शनिवार दोपहर सरकारी टेलीविज़न के माध्यम से देश को संबोधित करने जा रहे हैं.
इस संबोधन में उनके द्वारा राष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा देने के कयास भी लगाए जा रहे हैं. लेकिन अब तक इस बारे में कोई भी पुख़्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है.
यह संबोधन एक ऐसे समय में हो रहा है जब तालिबानी लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के काफ़ी करीब पहुंच चुके हैं.
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पंजाब ने प्रवेश के लिए आरटी-पीसीआर रिपोर्ट या वैक्सीनेशन सर्टिफ़िकेट अनिवार्य किया

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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को आदेश जारी किया कि सोमवार से राज्य में प्रवेश करने वाले सभी लोगों के लिए आरटी-पीसीआर निगेटिव रिपोर्ट या फिर पूर्ण कोविड टीकाकरण सर्टिफ़िकेट अनिवार्य होगा.
ये नियम सड़क, रेल या हवाई मार्ग से पंजाब में प्रवेश करने वाले सभी लोगों पर लागू होगा.
अगर किसी व्यक्ति के पास ये सर्टिफ़िकेट मौजूद नहीं हैं, और वो कुछ ही दिनों पहले कोविड से ठीक हुआ है, तो उसका रैपिड एंटीजेन टेस्ट किया जाएगा.
इसके अलावा स्कूलों में केवल उन्हीं टीचर और स्टाफ़ को जाने की इजाज़त होगी जिन्होंने दोनों टीके ले लिए हैं या हाल ही में कोविड से ठीक हुए हैं.स्कूलों से हर दिन 10,000 टेस्ट सैंपल लेने का भी आदेश दिया गया है.
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तालिबान की जीत के बीच काबुल से अपने दूतावासों को ख़ाली करने में लगे कई देश
पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की मौत पर जवाबदेही तय हो: चीन

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पाकिस्तान द्वारा डूसा में हुए धमाके को हमला बताए जाने के बाद चीन ने कहा है कि पाकिस्तान दोषियों की जवाबदेही तय करे.
चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने पाकिस्तान से कहा है कि इस मामले में सच सामने आना चाहिए और दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए.
पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में जुलाई में एक 'बस धमाके' में 9 चीनी नागरिक समेत कम से कम 13 लोग मारे गए थे. ये लोग डासू बांध परियोजना पर काम कर रहे थे.
चीन ने इस हादसे को बम धमाका बता रहा था है जबकि पाकिस्तान ने इसे गैस लीकेज की वजह से हुआ धमाका कहा है.
हालांकि जांच के बाद, जिसमें चीन ने मदद की थी, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसे हमला बताते हुए कहा कि इसे अफ़ग़ानिस्तान की जमीन से अंजाम दिया गया था और इसके लिए इस्तेमाल किया गया वाहन भी अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते लाया गया था.
